वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सड़क से संसद तक संग्राम मचा हुआ है। संसद की जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी- JPC ने पहले ही अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप चुकी है। JPC में सभी प्रमुख दलों के सांसद सदस्य बनाए गए थे। जेपीसी ने एक दिन पहले ही ड्रॉफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी दी थी। 16 सदस्यों ने इसके पक्ष में वोट डाला। वहीं 11 सदस्यों ने विरोध किया था। कमेटी में शामिल
विपक्षी सांसदों ने इस बिल पर आपत्ति जताई थी। अब कांग्रेस इसे संविधान के खिलाफ
बता रही है। संसद के बजट सत्र समाप्त होने में 4 दिन और रह गए है। संभावना
जताई जा रही है कि सरकार मंगलवार को इसे लोकसभा में पेश कर सकती है। कांग्रेस सांसद
जयराम रमेश ने वक्फ संशोधन विधेयक की कड़ी आलोचना करते हुए इसे भारतीय संविधान और
उसके आधारभूत सिद्धांतों पर सीधा हमला बता रहे हैं। जयराम रमेश का कहना है कि ये
संविधान पर सीधा हमला है और इसकी बुनियाद के खिलाफ है... हर विपक्षी दल इसका विरोध
कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि 'धर्मनिरपेक्ष' दलों खासकर जेडी(यू) और टीडीपी का क्या कहना है?... पहली बार समिति में खंड-दर-खंड चर्चा हुई... अगर वे इसे लागू करते हैं, तो हम लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेंगे।"
विपक्षी दलों की ओर से आए कुछ सुझावों को शामिल करने के बाद
संयुक्त संसदीय समिति ने वक्फ विधेयक में संशोधन को लेकर जो सुझाव दिए हैं, उसे सरकार ने मान लिया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन
रिजिजू ने कहा- हम संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रहे हैं।
बिल पर संसद के बाहर खूब विचार-विमर्श हुए हैं। हमें सदन में बहस और चर्चा में भी
जरूर भाग लेना चाहिए। बिल पर बनी जेपीसी ने लोकतांत्रिक भारत के इतिहास में अब तक की सबसे
ज्यादा परामर्श प्रक्रिया का रिकॉर्ड बनाया है। सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध है कि
लोगों को गुमराह न करें। भोले-भाले मुसलमानों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि सरकार
मुसलमानों की संपत्ति और अधिकार छीनने जा रही है।
केरल भाजपा प्रमुख चंद्रशेखर ने सांसदों से
वक्फ बिल पर स्टैंड लेने को कहा केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव
चंद्रशेखर ने कहा है कि केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल सहित कई ईसाई संगठन केंद्र
द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि मुनंबम उपनगर में गरीब परिवारों ने दावा किया है कि वे वक्फ
बोर्ड द्वारा उनकी जमीन जब्त किए जाने के खतरे में जी रहे हैं। उन्होंने राज्य के
सांसदों से "तुष्टिकरण की राजनीति" में शामिल होने के बजाय लोगों की
सहायता करने का आग्रह किया।
इस बिल को लेकर मुसलमानों का अलग-अलग राय है। वक्फ
बोर्ड बिल पर ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन और अजमेर दरगाह के
आध्यात्मिक प्रमुख के उत्तराधिकारी सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा हा कि "हम सौभाग्यशाली हैं कि हम ऐसे देश में रह रहे हैं, जिसकी गंगा-जमुनी संस्कृति है।, नवरात्रि चल रही है और आज
ईद-उल-फितर है। मुझे पूरा भरोसा है कि आज पूरे भारत में आप लोगों को इन त्योहारों
पर एक-दूसरे को बधाई देते हुए देखेंगे। मिलजुलकर रहना देश की संस्कृति है और यही
हमारी ताकत है...पीएम मोदी ने सुनिश्चित किया है कि 'सौगात-ए-मोदी' देश के 22 लाख लोगों तक पहुंचे...मेरा मानना है कि वक्फ बिल में
संशोधन की जरूरत है। मुझे पूरा भरोसा है कि यह बिल पारदर्शिता लाएगा।
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष दरख्शां
अंद्राबी ने कहा कि जनता की उम्मीदों को पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। "जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड क्षेत्र की अधिकांश मस्जिदों और दरगाहों की
देखरेख करता है, स्वच्छता और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करता है... जनता की उम्मीदों को
पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
वक्फ संशोधन विधेयक पर एआईएमपीएलबी प्रमुख
खालिद सैफुल्लाह रहमानी इस बिल के विरोध में हैं। इनका कहना है कि इस विधेयक को
स्वीकार नहीं कर सकते"।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी शुरू से ही इसके विरोध में हैं। ओवैसी का कहना है कि इससे मुस्लिम वक्फ बोर्ड को
नुकसान होगा। संसद में असंवैधानिक कानून क्यों बनाया जा रहा है... अगर यह कानून बन
जाता है, सरकार वक्फ संपत्तियों को छीनने लेगेगी।
संसद सत्र 4 अप्रैल तक चलेगा।
अब देखना होगी कि सरकार वक्फ संशोधन बिल को संसद में पेश करती है या फिर सहयोगी
दलों के दबाव में इसे कुछ दिनों के लिए टाल देगी।