22 August 2024

हरियाणा में हर गरीब के चेहरे पर मुस्कान: 45 लाख लोगों को मुफ्त राशन

हरियाणा सरकार लगातार राज्य की प्रगति के लिए तत्पर है, गरीबों के हित में सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है। जिसका सीधा लाभ हरियाणा के गरीब वर्ग के नागरिकों को मिल रहा है। वर्ष 2020 में एक देश एक राशन कार्ड योजनाका आरम्भ किया गया, जिसके अन्तर्गत किसी भी राशन डिपो पर अपना आधार कार्ड दिखाकर राशन लिया जा सकता है। इस योजना के अन्तर्गत अगस्त, 2020 से मई, 2024 तक 13,77,366 लेन-देन की संख्या के साथ हरियाणा देश में अग्रणी रहा है। पूर्व में राशन कार्ड से संबंधित सभी सेवाएं सरल पोर्टल के माध्यम से दी जा रही थी। 

अब आवेदकों को बी.पी.एल./ए.ए.वाई. राशन कार्ड के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि पी.पी.पी. डेटाबेस की मदद से उनके आय मानदंड के अनुसार राशन कार्ड स्वचालित रूप से बनाए जा रहे हैं। वर्ष 2023 से हरियाणा राज्य ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 को लागू किया है। अंत्योदय अन्न योजना परिवारों को 35 किलोग्राम प्रति परिवार तथा बी.पी.एल. परिवारों को प्रति सदस्य 5 किलोग्राम खाद्यान्न प्रतिमाह दिया जा रहा है। जनवरी, 2023 से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत वितरित किए जाने वाले खाद्यान्न को निःशुल्क वितरित करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत लगभग 44 लाख लाभार्थी कार्ड धारकों को मुफ्त गेहूं-बाजरा दिया जा रहा है।

 

अंत्योदय आहार योजना

 

लाभार्थियों को 2 लीटर सरसों तेल 20 रुपया प्रति लीटर के हिसाब से दिया जा रहा है

 

1 किलोग्राम चीनी 13.50 रूपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से वितरित की जा रही है

 

1051 करोड़ रुपये चीनी वितरित करने हेतु बी.पी.एल. परिवारों के लिए खर्च किया गया

 

लाभार्थियों को लगभग 66,250 मीट्रिक टन गेहूं मासिक रूप से वितरित किया जा रहा है

 

पात्र लाभार्थियों हेतु प्रति माह लगभग 27,000 एम.टी. बाजरा वितरित किया गया है

 

 वितरित किए गए बाजरा पर कुल मासिक खर्च लगभग 76.97 करोड़ रूपये है

 

वर्ष 2023-24 से मार्च 2024 तक, लगभग 5,75,770 मीट्रिक टन गेहूं, 67,747 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड आटा, 1,97,561 मीट्रिक टन बाजरा, 33,342 मीट्रिक टन चीनी और 40,526 लीटर सरसों व सूरजमुखी के तेल का वितरण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 2024-25 से मई 2024 तक लगभग 1,30,998 मीट्रिक टन गेहूं, 35,830 मीट्रिक टन बाजरा, 7113 मीट्रिक टन चीनी और 15,468 लीटर सरसों के तेल व सूरजमुखी के तेल का वितरण किया गया है। राज्य में 2,93,36400वाई0 राशन कार्ड, 41,96,573 बी.पी.एल. राशन कार्ड है, जिसमें कुल 48 लाख लाभार्थी राशन कार्ड धारक हैं। प्रत्येक उचित मूल्य की दुकान पर स्थापित ई-पी.ओ.एस. उपकरणों के माध्यम से आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद पात्र परिवारों को आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया जा रहा है।

 

1 मई, 2016 से शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजनाके अन्तर्गत बी.पी.एल. परिवारों की महिलाओं को गैस कनेक्शन उपलब्ध करवाने हेतु 1600 रुपये की वित्तीय सहायता सरकार द्वारा वहन की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत गरीब परिवारों की महिलाओं को 11,12,956 गैस कनेक्शन दिए गए हैं। इसके अलावा, स्टेट फंड से 1,88,304 गैस कनैक्शन जारी किए गए। इस तरह से प्रदेश में लगभग 13.01 लाख मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजनाके अंतर्गत गैस कनेक्शन जारी करवाने के लिए राज्य के सभी जिलों में जिला उज्जवला कमेटियोंका गठन किया गया है ताकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजनाको सुचारू रूप से चलाया जा सके। हरियाणा को 1 अप्रैल, 2017 से केरोसिन मुक्तराज्य का दर्जा दिया गया है। राज्य में जिन्हें उज्जवला योजना का लाभ दिया जा रहा है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं...

 

उज्ज्वला योजना के लाभार्थी

 

प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी

अति पिछड़ा वर्ग (OBC)  परिवार की महिला

अनुसूचित जाति के परिवार की महिला

अनुसूचित जनजाति परिवार की महिला

अंत्योदय अन्न योजना की लाभार्थी महिला

वनवासी समुदाय की महिला

एस..सी.सी परिवार

चाय और पूर्व चाय बागान जनजातियों से संबध रखने वाली महिला

 

हरियाणा पी.डी.एस. नियंत्रण आदेश, 2022 जारी किए गए हैं। नए आदेश में आरम्भ से अंत तक कम्प्यूटरीकरण, एफ.पी.एस. ऑटोमेशन, एन.एफ.एस.ए., परिवार पहचान पत्र और उचित मूल्य की दुकानों के आवंटन में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण शामिल है। एन.एफ.एस.ए., 2013 के तहत दिए गए प्रावधानों के अनुसार, विभाग अपने संबंधित राशन कार्ड में महिला को परिवार की मुखिया के रूप में नामित करके महिला सशक्तिकरण के विचार को लागू करने का हर संभव प्रयास कर रहा है। नया उचित मूल्य दुकान लाइसेंस जारी करते समय महिला आवेदकों को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग सहित राज्य की खरीद एजेंसियों के पास 31 जनवरी, 2024 तक कवर्ड भण्डारण क्षमता 94.32 लाख मीट्रिक टन है। भण्डारण के कारण होने वाली हानि को कम करने और भण्डारण की कमी को पूरा करने के लिए कवर्ड भण्डारण क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। भारतीय खाद्य निगम ने हरियाणा में 37 स्थानों पर हब और स्टील/स्पोक साइलो के निर्माण का निर्णय लिया है। अटल किसान मजदूर कैंटीन योजना के अन्तर्गत प्रदेश के किसानों व मजदूरों को 10 रुपये प्रति थाली की रियायती दर से भोजन उपलब्ध करवाने के लिए 40 मण्डियों में कैंटीन शुरू की गई है। रबी व खरीफ खरीद सीजन 2020 से किसानों द्वारा बेची गई फसल की अदायगी ऑनलाइन सीधे उनके खाते में डाली जा रही है।


वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नई अनाज व सब्जी मंडियों के विकास एवं अपग्रेडेशन, नई सड़कों के निर्माण और मौजूदा सड़कों की विशेष मरम्मत पर 30 अप्रैल, 2024 तक लगभग 4,730 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 5,021 किलोमीटर लम्बाई की 1,931 सम्पर्क सड़कों का निर्माण कार्य लगभग 1,662 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण किया गया है। 568 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1,131 किलोमीटर लम्बाई की 466 सम्पर्क सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। 9,884 किलोमीटर लम्बाई की 3,508 सड़कों की विशेष मरम्मत का कार्य लगभग 1,390 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण किया गया है और 340 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1,517 किलोमीटर लम्बाई की 511 सड़कों की विशेष मरम्मत का कार्य प्रगति पर है। लगभग 1,157 करोड़ रुपये नई अतिरिक्त मंडियों के विकास तथा रख-रखाव पर खर्च किए गए हैं। लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से 14 नई अतिरिक्त अनाज और सब्जी मंडियों के निर्माण कार्य प्रगति पर है। 150 करोड़़ रुपये की लागत से पिंजौर में 78 एकड़़ भूमि पर सेब, फल एवं सब्जी मण्डी बनाई जा रही है। इसका कार्य 31 दिसम्बर, 2024 तक पूर्ण होने की सम्भावना है। इस मंडी में 67 दुकान प्लॉटों को ई-नीलामी प्रक्रिया द्वारा बेचा जा चुका है। मार्केट फीस की चोरी रोकने के लिए और मंडियों में आवक का रिकॉर्ड रखने के लिए कम्प्यूटरीकृत प्रणाली शुरू की गई है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 883 करोड़ रुपये मार्केट फीस के रूप में प्राप्त किये गये। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 31 मई, 2024 तक 400 करोड़ रूपये मार्केट फीस के रूप में एकत्र किए गए। पंचकूला सेक्टर-20 और गुरुग्राम में किसान बाजार शुरू किये गये हैं। 31 अगस्त, 2019 से प्रदेश में प्लॉट और सम्पत्ति प्रबन्धन सम्बन्धित अन्तिम निपटान योजना चलाई गई। यह योजना 31 जनवरी, 2021 तक रहीं, जिसके अंतर्गत 1299 अलॉटियों द्वारा 73.97 करोड़ रुपये जमा करवाये गए। मंडियों में दुकानों व बूथ प्लॉटों को ई-नीलामी के माध्यम से बेचा जा रहा है।


अगस्त-2021 से अबतक प्लॉटों की नीलामी से 528 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। प्रदेश की 108 मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार पोर्टलसे जोड़ा गया है। राज्य सरकार ने 27 सितम्बर, 2016 को ई-खरीदको अपनाकर क्रांतिकारी कदम उठाया है। 5 करम के सभी कच्चे रास्तों को पक्का करने के उदे्दश्य से राज्य में 1600 कि.मी. लम्बाई की सड़कों को चिन्हित किया गया है। अबतक 563 किलोमीटर लम्बाई की 243 सड़कों का निर्माण किया जा चुका है, 578 किलोमीटर लम्बाई की 233 सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है और 287 किलोमीटर लम्बाई की 134 सड़कों का निर्माण कार्य जल्द किया जाएगा। बकाया कच्चे रास्तों को चालू वित्त वर्ष 2024-25 में पक्का किया जाएगा। 1 जनवरी, 2014 से प्रदेश में मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना, 2013 से आरंभ की गई है। इस योजना के तहत किसान, खेतीहर मजदूर और मार्केट यार्ड में कृषि कार्यों को करने वाले मजदूर शामिल हैं। योजना के अंतर्गत दुर्घटना में हुई शारीरिक क्षति के अनुसार 37,500 रूपये से लेकर 5 लाख रूपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाती है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान इस योजना के तहत 31 मार्च 2024 तक 11,082 मामलों में 152.92 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। 

 

खेतीहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना

 

हरियाणा सरकार के राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा इस योजना का संचालन किया जा रहा है

 

खेतिहर मजदूर की मृत्यु या अपंगता होने पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है

दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिती में 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी

 

आंशिक अपंगता होने पर में 37 हज़ार रूपये से लेकर 2 लाख 50 हजार रुपये तक की मदद दी जाएगी

 

इस योजना के तहत प्रदान की जाने वाली सहायता राशि लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी

 

मृत्यु होने की दशा में उत्तराधिकारी आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए इस योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकते हैं


राज्य के किसान, खेतिहर मजदूर, मार्केट यार्ड में काम करने वाले मजदूर इस योजना के पात्र होंगे

 

डिफॉल्टर अलॉटियों को अपनी बकाया राशि जमा करवाने हेतु एक मौका और देने के उद्देश्य से विवादों का समाधान योजना शुरू की गई है। यह योजना 01 अप्रैल 2021 से 31 अगस्त 2021 तक लागू रही थी और इससे लगभग 81 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई। इस योजना को पुनः 1 दिसंबर 2022 से 31 मार्च 2023 तक लागू किया गया और इस दौरान अलॉटियों द्वारा 47.41 करोड़ रुपये की राशि जमा की गई। योजना के प्रभाव को देखते हुए इसे फिर से 1 नवंबर 2023 से 30 जून 2024 तक लागू किया गया और अबतक 26.86 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। प्रदेश में 27,394 अटल सेवा केन्द्र पंजीकृत हैं, जिनमें से 18,915 ग्रामीण और 8,479 शहरी क्षेत्रों में हैं। केन्द्र सरकार की डिजिलॉकर सेवा को अपनाने में हरियाणा अग्रणी राज्य है। इस समय डिजिलॉकर सेवा के माध्यम से 101 दस्तावेज़ और प्रमाण-पत्र डिजिटल तरीके से सत्यापन के लिए उपलब्ध हैं। 25 दिसम्बर, 2019 को लोकायुक्त पोर्टलका शुभारम्भ किया गया। प्रदेश में सभी 22 जिलों की वेबसाइट बनाई गई है। 5953 ग्राम पंचायतों में वाई-फाई हॉट स्पॉट लगाए जा चुके हैं। 21 अगस्त, 2020 को राज्य में ई-आफिसकी शुरुआत की गई। प्रदेश के 44 विभागों और 22 जिलों में ई-आफिसके माध्यम से कार्य किया जा रहा है। 25 दिसम्बर, 2014 से हर जिला मुख्यालय पर सी.एम. विंडोशुरू की गई है। अब कोई भी नागरिक अपनी समस्या या शिकायत के निवारण के लिए चण्डीगढ़ आए बिना ही मुख्यमंत्री से सीधा सम्पर्क कर सकता है। इसकी सफलता को देखते हुए ब्लॉक स्तर पर भी सी.एम. विंडो स्थापित की गई है। सी.एम. विंडो के माध्यम से 11.74 लाख से अधिक शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। सी.एम. सोशल मीडिया एक्स निवारण की शिकायतों पर नजर रखने के लिए नया इन-हाउस सिस्टम सोशल मीडिया ग्रीवेंस ट्रैकर विकसित किया गया है।


सभी विभागों में सभी जी2सी सेवाओं के लिए राज्यस्तरीय मोबाइल प्लेटफार्म ‘गेटवे टू गवर्नमेंट’ बनाया गया है। इसके माध्यम से सभी सरकारी सेवाओं, आपातकालीन हेल्पलाइनों और अन्य सूचना सेवाओं तक पहुंचने के लिए नागरिकों को सिंगल इंटरफेस प्रदान किया गया है। जन सहयोग मंच नागरिकों के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी सेवाओं को सूचीबद्ध करने वाली एक व्यापक सेवा सूची तैयार किया गया है। इनमें 700 से अधिक सरल सेवाओं के लिए आवेदन करना, सब्सिडी प्राप्त करना, सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन करना और सरकारी पहलों के बारे में जानकारी प्राप्त करना शामिल है। मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान अभियान का उद्देश्य राज्य के ऐसे परिवारों का आर्थिक उत्थान करना है, जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम है। ऐसे परिवारों की पहचान परिवार पहचान-पत्र डेटाबेस (पी.पी.पी.)’ में उपलब्ध आय के आंकड़ों के आधार पर की जाती है। मोबाइल एप के माध्यम से अब तक 1,77,943 परिवारों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के साथ-साथ डिजिटल-कैशलेस लेन-देन की निगरानी के लिए हरियाणा कैशलेस कंसोलिडेटेड पोर्टल लॉन्च किया गया है। अब तक 784.63 करोड़ डिजिटल लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं। कल्याणकारी योजनाओं का लाभार्थी तक सीधा लाभ सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डी.बी.टी.सुविधा शुरू की गई है। इसके माध्यम से 152 योजनाओं के अन्तर्गत 80,897 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। हरियाणा मुख्यमन्त्री राहत कोष से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए 5 मार्च, 2022 को ऑनलाइन सेवा शुरू की गई। स्नातक, स्नातकोत्तर और आई.टी.आई. पाठ्यक्रमों के ऑनलाइन प्रवेश की सुविधा उपलब्ध है। 

 

12 जनवरी, 2021 को वन टाइम रजिस्ट्रेशन पोर्टल’ शुरू किया गया है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा ग्रुप-सी, डी और अराजपत्रित शिक्षण पदों हेतु किए जाने वाली भर्ती के लिए आवेदक इस पोर्टल पर एकमुश्त पंजीकरण करवा सकते हैं। पोर्टल पर अब तक 13.76 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। 31 अक्टूबर, 2021 को उत्तम बीज पोर्टल लॉन्च किया गया। इसे मेरी फसल मेरा ब्यौरापोर्टल से जोड़ा गया है। बौद्धिक ज्ञान आधारित उद्यमिता और अर्थव्यवस्था निर्माण की दिशा में हरियाणा में नवाचार और उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए हारट्रॉन ने गुरुग्राम में एक अत्याधुनिक नवाचार और स्टार्टअप हब की स्थापना की है। मुम्बई में 7-8 फरवरी, 2020 को आयोजित 23वें राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह के दौरान प्रदेश की अन्त्योदय सरल परियोजना को नागरिक केन्द्रित सेवा वितरण के मामले में उत्कृष्टता श्रेणी में गोल्ड अवॉर्डदिया गया। अन्त्योदय सरल परियोजना के लिए 30 दिसम्बर, 2020 को प्रदेश को डिजिटल इंडिया अवार्ड-2020’ मिला। सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार विभाग, हरियाणा द्वारा श्रेष्ठ कार्य पद्धतियों, विचारों के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान और क्षमता निर्माण की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने के उद्देश्य से जम्मू और कश्मीर आईटी विभाग के साथ 27 नवम्बर 2022 को एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया, ताकि आईटी डोमेन में आपसी हित के क्षेत्रों में परामर्श लिया और दिया जा सके।

 

राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण तथा सर्वे इंजन प्लेटफॉर्म को राष्ट्र स्तरीय कार्यक्रम डिजिटल ट्रांस्फॉर्मेशन कॉनक्लेव में 24 नवम्बर, 2023 को अवार्ड मिला। राज्य में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और संचार बुनियादी ढांचे की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से कम्यूनिकेशन एंड कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर पॉलिसी 2023’ में संशोधन को केबिनेट की मंजूरी मिली और इसकी नोटिफिकेशन 27 नवंबर 2023 को जारी कर दी गई है। हरियाणा उदय के नाम से एक पोर्टल विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक चल रही योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, फीडबैक दे सकते हैं, सर्वेक्षण में भाग ले सकते हैं और नई नीति पर अपने विचार भी प्रस्तावित कर सकते हैं। ‘हरियाणा उदय’ का उद्देश्य जिला प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जनता के बीच सामुदायिक संबंधों को मजबूत करना है। यह कार्यक्रम 1 जून, 2023 से पूरे राज्य में शुरू, निरोगी हरियाणा योजना गरीब और जरूरतमंद नागरिकों को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए शुरू की गई है। निरोगी हरियाणा पोर्टल पी.पी.पी. डेटाबेस के माध्यम से पहचाने गए अंत्योदय लाभार्थियों की स्वास्थ्य जांच के लिए बनाया गया है। यह योजना 29 नवंबर, 2022 से शुरू की गई और 48 लाख अंत्योदय परिवारों के 1 करोड़ 77 लाख 66,231 लाभार्थियों की बड़े पैमाने पर व्यापक स्वास्थ्य जांच करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है।

 

पुलिस अधिकारियों के खिलाफ नागरिकों की शिकायतों को सुनने के लिए एस.पी.सी.ए. शिकायत पंजीकरण और केस ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया गया है, जिससे पारदर्शिता आएगी और यह पुलिस में जवाबदेही लाने और शक्तियों के दुरुपयोग को रोकने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। हरियाणा पुलिस हाउसिंग कोरपोरेशन के लिए एक परियोजना प्रबंधन पोर्टल डिजाइन किया गया है, जो सभी हितधारकों को एक मंच पर लाकर सिविल कार्यों की निगरानी में मदद करता है। सरकार के इन प्रयासों से हर गरीब के चेहरे पर मुस्कान है। हरियाणा सरकार पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सुविधाएं मुहैया करवा रही है। गरीबों का होगा विकास तो राज्य को मिलेगी नई पहचान। इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार हर कदम पर खड़ी है गरीबों के साथ। 

हरियाणा में पशुपालन एवं डेयरी: हरियाणा को मिली नई पहचान, पशुपालन एवं डेयरी विभाग की विभिन्न योजनाओं पर आधारित।

हरियाणा सरकार कृषि जगत से लेकर पशुपालन एवं डेयरी के क्षेत्र में लगातार किसानों के हित में कार्य कर रही है। हरियाणा में वर्ष, 2014 से अब तक 38 नए राजकीय पशु अस्पतालों का निर्माण किया गया है। साथ ही 59 राजकीय पशु औषद्यालयों को राजकीय पशु अस्पताल में अपग्रेड किया गया है। राज्य में 68 नए राजकीय पशु औषद्यालयों का निर्माण किया गया है। प्रदेश में 2857 पशु चिकित्सा संस्थाओं के माध्यम से 71.26 लाख पशुओं को पशु चिकित्सा व पशु प्रजनन से सम्बन्धित सेवाएं प्रदान करने का एक बेहतरीन बुनियादी ढांचा विकसित किया गया है। वर्ष 2022-23 के दौरान हरियाणा का वार्षिक दुग्ध उत्पादन 119.65 लाख टन रहा और प्रति व्यक्ति दुग्ध की उपलब्धता 1098 ग्राम प्रतिदिन रही, जोकि देश में पंजाब व राजस्थान के बाद तीसरे स्थान पर है। राज्य में मांस उत्पादन 665.25 हजार टन व अण्डा उत्पादन 81,806.37 लाख रहा है।

पालतू पशुओं के मुंह-खुर तथा गलघोंटू के लिए एक संयुक्त वैक्सीन का उपयोग करके प्रदेश को गाय और भैंसों के मुंह-खुर (एफ.एम.डी.) और गलघोंटू (एच.एस.) रोग से मुक्त किया गया है। हरियाणा देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसे केन्द्र सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के घटक राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एन.ए.डी.सी.पी.) के तहत एक पायलट परियोजना के रूप में संयुक्त वैक्सीन का उपयोग करने की अनुमति प्रदान की गई है। अप्रैल, 2019 के बाद राज्य के गौजातीय पशुओं में गलघोंटू या मुंह-खुर के प्रकोप का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत राज्य में सभी गायों व भैंसों की पहचान करके 12 अंकों के टैग से टैगिंग की जा रही है। केन्द्र सरकार के पोर्टल, पशु उत्पादकता व स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क (आई.एन.ए.पी.एच.) के अन्तर्गत वर्ष 2019-20 से अब तक 59.56 लाख पशुधन (गाय-भैंस) का पंजीकरण किया जा चुका है। 


राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम

 

मवेशियों की सेहत में सुधार कर किसानों को अधिक-से-अधिक लाभ पहुंचाना है


कार्यक्रम के तहत 500 मिलियन से अधिक पशुओं, जिनमे भैंस, भेड़, बकरी और सूअर शामिल हैं, का टीकाकरण करना है


कार्यक्रम में ब्रूसेलोसिस बीमारी को नियंत्रित एवं समाप्त करने हेतु सालाना 36 मिलियन मादा गोजातीय बछड़ों का टीकाकरण करना भी शामिल है


वर्ष 2025 तक उपरोक्त रोगों पर नियंत्रण का लक्ष्य रखा गया है, वर्ष 2030 तक रोगों का उन्मूलन भी शामिल है


सरकार की इस कार्यक्रम को किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ भी इसे जोड़ा गया है


राज्य के पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजनाके अन्तर्गत बड़े पशु की दूध उत्पादन क्षमता अनुसार 100 रुपये से 300 रुपये तथा छोटे पशु जैसे-भेड़, बकरी व सूअर इत्यादि का केवल 25 रुपये प्रति पशु के प्रीमियम पर बीमा किया जा रहा है। राज्य के अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के पशुओं का बीमा मुफ्त किया जाता है। इस योजना के तहत वर्ष 2014 से अब तक लगभग 15.12 लाख पशुओं का बीमा किया जा चुका है। हरियाणा पशु पंजीकरण, प्रमाणन और प्रजनन अधिनियम, 2019 में पशु प्रजनन गतिविधियों को विनियमित करके पशुओं के कल्याण और आनुवांशिक सुधार के लिए कानून बनाने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है।


पंडित दीनदयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना

 

पशुपालक 25 से 300 रुपये का प्रीमियम देकर अपने बड़े पशुओं जैसे गाय, भैंस के साथ-साथ छोटे पशुओं का भी बीमा करा सकते हैं


गोशालाएं भी पांच पशुओं का बीमा करा सकती हैं


राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत तीन वर्षो में तीन लाख से अधिक पशुपालकों ने 6.40 लाख पशुओं का बीमा करवाया है 


पशुओं की अचानक मौत होने पर मिलने वाली आर्थिक मदद के रूप में अब तक 42 करोड़ रुपये की राशि बीमा क्लेम में दी गई है


हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड व न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की ओर से पशुओं का वर्ष का बीमा कराया जा रहा है


अनुसूचित जाति के पशुपालकों के लिए फ्री बीमा किया जा रहा है


बड़े पशुओं के लिए 100 रुपये से लेकर 300 रुपये तक प्रीमियम राशि देकर दुग्ध अनुसार और श्रेणी के अनुसार बीमा कराया जा रहा है


राज्य के पांच जिलों में 01 सितम्बर, 2019 से राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम शुरू किया गया और चौथे चरण तक 400681 कृत्रिम गर्भाधान किए गए। इस कार्यक्रम के चौथे चरण में 10,834 कृत्रिम गर्भाधान किये जा चुके हैं। कार्यक्रम के तहत पशुपालकों को 30 रुपये मूल्य का टीका 5 रुपये की रियायती मुल्य पर उपलब्ध करवाया जाता है। प्रदेश में आवारा व बेसहारा पशुओं की तादाद को नियंत्रित करने व पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए पशुपालकों द्वारा कम से कम 85 प्रतिशत मादा बछड़ियां प्राप्त करने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले सैक्सड सोर्टिड सीमन का उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में पशुपालकों को 200 रुपये प्रति डोज की रियायती दर पर सैक्सड सोर्टिड सीमन उपलब्ध करवाया जा रहा है। राज्य में गायों में कृत्रिम गर्भाधान हेतु सभी पशु संस्थाओं में 2.50 लाख डोज सैक्स सोर्टिड सीमन की आपूर्ति की गई, जिससे 2.15 लाख पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया गया, जिसमें 49,016 मादाएं गर्भित पाई गई और 18,586 बछड़े उत्पन्न हुए, जिसमें 17,048 (91.72 प्रतिशत) मादा बच्चे पैदा हुए। 

 

राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम से लाभ

 

कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं तक पहुंच प्रदान करके प्रजनन दर को बढ़ाने में मदद करेगा

 

इससे राज्य में गाय, भैंस, बकरी और भेड़ की प्रजनन दर में सुधार करने में मदद मिलेगी


कार्यक्रम बेहतर बैलों के उन्नत वीर्य के उपयोग के माध्यम से पशुधन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करेगा


इससे दूध और मांस के उत्पादन के साथ-साथ पशुओं की गुणवत्ता में भी सुधार करने में मदद मिलेगी


कृत्रिम गर्भाधान से बीमारियों के प्रसार को कम करके पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलेगी


इससे पशुओं की बीमारी से होने वाली मौतों की संख्या में कमी आएगी


कार्यक्रम दूध और मांस के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करेगा, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा

 

डेयरी, पशुपालन और अन्य संबंधित गतिविधियों में लगे पशुपालकों की कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को समय पर पूरा करने के लिए विभिन्न बैंकों द्वारा पशुपालकों को पशु किसान क्रेडिट कार्ड (पी.के.सी.सी.) प्रदान किए जाते हैं। विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न बैकों को लगभग 4.70 लाख आवेदन पत्र प्रेषित किए गए हैं। इनमें से 1,27,770 पशुपालकों को पशु किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किये जा चुके हैं। अनुसुचित जाति के पशुपालकों को विशेष योजना के अन्तर्गत 2 या 3 पशुओं की डेयरी व सूकर इकाइयां (10 मादा व 1 नर) स्थापित करने के लिए 50 प्रतिशत अनुदान सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत अक्तूबर, 2014 से अब तक लगभग 18901 लाभार्थी लाभान्वित हुये। इसके अतिरिक्त राज्य में मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत 2 पशुओं की 14353 इकाइयों को स्थापित की गई है। अनुसुचित जाति के पशुपालकों को रोजगार प्रदान करने के लिए भेड़/बकरी पालन योजना के अन्तर्गत भेड़/बकरी इकाई (15 मादा़ 1 नर) स्थापित करने के लिए 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इस योजना के तहत अक्तूबर, 2014 से अब तक 2426 लाभार्थी लाभान्वित हुए। इसके अतिरिक्त राज्य में मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत 3415 भेड़/बकरी इकाइयां स्थापित की। सामान्य जाति व अन्य वर्गां के लिए वर्ष 2018-19 से भेड़/बकरी इकाइयां स्थापित करने हेतु एक नई स्कीम के तहत 15 मादा़ 1 नर भेड़/बकरी इकाई तथा 10 मादा़ 1 नर सूकर इकाई की स्थापना हेतु 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इस योजना के तहत अक्तूबर, 2014 से अब तक 459 इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त राज्य में मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत 625 भेड़/बकरी इकाइयां स्थापित की गई।

 

पशु किसान क्रेडिट कार्ड

 

इस योजना के अंतर्गत किसानों को क्रेडिट कार्ड दिया जायेगा, किसान इस क्रेडिट कार्ड का उपयोग बैंक में डेबिट कार्ड की तरह कर सकते हैं

 

पशुपालकों को प्रति भैंस 60249 रूपये और प्रति गाय 40783 रूपये का लोन प्रदान किया जाएगा

 

क्रेडिट कार्ड धारक किसान 1.60 लाख रूपये तक बिना कॉलेटोरल सिक्योरिटी के ले सकते  हैं

 

पशु पालकों को सभी बैंकों से सात प्रतिशत ब्याज पर साल के हिसाब से लोन दिया जाएगा

 

तीन लाख से ज़्यादा राशि होने पर पशु पालकों को 12 प्रतिशत की व्याज से लोन प्राप्त होगा

 

प्रदेश में डेयरी स्थापित करने पर लाभार्थियों को 2050 दुधारू पशुओं की इकाई की खरीद हेतु लिये गये बैंक ऋण पर ब्याज अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, 2, 4 तथा 10 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाइयां स्थापित करने पर 25 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। इस योजना के तहत अक्तूबर, 2014 से अब तक 13,637 डेयरी इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त राज्य में मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत 2 पशुओं की 17221 इकाइयां स्थापित की गई। राज्य में देसी गायों के उत्थान हेतु हरियाणा, साहीवाल और बेलाही नस्ल की अधिक दूध देने वाली गायों के पालकों को 5,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है। इस योजना के तहत अक्तूबर, 2014 से अब तक 15,122 पशुपालक लाभान्वित हुए हैं। पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता की मुर्राह भैंस पालन के लिए 18 किलो प्रतिदिन से अधिक दूध देने वाली मुर्राह भैंस मालिकों को 15,000 रुपये से 30,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है। इस योजना के तहत अक्तूबर, 2014 से अब तक 21,374 पशुपालक लाभान्वित हुए हैं। बैकयार्ड कुक्कुट इकाइयां स्थापित करने हेतु वर्ष 2018-19 से शुरू की गई एक नई स्कीम के अन्तर्गत प्रत्येक लाभार्थी को 10 दिन के 50 चूजे व 2 फीडर तथा 2 ड्रिकर उनके घरद्वार पर  मुफ्त दिए जाते है। इस योजना के तहत अब तक 3,846 इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त राज्य में मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत 497 बैकयार्ड कुक्कुट इकाइयां स्थापित की गई। पशुपालकों को गुणवत्तापरक पशु स्वास्थ्य व देखभाल सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए रोग निदान सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसी सन्दर्भ में हिसार में नई प्रयोगशाला स्थापित की जा चुकी है तथा पंचकूला और सोनीपत में प्रयोगशालाएं स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। गाय व भैंसों की तरह बकरियों में भी कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है और अब तक 50 पशु संस्थाओं में यह कार्य आरम्भ हो चुका है। यह तकनीक आनुवांशिक रूप से बकरियों की नस्लों के उन्नयन में सहायक होगी और इससे राज्य के गरीब बकरी पालकों की आय में वृद्धि होगी। जिला भिवानी के लोहारू में बकरी प्रजनन केन्द्र स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है। अब तक 10834 बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान किए जा चुके हैं। 


गौ-संरक्षण एवं गौ-संवर्धन हेतु राज्य में 19 नवम्बर, 2015 से हरियाणा गौ-वंश संरक्षण व गौसंवर्धन अधिनियम-2015‘ लागू किया गया है। राष्ट्रीय गोकुल मिशनके अन्तर्गत देसी गायों की नस्लों के संरक्षण एवं विकास के लिए राजकीय पशुधन फार्म, हिसार में गोकुल ग्राम की स्थापना की गई है। राज्य में वर्ष 2020-21 से अब तक गौशालाओं को लगभग 132.66 करोड़ रुपये की राशि अनुदान के रूप में दी गई है। अगस्त- सितम्बर 2022 में राज्य के सभी लगभग 17.36 लाख स्वस्थ गौधन को एक महीने से भी कम समय में टीका लगा कर लम्पी त्वचा रोग के प्रकोप को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया गया। प्रदेश में गरीब परिवारों की आय बढ़ाने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के अन्तर्गत विभाग की स्वरोजगार योजनाओं के लिए विभाग को सर्वाधिक 94,153 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से अब तक 88,081 आवेदन बैंकों को प्रायोजित किए गए है, जिनमें से 40,274 आवेदन बैंकों द्वारा स्वीकृत किए गए हैं और इस योजना के तहत अब तक कुल 34,309 पशुपालक लाभान्वित हुए हैं।


अंत्योदय परिवार उत्थान योजना

 

अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के अंतर्गत उन सभी परिवारों के पहचान पत्र बनवाए जा रहे हैं जिनकी सालाना आय ₹100000 से कम है

 

इस योजना के माध्यम से ऐसे सभी परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का प्रयास किया जा रहा है

 

पहचान पत्रों के माध्यम से हरियाणा सरकार के पास इस योजना के अंतर्गत आने वाले सभी लाभार्थियों का अभिलेख दर्ज होगा

 

इस अभिलेख के माध्यम से सरकार द्वारा लाभार्थियों का उत्थान करने का प्रयास किया जाएगा

 

विभिन्न प्रकार के कौशल विकास प्रशिक्षण भी इस योजना के अंतर्गत बेरोजगार नागरिकों को प्रदान किए जाएंगे

 

सरकार द्वारा लाभार्थी की आय लगभग ₹8000 से ₹9000 प्रतिमाह करने का इस योजना के अंतर्गत प्रयास किया जाएगा

 

हरियाणा अंत्योदय परिवार उत्थान योजना की घोषणा शिरोमणि गुरु रविदास जी के 644 वी जयंती के अवसर पर की गई है

 

इस योजना के माध्यम से प्रदेश के नागरिक आत्मनिर्भर एवं सशक्त बन पाएंगे

 

प्रदेश की बेरोजगारी दर में इस योजना के माध्यम से गिरावट आई है

 

इस योजना के माध्यम से प्रदेश के गरीब नागरिकों को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान हो रहे हैं

 

वर्ष 2022-23 से शुरू श्नेशनल लाइव स्टॉक मिशनश के अधीन भेड़, बकरी पालन व चारा उत्पादन के लिए 10 लाख से 368 लाख रुपये तक की अनुदान राशि का प्रावधान है। इसके लिए अब तक 368 आवेदन प्राप्त हुये हैं। हरियाणा सरकार के प्रयास से लगातार राज्य के पशुपालक प्रगति कर रहे हैं। पशुपालन एवं डेयरी सेक्टर को नई पहचान दिलाने के लिए हरियाणा सरकार हर कदम पर खड़ी है आपके साथ।

हरियाणा में सशक्त हुआ किसान- आधुनिक हुई प्रदेश की अनाज मंडियां, हरियाणा राज्य कृषि वितरण बोर्ड की विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं।

हरियाणा सरकार किसानों को सशक्त और समृद्ध बनाने के लिए ‘‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनाके तहत प्रत्येक किसान परिवार को 6000 रूपये वार्षिक सहायता उपलब्ध करवा रही है। कृषि और किसान कल्याण विभाग द्वारा मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल संचालित किया जा रहा है ताकि किसानों के भूमि रिकॉर्ड और फसल की खरीद और अन्य सरकारी लाभों के लिए बोई गई फसल का पंजीकरण और सत्यापन किया जा सके। राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और गिरते भू-जल स्तर को ध्यान में रखते हुए मेरा पानी मेरी विरासतनाम से एक नई योजना शुरू की गई है। 

 मेरा पानी मेरी विरासत योजना के लाभ 


डार्क जोन क्षेत्र में रहने वाले जो किसान धान की खेती छोड़ देंगे उन्हें 7000 रूपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन धनराशि प्रदान की जाएगी   


50% या फिर उससे अधिक हिस्से पर धान की जगह मक्का, कपास, बाजरा, दलहन और सब्जियां उगाने पर ₹7000 प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी


राशि प्राप्त करने के लिए किसान को गत वर्ष के धान के क्षेत्रफल में 50% या फिर 50% से अधिक फसल विविधीकरण करना होगा

 

किसान द्वारा फसल विविधीकरण के अंतर्गत फसल का बीमा कराने पर किसान के हिस्से की राशि का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा

 

मंडियों में मक्का सुखाने के लिए मशीन की स्थापना की जाएगी जिससे कि किसानों को उचित मूल्य का भुगतान किया जा सके

 

मेरा पानी मेरी विरासत के अंतर्गत उगाई गई फसल पर सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की जाएगी

 

ड्रिप इरिगेशन सिस्टम खेत में लगाने पर 85% की सब्सिडी प्रदान की जाएगी

 

इस योजना की सफलता के लिए सरकार द्वारा व्यापक प्रचार प्रसार किया जाएगा

 

सरकार द्वारा विविधीकरण के तहत फसल विविधीकरण करने पर किसानों को 7 हजार रुपये प्रति एकड़ सीधे उनके बैंक खातों में जमा करवाने की मंजूरी सरकार द्वारा दी गई है। प्रदेश में वर्ष 2014-15 में खाद्यान्न उत्पादन 169.74 लाख टन रहा था जो अब 2023-24 में बढ़कर 192.54 लाख टन हो गया है। इससे जाहिर होता है कि सरकार के प्रयास से किसानों को सीधा लाभ पहुंच रहा है साथ ही राज्य का किसान तेजी से प्रगति कर रहा है हरियाणा में दिसम्बर 2018 से शुरू हुई प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजनाके अन्तर्गत पात्र किसान परिवार को 6000 रुपये की वार्षिक सहायता 3 किस्तों में उपलब्ध करवाई जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत दिसम्बर, 2018 से अब तक लगभग 20 लाख किसानों को 17 किस्तों के रूप में 5,693 करोड़ 59 लाख रुपये की राशि पोर्टल के माध्यम से सीधे लाभार्थी किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते में डी.बी.टी. के माध्यम से भारत सरकार द्वारा स्थानान्तरित की जा चुकी है। मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल से किसानों को काफी लाभ पहुंच रहा है।


 मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के लाभ

 

बारिश या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसल को क्षति होने पर किसानों को समय पर सहायता प्रदान करना

 

एक ही पोर्टल से किसान आसानी से अपने फसलों की खरीद बिक्री कर सकते हैं

 

फसल की बुवाई-कटाई का समय और मंडी संबंधित जानकारियां उपलब्ध करना

 

सरकार व्यक्तिगत किसानों की विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर लक्षित सहायता प्रदान कर सकती है

 

लाभार्थी आवेदक हरियाणा राज्य का किसान होना चाहिए

 

किसान की जमीन हरियाणा के क्षेत्र में आनी चाहिए

 

मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर किसान का पंजीकरण होना आवश्यक है

  

इंडिया एग्रो बिजनेस अवॉर्ड 2022 के तहत कृषि क्षेत्र में नीतियों, कार्यक्रमों, उत्पादन,इनपुट, प्रौद्योगिकियों, विपणन, मूल्य वर्धन, बुनियादी ढांचे और निर्यात के क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए हरियाणा को 9 नवम्बर, 2022 को बेहतर राज्यकी श्रेणी में पुरस्कृत किया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनाखरीफ 2016 से राज्य में लागू की गई है। जिसके तहत खरीफ में धान, बाजरा, मक्का, मूंग व कपास तथा रबी में गेहूं  सरसों, चना, जौं व सूरजमुखी फसलों का बीमा किया जा रहा है। वर्ष 2020 से इस योजना को किसानों के लिए स्वैच्छिक बनाया गया है। यह स्कीम राज्य में कलस्टर आधार पर लागू की जा रही है। कलस्टर 1 में खरीफ 2023 से रबी 2025-26 तक एग्रीकल्चर इंश्योरेन्स कम्पनी द्वारा किसानों की फसलों का बीमा किया जा रहा है। कलस्टर 2 में खरीफ 2023 में कपास फसल के लिए हरियाणा सरकार द्वारा किसानों के हितों के लिए हरियाणा फसल सुरक्षा योजना लागू की गई। कलस्टर 3 में क्षेमा बीमा कम्पनी द्वारा खरीफ 2023 व रबी-2023-24 में किसानों की फसलों का बीमा किया गया है। जबकि खरीफ 2024 से लेकर रबी 2025-26 तक कलस्टर 2 व कलस्टर 3 में बीमा कम्पनी के चयन हेतू टेंडर किया जा चुका है, जोकि अनुमोदन हेतू प्रक्रियाधीन है। इस योजना के अन्तर्गत किसान की प्रीमियम दर खरीफ फसलों के लिए बीमित राशि का अधिकतम 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.50 प्रतिशत तथा कपास के लिए 5 प्रतिशत है। इस योजना के अन्तर्गत खरीफ-2016 से रबी 2023-2024 तक 2,18,55,352 किसानों ने अपनी फसलों का बीमा करवाया, जिसमें से 32,19,986 किसानों को 8423.58 करोड़ रुपये का क्लेम दिया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना  से किसानों को कई तरह के लाभ पहुंच रहा है।

 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लाभ

 

प्राकृतिक आपदा के कारण फसल नुकसान पर पूर्ण बीमा राशि

ऑनलाइन बीमा कैलकुलेटर की सुविधा

बहुत कम प्रीमियम राशि पर पूर्ण भुगतान

ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया आसान

किसानों को खेती के प्रति और प्रोत्साहित करना 

बीमा कराने वाले किसानों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन सेवा


फसल विविधिकरण कार्यक्रम वर्ष 2020-21 में ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ स्कीम राज्य के सभी जिलों में चलाया जा रहा है। फसल विविधिकरण योजना के तहत राज्य में धान के क्षेत्र को कम करने के लिये उसके स्थान पर कम पानी वाली फसलों जैसे मक्का, कपास, खरीफ दलहन और खरीफ तिलहन कृषि वानिकी फसलों को बढावा देने के उद्देश्य से किसानों को 7000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान राशि दी गई। दलहन व तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 7 जिलों-भिवानी, चरखी दादरी, हिसार, झज्जर, महेन्द्रगढ़, मेवात और रेवाड़ी में एक लाख एकड़ में योजना लागू कर दलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए 4,000 रुपये प्रति एकड़ सहायता राशि दी जा रही है।


वर्ष 2023-24 के दौरान 1.00 लाख एकड़ का लक्ष्य के प्रति 1540.62 एकड़ का सत्यापन दिनांक 08.12.2023 तक हो चुका है और 61.62 लाख रूपये कट्ठा के माध्यम से किसानों के खातों में जल्द ही डाले जायेंगे। धान की सीधी बिजाई (डी.एस.आर.) योजना 2021 के तहत प्रदेश के 12 जिलों अम्बाला, यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत, जीन्द, सोनीपत, फतेहाबाद, सिरसा, हिसार तथा रोहतक में प्रदर्शन प्लांट लगाने वाले सत्यापित किसानों को 4,000 रुपये प्रति एकड़ सहायता राशि दी जा रही है। खरीफ 2023 के दौरान 2 लाख एकड़ लक्ष्य के प्रति 1.78 लाख एकड़ का सत्यापन कर 71.42 करोड़ रूपये कट्ठा के दर से किसानों के खातों में राशि भेजी गई है। खरीफ 2024 के लिए 3.02 लाख एकड़ का लक्ष्य निर्धारित प्रस्तावित है। ‘प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमैंट ऑफ क्रॉप रेज्ड्यू’ योजना के तहत पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में फसल अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए वर्ष 2018-19 से 2023-24 तक व्यक्तिगत श्रेणी के किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 59,435 फसल अवशेष प्रबंधन उपकरण उपलब्ध करवाये गये और 80 प्रतिशत अनुदान पर 6,794 कस्टम हायरिंग सेन्टर स्थापित किये गए। राज्य के किसानों को 721 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में प्रदान किये जा चुके हैं। 

 

हरियाणा सरकार द्वारा बायो गैस स्कीम के अन्तर्गत सामान्य किसानों को 1 मीटर क्यूबिक क्षमता के बायोगैस प्लांट पर 9,800 रुपये, 2 से 4 मीटर क्यूबिक प्लांट पर 14,350 रुपये तथा 6 मीटर क्यूबिक प्लांट पर 22,750 रुपये प्रति प्लांट तथा अनुसूचित जाति व जनजाति के किसानों को 1 मीटर क्यूबिक क्षमता के प्लांट पर 17,000 रुपये, 2 से 4 मीटर क्यूबिक प्लांट पर 22,000 रुपये तथा 6 मीटर क्यूबिक प्लांट पर 29,250 रुपये प्रति प्लांट अनुदान दिया जा रहा है।

 

हरियाणा सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 से शुरू की गई पराली प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से इन-सीटू/एक्स-सीटू प्रबन्धन तकनीकों के माध्यम से धान की फसल के अवशेष के प्रबन्धन के लिए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त पिछले तीन वर्षों में 159.70 करोड़ रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में किसानों को दी जा चुकी है।

 

हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना

 

हरियाणा सरकार द्वारा प्रदूषण को कम करने के लिए हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना को शुरू किया गया है

 

योजना के माध्यम से सरकार किसानों से सीधे पराली खरीद रही है

 

राज्य सरकार इस योजना के तहत किसानों से पराली खरीद कर उन्हें 1000 रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि प्रदान करेंगी

 

किसान पराली का बंडल बनाकर बेच सकते हैं

 

इसके बदले में किसानों को अधिकतम प्रति एकड़ 1000 रुपए या 50 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान किया जाएगा

 

यह योजना किसानों को प्रोत्साहन राशि प्रदान कर पराली से होने वाले प्रदूषण को दूर करेगी                 

 

राज्य सरकार ने 17 नई स्थायी मृदा एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की है। विभिन्न मंडियों में 54 नई लघु मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं भी खोली जा चुकी हैं। इसके अलावा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों तथा राजकीय महाविद्यालयों में 240 लघु मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। इनमें विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों द्वारा मिट्टी के नमूने एकत्रित कर उनका परीक्षण किया जाता है। इस योजना के तहत मृदा जांच हेतु विभाग द्वारा हर खेत-स्वस्थ खेतका पोर्टल लॉन्च किया गया है। हर खेत-स्वस्थ खेतअभियान के अन्तर्गत तीन-चार वर्षों में राज्य के प्रत्येक एकड़ के मृदा नमूने एकत्रित करके सभी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जाएंगे। इस अभियान के अन्तर्गत अबतक लगभग 56 लाख मृदा नमूने एकत्रित किए जा चुके हैं साथ ही 40 लाख नमूनो का विश्लेषण करने के उपरांत 35 लाख किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड वितरित किए जा चुके हैं, शेष नमूनों का कार्य प्रगति पर है। सॉयल हैल्थ कार्ड प्रोजेक्ट के लिए स्कॉच ग्रुप द्वारा विभाग को स्वर्ण पदक दिया गया है। सॉयल हैल्थ कार्ड योजना के तहत 86.65 लाख सॉयल हैल्थ कार्ड वितरित किये गये है। 


सॉइल हेल्थ कार्ड योजना

 

किसान खेतों की मृदा के बेहतर स्वास्थ्य और उर्वरता में सुधार के लिये मृदा की पोषक स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकता हैं

 

इस योजना के अंतर्गत देश के किसानों की  खेतों की मिट्टी जांच करके  मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किया जाता है

 

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना का लाभ देश के 14 करोड़ किसानों को सरकार द्वारा प्रदान  किया जा रहा है

 

इस योजना में किसानों को उनके खेतों के अनुसार फसल लगाने का सुझाव भी दिया जाता है

 

सॉइल कार्ड के तहत किसानों को एक रिपोर्ट दी जाएगी, इस रिपोर्ट में उनकी जमीन की मिट्टी की पूरी जानकारी मौजूद होगी

 

मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड 2023 के तहत किसानों को एक खेत के लिए हर 3 साल में एक मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाएगा

 

भारत सरकार ने इस योजना के तहत 568 करोड़ रूपये का बजट तय किया गया है

 

देश के सभी किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं

 

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत भूमिगत पाइप लाइन के लिए किसानों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रति किसान अधिकतम 60,000 रुपये की राशि प्रदान की जा रही है। वर्ष 2014-15 से 2020-21 तक 52,193 किसानों को 233 करोड़ 6 लाख रुपये की राशि सब्सिडी के रूप में दी गई। वर्ष 2023-24 में केंद्र सरकार के सहयोग से अटल भू-जल योजना के अन्तर्गत 36 अतिदोहन खण्डों की 1656 ग्राम पंचायतों के चयनित गावों के इच्छुक किसानों से 40,000 एकड़ में भूमिगत पाइप लाइन बिछाने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए है, इसका भी कार्य प्रगति पर है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन स्कीम के अन्तर्गत तिलहन श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश को वर्ष 2017-18 के लिए 2 जनवरी, 2020 को प्रशंसा पुरस्कार दिया गया। राज्य सरकार द्वारा बाजरा उत्पादक किसानों को बाजार में कम कीमत के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने के उद्देश्य से तथा लाभकारी कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए खरीफ 2021 से बाजरा फसल के लिए भावांतर भरपाई योजना शुरू की। योजना के अन्तर्गत खरीफ 2021 में 2.43 लाख किसानों को 440 करोड़ रुपये, खरीफ 2022 के दौरान 2.79 लाख किसानों को 396 करोड़ रुपये और खरीफ 2023 के दौरान 1.34 लाख किसानों को 91.59 करोड़ रुपये वितरित किए गए। वर्ष 2023 के दौरान राज्य सरकार ने सूरजमुखी फसल पर भी अंतरिम सहायता 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 36.38 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान 11726 किसानों को किया गया।


कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण किसानों को होने वाले जोखिम/हानि को कम करने के उद्देश्य से, मूल्य समर्थन योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा आठ तिलहन/दलहन (सरसों, सूरजमुखी, मूंगफली, तिल, चना, मूंग, अरहर, उड़द) फसलों कीखरीद की जा रही है। किसानों को अतिरिक्त लाभ देने के लिए, इन फसलों को केन्द्र सरकार की मूल्य समर्थन योजना (पी.एस.एस.) से परे राज्य लागत पर खरीदा जा रहा है। इस योजना को राज्य में पहली बार सूरजमुखी की खरीद के लिए वर्ष 2015 में लागू किया गया और किसान हित में इसे आगे बढ़ाते हुए सरसों, मूंगफली, तिल, चना, मूंग, अरहर, उड़द की खरीद शुरू की गई है। रबी सीजन 2024-25 के दौरान 69.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई तथा खरीफ-2023 में 58.94 लाख मीट्रिक टन धान की

खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई। हरियाणा ऑपरेशनल पायलट परियोजना के अन्तर्गत उप-स्तही व वर्टीकल जल निकासी प्रणाली द्वारा जलग्रस्त एवं लवणीय भूमि का सुधार किया जाता है। राज्य में लगभग 9,82,740 एकड़ भूमि जलग्रस्त एवं लवणीय है। वर्ष 2014 से अब तक 90,800 एकड़ भूमि का सुधार किया जा चुका है तथा 20,755 एकड़ भूमि के सुधार का कार्य प्रगति पर है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 62,000 एकड़ जलग्रस्त एवं लवणीय भूमि के सुधार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मृदा स्वास्थ्य को गिरावट से बचाने और खतरनाक कीटनाशकों के उपयोग को कम करने के लिए राज्य सरकार ने 24.10 करोड़ रुपये लागत की प्राकृतिक खेती योजना वर्ष 2023-24 में लागू की है। इसके लिए सरकार ने एक समर्पित प्राकृतिक खेती पोर्टल शुरू किया है। अब तक 15782 किसानों ने इस पोर्टल पर पंजीकरण करते हुए प्राकृतिक खेती में रुचि दिखाई है तथा 3871 सत्यापित किसान 9170 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहें है। इस योजना के अन्तर्गत 2500 किसानों को 4 ड्रम प्रति किसान की दर से 75 लाख रुपये, 179 देसी गाय की खरीद के लिए कुल 44.75 लाख रुपये अनुदान राशि सीधा किसान के बैंक खाते में स्थानान्तरित की गई है। योजना में प्राकृतिक खेती उत्पाद की ब्रांडिग व पैकेजिंग पर प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। इस योजना को वर्ष 2024-25 के दौरान 2650 करोड़ रुपये के बजट के साथ क्रियान्वित करने का प्रस्ताव किया गया है। अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में शिक्षित करने के लिए गुरुकुल-कुरुक्षेत्र, घरौंडा-करनाल, हमेटी-जीन्द, तथा मंगियाना-सिरसा में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं।


किसान सिर्फ खेती तक ही सीमित ना रहे, बल्कि आज के आधुनिक दौर में तकनीक और मशीनीकरण को भी अपनाएं इसके लिए हरियाणा सरकार ने कृषि यंत्र अनुदान योजना चलाई है, जिसके तहत 55 से अधिक तक के कृषि यंत्र, उपकरण, ट्रैक्टर आदि की खरीद पर सब्सिडी दी जाती है इसका फायदा छोटे किसानों को भी मिलता है, क्योंकि पैसों की तंगी के कारण, जो किसान महंगे मशीनें नहीं खरीद पाते थे, अब वो सब्सिडी का लाभ लेकर आसानी से खरीद लेते हैं इससे खेती की लागत कम होती है, उत्पादन भी बेहतर मिलता हैअगर कोई किसान कृषि यंत्र अनुदान योजना का लाभ लेना चाहता हैं तो सरकार की ऑफिशियल साइट पर जाकर आवेदन कर सकता हैं। 


कृषि यंत्र अनुदान योजना

 

किसानों को कृषि यंत्र की खरीद पर 40 से 50% तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा

 

योजना के माध्यम से किसान आधुनिक कृषि यंत्र खरीदने के लिए प्रेरित होंगे

 

हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के माध्यम से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा

 

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसान को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा

 

यदि लक्ष्य से ज्यादा आवेदन प्राप्त होते हैं तो लकी ड्रॉ के माध्यम से चयन किया जाएगा

 

हरियाणा देश का एक अग्रणीय कृषि प्रधान राज्य है, जहां राज्य सरकार किसानों को अनेकों योजनाओं का लाभ दे रही है ताकि किसान सशक्त और खुशहाल हो सके। किसानों को मिलेगी गति, तो राज्य की होगी प्रगति।