31 July 2009

सुसाशन के सरकार से बदलता बिहार

गौरवशाली बिहार एक ऐसा प्रदेश जिसके बारे मे लोग कुछ दिन पहले अपराध,लुट,अपहरण,बेरोजगारी, असिक्षा के बारे मे बाते करते थे! यहाँ पर पुलिश प्रशाशन सब मूक दर्शक बने हुए थे !अपराधियों के अत्याचार,असामाजिक तत्वों का दबाव जिसे आम आदमी से लेकर उच्च अस्तर के अधिकारी भी आतंकित थे ! यह समय था बिहार मे राजद सरकार की जिसका मुखिया थे लालू प्रसाद यादव जिन्होंने जातिगत समीकरण को आधार बनाकर मुस्लिम एव यादवो को ठगने के साथ-साथ अन्य जाती के लोगो को भी उनके बिकाश तथा मौलिक अधिकारों से बंचित रखा १५ बर्षो के शासनकाल के दौरान उन्होंने बिहार को ४० बर्ष पीछे भेज दिया,जिसका परिराम हुआ की, आज यहाँ की गरीब एव बेरोजगार युवा पीढी झेल रही है ! लेकिन अब इन सब के बावजूद बिहार मे बिकाश रूपी नैया के खेवनहार मिल गया है !और आज वही बिहार दिन दुनी रात चौगुनी बिकाश के पथ पर अग्रसर है !कुछ दिन पहले जहा लोग बिहारी कहलाने से हिचकते थे,लेकिन वही आज पुरे देश मे गर्व के साथ लोग बिहारी कहलाना पसंद कर रहे है ! यह सब कुछ संभव हो पाया है,बिहार मे चल रहे राजग के साशन से जहा सिक्षा बेरोजगारी बिजली सड़क पानी सवास्थ्य जैशे सुबिधाये हर किसी को आसानी से मिल रही है !और यहाँ के जनता खुशहाल है,लेकिन यह सब कुछ लोजपा राजद गठबंधन को रास नहीं आ रही है,उसे पिछले राजद सरकार के तरह ही जनता को भोला समझ कर एक बार फिर से सता की चाबी अपनी हाथो मे करने की कवायद सुरु हो चुकी है तभी तो लालू प्रसाद यादव अपने कार्यकताओ को अपने हाथो से खाना परोसने का काम करने तथा अभी से ही उन्हें लुभाने रिझाने एव अच्छा ताल मेल बनाकर चलने के लिए अब सीधे कार्यकर्ताओ से फ़ोन पर बात करने की आश्वासन दे रहे है !वही दूसरी ओर लोजपा प्रमुख रामबिलाश पासवान जो इस बार के लोक सभा चुनाव मे अपना भी संसदीये सीट नहीं बचा सके और इसके साथ ही दूसरी ओर पार्टी का सुपरा साफ हो चूका है !इनसब के बावजूद जहा उन्हें अपनी हार की समीक्षा करना चाहिए तो वह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से मतदान करने के कारण पार्टी का हार बता रहे है !

21 May 2009

ममता के माया से वाम का सफाया

पश्चिम बंगाल में वाम दल के जो चुनाव नतीजा उभर कर सामने आया है उससे साफ जाहिर होता है की इस बार के चुनाव में वाम दल के नीतियों को यहाँ के जनता पुरी तरह से नकार चुकी है,वाम दल तीसरे मोर्चे को मजबूत बनाने के पुरजोर कोसिस तो किया,लेकिन उसे इस बात का पुरा-पुरा भरोसा था की इस बार भी वह पिछले लोक सभा चुनाव के तरह सफलता हासिल करेगी,लेकिन वही दूसरी तरफ पूर्ब रेल मंत्री ममता बनर्जी नंदी ग्राम तथा सिंगुर के मुद्दा को इस प्रकार आंधी दिया की वाम पंथी बुरी तरह अपने ही गढ़ में ध्वस्त हो गये ! ममता बनर्जी ने जिस प्रकार से अपना रोड सो किया उसे साफ जाहिर होता है की उसने वामपंथियों को पुरी तरह से हराने के लिया मन मे ठान लिया था,उसने यह भी कहा था की अगर तृणमूल कांग्रेस चुनाव जीतती है तो बंगाल का बिकाश के मुद्दा संसद में उठेगा,उन्होंने जिस प्रकार से सीपीएम के ३२ बर्षो के सासन काल के जिक्र पुरे बंगाल में लोगो के बिच जा कर की उससे वाम वामपंथियों के सारे बिकाश कार्य तानाशाही के तरह साबित होते नजर आया ! नंदी ग्राम तथा सिंगुर के घटना से तो पहले ही साफ हो गया था की जिस प्रकार सीपीएम उधोग लगाने के नाम पर किसान एव गरीब जनता का जिंदगी बदहाल कर दिया है उसे इस बार वामपंथी सरकार को जरुर इसका नतीजा भोगना परेंगा ! तभी तो वामपंथियों को अपना ही गढ़ बचाना मिल का पत्थर साबित हुआ .

09 May 2009

जूता रे जूता तुझसे कोई न अछुता

इस बदलते ज़माने मे लोगो का बिरोध प्रदर्शन का तरीका भी बदलते जा रहा है ,हर जगह अलग अलग तरीके से बिरोध जताने का हथकंडा अपनाया जा रहा है !इन सारे हथकंडो मे एक है जूता जिसे हर जगह नेताओ को निशाना बनाया जा रहा है,इस घटना का सुरुआत उस वक्त हुआ जब अमेरिका के पूर्ब रास्ट्रपति बुश इराक में एक पत्रकार सममेलन कर रहे थे !तभी एक अचानक इराकी पत्रकार मुन्तिजिर जैदी ने बुश के ऊपर एक जूता उछाल दिया !उसके बाद से बिरोध जताने का यह एक आधुनिक तरीका बन गया ! इस घटना के बाद भारत मे भी नेताओ के खिलाफ बिरोध प्रदर्शन का ये तरीका अपनाया जा रहा है !यह एक आम समस्या बनती जा रही है,चाहे भारत के प्रधानमंत्री गिरिःमंत्री या फ़िर पिपक्ष के नेता ही क्यो न हो !ऐसे मे यह एक प्रश्न उठता है की क्या यह तरीका सचमुच मे सही है ,या फिर इसे लोग अपनाकर चर्चित होना चाहते है,इस घटना का प्रचलन दिन प्रति दिन बढ़ते जा रहा है,इसका प्रमुख कारण एक ही नजर आ रहा है नेताओ द्वारा दोसियो को माफ कर देना फिलहाल चाहे जो कुछ हो मगर भारत मे ये जूता सुर्खियाजरुर जरुर बटोर रहा है !