14 July 2022

हिंदुस्थान को इस्लामिक देश बनाने की PFI के ब्लूप्रिंट का भंडाफोड़

पटना पुलिस ने PFI के अजेंडे को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. बिहार पुलिस ने फुलवारी शरीफ से आतंकी गतिविधियों में शामिल में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है. इन दोनों जिहादी आतंकियों की पहचान मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज के तौर पर हुई है. ये दोनों मार्शल आर्ट्स सिखाने के नाम पर युवकों का ब्रेन वॉश कर रहे थे. कट्टर जिहादी मुसलमानों को हथियार चलाना और हमले करने की ट्रेनिंग देते थे. इनका मकसद 2047 तक भारत को मुस्लिम देश बनाना था.

फुलवारी शरीफ के एएसपी मनीष कुमार सिन्हा ने इस संबंध में बताया, कि भारत विरोधी गतिविधि में संलिप्त होने के कारण इन दोनों लोगों को गिरफ्तार किया है. आतंकियों के पास पिछले 2 माह से अलग-अलग जगह से लोग मिलने आते थे और अपनी टिकट और होटल की बुकिंग किसी और नाम से करते थे.

जिन दो लोगों को पकड़ा गया है उनमें मोहम्मद जलालुद्दीन झारखंड पुलिस का पूर्व सब इंस्पेक्टर रह चुका है जबकि अतहर परवेज आतंकी संगठन सिमी का सदस्य रहा है. परवेज फिलहाल पीएफआई-एसडीपीआई से जुड़ा हुआ है. ये दोनों अनपढ़ और भटके हुए युवकों को संपर्क में लेकर उन्हें आतंकी गतिविधियों की ट्रेनिंग देते थे.

ट्रेनिंग में ये मार्शल आर्ट और शारीरिक शिक्षा के नाम पर तलवार और चाकू चलाना सिखाते थे. इसके अलावा धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए उनका ब्रेनवॉश करते थे. पुलिस ने बताया है कि उनके पास इसके न केवल गवाह हैं बल्कि सीसीटीवी फुटेज भी हैं. वहीं अतहर परवेज का तो भाई 2001-02 में बम ब्लास्ट मामले में जेल भी जा चुका है.

पुलिस के अनुसार इनके पास से 8 पन्नों का दस्तावेज मिला है. इस दस्तावेज सड़े पता चला है कि इनका मकसद 2047 तक भारत को इस्लामी देश बनाने का था. पीएफआई अपने ब्लू प्रिंट के अनुसार 10 फीसद मुस्लिम आबादी को अपने साथ शामिल कर देश में जिहादी उन्माद फैलाना चाहता है. इसके लिए PFI इस्लाम कबूल करवाने के लिए भी भोले-भाले हिन्दुओं को निशाना बना रहा है.

पुलिस PFI के पाकिस्तानी कनेक्शन को भी तलाश रही है. साथ हीं आगे की जाँच के लिए ईडी की मदद भी ली जाएगी. पुलिस को संदेह है कि ट्रेनिंग देने के लिए इन्हें पाकिस्तान ही पैसे देता था. पुलिस जाँच में इनके पास से 30 से 40 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन प्रमाण भी मिला है. पुलिस को पता चला है कि इन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और केरल से भी फंडिंग होती थी.


                          कुछ महत्वपूर्ण सवाल

 

01. पटना पुलिस ने PFI के 2 एजेंटों को गिरफ्तार किया है, पर उनको आतंकवादी क्यों नहीं कहा गया ?

 

02. ब्रेन वॉश करने और कट्टर जिहादी मुसलमानों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने का खुलासा हुआ है, क्यों न इसे आतंकी संगठन घोषित किया जाय ?

 

03. PFI का मकसद 2047 तक भारत को मुस्लिम देश बनाना है, क्या ये भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसा नहीं है ?

 

04. जिन दो लोगों को पकड़ा गया है उनमें मोहम्मद जलालुद्दीन झारखंड पुलिस का पूर्व सब इंस्पेक्टर रह चुका है, क्या ये देश के विरुद्ध बगावत नहीं है ?

 

05. गिरफ्तार अतहर परवेज आतंकी संगठन सिमी का सदस्य रहा है, अनपढ़ युवकों को आतंकी ट्रेनिंग देता था, इसकी भनक ख़ुफ़िया एजेंसियों को क्यों नहीं लगी ?

 

06. मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग के नाम पर तलवार और चाकू सहित प्रतिबंधित अस्त्र-शस्त्र चलाना क्या हिन्दुओं के विरुद्ध अघोषित युद्ध नहीं है ?

 

07. पीएफआई 10 फीसद मुस्लिम आबादी को अपने साथ शामिल कर देश में जिहादी उन्माद फैलाना चाहता है, फिर भी सरकारी एजेंसियां मौन क्यों हैं ?

 

08. PFI इस्लाम कबूल करवाने के लिए भी भोले-भाले हिन्दुओं को निशाना बना रहा है, मगर देश में अबतक धर्मांतरण विरोधी केन्द्रीय कानून क्यों नहीं बना ?

 

09. पुलिस को PFI के मुस्लिम देशों का कनेक्शन भी मिला है, तो सरकार इस्लामिक देशों से खुली बहस क्यों नहीं करती ?

 

10. PFI को पाकिस्तान, बांग्लादेश और केरल से भी फंडिंग होती थी, इसका भी खुलासा हुआ है, केरल सरकार इसपर मौन क्यों है ?

शिंजो आबे की हत्या अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र ? इस हत्या से भारत ने क्या सीख ली ?

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का निधन हो गया है. हमलावर ने उन पर दो गोलियां चलाई थीं. कई घंटों तक इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. शिंजो आबे नारा शहर में एक रैली कर रहे थे, तभी हमलावर ने उन पर दो गोलियां चलाईं थीं. एक गोली उनके सीने के आरपार चली गई, जबकि दूसरी गोली गर्दन पर लगी. गोली लगते ही आबे सड़क पर गिर पड़े थे. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. शिंजो आबे पर ये हमला शुक्रवार सुबह साढ़े 11 बजे हुआ. रविवार को जापान में ऊपरी सदन के चुनाव हैं. आबे इसी चुनाव के लिए कैंपेनिंग कर रहे थे. आबे ने जैसे ही बोलना शुरू किया, वैसे ही उनपर पीछे खड़े हमलावर ने गोलियां चला दीं. आबे की हत्या करने वाले की पहचान यामागामी तेत्सुया के रूप में हुई है. उसकी उम्र 41 साल है. गोली चलाने के बाद यामागामी ने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया. पूछताछ में यामागामी ने बताया है कि वो आबे की किसी बात से 'नाराज' था, इसलिए उनकी जान लेना चाहता था. 


पीएम मोदी ने अपने खास दोस्त पर हमले को लेकर दुख व्यक्त किया है. शिंजो आबे 1957 में स्वतंत्र भारत की यात्रा करने वाले पहले जापानी प्रधान मंत्री नोबुसुके किशी के नाती थे. आबे का भारत से नाता बचपन से जुड़ा था. आबे ने अपनी भारत यात्रा के दौरान उन कहानियों को याद किया था जो उन्होंने बचपन में अपने नाना की गोद में बैठकर भारत के बारे में सुनी थीं. शिंजो आबे का भारत को लेकर खास लगाव था. यह लगाव काशी से लेकर क्योटो तक दिखाई देता था. आबे का भारत की संस्कृति से लेकर द्विपक्षीय संबंधों को लेकर जो निकटता थी वह कई मौकों पर दिखाई थी. बुलेट ट्रेन परियोजना से लेकर असैन्य परमाणु समझौते में आबे की भूमिका भारत से उनके प्रति प्यार को दर्शाती है.

शिंजो आबे पर ये हमला शुक्रवार सुबह साढ़े 11 बजे हुआ. रविवार को जापान में ऊपरी सदन के चुनाव हैं. आबे इसी चुनाव के लिए कैंपेनिंग कर रहे थे. आबे ने जैसे ही बोलना शुरू किया, वैसे ही उनपर पीछे खड़े हमलावर ने गोलियां चला दीं. आबे की हत्या करने वाले की पहचान यामागामी तेत्सुया के रूप में हुई है. उसकी उम्र 41 साल है. गोली चलाने के बाद यामागामी ने वहां से भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया. पूछताछ में यामागामी ने बताया है कि वो आबे की किसी बात से 'नाराज' था, इसलिए उनकी जान लेना चाहता था. 

पीएम मोदी ने अपने खास दोस्त पर हमले को लेकर दुख व्यक्त किया है. शिंजो आबे 1957 में स्वतंत्र भारत की यात्रा करने वाले पहले जापानी प्रधान मंत्री नोबुसुके किशी के नाती थे. आबे का भारत से नाता बचपन से जुड़ा था. आबे ने अपनी भारत यात्रा के दौरान उन कहानियों को याद किया था जो उन्होंने बचपन में अपने नाना की गोद में बैठकर भारत के बारे में सुनी थीं.

शिंजो आबे का भारत को लेकर खास लगाव था. यह लगाव काशी से लेकर क्योटो तक दिखाई देता था. आबे का भारत की संस्कृति से लेकर द्विपक्षीय संबंधों को लेकर जो निकटता थी वह कई मौकों पर दिखाई थी. बुलेट ट्रेन परियोजना से लेकर असैन्य परमाणु समझौते में आबे की भूमिका भारत से उनके प्रति प्यार को दर्शाती है.


कुछ महत्वपूर्ण सवाल 

 

01. जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या क्या अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र है ?

 

02. शिंजे आबे ने भारत में बुलेट ट्रेन और असैन्य परमाणु समझौते में अहम योगदान दिया था, हत्या के पीछे साजिश के ये कारण तो नहीं ?

 

03. भारत के साथ जापान की दोस्ती से अमेरिका और चीन हमेशा परेशान रहते हैं, क्या इनकी भी कोई भूमिका है ?

 

04. रविवार को जापान में ऊपरी सदन के चुनाव है, आबे इसी चुनाव के लिए कैंपेनिंग कर रहे थे, क्या हत्या के पीछे ये भी एक मुख्य वजह हो सकता है ?

 

05.हमलावर का संबंध जापानी सेना से बताया जा रहा है, इससे पहले भी जापान में नेवी के अधिकारियों ने ही जापान के प्रधानमंत्री की हत्या कर दी थी, क्या इसके पीछे सैन्य ताकतें तो नहीं ?

 

06. शिंजे आबे की हत्या पर शक्ति संपन्न राष्ट्र चुप हैं, इनकी चुप्पी क्या किसी संदेह की ओर इशारा नहीं करते ?

 

07. शिंजे आबे एक बड़े राजनीतिक परिवार से संबंध रखते थे, क्या इसके पीछे जापान की आंतरिक राजनीति तो वजह नहीं है ?

 

08. जापान में भी नव बौद्ध राष्ट्रवादी नेताओं का विरोध करते हैं, क्या शिंजे की हिन्दू धर्म के प्रति आस्था हत्या की वजह तो नहीं ?

 

09.पूछताछ में आरोपी यामागामी ने बताया है कि वो आबे की किसी बात से 'नाराज' था, मगर किस बात से नाराज़ था, इसका खुलासा अबतक क्यों नहीं हुआ ?


10.   शिंजे आबे की हत्या को अन्य मीडिया हाउस अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र के एंगल से क्यों नहीं दिखा रहे हैं ?

असम में बाढ़ जिहाद ! हिंदू बहुल गांवों के बांध तोड़ने वाले गिरफ़्तार

देश में बढ़ते जिहाद के बिच अब एक नया जिहाद सामने आया है जिसका नाम है बाढ़ जिहाद. जी हाँ, आपने बिल्कुल सही सुना बाढ़ जिहाद. असम इन दिनों बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है. करीब 14 लाख लोग इसकी वजह से प्रभावित हुए हैं. 162 लोगों की मौत हो चुकी है. इस बीच असम के कछार जिले में बराक नदी का तटबंध को तोड़ कर बाढ़ जिहाद की साजिश रचने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इन दोनों जिहादियों के बांध तोड़ने की वजह से ही सिलचर शहर में बाढ़ आई है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इसे मानव निर्मित आपदा करार दिया है. CM ने उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही थी, जिसके बाद अब आरोप हवालात में बंद हैं. 

गिरफ्तार बाढ़ जिहादियों की पहचान मीठू हुसैन लस्कर और काबुल खान के रूप में हुई है. इन दोनों बाढ़ जिहादियों हिन्दू बहुल्य गाँव में बांध को तोड़ दिया. इसके कारण पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया. बांध टूटने के बाद काबुल खान ने इसका वीडियो भी बनाया ताकी इस जिहाद को लोगों के बिच भेज कर तबाही की वाहवाही लुट सके.

मुख्यमंत्री ने जब कछार जिले में तटबंध का दौरा किया तो स्थानीय निवासियों को ये वीडियो दिखाया गया. लोगों से वीडियो में आ रही आवाज की पहचान की अपील की गई थी. इसके बाद काबुल खान की पहचान हुई. इसके बाद खान के सहयोगी आरोपी सहित छह लोग जिम्मेदार पाए गए. इनमे से 2 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी ​​के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जांच का नेतृत्व कर रहे हैं. साथ हीं राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से विशेष कार्य बल भी इस मामले की निगरानी कर रहा है.

 

कुछ महत्वपूर्ण सवाल

 

01. देश में बढ़ते जिहाद के प्रकार को हिन्दू समाज क्यों नहीं समझ रहा है ? 

02.  इतना बड़ा षड्यंत्र होने के बाद भी स्थनीय प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी ?

03.  बाढ़ की विभीषिका वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बालों की तैनाती क्यों नहीं हुई थी ?

04.  गिरफ्तार आरोपियों की जाँच NIA द्वारा क्यों नहीं हो रही है ?

05.  असम एक सीमावर्ती राज्य है, क्या इसकी पीछे चीन की कोई साजिश तो नहीं है ?

06.  बराक नदी भारत के मणिपुर, नागालैण्ड, मिज़ोरम व असम से होते हुए बंगलादेश तक जाती है, फिर साजिश से कैसे इनकार किया जा सकता है ?

07.  प्रशासन ये खुद मान रहा है कि दोनों जिहादियों के बांध तोड़ने की वजह से ही सिलचर में बाढ़ आई, क्या ये बड़ी साजिश नहीं है ? 

08. असम के CM हिमंत बिस्व सरमा ने इसे मानव निर्मित आपदा करार दिया है, क्या ये किसी अंतरराष्ट्रीय साजिश की ओर इशारा तो नहीं है ?

09. बाढ़ जिहादी मीठू हुसैन और काबुल खान का कोई रोहिंग्या और बांग्लादेशी लिंक तो नहीं है ?

10. राष्ट्रीय बाढ़ आयोग इस मामले में अबतक संज्ञान क्यों नहीं लिया है ?

हिंदुओं के हत्याकांड पर खान गैंग तो दूर, बच्चन से लेकर कपूर तक मौन क्यों ?

बात-बात पर हो हल्ला मचाने वाला बॉलीवुड गैंग उदयपुर और अमरावती में हुई हत्यों पर मौन धारण किया हुआ है. हिन्दुओं के खिलाफ नफरत और इस्लाम के प्रति आस्था दिखाने वाला पूरा फ़िल्मी जमात शांत है. कभी लिंचिंग के नाम पर अवार्ड वापसी का नाटक तो कभी हिन्दू धार्मिक आस्था पर फिल्मों के जरिये अपने जिहादी मानसिकता का परिचायक खान गैंग, कपूर परिवार, बच्न परिवार दूर-दूर तक कहीं नज़र नहीं आ रहा हैं. 

बॉलीवुड मनोरंजन के साथ ही सामाजिक संदेश देने का एक बड़ा माध्यम है. लेकिन बॉलीवुड पर छद्म धर्मनिरपेक्ष माफिया का कब्जा है. यहां पर धर्मनिरपेक्षता की आड़ में बड़ी साजिशों को अंजाम दिया जाता है. इस साजिश में बड़े-बड़े फिल्म निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, अभिनेत्री, पटकथा और संवाद लेखक शामिल है, जो इस्लाम के प्रचार-प्रसार कर उसमें आस्था पैदा करने की कोशिश करते हैं, जबकि हिन्दू समाज के प्रति नफरत पैदा करते हैं।

आए दिन सोशल मीडिया से लेकर फ़िल्मी परदे तक- देश, हिन्दू समाज को लेकर साजिशों को लोगों के समाने पेश करने वाला जमात ने अब चुप्पी साध ली है. उदयपुर में कन्हैया लाल की निर्मम हत्या और अमरावती में उमेश कोल्हे की मर्डर इस फ़िल्मी जमात के लिए कोई विशेष मायने नहीं रखता है. क्योंकी इन हत्याओं में जिहादियों का सीधा हाथ है. इसलिए ये विषय इनके लिए सेलेक्टिव एजेंडा है.

काफी दिनों से बॉलीवुड में जड़ जमा चुकी जिहादी विचारधार, जो अपने को प्रगतिशील, उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष बताती है, हिन्दू समाज के खिलाफ काम करती है. यह विचारधारा प्रगतिशीलता और अंधविश्वास दूर करने के नाम पर हिन्दुओं की भावनाओं पर हमला करती है. इसलिए आज हम पूछ रहे हैं कि हिंदुओं के हत्याकांड पर खान गैंग तो दूर, बच्चन से लेकर कपूर तक मौन क्यों हैं?


कुछ महत्वपूर्ण सवाल

 

01. बॉलीवुड गैंग उदयपुर और अमरावती में हुई हत्याओं पर मौन क्यों धारण किया हुआ है ?

02. जिहाद के प्रति आस्था दिखाने वाला पूरा फ़िल्मी जमात हिन्दू हत्याओं पर  शांत क्यों बैठा है ?

03. लिंचिंग के नाम पर हो- हल्ला करने वाला बॉलीवुड हिन्दू हत्याओं पर कहां है, क्यों आवाज़ क्यों नहीं उठा रहा है ?

04. अवार्ड वापसी का नाटक करने वाला फ़िल्मी लिबरल गैंग अपनी चुप्पी कब तोड़ेगा ?

05. खान गैंग, कपूर परिवार, बच्न परिवार दूर-दूर तक कहीं नज़र क्यों नहीं आ रहा ?

06. कन्हैया लाल और उमेश कोल्हे की हत्या क्या बॉलीवुड के लिए कोई मायने नहीं रखता ?

07. बॉलीवुड सेलेक्टिव एजेंडा पर ही चलाता है इस चुप्पी ने साफ कर दिया है, तो फिर क्यों ना बॉलीवुड का हिन्दू समाज बहिष्कार करे ?

08. बॉलीवुड मनोरंजन के साथ ही सामाजिक संदेश देने का एक बड़ा माध्यम है, मगर बॉलीवुड छद्म धर्मनिरपेक्षता क्यों दिखा रहा है ?

09. क्या बॉलीवुड में खान गैंग का मजबूत प्रभाव फ़िल्मी कलकारों को खुलकर बोलने से रोकता है ?

10. विदेशी पैसों पर पलने वाला फ़िल्मी जगत क्या किसी अंतर्राष्ट्रीय दबाव में है ?

उमेश कोल्हे के हत्यारों को फांसी दो, ग्राउंड जीरो से सत्य रिपोर्ट

महाराष्ट्र के अमरावती में दावा दुकानदार उमेश कोल्हे का सिर कलम किए जाने की घटना के सम्बन्ध में बड़ा खुलासा हुआ है. सिर्फ केमिस्ट उमेश कोल्हे ही नहीं, बल्कि 8 लोगों को हत्या की धमकी दी गई थी. इनमें एक डॉक्टर गोपाल राठी भी शामिल थे. इन 8 लोगों का सिर कलम किए जाने की धमकी दी गई थी.

एक तरह से ऐसा कर के हिन्दुओं को ये सन्देश देने की कोशिश की गई कि जो बात इस्लामी कट्टरपंथियों को पसंद नहीं आएगी, ऐसा लिखने-बोलने की उन्हें अनुमति नहीं है. उमेश कोल्हे को भी इससे पहले भी 2 बार मारने की कोशिश की गई थी, तीसरी बार में हत्यारों को सफलता मिली.

उमेश कोल्हे की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में कि उनके गले पर जो जख्म था, वो 5 इंच चौड़ा, 7 इंच लंबा और 5 इंच गहरा था. उनकी साँस लेने वाली नली, भोजन निगलने वाली नली और आँखों की नसों पर भी वार किए गए थे. उमेश कोल्हे ने नूपुर शर्मा को लेकर एक पोस्ट ब्लैक फ्रीडमनामक एक व्हाट्सएप्प ग्रुप में गलती से शेयर कर दिया था. उनके दोस्त डॉक्टर युसूफ खान ने इस घटना की साजिश रची थी.

इस हत्‍याकांड में एनआईए ने आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) लगाया है. जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) भी जल्द इस मामले में पूछताछ कर रही है.

अमरावती के श्याम चौक क्षेत्र के घंटाघर के पास 21 जून की रात करीब साढ़े 10 बजे उमेश की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. ऐसे में उमेश कोल्हे के हत्यारों को फंसी देने के लिए देशभर के लोग मांग कर रहे हैं. उमेश कोल्हे के भाई महेश कोल्हे  ने जल्द न्याय की उम्मीद जताई है. साथ हीं उन्होंने मामले को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की मंग की है.

जिहादियों के कारखानों मदरसों को बंद करो ! गजवा-ए-हिन्द की पाठशाला पर प्रहार

जिहाद और मदरसे के सम्बन्धों पर लंबे समय से बहस चल रही है, लेकिन इनके प्रति राजनीतिक नेतृत्व की नरम स्थिति के कारण, कानून प्रवर्तन एजेंसियां हमेशा कोई कड़ी जांच करने और किसी भी गंभीर कार्रवाई करने में संकोच करती रही हैं. मदरसे अब केवल शिक्षा व्यवस्था के लिए नहीं बल्की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन गए हैं.

राजस्थान के उदयपुर में हाल ही में हुई जिहादी आतंक की बर्बर क्रूरता ने देश और सुरक्षा एजेंसियों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है. यही कारण हैं कि आतंकवादी घटनाओं और जिहादी गतिविधियों के लिए अब मदरसे को मूल वजह माना जा रहा है. 

विशेषज्ञ के अनुसार इस्लामी कट्टरवाद और जिहाद के पीछे मदरसों की भी एक अहम भूमिका है. भारत में इन मदरसों को लेकर पिछले दो-तीन दशकों में कुछ अध्ययन हुए हैं. मगर जिहाद और आतंकवाद में इनकी भूमिका को लेकर कुछ क्षेत्रीय दल और सेक्युलर पार्टियां इनका बचाव करती हैं. कागजों पर तो मदरसे अरबी भाषा और संस्कृति सीखने के केंद्र कहे जाते हैं. मगर हकीकत ये है कि इन विषयों की आड़ में उन्हें जिहाद का पाठ पढ़ाया जा रहा है.

भारतीय उपमहाद्वीप में मदरसे इस्लामिक आक्रमण और उसके बाद सत्ता नियंत्रण करने के लिए शुरू हुआ था. मगर ये देश में धीरे-धीरे जिहाद का केंद्र के रूप में स्थापित हो गया.

वर्ष 1950 में भारत में केवल 88 मदरसे थे, जो अब बढ़कर 5 लाख से अधिक हो गए हैं. 21 अप्रैल, 2017 को दिल्ली और उत्तर प्रदेश को निशाना बनाने के उद्देश्य से एक आतंकी साजिश की योजना बनाने के लिए, बिजनौर के एक मदरसे से पांच मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी हुई थी. इसी तरह की गिरफ्तारियां महाराष्ट्र में मुंबई, पंजाब के जालंधर और बिहार के पूर्वी चंपारण जिलों से भी हुई थी.

इससे साबित होता है कि मदरसा हीं जिहाद और आतंकवाद का केंद्र बिन्दु है. इन मदरसों के रास्ते जिहाद और आतंक का पौध भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में आतंकवाद की नर्सरी बन गए हैं. इसलिए आज ये प्रश्न खड़ा हुआ है कि क्यों न जिहादियों के कारखाने मदरसों को बंद किया जाय?


                                                कुछ महत्वपूर्ण सवाल


01. मदरसों में लगातार हो रहे जिहादी गतिविधियों के बावजूद राज्य सरकारें इसे बंद क्यों नहीं कर रही हैं ?

 

02. मदरसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं, सुरक्षा एजेंसियां इसकी जाँच क्यों करती हैं ?

 

03. आतंकवादी घटनाओं और जिहादी गतिविधियों में शामिल मदरसों की विदेशी फंडिंग की जाँच क्यों नहीं होती ?

 

04. इस्लामिक कट्टरवाद और जिहाद के पीछे मदरसों की अहम भूमिका है, ये बात जाँच में साबित हो चुकी है, फिर भी अबतक मदरसे कैसे चल रहे हैं ?

 

05. देश में इस वक्त लगभग 5 लाख से ज्यादा मदरसे हैं, इसे नियंत्रित करने के लिए कोई नियामक क्यों नहीं है ?

 

06. देश में आतंकवाद की नर्सरी बन चुके मदरसे, क्या गजवा- ए- हिन्द का एजेंडा चला रहे हैं, इसे क्यों नहीं रोका जा रहा है ?

 

07. आतंकी समर्थक उलेमा और मौलाना भारतीय मदरसों में जिहादी भाषण देकर आतंक को बढ़ावा देते हैं, इसपर कार्रवाई क्यों नहीं होती ?

 

08. पाकिस्तान के अधिकतर मदरसे आतंकी ट्रेनिंग सेंटर बन चुके हैं, क्या भारत में भी मदरसों को इसीलिए बढ़ाया जा रहा है ?

 

09. दुनिया के कई देशों ने मदरसों को इस्लामिक आतंकवाद का केंद्र माना है, फिर अमेरिका सहित ताकतवर देश इसपर रोक क्यों नहीं लगाते ?

 

10. भारत में मदरसों को इस्लामिक सत्ता नियंत्रण करने के लिए शुरू किया गया था, देश में अब लोकतंत्र है, फिर मदरसों को क्यों चलाया जा रहा है ?

09 July 2022

तारेक फ़तेह का मुसलामानों से 10 सवाल !

1. मुसलमानों का दावा है कि कुरान अल्लाह की किताब है, लेकिन कुरान में बच्चों की खतना करने का हुक्म नहीं है, फिर भी मुसलमान खतना क्यों कराते है? क्या अल्लाह में इतनी भी शक्ति नहीं है कि मुसलमानों के खतना वाले बच्चे ही पैदा कर सके? और कुरान के विरुद्ध काम करने से मुसलमानों को काफ़िर क्यों नहीं माना जाए?


2. मुसलमान मानते हैं कि अल्लाह ने फ़रिश्ते के हाथों कुरआन की पहली सूरा लिखित रूप में मुहम्मद को दी थी, लेकिन अनपढ़ होने से वह उसे नहीं पढ़ सके, इसके अलावा मुसलमान यह भी दावा करते हैं कि विश्व में कुरान एकमात्र ऐसी किताब है जो पूर्णतयः सुरक्षित है, तो मुसलमान कुरान की वह सूरा पेश क्यों नहीं कर देते जो अल्लाह ने लिख कर भेजी थी, इससे तुरंत पता हो जायेगा कि वह कागज कहाँ बना था? और अल्लाह की राईटिंग कैसी थी? वर्ना हम क्यों नहीं माने कि जैसे अल्लाह फर्जी है वैसे ही कुरान भी फर्जी है।

3. इस्लाम के मुताबिक यदि 3 दिन/माह का बच्चा मर जाये तो उसको कयामत के दिन क्या मिलेगा- जन्नत या जहन्नुम? और किस आधार पर?

4. मरने के बाद जन्नत में पुरुष को 72 हूरी (अप्सराए) मिलेगी, तो स्त्री को क्या मिलेगा...72 हूरा (पुरुष वेश्या)? और अगर कोई बच्चा पैदा होते ही मर जाये तो क्या उसे भी हूरें मिलेंगी? और वह हूरों का क्या करेगा ?

5. यदि मुसलमानों की तरह ईसाई, यहूदी और हिन्दू मिलकर मुसलमानों के विरुद्ध जिहाद करें, तो क्या मुसलमान इसे धार्मिक कार्य मानेंगे या अपराध? और क्यों?

6. यदि कोई गैर मुस्लिम (काफ़िर) यदि अच्छे गुणों वाला हो तो भी... क्या अल्लाह उसको जहन्नुम की आग में झोक देगा? और क्यों? और, अगर ऐसा करेगा तो.... क्या ये अन्याय नहीं हुआ?

7. कुरान के अनुसार मुहम्मद सशरीर जन्नत गए थे, और वहां अल्लाह से बात भी की थी, लेकिन जब अल्लाह निराकार है, और उसकी कोई इमेज (छवि) नहीं है तो..मुहम्मद ने अल्लाह को कैसे देखा ? और कैसे पहचाना कि यह अल्लाह है, या शैतान है?

8. मुसलमानों का दावा है कि जन्नत जाते समय मुहम्मद ने येरूसलम की बैतूल मुक़द्दस नामकी मस्जिद में नमाज पढ़ी थी, लेकिन वह मुहम्मद के जन्म से पहले ही रोमन लोगों ने नष्ट कर दी थी। मुहम्मद के समय उसका नामो निशान नहीं था, तो मुहम्मद ने उसमे नमाज कैसे पढ़ी थी? हम मुहम्मद को झूठा क्यों नहीं कहें ?

9. अल्लाह ने अनपढ़ मुहम्मद में ऐसी कौन सी विशेषता देखी, जो उनको अपना रसूल नियुक्त कर दिया, क्या उस समय पूरे अरब में एकभी ऐसा पढ़ा-लिखा व्यक्ति नहीं था, जिसे अल्लाह रसूल बना देता, और जब अल्लाह सचमुच सर्वशक्तिमान है, तो अल्लाह मुहम्मद को 63 साल में भी अरबी लिखने या पढने की बुद्धि क्यों नहीं दे पाया?

10. जो व्यक्ति अपने जिहादियों की गैंग बना कर जगह जगह लूट करवाता हो, और लूट के माल से बाकायदा अपने लिए पाँचवाँ हिस्सा (20 %) रख लेता हो, उसे उसे अल्लाह का रसूल कहने की जगह लुटरों का सरदार क्यों न कहें?

31 May 2022

देशभर में हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कर बनाई गई मस्जिदें-मजार राज्यवार सूची

आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में 142 हिन्दू मंदिरों को तोड़ कर अवैध मस्जिदें बनाई गई है।

कदिरी में जामी मस्जिद।

पेनुकोंडा में अनंतपुर शेर खान मस्जिद।

बाबया दरगाह पेनुकोंडा- इवारा मंदिर को तोड़कर बनाया गया।

तदपत्री में ईदगाह।

गुंडलाकुंटा में दतगिरी दरगाह।

दतगिरी दरगाह- जनलापल्ले में जंगम मंदिर के ऊपर बनाया गया है।

हैदराबाद के अलियाबाद में मुमिन चुप की दरगाह-  इसे 1322 में एक मंदिर की जगह पर बनाया गया था।

राजामुंदरी में जामी मस्जिद- इसका निर्माण 1324 में वेणुगोपालस्वामी मंदिर को नष्ट करके किया गया था। 


असम

पोआ मस्जिद- सुल्तान गयासुद्दीन बलबन की मजार- ये दोनों कामरूप जिले के हाजो के मंदिरों की जगह पर आज भी मौजदू हैं।

 

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में 102 जगहों पर मस्जिदें, किले और दरगाह हैं, जिन्हें मुस्लिम शासकों ने मंदिर को नष्ट करके बनाया था।

लोकपुरा की गाजी इस्माइल मजार- वेणुगोपाल मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

बीरभूम सियान में मखदूम शाह दरगाह को बनाने के लिए मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।

सुता में सैय्यद शाह शाहिद महमूद बहमनी दरगाह- बौद्ध मंदिर की सामग्री से बनाया गया था।

बनिया पुकुर में 1342 में बनाई गई अलाउद-दीन अलौल हक़ मस्जिद- मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया था।

 

बिहार

बिहार में कुल 77 जगहों पर मंदिर को नष्ट करके या फिर उसकी सामग्री का उपयोग करके मस्जिदों, मुस्लिम संरचनाओं, किलों आदि को बनाया गया था।

भागलपुर- हजरत शाहबाज की दरगाह 1502 में मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।

चंपानगर- जैन मंदिरों को नष्ट कर कई मजारों का निर्माण कराया गया था।

मुंगेर- अमोलझोरी में मुस्लिम कब्रिस्तान एक विष्णु मंदिर की जगह पर बनाया गया था।

गया- नादरगंज में शाही मस्जिद 1617 में एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।

नालंदा- 1380 में मखदुमुल मुल्क शरीफुद्दीन की दरगाह, बड़ा दरगाह, छोटा दरगाह और अन्य शामिल हैं।

पटना- शाह जुम्मन मदारिया की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।

शाह मुर मंसूर की दरगाह, शाह अरज़ानी की दरगाह, पीर दमरिया की दरगाह भी बौद्ध स्थलों पर बनाई गई थीं।

 

दिल्ली

यहां कुल 72 जगहों पर मुस्लिम आक्रमणकारियों ने सात शहरों का निर्माण करने के लिए इंद्रप्रस्थ और ढिलिका को नष्ट कर दिया था।

मंदिर की सामग्री का उपयोग कई स्मारकों, मस्जिदों, मजारों और अन्य संरचनाओं में किया गया।

कुतुब मीनार, कुव्वतुल इस्लाम मस्जिद (1198)

शम्सूद-दीन इल्तुतमिश का मकबरा, जहाज़ महल, अलल दरवाजा, अलल मीनार, मदरसा और अलाउद-दीन खिलजी का मकबरा और माधी मस्जिद शामिल हैं।

 

गुजरात

गुजरात की 170 ऐसी जगहों पर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई हैं।

असवल, पाटन और चंद्रावती के मंदिरों को नष्ट कर इनकी सामग्री का उपयोग अहमदाबाद को एक मुस्लिम शहर बनाने के लिए किया गया था।

अहमदाबाद में मंदिर सामग्री का उपयोग करने वाले जो स्मारक बनाए गए हैं, वह हैं- अहमद शाह की जामी मस्जिद, हैबिट खान की मस्जिद।

ढोलका जिले में बहलोल खान की मस्जिद और बरकत शहीद की मजार भी मंदिरों को ध्वस्त करके बनाई गई थी।

सरखेज में, शेख अहमद खट्टू गंज बक्स की दरगाह 1445 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी।

1321 में भरूच में हिंदू और जैन मंदिरों के विध्वंस के बाद जो सामग्री इकट्ठा हुई थी। उसका उपयोग करके जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था।

भावनगर में बोटाद में पीर हमीर खान की मजार एक मंदिर की जग​ह पर बनाई गई थी।

1473 में द्वारका में एक मंदिर के स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया था।

भुज में जामी मस्जिद और बाबा गुरु के गुंबद मंदिर के स्थान पर बनाए गए थे।

जैन समुदाय के लोगों को रांदेर से निकाल दिया गया और मंदिरों की जगह मस्जिद बना दी गई थीं।

सोमनाथ पाटन में बाजार मस्जिद, चाँदनी मस्जिद और काजी की मस्जिद भी मंदिर के स्थानों पर बनाई गई थी।


दीव

दीव में जो जामी मस्जिद है, उसका निर्माण 1404 में किया गया था। इसे भी एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।


हरियाणा

हरियाणा में कुल 77 स्थलों पर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई है।

पिंजौर और अंबाला में मंदिर की सामग्री का उपयोग फिदई खान के बगीचे के निर्माण में किया गया था।

फरीदाबाद में जामी मस्जिद 1605 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है।

नूंह में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके 1392 में एक मस्जिद का निर्माण किया गया था।

बावल में मस्जिदें और गुरुग्राम जिले के फर्रुखनगर में जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई हैं।

कैथल में बल्ख के शेख सलाह-दीन अबुल मुहम्मद की दरगाह 1246 में मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी।

कुरुक्षेत्र में टीले पर मदरसा और झज्जर में काली मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी।

हिसार का निर्माण फिरोज शाह तुगलक ने अग्रोहा से लाई गई मंदिर सामग्री का उपयोग करके किया था।

अग्रोहा शहर का निर्माण भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज महाराजा अग्रसेन ने करवाया था।

महाराजा अग्रसेन का जन्म भगवान राम के बाद 35वीं पीढ़ी में हुआ था। 1192 में मुहम्मद गौरी ने इस शहर को नष्ट कर दिया था।

 

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, यहाँ मंदिर सामग्री का उपयोग करके जहाँगीरी गेट बनाया गया था।

 

कर्नाटक

कर्नाटक में कुल 192 स्थान हैं। बेंगलुरु के डोड्डा बल्लापुर में अजोधन की मुहिउद-दीन चिश्ती की दरगाह मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी।

कुदाची में मखदूम शाह की दरगाह और शेख मुहम्मद सिराजुद-दीन पिरदादी की मजार भी मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।

हम्पी के विजयनगर में मस्जिद और ईदगाह भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाए गए थे।

सोला खंबा मस्जिद, जामी मस्जिद, मुख्तार खान की मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थीं और कुछ में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल भी किया गया था।

जामी मस्जिद, महला शाहपुर में मंदिर के स्थान पर आज भी मस्जिद मौजूद हैं।

बीजापुर एक प्राचीन हिंदू शहर हुआ करता था, लेकिन इसे एक मुस्लिम राजधानी में तब्दील कर दिया गया था।

जामी मस्जिद, करीमुद-दीन की मस्जिद, छोटा मस्जिद, आदि मंदिर स्थलों पर बनाए गए थे या मंदिर सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।

टोन्नूर, मैसूर में सैय्यद सालार मसूद की मजार मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाई गई थी।

 

केरल

केरल की दो जगहों का उल्लेख किया गया है। पहला कोल्लम में जामी मस्जिद और दूसरा पालघाट में टीपू सुल्तान द्वारा बनाए गए किले का, जिसमें मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।

 

लक्षद्वीप

लक्षद्वीप में दो जगहों के बारे में बताया गया है। कल्पेनी में मुहिउद-दीन-पल्ली मस्जिद और कवरती में प्रोट-पल्ली मस्जिद भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई है। यह सर्वविदित है कि लक्षद्वीप में अब 100% के आसपास मुस्लिम हैं।

 

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के 151 स्थलों पर मंदिर को तोड़ कर मस्जिद बनाई गई है, भोपाल में कुदसिया बेगम द्वारा जामी मस्जिद का निर्माण किया गया था, जहाँ कभी सभामंडल मंदिर हुआ करता था।

दमोह में गाजी मियां की दरगाह भी पहले एक मंदिर ही था।

धार राजा भोज परमार की राजधानी हुआ करती थी। इसे भी मुस्लिम राजधानी में बदल दिया गया।

कमल मौला मस्जिद, लाट की मस्जिद, अदबुल्लाह शाह चंगल की मजार आदि का निर्माण मंदिर की जगह पर या ​फिर उनकी सामग्री का इस्तेमाल करके बनाया गया है।

मांडू एक प्राचीन हिंदू शहर था। इसे भी मुस्लिम राजधानी में भी बदल दिया गया था।

जामी मस्जिद, दिलावर खान की मस्जिद, छोटी जामी मस्जिद आदि का निर्माण मंदिर के स्थानों पर किया गया है।

चंदेरी को भी मंदिर की सामग्री का उपयोग करके बनाया गया था। मोती मस्जिद, जामी मस्जिद और अन्य संरचनाओं में भी मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।

ग्वालियर में, मुहम्मद गौस की दरगाह, जामी मस्जिद और गणेश द्वार के पास मस्जिद मंदिर स्थलों पर बनाई गई थी।

 

महाराष्ट्र

किताब में महाराष्ट्र के 143 स्थलों के बारे में बात की गई है।

अहमदनगर में अम्बा जोगी किले में मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।

गॉग में ईदगाह, जिसे 1395 में बनाया गया था, यह भी एक मंदिर के स्थान पर बना है।

अकोट की जामी मस्जिद 1667 में एक मंदिर के स्थल पर बनाई गई थी।

करंज में अस्तान मस्जिद 1659 में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

रीतपुर में औरंगजेब की जामी मस्जिद मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

हजरत बुरहानुद्दीन-दीन गरीब चिश्ती की दरगाह खुल्दाबाद में एक मंदिर स्थल पर 1339 में बनाई गई थी।

मैना हज्जम की मजार मुंबई में महालक्ष्मी मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

मुंबई में जामी मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी।

परंदा में तलाब के पास नमाजगाह का निर्माण मनकेवरा मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था।

लातूर में, मीनापुरी माता मंदिर को मबसू साहिब की दरगाह में बदल दिया गया था, सोमवारा मंदिर को सैय्यद कादिरी की दरगाह में बदल दिया गया था।

रामचंद्र मंदिर को पौनार की कादिमी मस्जिद में बदल दिया गया था।

 

ओडिशा

ओडिशा में 12 ऐसी जगह हैं, जहाँ मंदिरों को तोड़कर उसके स्थान पर मस्जिद, दरगाह और मजार बनाई गई है।

बालेश्वर में महल्ला सुन्नत में जामी मस्जिद श्री चंडी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

शाही मस्जिद और कटक में उड़िया बाजार की मस्जिदों के साथ-साथ केंद्रपाड़ा में एक मस्जिद को मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

 

पंजाब

बाबा हाजी रतन की मजार बठिंडा में एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई है।

जालंधर के सुल्तानपुर की बादशाही सराय बौद्ध विहार के स्थान पर बनी हुई है।

लुधियाना में अली सरमस्त की मस्जिद भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है।

बहादुरगढ़ में किले अंदर एक मस्जिद बनाई गई है। उसका निर्माण भी मंदिर की जगह पर किया गया है।

 

राजस्थान

राजस्थान के 170 स्थलों पर मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था।

पहले अजमेर एक हिंदू राजधानी हुआ करती थी, जिसे मुस्लिम शहर में बदल दिया गया था।

अढ़ाई-दिन-का-झोंपरा 1199 में बनाया गया था, मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह 1236 में बनाई गई थी, और अन्य मस्जिदों का निर्माण मंदिर के स्थान पर किया गया था।

तिजारा में भरतारी मजार एक मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी।

बयाना में नोहारा मस्जिद का निर्माण उषा मंदिर के स्थान पर किया गया था।

भितरी-बहारी की मस्जिद में विष्णु भगवान की मंदिर की सामग्री का उपयोग किया गया था।

काम्यकेश्वर मंदिर को कामां में चौरासी खंबा मस्जिद में बदल दिया गया था।

पार्वंथा मंदिर की सामग्री का उपयोग जालोर में तोपखाना मस्जिद में किया गया था, जिसे 1323 में बनाया गया था।

शेर शाह सूरी के किले शेरगढ़ में हिंदू, बौद्ध और जैन मंदिरों की सामग्री का उपयोग किया गया था।

लोहारपुरा में पीर जहीरुद्दीन की दरगाह मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

1625 में, सलावतन में मस्जिद एक मंदिर स्थल पर बनाई गई थी।

पीर जहीरुद्दीन की मजार और नागौर में बाबा बद्र की दरगाह भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

 

तमिलनाडु

तमिलनाडु के 175 स्थलों पर मंदिरों को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था।

आचरवा में शाह अहमद की मजार भी एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

कोवलम में मलिक बिन दिनार की दरगाह एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी।

पंचा पद्यमलाई की पहाड़ी का नाम बदलकर मौला पहाड़ कर दिया गया था।

एक प्राचीन गुफा मंदिर के सेट्रल हॉल को मस्जिद में बदल दिया गया था।

कोयंबटूर में, टीपू सुल्तान ने अन्नामलाई किले की मरम्मत के लिए मंदिर की सामग्री का इस्तेमाल किया।

टीपू सुल्तान की मस्जिद भी एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी। तिरुचिरापल्ली में नाथर शाह वाली की दरगाह एक शिव मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी।

मंदिर के लिंगम का उपयोग लैंप के रूप में किया गया था।

 

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश पर में भी 299 स्थलों को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया था।   आगरा की कलां मस्जिद का निर्माण मंदिर की सामग्री से किया गया था।

अकबर के किले में नदी के किनारे का हिस्सा जैन मंदिर के स्थान पर बनाया गया था।

अकबर का मकबरा भी एक मंदिर के ऊपर खड़ा है।

इलाहाबाद में अकबर का किला मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

मियां मकबुल और हुसैन खान शाहिद की मजार भी मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

पत्थर महल में मस्जिद का निर्माण लक्ष्मी नारायण मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था।

अयोध्या में राम जन्मभूमि के स्थल पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था।

हालाँकि उस विवादित ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया है और उस स्थान अब भव्य राम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।

स्वर्गद्वार मंदिर और त्रेता का ठाकुर मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था और उन जगहों पर औरंगजेब द्वारा मस्जिदों का निर्माण किया गया था।

शाह जुरान गौरी की मजार एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

सर पैगंबर और अयूब पैगंबर की मजार एक बौद्ध मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी, जहाँ बुद्ध के पदचिन्ह थे।

गोरखपुर में इमामबाड़ा एक मंदिर के स्थान पर बनाया गया था। इसी तरह, पावा में कर्बला एक बौद्ध स्तूप के स्थान पर बनाया गया था।

टिलेवाली मस्जिद लखनऊ में एक मंदिर के स्थान पर बनाई गई है।

मेरठ में जामा मस्जिद एक बौद्ध विहार के खंडहर पर स्थित है।

एक दरगाह नौचंड़ी देवी के मंदिर को तोड़कर बनाई गई है।

वाराणसी में, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को विश्वेश्वर मंदिर सामग्री का उपयोग करके बनाया गया है।

हाल ही में अदालत ने विवादित ढाँचे के सर्वेक्षण का आदेश दिया था। स

र्वेक्षण करने वाली टीम को वहां एक शिवलिंग भी मिला है।

इसके बाद अदालत ने उस जगह को सील कर दिया है।