01 April 2025

वक्फ बिल पर आर-पार! 2 अप्रैल को पेश हो सकता है वक्फ बिल, सरकार ने कसी कमर, विपक्ष में उबाल! वक्फ बिल को बिशप्स काउंसिल का समर्थन

 

वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सड़क से संसद तक संग्राम मचा हुआ है। संसद की जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी- JPC ने पहले ही अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप चुकी है। JPC में सभी प्रमुख दलों के सांसद सदस्य बनाए गए थे। जेपीसी ने एक दिन पहले ही ड्रॉफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी दी थी। 16 सदस्यों ने इसके पक्ष में वोट डाला। वहीं 11 सदस्यों ने विरोध किया था। कमेटी में शामिल विपक्षी सांसदों ने इस बिल पर आपत्ति जताई थी। अब कांग्रेस इसे संविधान के खिलाफ बता रही है। संसद के बजट सत्र समाप्त होने में 4 दिन और रह गए है। संभावना जताई जा रही है कि सरकार मंगलवार को इसे लोकसभा में पेश कर सकती है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने वक्फ संशोधन विधेयक की कड़ी आलोचना करते हुए इसे भारतीय संविधान और उसके आधारभूत सिद्धांतों पर सीधा हमला बता रहे हैं। जयराम रमेश का कहना है कि ये संविधान पर सीधा हमला है और इसकी बुनियाद के खिलाफ है... हर विपक्षी दल इसका विरोध कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि 'धर्मनिरपेक्ष' दलों खासकर जेडी(यू) और टीडीपी का क्या कहना है?... पहली बार समिति में खंड-दर-खंड चर्चा हुई... अगर वे इसे लागू करते हैं, तो हम लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेंगे।"


विपक्षी दलों की ओर से आए कुछ सुझावों को शामिल करने के बाद संयुक्त संसदीय समिति ने वक्फ विधेयक में संशोधन को लेकर जो सुझाव दिए हैं, उसे सरकार ने मान लिया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा- हम संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। बिल पर संसद के बाहर खूब विचार-विमर्श हुए हैं। हमें सदन में बहस और चर्चा में भी जरूर भाग लेना चाहिए। बिल पर बनी जेपीसी ने लोकतांत्रिक भारत के इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा परामर्श प्रक्रिया का रिकॉर्ड बनाया है। सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध है कि लोगों को गुमराह न करें। भोले-भाले मुसलमानों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि सरकार मुसलमानों की संपत्ति और अधिकार छीनने जा रही है।


केरल भाजपा प्रमुख चंद्रशेखर ने सांसदों से वक्फ बिल पर स्टैंड लेने को कहा केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल सहित कई ईसाई संगठन केंद्र द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि मुनंबम उपनगर में गरीब परिवारों ने दावा किया है कि वे वक्फ बोर्ड द्वारा उनकी जमीन जब्त किए जाने के खतरे में जी रहे हैं। उन्होंने राज्य के सांसदों से "तुष्टिकरण की राजनीति" में शामिल होने के बजाय लोगों की सहायता करने का आग्रह किया।

 

इस बिल को लेकर मुसलमानों का अलग-अलग राय है। वक्फ बोर्ड बिल पर ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन और अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख के उत्तराधिकारी सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा हा कि "हम सौभाग्यशाली हैं कि हम ऐसे देश में रह रहे हैं, जिसकी गंगा-जमुनी संस्कृति है।, नवरात्रि चल रही है और आज ईद-उल-फितर है। मुझे पूरा भरोसा है कि आज पूरे भारत में आप लोगों को इन त्योहारों पर एक-दूसरे को बधाई देते हुए देखेंगे। मिलजुलकर रहना देश की संस्कृति है और यही हमारी ताकत है...पीएम मोदी ने सुनिश्चित किया है कि 'सौगात-ए-मोदी' देश के 22 लाख लोगों तक पहुंचे...मेरा मानना ​​है कि वक्फ बिल में संशोधन की जरूरत है। मुझे पूरा भरोसा है कि यह बिल पारदर्शिता लाएगा।

 

जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष दरख्शां अंद्राबी ने कहा कि जनता की उम्मीदों को पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। "जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड क्षेत्र की अधिकांश मस्जिदों और दरगाहों की देखरेख करता है, स्वच्छता और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करता है... जनता की उम्मीदों को पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।


वक्फ संशोधन विधेयक पर एआईएमपीएलबी प्रमुख खालिद सैफुल्लाह रहमानी इस बिल के विरोध में हैं। इनका कहना है कि इस विधेयक को स्वीकार नहीं कर सकते"।

 

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी शुरू से ही इसके विरोध में हैं। ओवैसी का कहना है कि इससे मुस्लिम वक्फ बोर्ड को नुकसान होगा। संसद में असंवैधानिक कानून क्यों बनाया जा रहा है... अगर यह कानून बन जाता है, सरकार वक्फ संपत्तियों को छीनने लेगेगी।

 

संसद सत्र 4 अप्रैल तक चलेगा। अब देखना होगी कि सरकार वक्फ संशोधन बिल को संसद में पेश करती है या फिर सहयोगी दलों के दबाव में इसे कुछ दिनों के लिए टाल देगी।

28 March 2025

लेखक के बारे में जानिए: जितेंद्र प्रताप सिंह, भारतीय पत्रकारिता के प्रखर स्वर और राष्ट्रवाद के सशक्त प्रहरी, पत्रकारिता में दृढ़ता, निष्पक्षता और विशिष्ट दृष्टिकोण

भारत में पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। यह न केवल समाज को जागरूक करने का माध्यम है, बल्कि सत्ता के समक्ष जन सरोकारों की आवाज़ बुलंद करने का भी प्रमुख जरिया है। ऐसे में जितेंद्र प्रताप सिंह का नाम एक ऐसे पत्रकार के रूप में उभरकर आता है, जिन्होंने अपनी निष्पक्षता, निर्भीकता और राष्ट्रवादी विचारधारा से भारतीय मीडिया को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है।

 

शैक्षिक पृष्ठभूमि और पत्रकारिता में प्रवेश

 

शिक्षा किसी भी व्यक्ति के विचारों और कार्यशैली को परिष्कृत करने का कार्य करती है। जितेंद्र प्रताप सिंह ने पश्चिम बंगाल तकनीकी विश्वविद्यालय से "मीडिया साइंस" में स्नातक किया और इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से "पत्रकारिता एवं जनसंचार" में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। उनकी शिक्षा का यह सफर उनकी बौद्धिक क्षमता और मीडिया के प्रति उनकी गहरी समझ को दर्शाता है। पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने से पहले उन्होंने संचार एवं जनसंपर्क के विभिन्न आयामों को समझा और गहराई से अध्ययन किया, जिससे उनकी लेखनी और पत्रकारिता का स्तर अत्यंत प्रभावी बन गया।

 

मीडिया में उल्लेखनीय योगदान

 

पत्रकारिता के क्षेत्र में जितेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। वर्तमान में वे एक राष्ट्रीय समाचार चैनल में "वरिष्ठ संवाददाता, कार्यकारी संपादक, वरिष्ठ निर्माता एवं कार्यक्रम प्रमुख" के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह उनकी वर्षों की मेहनत, गहन अध्ययन और सामाजिक मुद्दों की गहरी समझ का ही परिणाम है कि वे आज देश के अग्रणी पत्रकारों में गिने जाते हैं।

 

समाचार प्रस्तुति में उनकी निष्पक्षता और स्पष्टवादिता उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वे उन मुद्दों को उठाने से भी नहीं हिचकिचाते, जो जनसामान्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, भले ही वे सत्ता या किसी प्रभावशाली वर्ग के खिलाफ क्यों न हों। उनकी रिपोर्टिंग और कार्यक्रमों में राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक मूल्यों और समाज के हितों की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

 

पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान और पुरस्कार

 

उनकी निडर पत्रकारिता और लेखन के प्रति समर्पण को विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों ने भी सराहा है। उन्हें "वर्ष का सर्वश्रेष्ठ आभांजलि सम्मान" से नवाज़ा गया, जो पत्रकारिता में उनके विशिष्ट योगदान को मान्यता देता है। इसके अतिरिक्त, "लेखिका संघ दिल्ली" ने भी उन्हें लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया है।

 

जितेंद्र प्रताप सिंह ने वाद-विवाद प्रतियोगिताओं और जनसंपर्क के क्षेत्र में भी कई पुरस्कार जीते हैं, जो उनकी बौद्धिक क्षमता और संचार-कौशल को दर्शाते हैं। उनकी वाणी में ओजस्विता है और उनकी लेखनी में प्रखरता। उनकी विश्लेषण क्षमता और तर्कपूर्ण विचारधारा ने उन्हें एक कुशल वक्ता और प्रभावशाली लेखक के रूप में स्थापित किया है।

 

राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण

 

आज जब पत्रकारिता में कहीं-कहीं पक्षपात और सनसनीखेज़ पत्रकारिता हावी हो रही है, तब जितेंद्र प्रताप सिंह जैसे पत्रकार एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। उनके व्यक्तित्व में भारतीयता की गहरी जड़ें और राष्ट्रहित की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। वे न केवल पत्रकारिता के माध्यम से बल्कि लेखन और संवाद के ज़रिए भी भारतीय मूल्यों, परंपराओं और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रहे हैं।

 

उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा बचपन से ही स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। वे हमेशा से अपने देश, उसकी संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़े रहे हैं। यही कारण है कि उनकी पत्रकारिता में भी यह भावना प्रकट होती है। वे भारतीय मीडिया के माध्यम से राष्ट्रवादी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल समाचार प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना और सच्चाई को सामने लाना भी है।

 

सच के आईने में समाज को दिखाने की कोशिश

 

जितेंद्र प्रताप सिंह पत्रकारिता को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी मानते हैं। वे अपने विचारों को "आईना" बनाकर समाज को वास्तविकता दिखाने की कोशिश करते हैं। वे उन मुद्दों पर भी बेबाकी से बात करते हैं, जिन्हें प्रायः मुख्यधारा का मीडिया अनदेखा कर देता है। उनकी निष्पक्षता और स्पष्टवादिता उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है।

 

पत्रकारिता में दृढ़ता, निष्पक्षता और विशिष्ट दृष्टिकोण

 

जितेंद्र प्रताप सिंह भारतीय पत्रकारिता के उन नायकों में से एक हैं, जो अपने कार्य और विचारधारा के माध्यम से समाज में बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। वे उन गिने-चुने पत्रकारों में शामिल हैं, जिन्होंने "सच को सच" और "झूठ को झूठ" कहने का साहस दिखाया है। उनकी पत्रकारिता केवल सूचनाएं देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में कार्य कर रही है।

 

उनका योगदान भारतीय मीडिया और राष्ट्रवादी पत्रकारिता के लिए एक प्रेरणा है। उनके विचार, उनके शब्द और उनकी कर्मठता भारतीय समाज को आगे बढ़ाने और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

26 March 2025

कॉमेडी पर कोहराम ! कामरा के जोक्स पर सियासी संग्राम ! हैबिटेट स्टूडियो पर चला BMC का हथौड़ा, कुणाल कामरा विवाद में कूदीं कंगना

 

महाराष्ट्र के डिप्टी CM एकनाथ शिंदे के खिलाफ पैरोडी सॉन्ग के जरिए विवादों में घिरे कॉमेडियन कुणाल कामरा को मुंबई पुलिस ने समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया। हालांकि, मुंबई में नहीं होने की वजह से कुणाल पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे। मुंबई पुलिस ने नोटिस की एक फिजिकल कॉपी कामरा के घर पर भी भेजी है। कामरा को इस नोटिस के बारे में वॉट्सऐप से भी सूचित किया गया है। पुलिस मुंबई स्थित उनके घर भी पहुंची, जहां उनके माता-पिता रहते हैं। वहीं विवाद के बीच डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने कहा-

 

                            कामरा की कॉमेडी पर शिंदे का बयान

 

किसी पर हास्य व्यंग्य करना, कटाक्ष करना गलत नहीं है, लेकिन इसकी भी एक मर्यादा होती है। कुणाल कामरा ने जो किया, ऐसा लगता है कि उन्होंने सुपारी लेकर ऐसा किया है। कटाक्ष करते समय एक शिष्टाचार बनाए रखा जाना चाहिए, वर्ना एक्शन का रिएक्शन भी होता है।

 

स्टैंड-अप कॉमेडियन कामरा ने अपने शो में शिंदे के राजनीतिक करियर पर कटाक्ष किया था। कामरा ने फिल्म 'दिल तो पागल है' के एक गाने की पैरोडी की थी, जिसमें शिंदे को गद्दार कहा गया। गाने के जरिए शिवसेना और NCP में विभाजन को लेकर भी मजाकिया लहजे में कमेंट किया था। कामरा का वीडियो सामने आने के बाद 22 मार्च की रात शिवसेना शिंदे गुट के समर्थकों ने मुंबई के खार इलाके में हैबिटेट कॉमेडी क्लब में जमकर तोड़फोड़ की। शिंदे ने कहा, 'इसी व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री, अर्नब गोस्वामी और कुछ उद्योगपतियों पर टिप्पणी की थी। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। यह किसी के लिए सुपारी लेकर काम करना है। इस बीच तोड़फोड़ की घटना को लेकर कुणाल कामरा ने कहा-

 

विवादित कॉमेडी पर कामरा का बयान

 

"मैं माफ़ी नहीं मागूंगा। मैंने ठीक वही कहा जो अजित पवार (प्रथम उप मुख्यमंत्री) ने एकनाथ शिंदे (दूसरे उप मुख्यमंत्री) के बारे में कहा था। मैं इस भीड़ से नहीं डरता और मैं बिस्तर के नीचे छिपकर मामला शांत होने का इंतज़ार नहीं करूंगा। एंटरटेनमेंट वेन्यू महज एक प्लेटफ़ॉर्म है। यह हर किस्म के शो का मंच है। हैबिटेट मेरी कॉमेडी के लिए ज़िम्मेदार नहीं है, और जो भी मैं कहता या करता हूं, उस पर उसका कोई अधिकार या नियंत्रण नहीं है। ना ही किसी और पार्टी का कोई अधिकार है। एक कॉमेडियन के कहे शब्दों के लिए किसी जगह को नुकसान पहुंचाना, वैसी ही नासमझी है जैसे अगर आपको चिकन नहीं परोसा जाता तो आप टमाटर के ट्रक को पलट दें। जहां तक मुझे पता है, हमारे नेताओं और राजनीति तंत्र के तमाशे का मज़ाक उड़ाना क़ानून के ख़िलाफ़ नहीं है। मेरे ख़िलाफ़ किसी भी क़ानूनी कार्यवाही के लिए मैं पुलिस और कोर्ट का सहयोग करने को तैयार हूं। जो लोग मेरा नंबर लीक करने या लगातार मुझे कॉल करने में व्यस्त हैं, उनके लिएः मुझे यक़ीन है कि आपको अबतक पता चल गया होगा कि अनजान कॉल्स मेरे वाइसमेल में जा रहे हैं, जहां आपको वो गाना सुनाई देगा, जिससे आपको नफ़रत है।"

 

कुणाल कामरा को लेकर फिल्म जगत के कुछ सितारे सपोर्ट में तो कुछ विरोध में नजर आ रहे हैं। एक्ट्रेस और मंडी लोकसभा सीट से सांसद कंगना रनौत ने कि भी प्रतिक्रिया सामने आई है। कंगना ने कहा-

 

कामरा की कॉमेडी पर कंगना का बयान

 

कॉमेडी के नाम पर किसी की इज्जत उछालना गलत है। ये वही लोग हैं, जो जिंदगी में कुछ नहीं कर पाए। आप कोई भी हो और किसी के काम से यदि असहमत हैं तो इस तरह से नहीं बोल सकते। जब बीएमसी ने मेरे ऑफिस को तोड़ा था तब भी कामरा ने मजाक उड़ाया था। मेरे साथ जो हुआ वह गैरकानूनी था और इनके साथ जो हुआ वह लीगल है। आप कॉमेडी के नाम पर उनकी इज्जत उछाल रहे हैं। उनकी बुराई कर रहे हैं और उनके काम को नजरअंदाज कर रहे हैं। एकनाथ शिंदे जी किसी जमाने में रिक्शा चलाते थे। आज वो अपने दम पर हैं? और कॉमेडी के नाम पर ऐसा करने वालों के पास क्या है? उन्होंने खुद की जिंदगी में क्या किया है, ये लोग जो जिंदगी में कुछ कर नहीं पाए। मैं कहती हूं कि अगर वो कुछ लिख सकें तो साहित्य में क्यों नहीं लिखते? कॉमेडी के नाम पर गाली या अभद्रता करते हैं। कॉमेडी के नाम पर गाली-गलौज करना, हमारे ग्रंथों का मजाक उड़ाना, लोगों का मजाक उड़ाना, माताओं-बहनों का मजाक उड़ाना गलत है। आजकल सोशल मीडिया पर किस तरह के लोग आ गए हैं, जो खुद को इनफ्लूएंसर्स कह रहे हैं। हमारा समाज कहां जा रहा है। दो मिनट की फेम के लिए ये क्या कर रहे हैं हमें इस बारे में सोचना चाहिए

 

कुणाल कामरा पर कार्रवाई को लेकर चौतरफा मांग उठ रही है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कामरा की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि, कुणाल कामरा ने कानून के खिलाफ बात की है। उन्होंने एक नेता का अपमान करने की कोशिश की है। उन्हें किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। उन्हें माफी मांगनी चाहिए। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

 

इस मामले में अब महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायक विजय वडेट्टीवार ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने शिवसेना (शिंदे गुट) की युवा शाखा द्वारा की गई तोड़फोड़ की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की सरकार ज्यादा दिन नहीं टिक सकती। अगर कुछ गलत है, तो उन्हें अदालत जाना चाहिए। तोड़फोड़ करना और किसी की आवाज दबाना गलत है। सरकार को आलोचना सहने की क्षमता होनी चाहिए। अगर किसी ने केवल हंसी-मजाक के लिए कॉमेडी की है, तो सरकार को इसे हंसी में उड़ा देना चाहिए।

 

सत्ता पक्ष कामरा पर कार्रवाई की मांग कर रहा है तो वहीं विपक्ष खुलकर समर्थन कर रहा है। शिवसेना- UBT की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा को लेकर जारी विवाद पर सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह घटना इस बात का सबूत है कि सरकारें किसी भी तरह की आलोचना को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हैं। यह विवाद इस बात का प्रमाण है कि सरकारें किसी भी प्रकार की आलोचना के प्रति कितनी असहिष्णु हैं। हमने केंद्र में ऐसा होते देखा था, और अब वही मॉडल राज्यों में लागू किया जा रहा है। प्रियंका चतुर्वेदी के इस बयान से साफ है कि विपक्ष सरकार की नीतियों और आलोचना सहने की क्षमता पर सवाल उठा रहा है। यह विवाद न सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, बल्कि सरकारी तंत्र के दुरुपयोग को लेकर भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

 

शिवसेना- यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे का कहना है कि किसी को देशद्रोही कहना किसी पर हमला नहीं है। इसके बाद उन्होंने कहा कि 'गद्दार सेना' द्वारा किए गए हमले से शिवसेना का कोई लेना-देना नहीं है। जिनके खून में 'गद्दारी' है, वे कभी शिवसैनिक नहीं हो सकते। "मुझे नहीं लगता कि कुणाल कामरा ने कुछ गलत कहा है। 'गद्दार' को 'गद्दार' कहना किसी पर हमला नहीं है।

 

एकनाथ शिंदे पर की गई टिप्पणी और शिवसेना (शिंदे गुट) कार्यकर्ताओं द्वारा की गई बर्बरता पर भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि कुणाल कामरा देश के शीर्ष नेताओं और पत्रकारों के लिए बार-बार अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं, ताकि वे अपनी लोकप्रियता बढ़ा सकें।

 

एकनाथ शिंदे की टिप्पणी के बाद से ही कुणाल कामरा बयानों को लेकर सवालों के खेरे में हैं। कामरा का इतिहास उठाकर देखा जाए तो सामने आता है कि यह पहली बार नहीं है, जब उनका विवादों से पाला पड़ा हो। खासकर विवादित टिप्पणी के मामले में। कामरा सुप्रीम कोर्ट, पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़,  अर्णब गोस्वामी,  ओला के सीईओ सहीत देवी-देवताओं के अपमान को लेकर कानूनी नोटिस का सामना कर चुके हैं। ऐसे में अब देखना होगा कि इस बार कामरा पर क्या कुछ कार्रवाई होती है।

24 March 2025

योगी सरकार के 8 साल बेमिसाल ! निवेश और रोजगार में अभूतपूर्व वृद्धि, औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई, योगी सरकार की पुलिसिंग बनी मॉडल, अपराधियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई, योगी सरकार ने बदली प्रदेश की तस्वीर

 

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने अपने बेमिसाल 8 साल पूरे किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन आठ सालों में उत्तर प्रदेश का कायाकल्प कर दिया है। जिस यूपी को गुंडों का प्रदेश कहा जाता था, आज योगी की राज में वहां अपराधियों और गुंडों पर पुलिस की लाठी और बाबा का बुलडोजर चलाया जा रहा है। योगी सरकार की पुलिस ने एनकाउंटर में 222 दुर्दांत अपराधियों को ढेर किए और 8,118 घायल हुए। उत्तर प्रदेश में बीते आठ सालों में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है। बीजेपी का दावा है कि जो राज्य 2017 तक बीमारूमाना जाता था, वह अब देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है। सरकार ने औद्योगिक निवेश, रोजगार और कारोबारी सुगमता को प्राथमिकता दी, जिसका असर यह हुआ कि यूपी अब उद्यम प्रदेशबन चुका है।

 

 

योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में अब तक 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतार दिया गया है। इससे अब तक 60 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिल चुका है। सरकार की नीतियों का ही नतीजा है कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था दोगुनी हो चुकी है और प्रदेश जल्द ही 30 लाख करोड़ रुपये के जीडीपी आंकड़े को पार कर लेगा। प्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए योगी सरकार ने 33 सेक्टोरल पॉलिसी बनाई। ईज ऑफ डूइंग बिजनेसको प्राथमिकता दी गई और निवेश मित्रपोर्टल शुरू किया गया, जिससे अब 43 विभागों की 487 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता रैंकिंग में यूपी 2017 में 14वें स्थान पर था, जो 2022 में दूसरे स्थान पर पहुंच गया।

 

उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए 2018 में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) का आयोजन किया। फरवरी 2023 में आयोजित यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 ने निवेश का नया अध्याय लिखा। निवेश को धरातल पर उतारने के लिए ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC) भी आयोजित की गई, जिसके तहत करोड़ों रुपये की परियोजनाएं लागू की गईं। प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर में 90 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) योजना का बड़ा योगदान रहा।

उत्तर प्रदेश बना निवेश हब

 

डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल और फार्मा सेक्टर में 63,475 करोड़ रुपये के निवेश से स्वास्थ्य सेवाओं और विनिर्माण में तेजी आई है

एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डों और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार से यूपी निवेशकों के लिए पसंदीदा स्थान बन गया है

यूपी सरकार स्टार्टअप, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, एआई, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन को बढ़ावा दे रही है

लखनऊ-हरदोई में टेक्सटाइल पार्क, गोरखपुर में प्लास्टिक पार्क, कानपुर में मेगा लेदर क्लस्टर का निर्माण

इन्वेस्ट यूपी के जरिए निवेश को ट्रैक किया जा रहा है और लैंड पूलिंग व अलॉटमेंट जैसी योजनाओं से निवेशकों की दिक्कतें कम हो रही हैं

 

औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई

 

06 औद्योगिक गलियारे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और 06 गलियारे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर विकसित हो रहे हैं

47 साल बाद यूपी को बीडा के रूप में नया औद्योगिक शहर मिल रहा है

बुंदेलखंड में ड्रग व फार्मा पार्क की स्थापना को तेज किया गया है

मुख्यमंत्री सूक्ष्म उद्यमी दुर्घटना बीमा योजना में पंजीकृत उद्यमियों के लिए 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर दिया जा रहा है

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत अब तक 16 हजार मामलों में ऋण स्वीकृत हुए हैं और 6 हजार मामलों में ऋण वितरित किया गया है

अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन की शुरुआत भी की गई है

 

योगी सरकार की इन योजनाओं और सुधारों से यूपी की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, युवाओं को रोजगार मिला है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था लगातार ऊंचाइयों को छू रही है। उत्तर प्रदेश अब एक ब्रेकथ्रूप्रदेश के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। जिस यूपी के लोगों को कभी प्रदेश में कानून का राज स्थापित होने की बात असंभव लगती थी, उसी प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले आठ वर्षों में अपनी जीरो टॉलरेंस नीति से असंभव को संभव करके दिखाया है, जिसका डंका आज पूरी दुनिया में बज रहा है। आज हर प्रदेशवासी, बेटी, व्यापारी खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं क्योंकि उन्हे पता है कि अगर उनके साथ किसी ने बदसलूकी की तो प्रदेश के मुखिया उसे छोड़ेंगे नहीं।

 

योगी सरकार ने बदली यूपी की तस्वीर

 

एसटीएफ ने 2017 से अब तक 653 जघन्य अपराध घटित होने से पहले ही रोक दिए

एटीएस ने 2017 से अब तक 130 आतंकवादियों और 171 रोहिंग्या/बांग्लादेशी अपराधियों और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया

पिछले आठ वर्षों में एटीएस ने 222 दुर्दांत अपराधियों को मुठभेड़ में मार गिराया

8,118 अपराधी घायल हुए हैं। इसमें 20,221 इनामी अपराधी भी शामिल हैं

अब तक 79,984 अपराधियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई

930 अपराधियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत सख्त कदम उठाए गए हैं

योगी सरकार ने अवैध रूप से अर्जित बेनामी संपत्तियों को चिन्हित कर माफिया अपराधियों से मुक्त कराया

142 अरब 46 करोड़ 18 लाख से अधिक की संपत्तियों को जब्त व ध्वस्त किया

 

योगी सरकार द्वारा अपराधियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई के तहत जुलाई 2023 से दिसंबर 2024 तक ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 51 अभियुक्तों को मृत्युदंड, 6,287 अपराधियों को आजीवन कारावास, 1,091 अपराधियों को 20 वर्ष से अधिक की सजा, 3,868 अपराधियों को 10 से 19 वर्ष तक की सजा और 5,788 अभियुक्तों को 5 वर्ष से कम की सजा दिलाई गई। योगी सरकार ने चार स्तरीय एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का गठन कर 66,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया।

 

योगी सरकार की पुलिसिंग न केवल उत्तर प्रदेश में बल्कि पूरे देश में एक मॉडल के रूप में उभर रही है। पिछले आठ वर्षों में प्रदेश की कानून व्यवस्था में हुए ऐतिहासिक सुधारों के कारण प्रदेश में अपराध दर में भारी गिरावट आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश सरकार ने न केवल संगठित अपराधियों और माफियाओं पर शिकंजा कसा है, बल्कि आम नागरिकों के मन में सुरक्षा का भाव भी मजबूत किया है।

22 March 2025

हम बिहार हैं: बिहार स्थापना दिवस पर आप सभी बिहार वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।

 

ज्ञान, अध्यात्म, संस्कृति, सभ्यता, संस्कार और समृद्ध परंपराओं की भूमि बिहार के स्थापना दिवस पर आप सभी बिहार वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।

 


भारत के इतिहास के सबसे स्वर्णिम पन्नों में लिपटा है अपना बिहार। रामायण काल में इसी धरती पर जन्मी थीं देवी सीता।

 

महाभारत युग में यहीं राजा जरासंध ने राज किया था। इसी धरती ने दुनिया को पहला सम्राट दिया। लिच्छवी राजवंश ने दुनिया को पहला लोकतांत्रिक गणराज्य दिया।

 

ये भूमि है महावीर की, भगवान बुद्ध की, चाणक्य की, आर्यभट्ट की, कालीदास की। चंद्रगुप्त और अशोक जैसे महान सम्राटों की। ये भूमि है आंदोलन की। ये भूमि है बिहार की।

 

नालंदा और विक्रमशिला के ज्ञान की भूमि एवं विद्यापति, दिनकर और नागार्जुन जैसे साहित्य सारथियों की भूमि बिहार के स्थापना दिवस पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई।

21 March 2025

राज्यसभा में गरजे अमित शाह, आतंकवाद पर बोला करारा हमला, ‘एक साल में 380 नक्सली ढेर 1,045 ने किया आत्मसमर्पण’ शाह ने छाती ठोककर दिया जवाब! संसद में सांसदों ने थपथपाई मेजें

 

बजट सत्र के आठवें दिन आज अमित शाह ने गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर जवाब दिया। शाह ने कहा कि पिछले 10 साल में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में बहुत कुछ बदला है। आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद हमें पिछली सरकार ने विरासत में दिया था। 2014 में हमारी सरकार बनी तो हमने इन तीनों मोर्चों पर मुकाबला किया। आज आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद पर हमने काफी कंट्रोल किया है। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने की बात हो या फिर नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों की कार्रवाई। हमने हर जगह मजबूती से मुकाबला किया।

 

जम्मू-कश्मीर में विपक्ष के 33 साल के शासनकाल और वर्तमान की स्थिति में हुए बदलाव से तुलना करते हुए गृहमंत्री शाह ने कहा कि वहां सिनेमाहॉल ही नहीं खुलते थे। जी-20 के बैठक में दुनियाभर के राजनयिक वहां गए। लाल चौक पर तिरंगा फहराने के लिए हम सब भी गए थे। पठानकोट के नाका परमिट को हमने खत्म किया।' पीएम मोदी के आने के बाद पुलवामा में हमला हुआ। इसके बाद भारत ने क्या किया। बालाकोट में घुसकर हमला किया। आतंकवाद, नक्सलवाद देश के लिए नासूर बन गया था। उरी-पुलवामा अटैक के बाद एयरस्ट्राइक कर भारत को इजरायल-अमेरिका वाली लिस्ट में ला दिया। हमने इन देशों की तरह कार्रवाई की।

 

कन्याकुमारी से कश्मीर तक मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में निकाली गई यात्रा का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि, तिरंगा फहराने के लिए हमें लाल चौक जाने की परमिशन नहीं मिल रही थी। हमने जिद की तो सेना की सुरक्षा में जाना पड़ा और आनन-फानन में तिरंगा फहराकर आना पड़ा। उसी लाल चौक पर कोई घर ऐसा नहीं था जिस पर हर घर तिरंगा अभियान में तिरंगा न हो।

आतंक पर कड़े प्रहार का जिक्र करते हुए गृहमंत्री ने बताया कि हमने कई ऐसे कदम उठाए जिसकी वजह से आतंकियों से भारतीय बच्चों के जुड़ने की संख्या करीब-करीब शून्य हो गई है। आतंकी जब मारे जाते थे, बड़ा जुलूस निकलता था। आज भी आतंकी मारे जाते हैं और जहां मारे जाते हैं, वहीं दफना दिए जाते हैं। अब कोई जुलूस नहीं निकलता है।

 

आतंकियों के परिजनों पर कार्रवाई के बारे आमित शाह ने सदन में बताया कि घर का कोई आतंकी बन जाता था और परिवार के लोग आराम से सरकारी नौकरी करते थे। हमने उनको निकालने का काम किया। आतंकियों के परिवार के लोग बार काउंसिल में बैठे थे और प्रदर्शन होने लगता था। आज वो श्रीनगर या दिल्ली की जेल में हैं।

 

संसद में बजट सत्र के दूसरे भाग में लोकसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट को पास किया जाना है। इस प्रक्रिया के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर दिया है और लोकसभा में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने को कहा है। भाजपा ने सांसदों को जारी किए गए व्हिप में कहा है कि बजट 2025-26 की विभिन्न मांगों को पारित करने के लिए गिलोटिन किया जाएगा। इसलिए लोकसभा में भाजपा के सभी सांसदों से अनुरोध है कि वे पूरे दिन सदन में मौजूद रहें और सरकार के रुख का समर्थन करें। गिलोटिन को संसद में एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जाता है। 


गिलोटिन का इस्तेमाल किसी विधेयक को चर्चा की अनुमति दिए बिना पारित करवाने में तेजी लाने के लिए किया जाता है। अगर सरकार किसी विधेयक को जल्द से जल्द पारित कराना चाहती है और विपक्ष इसमें देरी कर रहा है तो संसद में गिलोटिन प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है।

हरियाणा बजट सत्र का नौवां दिन, सदन में सुर बदलते हैं…चाय पर करते हैं तारीफ ! हुड्डा के मुहावरे पर सदन में हंगामा भुक्कल के सवाल, 3 मंत्रियों ने दिए जवाब

 

हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के 9वें दिन की कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायक बजट की तारीफ करते दिखे तो वहीं कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर किसानों और आम लोगों का ध्यान ना रखने का आरोप लगाया। सत्र के दौरान स्पीकर हरविंद्र ने पुंडरी से भाजपा विधायक सतपाल जांबा को भाषण खत्म होने के बाद टोक दिया। स्पीकर ने कहा कि पूरा भाषण पढ़कर नहीं सुनाना चाहिए। इससे पहले प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने सड़कों पर सवाल उठाया। भुक्कल ने कहा कि झज्जर से बहादुरगढ़ तक की रोड बहुत खराब है। इस पर जवाब देने के लिए पहले PWD मंत्री रणबीर गंगवा, फिर जेल मंत्री अरविंद शर्मा और अंत में उद्योग मंत्री राव नरबीर खड़े हुए। मंत्री गंगवा ने कहा कि आपको पता नहीं कि वहां काम शुरू हो चुका है। आप कहो तो फोटो भी दिखा दूंगा।

 

इसके बाद CM नायब सिंह सैनी ने बताया कि 25 विधायकों की 1-1 करोड़ रुपए की राशि जारी कर दी है। इस पर कांग्रेस गीता भुक्कल ने कई सवाल उठाते हुए कहा कि ये पैसा एजेंसी के पास आता है, विधायकों का इससे कोई लेना देना नहीं है। सदन में विधायक सत्यप्रकाश ने आदमपुर में सीवर लाइन बिछाने के काम पर सवाल किया है। मंत्री रणबीर गंगवा ने बताया कि काम 70% पूरा हो गया है। इस पर विधायक सत्यप्रकाश ने कहा कि ये तथ्य गलत हैं। अभी सिर्फ 30 से 40% ही हुआ है।

 

इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला ने बजट पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार ने इंडस्ट्रियल सेक्टर बढ़ाने पर कोई काम नहीं किया है। इसका एक उदाहरण देते हुए चौटाला ने कहा "चीन ने अपने सर्विस सेक्टर का बजट घटाकर इंडस्ट्रियल सेक्टर बढ़ाने का काम किया है। ये बड़ी गंभीर चीज है। फिर मैंने बजट में आगे पढ़ा, लेकिन इसमें प्राइवेट सेक्टर को लाने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया। पब्लिक सेक्टर के अंदर प्राइवेट लोग आना ही नहीं चाह रहे हैं। आज हमारे देश का सबसे बड़ा धन हमारा युवा है, लेकिन युवा देश छोड़कर विदेश जा रहा है। वहां उन्हें पढ़ने और प्रयोग के मौके मिलते हैं। बजट में ऐसे कई सेक्टर हैं, जिन पर सरकार ने कोई भी ध्यान नहीं दिया है।

 

संसदीय कार्यमंत्री महिपाल ढांडा ने सदन में दो नई समितियां बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। पर्यावरण प्रदूषण पर विशेष समिति होगी, इसमें नौ से अधिक सदस्य नहीं होंगे। समिति के सदस्यों की कार्य अवधि एक साल होगी। ये समिति प्रदेश के पर्यावरण के प्रभावों पर अध्ययन करेगी। इसके साथ ही अपनी अध्ययन रिपोर्ट विधानसभा को पेश करेगी। इसके अलावा युवा कल्याण एवं युवा मामलों के लिए विशेष समिति में भी अध्यक्ष सहित नौ से अधिक सदस्य नहीं होंगे। इस समिति में सदस्यों की कार्यावधि एक वर्ष से अधिक नहीं होगी। सदन में युवाओं को लेकर चर्चा में किसी भी बिंदु की समिति जांच करेगी।

 

लाडो लक्ष्मी योजना पर बोलते हुए पूर्व सीएम हुड्‌डा ने कहा कि बजट में इन्होंने 5000 करोड़ रुपए रखे हैं। प्रदेश में 82 लाख के करीब महिलाएं हैं जिनकी उम्र 18 से 60 साल के बीच हैं, लेकिन इनके बजट के हिसाब से सिर्फ 25% महिलाओं को ही इस योजना का लाभ सरकार देगी, बाकी 75% महिलाओं को सरकार ने योजना से बाहर कर दिया है।

 

कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने बजट पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार अपने बजट को भविष्य का सक्षम बजट बता रही है, लेकिन सच्चाई ये है कि ये भविष्य का अक्षम बजट है। बजट में कुछ भी ऐसा नहीं है, जिसकी तारीफ की जाए। युवाओं के लिए बजट में कुछ भी नहीं दिया गया है। कायदे में ये सरकार युवा विरोधी बजट लेकर आई है। इस बजट में कर्ज ले ले कर सरकार काम कर रही है। इनकी गलत नीतियों के कारण हरियाणा की आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया हो गया है।

 

CM नायब सैनी ने सदन में घोषणा की कि मई महीने में हरियाणा में ग्रुप C-D भर्ती के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) कराया जाएगा। CM ने कांग्रेस पर तंज भी कसा कि हुड्डा ने चुनाव में 2 लाख नौकरियां देने की बात कही। इनके एक उम्मीदवार कहते थे कि हमारे कोटे में 2000 हजार नौकरियां हैं। ये 50 वोट के बदले एक नौकरी बांट रहे थे। यह सुनकर कांग्रेस सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया।