22 June 2020

मेवात के हिन्दू विहीन गांव

पुन्हाना खंड के 16 गांव हिन्दू विहीन

1. मढियाकी

2. टिकरी

3. रानोता

4. गुबराडी

5.  रसूलपुर

6. गोधोली

7. टुंडलाका

8. घीडा

9. बादली

10. अहमदबास

11. जाख

12. धौली

13. लुहिंगा खुर्द

14. डोण्डल

15. बहिरपुर

16. जखोपुर

 

5 से कम हिन्दू घर वाले मेवात के गांव

कुल संख्या 14

1. नवलगढ़

2. सिंगल्हेड़ी

3. रूपहेड़ी

4. सुनहेड़ा

5. ठेक

6. गुहेता

7. बढ़ा

8. जाडोली

9. चन्दनकी

10. पिपरौली

11. एचवाड़ी

12. नीमखेड़ा

13. एचवाड़ी

14. गोकलपुर

 

नगीना खंड के 16 गांव हिन्दू विहीन मेवात के गांव

1. उमरी

2. हुहुका

3. फकरपुर खोरी

4. अकलिंमपुर (जेताका )

5.  नोटकी

6. कुलताज पुर

7. पटाक पुर

8. पिथोरपुरी

9. शिशवाना

10. असाईसीका

11. जलालपुर

12. महू जलालपुर

13. गुमट बिहारी

14. सुखपुरी

15. खान मोहमदपुर

16. बहादरी

 

नगीना खंड के 5 से कम हिन्दू घर वाले मेवात के गांव

1. गंडूरी

2. खुशपूरी

3. बदरपुर

4. नांगल शाहपुर

5. उमरा

6. नोटकी

7. राजाका

8. कुलढेरा

9. शादीपुर

10. सरल

11. अटेरना

12.  अकलिम पुर

13.  मढ़ी

14   जरगाली

15   कंसाली

 

मेवात के पिनगवां खण्ड में 8 गांव हिन्दू विहीन

1.हेवतका

2.कुतुबपुर

3.पुठली

4.घटवासन

5.सिरसबास

6.कसाई डूंगेजा

7.पापड़ी

8.ख़्वाजली खुर्द

9.पटाकपुर

मेवात के पिनगवां खण्ड में हिन्दू विहीन 7 गांव

1.बदरपुर

2.बाजीदपुर

3.मुंढेता

4.बीलाका

5.अकबरपुर

6.नसीरपुरी

7.जैतलका


मेवात में हिन्दू युवक अजय कैसे बना अजहरुद्दीन !

आज हम अपने मेवात की इस सीरीज में धर्मांतरण के उस खेल से पर्दा उठाने जा रहे हैं..जिसे आप अब तक आप सिर्फ फिल्मों में या सोशल मीडिया में देखते या पढ़ते थे. मगर अब हम आपको इस्लामिक धर्मांतरण की उस भयावह चरित्र को आपके सामने रखने जा रहे हैं जिसकी कल्पना मात्र से हीं किसी भी हिन्दू का कलेजा कॉप उठेगा. ये घटना हरियाणा के मेवात स्थित नयी तहशील की है... जहाँ पर हिन्दू युवक अजय अब अजहरुद्दीन बन गया है... ये उसका जबरन कराया हुआ हलफ़नाम है. जिसे आप इस वक्त अपने टेलीविज़न स्क्रीन पर देख रहे हैं.

दरअसल अजय को पीछले कुछ दिनों से लगातार मुस्लिम कट्टरपंथी अपने जेहादी चाल में फ़साने के लिए हथकंडे अपना रहे थे..और अंत में वो अपने इस गंदे जेहादी मंसूबे में कामयाब भी हो गये. इस जेहाद का विरोध करने कोई भी नेता या संस्था सामने नहीं आया. ऐसे में अपने एकलौते पुत्र का धर्मांतरण जब एक माँ से नहीं देखा गया तो खुद इस जेहाद का विरोध करने उन जेहादियों के अड्डे पर पहुंच गईं. मगर उलटे जेहादियों ने उस हिन्दू माँ को भी नहीं बक्शा.

 

दरअसल मेवात इन दिनों इस्लामिक जेहाद की प्रयोगशाल बन चुका है. ऐसे अनेकों प्रयोग आयेदिन वहां के हिन्दुओं के ऊपर हो रहा है. इसीलिए हम आपको बार- बार इस बात को बता रहे हैं की मेवात के हालात कैसे सीरिया और इराक से भी बत्तर बन चुका है.   


मेवाती हिन्दुओं की पलायन के पीछे तब्लीगी जमात

मेवाती हिन्दुओं की पलायन के पीछे तब्लीगी जमात का भी बड़ा हाथ है. जमात का पहला जेहादी प्रयोगशाला मेवात के अन्दर 1927 में शुरू हुआ था. ब्रिटिश शासन में धर्म के आधार पर जब जनगणना शुरू हुआ तो मियो समुदाय के मुसलमानों ने बड़े पैमाने पर हिन्दू धर्म में घर वापसी करने लगे. मियो समुदाय के मुसलमान हिन्दुओं राजपूत राजाओं के वंशज थे..और इनका रहन सहन और रीति रिवाज़ हिन्दुओं का हीं था. मियो समुदाय के मुसलमान विदेशी मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा दबाव बना कर इस्लाम धर्म में जबरन शामिल कराएं गये थे.

मियो मुसलमानों के घर वापसी से बौखलाए मौलाना मोहम्मद इलियास कंधालवी ने 1927 में मेवात के अन्दर जेहादी प्रयोगशाला शुरू किया...जिसे आज आप तब्लीगी जमात के रूप में जानते हैं. मेवात में जमात के पैर पसारने के कारण मियो मुसलमानों के घर वापसी पूरी तरह से रुक गया. इसके बाद फिर मेवात में शुरू हुआ इस्लामिक धर्मान्तरण का गन्दा खेल..जिसके कारण आज मेवात के 230 गांव हिन्दूविहीन हो गये हैं.

आज तब्लीगी जमात पूरी दुनिया में जेहाद की प्रयोगशाला बन चुका है.
17
नवम्बर 2011 को विकिलीक्स ने खुलासा करते हुए कहा था कि तब्लीगी जमात की मदद से भारत में अलकायदा के नेटवर्क से जुड़े लोगों द्वारा रुपया और वीजा हासिल किया जा रहा है.


मेवात में सीआरपीएफ की शिविर हीं समस्या का समाधान

मेवात के हिन्दुओं की हमेशा से मांग रही है की वहाँ पर सीआरपीएफ की शिविर खोला जाय ताकि उनकी सुरक्षा हो सके. इसकी कड़ी में जब बात आगे बढ़ी तो हरियाणा के पूर्व परिवहन मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष आफताब अहमद ने मेवात के टुंडलाका गांव में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) शिविर लगाने की योजना के खिलाफ जोरदार तरीके से विरोध किया. 

मेवात में हमेशा से हीं कांग्रेस पार्टी की हिन्दुओं को लेकर दमनकारी नीति रही है. आफताब अहमद ऐसी मांग से ये साबित होता है की कांग्रेस मेवाती हिन्दुओं को लेकर कितना उदाशीन है. मुस्लिमों हितों का ढोंग करनेवाले आफताब अहमद ने यहाँ तक कह दिया की यह मुस्लिम बहुल क्षेत्र के निवासियों में डर की भावना पैदा करने का प्रयास है.

आफताब अहमद का मुस्लिम परस्ती की राजनीति यहीं नहीं रुकी. अहमद ने मुख्यमंत्री खट्टर को पत्र लिख इसपर अपना विरोध भी दर्ज करा दिया. तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है की क्या कांग्रेस पार्टी हीं मेवाती हिन्दुओं की दुर्दशा के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार है.


लव जेहाद और धर्मांतरण का अड्डा मेवात

मेवात में हिन्दू परिवारों के उपर एक के बाद एक लगातार हमले जारी है. हरियाणा के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री को इस बात को लेकर कोई प्रवाह नही है...और ना हीं इनको कोई जानकारी है. मेवात में कल हीं एक युवती के साथ कुछ लोगों द्वारा छेड़छाड़ करने तथा लव जेहाद में फंसाकर धर्मपरिवर्तन की कोशिश की गई है. युवती को बदनाम करने और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल करने की धमकी भी दी गयी है. पीड़ित पक्ष का आरोप है कि आरोपी युवक ने शनिवार को अवैध हथियार के बलपर उनके परिवार पर पथराव व हमला कर दिया.

पीड़ित पिता की शिकायत पर पुन्हाना पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है. सुदर्शन न्यूज़ की मुहीम का हीं असर है की आज पुलिस ने शिकायत दर्ज की है.. और पीड़ित परिवार भी थाने में जाने की हिम्मत दिखाई है. बरना यहाँ नो तो कोई FIR दर्ज होता था और ना हीं कोई कर्रवाई. पीड़िता के पिता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आरोपी उसकी बेटी का लगभग दो साल से पीछा कर रहा है. उनकी बेटी को बदनाम करने की नीयत से कुछ फोटो एडिट करके बनाया है. इसके अलावा आरोपी उनकी बेटी को लव जेहाद के चक्कर में फंसाकर उनकी बेटी का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश कर चुका है.

मेवात में हिन्दुओं की हालात आज सीरिया और इराक से भी बत्तर

मेवात में हिन्दुओं की हालात आज सीरिया और इराक से भी बत्तर हो गया है. इस्लामिक कट्टरपंथ के कारण आज यहाँ का हिन्दू ज़िन्दगी और मौत से हर रोज़ संघर्ष कर रहा है. पुन्हाना में एक युवक को चोटी रखना जेहादियों को इतना नागवार गुजरा की..युवक के ऊपर आपतिजनक कमेंट्स हर रोज करने लगे. मगर जब हिन्दू युवक ने इस बात को लेकर विरोध किया तो उसके साथ क्या हुआ आप खुद हीन सुन लीजिये.

इसके बाद भी इस्लामिक जेहादियों का मन नहीं भरा तो युवक के घर में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने धाबा बोल दिए. ये घटना कोई सीरिया या पाकिस्तान का नहीं है बल्कि अपने हीं देश में पनपा जेहादी प्रयोगशाला मेवात का है.

मेवात के हिन्दुओं को आतंकित करने के लिए रोजाना कुछ न मुसलमानों द्वारा किया जाता है. छोटी-छोटी बात पर आये दिन हिन्दुओं को प्रताड़ित किया जाता है. हिंदू समाज अब अपना धैर्य खो रहा है और अपना घर बार छोड़ कर पलायन होने पर मजबूर है.

17 June 2020

बाबरी मस्जिद गिराए जाने पर मेवात में प्रतिक्रिया

देश के किसी भी कोने में कहीं भी कोई हिन्दू मुसलमान का साम्प्रदायिक दंगा झगड़ा होता है तो उसकी सीधी प्रतिक्रिया मेवात में होती है. 6 दिसम्बर 1992 को जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया तो मेवात में सबसे पहले उसकी प्रतिक्रिया हुई. मेवात के कस्बा, पुन्हाना पिनगंवा, नगीना व नूंह में लगभग 23 मंदिरों की प्रतिमाओं को खण्डित व अपवित्रा कर दिया गया. पुन्हाना आर्य समाज मन्दिर के यज्ञ कुण्ड में सामूहिक मल मूत्रा किया गया. भादस के आर्य समाज आश्रम के पूरे भवन को तहस नहस कर दिया गया। 


नूह के गउशाला से 69 गायों को मुसलमानों ने जबरन खोल लिया. जिन्दा गाय के गले में मिट्टी के तेल से भिगों कर टायर डालकर जला दी गई. मंदिरों में रखे हुए सभी समान को मुसलमानों  ने  लूट लिया. पुन्हाना के मालीबास में किसानों की कडंवी में आग लगा दी गई. तेल मिल व बाजार की दुकानों को लूट लिया गया. स्थानीय मुस्लिम नेताओं ने हिन्दुओं के घरों में दूध देने वालों पर 550 रूपये दंड का ऐलान कर दिया. पिनगंवा व नूंह कस्बे का बहिष्कार कर दिया ताकि इस इलाके का कोई मेव इन दोनों कस्बों के किसी हिन्दू दुकान से कोई सौदा नहीं खरीदे. इस घटना के बाद दुकानदारी से पेट पालने वाले यहाँ के हिन्दू पलायन कर गये.

 

आज यहाँ पर जो भी हिन्दू बचे हुए हैं उनके दुकानों में चोरी दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है. बाहर का व्यापारी अपने उधार के पैसे लेने और अगला नया माल का आर्डर लेने आते हैं तो उनको लूट लिया जाता है. ऐसे में अब उन व्यापारियों ने यहां उधार देना बन्द कर दिया. इसके कारण मेवात का हिन्दू अपना घर बार छोड़ कर दुसरे शहरों में चले गये है.

हिंदूविहीन मेवात की अंतहीन कथा

मेवात हिन्दुओं की एक अंतहीन कथा...जी हाँ आज हम बात कर रहे हैं उस मेवात की जहाँ पर हिन्दू होना एक गुनाह है. मेवात में लगातार हिन्दुओं का पलायन जारी है. मेवाती हिन्दुओं का आवाज़ उठाने के लिए अब वहां कोई नहीं है. देश की राजधानी दिल्ली से महज़ कुछ हीं किलोमीटर दूर स्थित मेवात का हिन्दू.. आज मुस्लिमों के प्रताड़ना के कारण घुट-घुट कर जी रहा है. रोते-बिलखते हिन्दू आज अपने अस्तित्व की अंतिम मोड़ पर है.

आज मेवाती हिन्दू अपने अंतहीन यात्रा पर है..ऐसे में सुदर्शन न्यूज़ आज हिन्दुओं की आज बन कर ग्राउंड रिपोर्ट का जायजा लिया. आज हम हिन्दुओं के पलायन और पड़तारना के वास्तविक हकीकत से आपको पूरे कार्यक्रम के दौरान रूबरू करायेंगे. हम आपको ये भी बता दें की विश्व हिन्दू परिषद की ओर से मेवात में हिन्दुओं के उत्तपीड़न को लेकर गठीत की गई तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दी हैं...इस रिपोर्ट में रौंगटे खड़े करने वाली बातें सामने आई हैं.


                 विश्व हिन्दू परिषद की रिपोर्ट

रिपोर्ट में हिन्दू उत्पीड़न की कई घटनाओं का जिक्र

पिछले 25 वर्षों में मेवात के 50 गांव हुए हिंदुविहीन

हिन्दुओं के पलायन की वजह मुस्लिम पड़तारना

जिहादियों द्वारा हिन्दुओं की जमीन पर कब्ज़ा

मदरसों के माध्यम से राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का संचालन

स्थानीय पुलिस अत्याचार की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं करती

दबाव बना कर मुकदमे में समझौता करा दिया जाता है

गायों का अपहरण करके काट दी जाती है


ये तो महज़ एक बानगी मात्र है..हिन्दुओं की दुर्दशा इससे भी भयावह है. समिति ने अपने रिपोर्ट में पाया कि सरकारी कार्यालयों में मुस्लिम बहुल अधिकारी वहां के हिंदुओं के प्रति घृणात्मक रवैया अपनाया जाता हैं. हमारे रिपोर्टिंग के दौरान पता चला की पुन्हाना में एक हिन्दू महिला से मुस्लिम युवकों ने उनके सोने के गहने भी लूट लिए. इन सबके बीच पुन्हाना में कन्वर्जन की साजिशों का भी पता चला...यहाँ पर हिन्दुओं का धर्मांतरण अपने चरम सीमा पर है.

कुल मिलाकर हरियाणा के इस जिले में मुसलमानों का इतना आतंक व खौफ है जिसके चलते हिन्दुओं का जीना दूभर हो रहा है. इन्हीं सब कारणों के चलते हिन्दू पलायन को मजबूर हो रहे हैं. हमारे ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय लोगों की चर्चा के दौरान ये भी बात भी सामने आयी है कि मेवात क्षेत्र में बच्चों को जिहाद की तरफ भी धकेला जा रहा है. यहाँ बड़े पैमाने पे अवैध हथिया और हवाला का कारोबार चल रहा है. मुस्लिम पड़तारना से आतंकित होकर आज हिन्दू मेवात से पलायन कर रहा है.

                                 मेवात की प्रमुख समस्याएं

§  मेवात में हिंदू व राष्ट्र विरोधी खतरनाक षड्यंत्र 

§  प्रताड़ना के कारण हो रहा है हिंदुओं का पलायन।

§  25 वर्षों में 50 गांव हो चुके हैं हिंदुविहीन ।

§  हिंदू महिलाओं से दुष्कर्म की घटना आम बात ।

§  हिंदुओं की निजी जमीन को मुसलमान हड़प रहे हैं ।

§  हिंदुओं के धार्मिक प्रतीकों का हो रहा है घोर अपमान ।

§  विरोध करने पर सैंकड़ों जिहादियों की भीड़ कर देती है हमला ।

§  मुसलमानों द्वारा वायरल की जाती है राष्ट्र व हिंदू विरोधी पोस्ट ।

§  साधु-संतों की हो रही है निर्मम हत्या ।

§  पुन्हाना, नगीना, धुधौली और सीहरी में सबसे ज्यादा आतंक ।

§  हिंदुओं का जबरन कराया जाता है धर्म परिवर्तन ।

§  कट्टरपंथियों के पैसे से मस्जिदों का निर्माण आम है।


       मेवात में राष्ट्रीय सुरक्षा की समस्या


·       आतंकी संगठनों का मस्जिदों पर कब्ज़ा हो चुका है

·       हवाला कारोबार से आतंकी गतिविधियां चल रही है  

·       घरों में सीरिया और अफगानिस्तान जैसे प्रतिबंधित

·       हथियारों का जखीरा भरा हुआ है

·       रोहिंग्या मुसलमानों का अवैध शरणस्थली बन चुका है

·       तबलीगी जमातियों का जेहादी प्रयोगशाला चल रहा है

·      बस्तर और गढ़चिरौली से भी ज़्यादा खतरनाक बन चुका है मेवात

 मतदान करने से हिन्दुओं को रोकते हैं मुलसमान
 मतदान के समय हिन्दुओं की लाशें बिछा देने की धमकी देते हैं मुलसमान

मेवात में हिन्दू महिलाओं की समस्याएं

01 हिंदू महिलाओं से मुसलमानों द्वारा दुष्कर्म आम बात

02 मुसलमानों द्वारा वायरल की जाती है हिन्दू महिलाओं के आपत्तिजनक पोस्ट

03 स्कूल-कॉलेज जाते समय मोटरसाइकिल से लड़कियों का पीछा करते हैं मुसलमान लड़के

04 विरोध करने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देते हैं

05 जबरन हिन्दू लड़कियों को अपने चंगुल में फंसाते हैं

06 महिलाएं डर के कारण अपने घरों से नहीं निकलती हैं

07 बाज़ार जाने वाली महिलाओं पर अश्लील कमेंट्स किये जाते हैं

08 अस्पतालों में भी जाने से डरती हैं हिन्दू महिलाएं

09 घरों में घुसकर अभद्रता करते हैं मुसलामन

10 शाम ढलते हीं महिलाएं ज्यादा असुरक्षित महसूस करती हैं

11 अपहरण के बाद रेप कर दूसरे शहरों में बेच दी जाती हैं हिन्दू लड़कियां

12 बड़ी संख्या में हिन्दू लड़कियां काफी तेज़ी से गायब हो रही हैं

13 मेवात में बलात्कार की घटना ख़बर तक नहीं बनती है

14 महिला ज्यादती की एफआईआर तक थाने में दर्ज नहीं होती

15 सरे राह हिन्दू लडकियों के कपड़े फाड़ देते हैं मुस्लिम लड़के

16 लड़की जब जवान दिखने लगती है तो मुसलामन उसे घरों से उठा ले जाते हैं


मेवात में हिन्दुओं की धार्मिक समस्याएं

01 हिन्दू होली दीपावली सहित कोई भी त्यौहार नहीं मना पाते हैं

02 शादियों में खुलेआम हुड़दंग और छेड़छाड़ करते हैं मुस्लिम लड़के

03 बरातियों के साथ लूटपाट करके हत्या तक कर दी जाती है

04 मंदिरों के भीतर मज़ार का निर्माण कर दिया जाता है

05 मंदिरों को तोड़ कर मस्जिदें बना दी जाती है

06 साधु-संतों की निर्मम हत्या कर दी जाती है

07 संत- महात्माओं के महत्वपूर्ण अंगों को निकाल कर बेच देते हैं

08 डर के कारण मंदिरों में पूजापाठ नहीं होता है

09 मंदिरों की घंटियाँ नहीं बजती है

10 धार्मिक जुलूस और रथयात्रायें नहीं निकलती है  

11 गौ हत्यारों का शरणस्थली बन चुका है मेवात

12 हिन्दुओं की गायों को काट दिया जाता है

13 गोचर भूमि पर मुसलमानों का कब्ज़ा हो चुका है

14 मुस्लिम घरों में कत्लखाने चल रहे हैं

15 स्कूलों में जबरन कुरान और नमाज़ पढ़ाया जाता है  

16 दुल्हे को घोड़े पर नहीं बैठने देते मुसलमान

17 अपनी ही शादी में खुलेआम घोड़े पर नहीं बैठ सकता दूल्हा

18 दुल्हन की विदाई के बाद रास्ते में रोक कर उठा ले जाते हैं

19 मेवात के हिन्दू लड़कों को शादी के लिए लड़कियां नहीं मिलती है

17 February 2016

क्या मानवीय मूल्यों के पैमाने बदल गएँ हैं ?

एक भारतीय होने के नाते, भारतीय समाज मे व्याप्त भ्रष्टाचार हमारी चिंता का विषय हो सकता हैं, लेकिन सच तो यह हैं कि, आज भ्रष्टाचार सम्पूर्ण वैश्विक समाज कि सबसे बड़ी विकृति के रूप मे चुनौती बनता जा रहा हैं! ऐसे मे कहीँ न कहीँ एक अहसास होता हैं कि, जिस तेजी से सम्पूर्ण विश्व कि दौड़ लगा रहा हैं, दुष्प्रभाव के रूप मे जन्म लें रही ख़ुदगर्जी और पाने के लिये किसी भी हद तक जाने कि सोच हीं भ्रष्टाचार कि बड़ी वजह हैं! लोगों को आगे बढ़ना हैं, ऐसे मे ईमान और उसूलों कि बेडीयां खटकती हैं! वह दौर बीत गये, जब व्यवहारिकता और मानवीय मूल्यों के पैमानों पर सफल इंसानका परिक्षण होता था! आज सफल इंसान कि परिभाषा आर्थिक सम्पन्नता मे अंतर्निहित हो चुकी हैं! अब मानवीय मूल्यों के पैमाने बदल गएँ हैं!





जैसा की हम सभी जानते हैं, भ्रष्टाचार आज हमारे देश का भी सबसे मुद्दा ज्वलंत बन गया हैं! एक ऐसी बीमारी, जो लगातार हमें वैश्विक परिदृश्य में कमजोर कर रही हैंबावजूद इसके हम इलाज नहीं ढूंढ पायें हैं! हाँ, इलाज कि अनेकों कोशिशे हुई हैं, लेकिन हम रोग कि जड़ में नहीं पहुंच पायें हैं! देश में बड़े-बड़े आंदोलन, जुलुस प्रदर्शन हो रहे हैंहर देशवासी भ्रष्टाचार पर चिंतिंत हैं, बावजूद इसके आज भी हमारा चिंतन भ्रष्टाचार की जड़ों में नहीं पहुंच सका हैं! वास्तव में हमारा भ्रष्टाचार कि जड़ों में न जाना, कमजोरी से ज्यादामज़बूरी भी बन चुका है..क्योंकि अंगुली खुद पर भी उठ जाने का डर बना हुआ है ! हकीकत यह हैं कि आज भ्रष्टाचार हमारी जीवनशैली का हिस्सा बन चुका हैं, और चाहें-अनचाहें हम सभी इस में लिप्त हो रहे हैं! बातें होती हैं भ्रष्टाचार पर,… दूसरों को भला-बुरा सुनाते हैं, लेकिन बड़ा प्रश्न यह हैं कि, कब तक हम उस भ्रष्टाचार को नजरअंदाज करेंगे जो हमारी जीवनशैली का हिस्सा हैं, एक आम आदमी के जीवनशैली का हिस्सा हैं?.. ‘जीवन के किसी मोड़ पर अगर हम भ्रष्टाचार से पीड़ित होते हैं, तो मौके मिलते ही कई बार हम फायदे भी उठाते हैं! समस्या यह रहीं हैं कि, जब दूसरों को मौका मिल जाता हैं तो भ्रष्टाचार लगता हैं, जब खुद का मौका लग जाता हैं, तो हमें शिष्टाचार लगने लगता हैं! भ्रष्टाचार के प्रति यह दोहरा नजरिया हि, अब तक के असफल संघर्षों की बड़ी वजह रहा हैं!




कहते हैं सच कड़वा होता हैं, लेकिन कड़वी तो दवा भी होती हैं! रोगों से मुक्ति एवं स्वस्थ शरीर के लिये हमें कड़वी दवाओं का घूंट पीना हि पड़ता हैं! हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी भी यही बात कहते हैं. कारण-अकारण, परिस्थितिजन्य मजबूरीवश हम सभी के जीवन मे भ्रष्टता अपनी जड़ जमा चुकी हैं”! अगर हम इस सत्य को स्वीकार नही कर सकते, हमें भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कुछ बोलने का हक नही हैं! अगर हम अपनी कमियों/खामियों को स्वीकार करने का माद्दा नही रखते, हमें दूसरों कि कमियों पर हो-हल्ला मचाना बंद करना चाहिए ! सामाजिक बुराइयों मे सुधार के लिये, नेता नही जिम्मेदार नागरिक बनने कि आवश्यकता हैं ! मुझे बेहद दुर्भाग्य के साथ कहना पड़ रहा हैं कि, अब तक भ्रष्टाचार के प्रति हमारा चिंतन सिर्फ और सिर्फ पीड़ित का प्रलाप रहा हैं! एक समग्र और गंभीर चिंतन कि जगह हम सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप में उलझ कर रह गए हैं !


अगर हम आधुनिक जीवनशैली को एक निस्पक्ष दृष्टिकोण से समझ सकें,…ये सही हैं की आज हम सभी के जीवन में भ्रष्टाचार प्रभावी हैं लेकिन इस हालात के लिए खुद को या किसी व्यक्ति विशेष को आरोपित करना भी पूर्ण विराम नहीं हैं ! वास्तव में आज हमारे परिवार और समाज में ऐसे हालात बनते जा रहे हैं, जहाँ ईमानदारी और शिष्टता के साथ जीवन लगभग असंभव होता चला जा रहा है ! एक ऐसा दमघोंटू वातावरण तैयार हो चूका हैं,… जहाँ पग-पग पर भ्रष्टाचार से सामना करना पड़ता हैं..ऐसे में जीवन पथ पर अपना औचित्य और रफ़्तार बनाये रखने के लिए व्याप्त माहौल से समझौता मज़बूरी बन जाता हैं! कई बार ऐसे हालात बनतें हैं, जब जीवन संघर्ष मे खुद या परिवार को बचाने कि जद्दोजेहद मे विकल्पहीनता का अहसास होता हैं, तब हम मजबूरन ही सही जीवन संघर्ष मे खुद को बचाये रखने कि गरज से भ्रष्टाचार का दामन थाम हि लेते हैं! जब जीवन कि नाव बिच समुन्द्र मे फँस जाती हैं, स्थापित उसूल और मर्यादायें भी बोझ लगती हैं! व्यवस्था में व्याप्त खाओं और खाने दोके माहौल से बचना मुश्किल हो चुका हैं!



वास्तव में अगर हम सही मायनों में देश और समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार के प्रति चिंतित हैं, और हालात में सुधार की कामना रखते हैं, मुझे लगता हैं हम सभी को थोड़ी ईमानदारी दिखानी होगी और उस सत्य को स्वीकार करने होगा….जिससे हम सभी चेहरा छुपाते रहे हैं! किसी भी रोग का कारण ढूंढने से पूर्व रोगी को ढूंढा जाता हैं. ठीक इसी तरह भ्रष्टाचार जैसी अब तक लाइलाज बीमारी का कारण ढूंढने से पूर्व हमें यह स्वीकार करना होगा की, हम सभी इस रोग से ग्रस्त हो चुके हैं! भ्रष्टाचार का वायरस हमारी व्यवस्था में लगातार जड़ जमाता चला जा रहा हैं और दुर्भाग्य से हम राजनैतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के कुछेक आर्थिक भ्रष्टाचार के मामलों में ही चिंतित हैं! यहाँ भी पैसा महत्पूर्ण हो जाता हैं, क्योंकि हमारे देश और समाज में सिर्फ और सिर्फ आर्थिक भ्रष्टाचार को ही भ्रष्टाचारमाना जाता हैं. जबकि भ्रष्टाचार की परिभाषा हर इंसानी भ्रष्ट आचरणको अपने अंदर समेटे हुए हैं! 




वास्तव में हमें बेहद जिमेदारी और गंभीरता के साथ व्यक्ति,परिवार और समाज में व्याप्त भ्रष्ट आचरण को स्वीकार करते हुए समग्र और निष्पक्ष चिंतन करना होगा! व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के माहौल से बाहर निकलसामूहिक जिमेदारी को स्वीकार करते हुए माहौल के प्रति चिंतनशील होना होगा! कौन भ्रष्ट हैं? और कौन शिष्ट हैं ? ऐसे प्रश्नों से जितनी जल्दी हम बाहर निकल सकें बेहतर होगा और तभी हम अपने निजी जीवन,परिवार, समाज और राष्ट्र में फैली भ्रष्टता के विरुद्ध एक निर्णायक और परिणामी संघर्ष की पृष्टभूमि रख सकते हैं, अन्यथा समय व्यतीत करने के लिए, जो होता आया हैं, वह सही हैं! तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है की क्या मानवीय मूल्यों के पैमाने बदल गएँ हैं ?