27 November 2024

संभल पर सियासी दंगल ! जामा मस्जिद के सर्वे पर बवाल, सपा सांसद ने दिए थे भड़काऊ भाषण, विहिप की संभल हिंसा पर मांग- दोषियों पर लगे रासुका

 

उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा पर सियायत शुरू हो गई है। संभल के सियासी दंगल में अबतक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस ने सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सदर विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल पर हिंसा भड़काने की एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने हिंसा से जुड़े मामले में 7 एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें 6 नामजद और 2500 से ज्यादा अज्ञात हैं। अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। हिंसा में जिन 4 युवकों की जान गई, पोस्टमॉर्टम के बाद उनका डेड बॉडी देर रात ही सुपुर्दे खाक कर दिया गया। संभल तहसील में फिलहाल इंटरनेट बैन कर दिया गया है। सभी स्कूल-कॉलेज को भी बंद रखा गया है। एक दिसंबर तक संभल जिले में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है।

 

मृतकों के परिजन का दावा है कि पुलिस की गोली से मौत हुई है। जबकी पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि 'पुलिस फायरिंग में कोई मौत नहीं हुई है। हमलावरों की फायरिंग में युवकों की जान गई है।' संभल पुलिस ने हिंसा से जुड़े उपद्रवियों के पहली बार फुटेज जारी किए हैं।

 

कैसे भड़की हिंसा ?

 

रविवार सुबह 6:30 बजे डीएम-एसपी के साथ एक टीम सर्वे करने पहुंची थी

टीम को देखकर मुस्लिम समुदाय के लोग भड़क गए

कुछ ही देर में करीब दो से तीन हजार लोग जामा मस्जिद के बाहर पहुंच गए

पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो भीड़ में शामिल लोगों ने पथराव कर दिया

इसके बाद भगदड़ जैसे हालात हो गए

छतों से भी जमकर पथराव किया गया

भारी पथराव के कारण पुलिस को कुछ देर के लिए भागना पड़ा

बवाल इतना बढ़ गया कि पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले दागे

फिर लाठीचार्ज करके भीड़ को खदेड़ा गया

भगदड़ में 4 लोगों की मौत हो गई

 

संभल जामा मस्जिद हिंसा में हुई मौतों को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी मर्डर बता रहे है। जबकी पुलिस ने इसे भगदड़ में हुई मौत करार दिया है।  ओवैसी हाईकोर्ट के सिटिंग जज से इंक्वायरी कराने की मांग की है। साथ ही आरोप लगाते हुए कहा कि 'जिस दिन कोर्ट में सुनवाई होती है, उसी दिन ऑर्डर हो जाता है और उसी दिन सर्वे भी हो जाता है। 1948 में ऐसा हुआ था बाबरी मस्जिद में। असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि संभल की चंदौसी की जामा मस्जिद कोई 100 साल या 50 साल पुरानी नहीं है, बल्कि दो सौ, ढाई सौ या उससे भी ज्यादा साल पुरानी है।

 

शाही मस्जिद पर हिंदू पक्ष का क्या है दावा ?

संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यह एक प्राचीन हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी

इस दावे को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ऐतिहासिक साक्ष्यों से जोड़ने की कोशिश की गई है

ASI की 1875 की रिपोर्ट में इस मस्जिद में मौजूद एक शिलालेख का उल्लेख सबसे बड़ा प्रमाण बताया गया है

रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद में एक शिलालेख है, जिसमें लिखा है कि इसका निर्माण 933 हिजरी में मीर हिंदू बेग ने पूरा किया था

मीर हिंदू बेग बाबर का दरबारी था, जिसने एक हिंदू मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित किया

ASI के मुताबिक, यह शिलालेख इस बात का प्रमाण है कि मस्जिद का निर्माण हिंदू धार्मिक स्थल को बदलकर किया गया था


संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि इसे भगवान विष्णु के हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाया गया था

इस दावे का आधार बाबरनामा और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट को माना जा रहा है


ASI
की 1875 की रिपोर्ट में भी कई ऐसे साक्ष्य दर्ज हैं, जो हिंदू मंदिर के अस्तित्व की ओर संकेत करते हैं


मस्जिद के हिंदू खंभे मुस्लिम खंभों से अलग हैं और विशुद्ध हिंदू वास्तुकला का प्रतीक हैं


ASI
के अनुसार, मस्जिद के गुंबद का जीर्णोद्धार हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल में हुआ था


मस्जिद की संरचना में हिंदू मंदिर के कई चिह्न पाए गए, जिन्हें बाद में प्लास्टर से ढक दिया गया


हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन ने अपनी याचिका में बाबरनामा का जिक्र किया है

बाबरनामा, जिसे बाबर ने खुद लिखा था और ब्रिटिश ओरिएंटलिस्ट एनेट बेवरिज ने अनुवाद किया

 

बाबरनामा के पृष्ठ 687 पर लिखा है कि बाबर के आदेश पर उसके दरबारी मीर हिंदू बेग ने संभल के हिंदू मंदिर को जामा मस्जिद में परिवर्तित किया

 

यह विवरण शिलालेख से मेल खाता है, जिसमें मीर हिंदू बेग का नाम और 933 हिजरी वर्ष में मस्जिद के निर्माण का उल्लेख है

 

संभल में शाही जामा मस्जिद, शहर के केंद्र में ऊंचे टीले पर कोर्ट पूर्वी इलाके में बनी हुई है। इस मस्जिद को लेकर हिंदू-मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में अलग-अलग दावे किए है। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि,

 

मुस्लिम पक्ष का क्या है दावा ?


शाही जामा मस्जिद का निर्माण 1529 में मीर बेग ने करवाया था

मीर बेग मुगल बादशाह बाबर का कमांडर था

मस्जिद के अंदर बने एक शिलालेख की ओर मुस्लिम पक्ष इशारा करता हैं

शिलालेख पर बाबर का नाम लिखा है

जामा मस्जिद का उल्लेख बाबर नामा में मिलता है

सुप्रीम कोर्ट के 1991 के उस ऑर्डर को आधार बनाकर मुस्लिम पक्ष अपना विरोध दर्ज कराता है

जिसमें अदालत ने कहा था कि 15 अगस्त 1947 से जो भी धार्मिक स्थल जिस भी स्थिति में हैं, वो अपने स्थान पर बने रहेंगे

 

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि संभल की घटना सरकार द्वारा जानबूझकर कराई गई थी, ताकि चुनावी प्रक्रियाओं में की गई गड़बड़ियों से ध्यान हटाया जा सके।

 

संभल में शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने 'हिंसा के लिए पूरी तरीके से प्रशासन जिम्मेदार है। SDM वहां मौजूद थीं। उन्होंने मस्जिद परिसर की हौज में भरे पानी को खाली करवाने का ऑर्डर दिया। जबकि DM और SP ये कह रहे थे कि हौज का पानी डंडे से माप लो। SDM नहीं मानी और उन्होंने हौज खाली करवा दी। ये पानी जब मस्जिद से बाहर निकला तो पब्लिक में ये अफवाह फैल गई कि मस्जिद में खुदाई चल रही है। इसलिए लोग उत्तेजित होने शुरू हो गए।

 

संभल पर सियासत लगातार जारी है। हर दल के नेता हिंसा पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। संभल हिंसा पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का कहना है कि 'यह घटना विपक्ष की वजह से हुई, यह गोधरा कांड की तरह विपक्ष की पूर्व नियोजित रणनीति थी। यह सर्वेक्षण टीम पर हमला नहीं था, बल्कि भारत के संविधान और लोकतंत्र पर हमला था। वे देश को जलाना चाहते हैं। वे संभल को बांग्लादेश बनाना चाहते हैं। जो लोग मारे गए, वे हमलावरों की गोली से मारे गए, पुलिस की गोली से नहीं, यह पोस्टमार्टम से स्पष्ट है। देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।'

 

विश्व हिंदू परिषद ने संबल जिले में हुई हिंसा की निंदा की है। पूरे हिंसा में शामिल लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेन्द्र जैन ये भी कहा है कि हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई दोषियों से की जाय।

 

संभल हिंसा कि आग में जल रहा है और उधर राजनीतिक दलों का संभल में दंगल जारी। अब देखना होगा कि हिंसा की ये आग कबतक बूझती है।

बाबा बागेश्वर की हिंदू जोड़ो यात्रा, हिंदुओं को एक करने निकले बाबा बागेश्वर, छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं- धीरेंद्र शास्त्री हाथ में ध्वज थामे 2 किमी पैदल चले संजय दत्त, गुरुजी मेरे गुरु हैं- संजय दत्त

 

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री 'हिंदू एकता' पदयात्रा पर हैं। मध्य प्रदेश में चल रही इस यात्रा में देश के कई जाने माने दिग्गज इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं। बाबा बागेश्वर सरकार का यह यात्रा बागेश्वर धाम से ओरछा तक जाएगी। आम हो या खास हर कोई इस यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंच रहा है। इसी कड़ी में बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त मध्य प्रदेश में चल रही हिंदू एकता यात्रा में शामिल हुए। एक्टर संजय दत्त बागेश्वर महाराज धीरेंद्र शास्त्री के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते दिखे और सनातन धर्म की एकता का संदेश देते नजर आए। संजय ने कहा कि वो इस यात्रा का हिस्सा बनकर बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं। ये यात्रा बहुत बड़ी जागरुकता लाने वाली है, और महाराज जी बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं। 

 

संजय दत्त ने सभी को ये भरोसा भी दिलाया कि इस यात्रा को वो यहीं तक सीमित नहीं रहने देंगे, इसे वो मुंबई तक लेकर जाएंगे। मैं इनके साथ हमेशा जुड़कर रहूंगा। ये कुछ अच्छा काम कर रहे हैं इसलिए इतनी जनता इनसे जुड़ी है। इसलिए हम सब इनके साथ जुड़े हैं। ये सभी काम ये अपने दिल से करते हैं, ये मैंने देखा है। ये गरीबों से मिलते हैं, उनका ख्याल रखते हैं, ये बहुत बड़ी बात है जो मैंने बहुत कम देखा है। देश में जात-पात का भेद मिटाकर सभी हिंदुओं को एक करने के लिए बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री सनातन हिंदू एकता यात्रा निकाल रहे हैं। छतरपुर से निकली 160 किमी यात्रा को जनता के साथ दिग्गजों का समर्थन मिल रहा है। यात्रा के पांचवे दिन ग्रेट खली ने हिंदू राष्ट्र का समर्थन देते हुए यात्रा में शामिल हुए। खली ने बागेश्वर बाबा की तारीफ करते हुए हिंदुओं को समय से पहले जागकर एकजुट होने की बात कही। वहीं, पदयात्रा में शामिल हो रहे लोगों की आंखों में सनातन हिंदू एकता का जुनून झलक रहा है।

 

 

यात्रा में शामिल होने आए खली को पंडित धीरेंद्र शास्त्री के साथ चल रहे एक साधु ने उनकी चोटी पकड़कर उठाने को कहा। खली ने पूछा- सही में उठा लूं। साधु ने कहा उठाइए। इस पर खली ने चोटी पकड़कर एक साथ से साधु को उठा लिया। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भी ताली बजाते हुए खली से बात की।

 

सनातन हिंदू एकता पदयात्रा में कई अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं। एक भक्त रथ को अपनी चोटी से खींच रहा है। बागेश्वर धाम का यह भक्ति अपनी चोटी में रथ को बांधकर पूरी पदयात्रा में खींचते हुए चल रहा है। पथरी बाबा नाम का यह भक्त मध्य प्रदेश के दमोह का रहने वाला है। आधी यात्रा व इस प्रकार पूरी कर चुका है और ओरछा धाम तक ऐसे ही अपनी चोटी से इस रथ को खींचता रहेगा।


मध्य प्रदेश में चल रही बाबा बागेश्वर की हिंदू एकता पदयात्रा जहां हर दिन बड़ा रूप लेती जा रही है, वही अपार जनसमर्थन के बीच अब देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग भी तेज हो गई है। इस यात्रा के मुखिया पंडित धीरेंद्र शास्त्री इस मांग को खुद उठा रहे हैं तो उनकी इस मांग के समर्थन में भी लोग आ रहे हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में एमपी सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बाबा बागेश्वर की मांग के पक्ष में खड़े हो गए हैं। दमोह पहुंचे मंत्री प्रहलाद पटेल ने उनकी इस यात्रा को लेकर बड़ा बयान दिया।

बाबा बागेश्वर की यात्रा को पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने बड़ी यात्रा करार देते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री बड़े संत हैं। उनके अनुयायी भारी संख्या में देश भर में हैं। सनातनी होने के नाते वो यात्रा से खुश हैं। हिंदू राष्ट्र की मांग पर पटेल ने साफ कहा कि यदि हमारे साधु संत ऐसी मांग करते हैं तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए बल्कि हर हिंदू को गर्व होना चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री की हिंदू एकता यात्रा यूपी के झांसी में पहुंची, जहां एक अप्रिय घटना हुई। यात्रा के दौरान किसी व्यक्ति ने बाबा पर मोबाइल फेंक दिया, जो उनके गाल पर लगा। इस घटना के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि, "किसी ने हम पर मोबाइल फेंका है, हमें मिल गया है।" मोबाइल फेंके जाने की घटना के बावजूद, धीरेंद्र शास्त्री ने अपने समर्थकों को संयम बनाए रखने का संदेश दिया। वह माइक से अपने भक्तों और समर्थकों को संबोधित कर रहे थे और यात्रा को शांतिपूर्ण बनाए रखने पर जोर दिया। यात्रा में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन सतर्क है। इस घटना के बाद सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मोबाइल फेंकने वाला व्यक्ति कौन था और उसके इरादे क्या थे।

इस यात्रा में अपार जनसमूह चलकर सनातन हिन्दू एकता यात्रा को बल दे रहा है। यात्रा के दौरान बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री यात्रा में चलने वाले लोगों और ग्रामीणों से मिलते जा रहे हैं। नेपाल से आये करीब 1300 नेपाली हिन्दू भी बागेश्वर बाबा की यात्रा में शामिल हुए। उनका कहना है कि वे भी नेपाल में इस तरह की यात्रा निकालेंगे और जात-पात मिटाएंगे। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जैन धर्म, तीर्थंकर भगवान ऋषभ देवजी का गौरव गाथा के साथ जैन आचार्य लोकेश मुनी का बागेश्वर धाम सरकार की ओर से स्वागत किया गया।

 

वहीं जैन आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत हमें नहीं रोक सकती है। यह यात्रा वट वृक्ष की तरह आगे बढ़ेगा और विश्व भर के सनातनी इस यात्रा से जुड़ जाएंगे। यात्रा में देश के अलग-अलग राज्यों के साथ ही पड़ोसी राज्य नेपाल से भी भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैंबाबा बागेश्वर का उद्देश्य है कि पिछड़ों और बिछड़ों को गले लगाकर आपसी भेदभाव मिटाना है। 

बांग्लादेश में चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद तनाव, संत की गिरफ्तारी से सड़क पर हिन्दू, बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार जारी। बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के निशाने पर बांग्लादेशी हिंदू

 

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ पुलिस की दमनकारी कार्रवाई जारी है। इस्कॉन के महंत चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की गिरफ्तारी के बाद चटगांव में प्रदर्शन कर रहे समर्थकों पर पुलिस ने पहले तो लाठीचार्ज किया और फिर साउंड ग्रेनेड दागे। पुलिस की इस हिंसक कार्रवाई में कई लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बाहर प्रदर्शन कर रहे हिन्दुओं को कट्टरपंथियों ने लाठी डंडे से पीट- पीट कर अधमरा कर दिया। हिंसक कट्टरपंथियों को पुलिस भी साथ दे रही है। प्रदर्शनकारी हिन्दुओं पर कहर बरपाने में बांग्लादेशी पुलिस भी कट्टरपंथियों के साथ मिलकर हिंसा को बढ़ावा दे रही है। बांग्लादेश में इस्कॉन के धर्मगुरु चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की गिरफ्तारी और हिन्दुओं पर बर्बरतापूर्ण हमले पर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया किया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा-


भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान

 हम चिन्मय कृष्ण दास, जो बांग्लादेश सम्मिलित सनातन जागरण जोतके प्रवक्ता हैं, की गिरफ्तारी और जमानत न दिए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं।यह घटना बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों द्वारा हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर किए गए कई हमलों के बाद हुई। अल्पसंख्यकों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आगजनी और लूटपाट के साथ-साथ चोरी, तोड़फोड़, देवी-देवताओं और मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले दर्ज किए गए हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन घटनाओं के अपराधी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि शांतिपूर्ण सभाओं के माध्यम से वैध मांगें प्रस्तुत करने वाले धार्मिक नेता के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं। हम दास की गिरफ्तारी के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर भी चिंता व्यक्त करते हैं।हम बांग्लादेश के अधिकारियों से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अपील करते हैं, जिसमें शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उनका अधिकार भी शामिल है।

 

भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान पर बांग्लादेश का भी जवाब आया है। बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने उल्टा भारत पर आपसी समझ की भावनाओं की दुहाई देते हुए अलग राग अलाप रहा है। बांग्लादेश विदेश मंत्रालय कहा-

 

बांग्लादेश विदेश मंत्रालय का बयान

"ये बेहद दुख की बात है कि चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी को कुछ लोगों ने गलत तरीके से पेश किया है। इस तरह के बयान न केवल तथ्यों को गलत तरीके से पेश करते हैं, बल्कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच दोस्ती और आपसी समझ की भावना के भी उलट हैं। बांग्लादेश सरकार फिर से ये दोहराना चाहेगी कि देश की न्यायपालिका पूरी तरह से स्वतंत्र है और सरकार उनके कामकाज में दखल नहीं देती बांग्लादेश सरकार देश में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने को लेकर प्रतिबद्ध है। चटगांव में वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की बेरहमी से की गई हत्या को लेकर चिंतित है। प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि किसी भी कीमत पर धार्मिक सहिष्णुता बनी रहे।

 

बांग्लादेश इस्कॉन प्रमुख चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की गिरफ्तारी को लेकर इस्कॉन ने भी बयान जारी किया है। इसमें बांग्लादेश सरकार की निंदा की गई है। इस्कॉन ने बांग्लादेश सरकार से अपील की है कि उन्हें ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जिसमें सभी धर्म-वर्ग के लोग मिलजुलकर रहें। इस्कॉन ने कहा कि

 

इस्कॉन ने की बांग्लादेश सरकार की निंदा

चिन्मय कृष्ण दास प्रभु बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं। सरकार को नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। बांग्लादेश के इस्कॉन ने भारत से इस मामले में दखल देने की मांग करते हुए कहा है कि भारत सरकार से अनुरोध है कि वे बांग्लादेश सरकार से बात करके यह बताएं कि इस्कॉन का दुनिया में कहीं भी आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है। हमारे नेता को तुरंत रिहा किया जाय। हम एक शांतिप्रिय भक्ति आंदोलन चलाते हैं।

 

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरे और इस्कॉन मंदिर से जुड़े चिन्मय प्रभु को 26 नवंबर को चटगांव के कोतवाली थाने में दर्ज देशद्रोह के मामले में कोर्ट में पेश किया गया। चिन्मय प्रभु के खिलाफ बांग्लादेश दंड संहिता की धारा 120(बी), 124(ए), 153(ए), 109 और 34 के तहत देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है। चटगांव कोर्ट के बाहर पुलिस ने चिन्मय प्रभु के समर्थकों पर आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को भगाने के लिए रबर बुलेट्स का भी इस्तेमाल किया। चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी के विरोध में धरना प्रदर्शन करने आए लोगों पर पुलिस ने जमकर लाठी बरसाई। जिसमें कई हिन्दू प्रदर्शनकारी घायल हो गए वहीं चरमपंथी तत्वों ने भी हिन्दुओं को जमकर पीटा जिसमें कई गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं चिन्मय प्रभु ने कोर्ट परिसर में ही समर्थकों को संबोधित करते हुए कानून के मुताबिक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।

 

इस्लामिक कट्टरपंथियों ने चटगांव के लोकनाथ मंदिर पर भी हमला किया है। कंट्टरपंथियों की भीड़ अल्लाह हु अकबर के नारे लगाते हुए मंदिर की तरफ बढ़ी। शाम में भी कई कट्टरपंथियों ने चटगांव के हजारी लेन में काली मंदिर में तोड़-फोड़ की है। इस दौरान हिंसक भीड़ ने चटगांव की दलित बस्ती में कई घरों को भी आग लगाकर जला दिया। इससे पहले इलाके में हिंदुओं से दुकानों को बंद करने की धमकी भी दी थी। हमलावर इस्लामी जमात और विपक्षी पार्टी BNP से जुड़े हुए हैं।

 

चटगांव में चिन्मय प्रभु के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान एक वकील की मौत हो गई है। मारे गए वकील का नाम सैफुल इस्लाम ऊर्फ आलिफ (35) है। वकील की मौत कैसे हुई, फिलहाल ये साफ नहीं है। उसे चटगांव के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सैफुल चटगांव में एक असिस्टेंट पब्लिक प्रोसिक्यूटर था। वकील की मौत पर चटगांव वकील एसोसिएशन के अध्यक्ष ने नाजिम उद्दीन चौधरी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी सैफुल को चैम्बर से पकड़ कर ले गए थे और उसकी हत्या कर दी। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस ने सैफुल की हत्या की निंदा करते हुए जांच शुरू करने के आदेश दिए हैं। जबकी इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा मारे गए हिन्दुओं पर मोहम्मद यूनुस मौन हैं।

 

बांग्लादेश में चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की रिहाई के लिए शुरू हुआ प्रदर्शन लगातार जारी है। हिन्दू अलग-अलग हिस्सों में लगातार प्रदर्शन कर हैं। प्रदर्शनकारियों ने ढाका, चटगांव और दिनाजपुर सड़क पर जाम लगाया और नारेबाजी कर प्रभु की जल्द रिहाई की मांग की। ढाका के शाहबाग में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने लाठी-डंडे से हमला कर दिया। इस हमले में 20 से ज्यादा लोग घायल हैं। जहां पर हिंदुओं पर हमला किया गया, वो शाहबाग पुलिस स्टेशन से महज 30 मीटर दूर है। जब कट्टरपंथी, शांतिपूर्वक तरीके प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमला कर रहे थे, तब प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कोई एक्शन नहीं लिया। चिन्मय दास ने अपने समर्थकों से आंदोलन जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा-

 

चिन्मय कृष्ण दास प्रभु का बयान

हम इस देश के लोग हैं, इस देश का हिस्सा हैं। हम इस देश के कानून के मुताबिक, काम करते रहेंगे। आप सभी को ऐसी कोशिश करनी चाहिए कि कोई अराजक माहौल न बने। लेकिन, हमारी 8 सूत्री मांगें हमारी बुनियादी मांग है। हमने इसे लेकर आंदोलन जारी रखा है और आगे भी करते रहेंगे।

-चिन्मय कृष्ण दास प्रभु, बांग्लादेश इस्कॉन के धर्मगुरु

 

बांग्लादेश पुलिस ने ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को गिरफ्तार किया। वे चटगांव जा रहे थे। मौके पर पुलिस ने कोई गिरफ्तारी वारंट नहीं दिखाया। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की जासूसी शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रेजाउल करीम मल्लिक का कहना है कि पुलिस के अनुरोध के बाद चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार किया गया है।  

 

क्यों गिरफ्तार हुए चिन्मय प्रभु ?

 

25 अक्टूबर को चटगांव के लालदीघी मैदान में नातन जागरण मंच ने 8 सूत्री मांगों को लेकर एक रैली की थी

 

इसे चिन्मय कृष्ण दास ने भी संबोधित किया था

 

इस दौरान न्यू मार्केट चौक पर कुछ लोगों ने आजादी स्तंभ पर भगवा ध्वज फहराया था

 

इस ध्वज पर आमी सनातनी लिखा हुआ था

 

रैली के बाद ‌BNP नेता फिरोज खान ने राजद्रोह का केस दर्ज कराया था

 

फिरोज खान ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप लगाया है

 

बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से हटाने के लिए हुए प्रदर्शन के दौरान 6 अगस्त को खुलना जिले में इस्कॉन मंदिर को निशाना बनाया गया था। इसमें भगवान जगन्नाथ की मूर्तियों को जला दिया गया था। इस हमले के बाद चिन्मय दास ने कहा था कि चटगांव में तीन अन्य मंदिरों पर भी खतरा है। हिन्दू समुदाय मिलकर उनकी सुरक्षा में लगे हैं। दास का कहना था कि हिंसा से बचने के लिए हिन्दू त्रिपुरा और बंगाल के रास्ते भारत में शरण ले रहे हैं।


चिन्मय दास हिन्दू मंदिरों की सुरक्षा के मुद्दे को काफी समय से उठाते रहे हैं। बांग्लादेश के चटगांव में इस्कॉन मंदिर और सनातन धर्म पर विवादित टिप्पणी से हिंदुओं में नाराजगी है। इसे लेकर हजारों की संख्या में हिंदू समुदाय ने प्रदर्शन किया। विरोध में जब हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए तो आर्मी ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। साथ ही इस्लामिक कट्टरपंथी भी सेना और पुलिस के साथ मिलकर हिंदू समुदाय के प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रहे हैं।

25 November 2024

संभल पर सियासी दंगल ! जामा मस्जिद के सर्वे पर बवाल। कैसे भड़की हिंसा ? शाही मस्जिद पर हिंदू पक्ष का क्या है दावा ? मुस्लिम पक्ष का क्या है दावा ?

उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा पर सियायत शुरू हो गई है। संभल के सियासी दंगल में अबतक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस ने सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सदर विधायक नवाब इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल पर हिंसा भड़काने की एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने हिंसा से जुड़े मामले में 7 एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें 6 नामजद और 2500 से ज्यादा अज्ञात हैं। अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। हिंसा में जिन 4 युवकों की जान गई, पोस्टमॉर्टम के बाद उनका डेड बॉडी देर रात ही सुपुर्दे खाक कर दिया गया। संभल तहसील में फिलहाल इंटरनेट बैन कर दिया गया है। सभी स्कूल-कॉलेज को भी बंद रखा गया है। एक दिसंबर तक संभल जिले में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है।

 

मृतकों के परिजन का दावा है कि पुलिस की गोली से मौत हुई है। जबकी पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि 'पुलिस फायरिंग में कोई मौत नहीं हुई है। हमलावरों की फायरिंग में युवकों की जान गई है।' संभल पुलिस ने हिंसा से जुड़े उपद्रवियों के पहली बार फुटेज जारी किए हैं।

 

कैसे भड़की हिंसा ?

 

रविवार सुबह 6:30 बजे डीएम-एसपी के साथ एक टीम सर्वे करने पहुंची थी

टीम को देखकर मुस्लिम समुदाय के लोग भड़क गए

कुछ ही देर में करीब दो से तीन हजार लोग जामा मस्जिद के बाहर पहुंच गए

पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो भीड़ में शामिल लोगों ने पथराव कर दिया

इसके बाद भगदड़ जैसे हालात हो गए

छतों से भी जमकर पथराव किया गया

भारी पथराव के कारण पुलिस को कुछ देर के लिए भागना पड़ा

बवाल इतना बढ़ गया कि पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले दागे

फिर लाठीचार्ज करके भीड़ को खदेड़ा गया

भगदड़ में 4 लोगों की मौत हो गई

 

संभल जामा मस्जिद हिंसा में हुई मौतों को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी मर्डर बता रहे है। जबकी पुलिस ने इसे भगदड़ में हुई मौत करार दिया है।  ओवैसी हाईकोर्ट के सिटिंग जज से इंक्वायरी कराने की मांग की है। साथ ही आरोप लगाते हुए कहा कि 'जिस दिन कोर्ट में सुनवाई होती है, उसी दिन ऑर्डर हो जाता है और उसी दिन सर्वे भी हो जाता है। 1948 में ऐसा हुआ था बाबरी मस्जिद में। असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि संभल की चंदौसी की जामा मस्जिद कोई 100 साल या 50 साल पुरानी नहीं है, बल्कि दो सौ, ढाई सौ या उससे भी ज्यादा साल पुरानी है।

 

शाही मस्जिद पर हिंदू पक्ष का क्या है दावा ?

 

संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यह एक प्राचीन हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी

इस दावे को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ऐतिहासिक साक्ष्यों से जोड़ने की कोशिश की गई है

ASI की 1875 की रिपोर्ट में इस मस्जिद में मौजूद एक शिलालेख का उल्लेख सबसे बड़ा प्रमाण बताया गया है

रिपोर्ट के अनुसार, मस्जिद में एक शिलालेख है, जिसमें लिखा है कि इसका निर्माण 933 हिजरी में मीर हिंदू बेग ने पूरा किया था

मीर हिंदू बेग बाबर का दरबारी था, जिसने एक हिंदू मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित किया

ASI के मुताबिक, यह शिलालेख इस बात का प्रमाण है कि मस्जिद का निर्माण हिंदू धार्मिक स्थल को बदलकर किया गया था


संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि इसे भगवान विष्णु के हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाया गया था

इस दावे का आधार बाबरनामा और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट को माना जा रहा है


ASI
की 1875 की रिपोर्ट में भी कई ऐसे साक्ष्य दर्ज हैं, जो हिंदू मंदिर के अस्तित्व की ओर संकेत करते हैं


मस्जिद के हिंदू खंभे मुस्लिम खंभों से अलग हैं और विशुद्ध हिंदू वास्तुकला का प्रतीक हैं


ASI
के अनुसार, मस्जिद के गुंबद का जीर्णोद्धार हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल में हुआ था


मस्जिद की संरचना में हिंदू मंदिर के कई चिह्न पाए गए, जिन्हें बाद में प्लास्टर से ढक दिया गया


हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन ने अपनी याचिका में बाबरनामा का जिक्र किया है

बाबरनामा, जिसे बाबर ने खुद लिखा था और ब्रिटिश ओरिएंटलिस्ट एनेट बेवरिज ने अनुवाद किया

 

बाबरनामा के पृष्ठ 687 पर लिखा है कि बाबर के आदेश पर उसके दरबारी मीर हिंदू बेग ने संभल के हिंदू मंदिर को जामा मस्जिद में परिवर्तित किया

 

यह विवरण शिलालेख से मेल खाता है, जिसमें मीर हिंदू बेग का नाम और 933 हिजरी वर्ष में मस्जिद के निर्माण का उल्लेख है

 

संभल में शाही जामा मस्जिद, शहर के केंद्र में ऊंचे टीले पर कोर्ट पूर्वी इलाके में बनी हुई है। इस मस्जिद को लेकर हिंदू-मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में अलग-अलग दावे किए है। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि,

 

मुस्लिम पक्ष का क्या है दावा ?


शाही जामा मस्जिद का निर्माण 1529 में मीर बेग ने करवाया था

मीर बेग मुगल बादशाह बाबर का कमांडर था

मस्जिद के अंदर बने एक शिलालेख की ओर मुस्लिम पक्ष इशारा करता हैं

शिलालेख पर बाबर का नाम लिखा है

जामा मस्जिद का उल्लेख बाबर नामा में मिलता है

सुप्रीम कोर्ट के 1991 के उस ऑर्डर को आधार बनाकर मुस्लिम पक्ष अपना विरोध दर्ज कराता है

जिसमें अदालत ने कहा था कि 15 अगस्त 1947 से जो भी धार्मिक स्थल जिस भी स्थिति में हैं, वो अपने स्थान पर बने रहेंगे

 

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि संभल की घटना सरकार द्वारा जानबूझकर कराई गई थी, ताकि चुनावी प्रक्रियाओं में की गई गड़बड़ियों से ध्यान हटाया जा सके।

 

संभल में शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने 'हिंसा के लिए पूरी तरीके से प्रशासन जिम्मेदार है। SDM वहां मौजूद थीं। उन्होंने मस्जिद परिसर की हौज में भरे पानी को खाली करवाने का ऑर्डर दिया। जबकि DM और SP ये कह रहे थे कि हौज का पानी डंडे से माप लो। SDM नहीं मानी और उन्होंने हौज खाली करवा दी। ये पानी जब मस्जिद से बाहर निकला तो पब्लिक में ये अफवाह फैल गई कि मस्जिद में खुदाई चल रही है। इसलिए लोग उत्तेजित होने शुरू हो गए।

 

संभल पर सियासत लगातार जारी है। हर दल के नेता हिंसा पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। संभल हिंसा पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का कहना है कि 'यह घटना विपक्ष की वजह से हुई, यह गोधरा कांड की तरह विपक्ष की पूर्व नियोजित रणनीति थी। यह सर्वेक्षण टीम पर हमला नहीं था, बल्कि भारत के संविधान और लोकतंत्र पर हमला था। वे देश को जलाना चाहते हैं। वे संभल को बांग्लादेश बनाना चाहते हैं। जो लोग मारे गए, वे हमलावरों की गोली से मारे गए, पुलिस की गोली से नहीं, यह पोस्टमार्टम से स्पष्ट है। देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।'

 

विश्व हिंदू परिषद ने संबल जिले में हुई हिंसा की निंदा की है। पूरे हिंसा में शामिल लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेन्द्र जैन ये भी कहा है कि हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई दोषियों से की जाय।

संभल हिंसा कि आग में जल रहा है और उधर राजनीतिक दलों का संभल में दंगल जारी। अब देखना होगा कि हिंसा की ये आग कबतक बूझती है