22 June 2020

मेवाती हिन्दुओं की प्रमुख मांगें और कानूनी उपाय

 

मेवाती हिन्दुओं की प्रमुख मांगें और कानूनी उपाय

1 मुसलामानों के द्वारा खरीदी गई हिन्दुओं की संपत्तियों का निबंधन को रद्द किया जाय

कानूनी प्रावधान - भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 में प्रावधान, धोखाधड़ी या जबरन दबाव बना कर खरीदी गई जमीन का निबंधन रद्द हो सकता है

2 मंदिरों और मठों की संपत्तियों को हिन्दुओं के हाथों में वापस दिया जाय, हिन्दुओं की संपत्ति बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाया जाय

कानूनी प्रावधान - सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 में कानूनी प्रावधान है

3 पलायन कर चुके हिन्दुओं को सम्मानपूर्वक वापस बसाया जाय

कानूनी प्रावधान - जम्मू कश्मीर हिन्दू पुनर्वास अधिनियम की  तर्ज पर हरियाणा सरकार मेवाती हिन्दुओं के लिए पुनर्वास अधिनियम बनाएं

4 गरीब हिन्दुओं को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत कॉलोनी बनाकर बसाया जाय

कानूनी प्रावधान - “प्रधानमंत्री आवास योजना” या “मुख्यमंत्री आवास योजना” के तहद राज्य सरकार मेवाती हिन्दुओं को कॉलोनी बनाकर बसाएं

5 मिलिट्री और पैरामिलिट्री फ़ोर्स की स्थाई तैनाती की जाय 

 

कानूनी प्रावधान - सेना अधिनियम 1950 और नौसेना अधिनियम 1957 के तहत भारत सरकार स्थाई कैंप बना सकती है

 

6 सेवानिवृत सेना के अधिकारियों को यहां बसाया जाय

कानूनी प्रावधान - रक्षा मंत्री भूतपूर्व सैनिक कल्याण कोष के तहत भारत सरकार सेवानिवृत सेना के अधिकारियों को बसा सकती है

 

7 मौजूदा अधिकारियों की जगह निष्पक्ष अधिकारी को नियुक्त किया जाय

कानूनी प्रावधान – हरियाणा सिविल सेवा सरकारी कर्मचारी आचरण नियम के तहत कार्रवाई कर सकती है

 

8 दलित हिन्दुओं पर अत्याचार के लिए थाना प्रभारी को जिम्मेदार बनाया जाय

कानूनी प्रावधान - दंड प्रक्रिया संहिता 1973 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में कानूनी प्रावधान

 

9 सभी मदरसों और मस्जिदों की NIA से जांच कराई जाय

 

कानूनी प्रावधान- राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 और  ग़ैरक़ानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम 1967 (यूएपीए) के तहद भारत सरकार कार्रवाई करे 

                 

10 पीड़ित हिन्दुओं से सम्बंधित मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाय

कानूनी प्रावधान- दंड प्रक्रिया संहिता 1973 में कानूनी प्रावधान

11 जोगेंद्र नाथ मंडल का स्मारक बनाया जाय

कानूनी प्रावधान - भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2019 के तहद राज्य जमीन का अधिग्रहण करके स्मारक बना सकती है

 

12 हरियाणा गोरक्षा कानून को सक्रियता से लागू किया जाय

कानूनी प्रावधान- हरियाणा गो-संरक्षण संवर्धन अधिनियम 2015 को राज्य सरकार सख्ती से लागू कर सकती है  

 

13 हरियाणा में प्रभावी धर्मांतरण रोकथाम कानून बनाया जाय

कानूनी प्रावधान- दंड प्रक्रिया संहिता 1973 में कानूनी प्रावधान

 

14 सम्पूर्ण राज्य में जामात पर प्रतिबन्ध लगाया जाय

कानूनी प्रावधान- राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 और  ग़ैरक़ानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम 2019 (यूएपीए) के तहभारत सरकार कार्रवाई करे 

 

15 महिला सुरक्षा के विशेष प्रबंध किया जाय

कानूनी प्रावधान- दंड प्रक्रिया संहिता 1973 और भारतीय दंड संहिता  1860 में कानूनी प्रावधान

 

16 हिन्दू धर्म संस्कृति की शिक्षा देने वाले संस्थानों को खोलने के अनुमति दी जाय    

कानूनी प्रावधान- भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2019 के तहराज्य सरकार संस्थानों को खोलने के अनुमति दे सकती है

17 मेवात में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए संसद और विधानसभा की सीटें आरक्षित की जाय

कानूनी प्रावधान- जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के तहराज्य सरकार सीटें आरक्षित कर सकती है

18 हिन्दुओं की समशान घाट से मुसलमानों के अबैध कब्ज़ा को हटाया जाय. सरकार समशान घाट के लिए हिन्दुओं को भूमि उपलब्ध कराएं

कानूनी प्रावधान- भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2019 के तहराज्य सरकार हिन्दुओं को भूमि उपलब्ध करा सकती है.

 


मेवात का पूरा इलाका हरे रंग में रंग गया है

मेवात का पूरा इलाका हरे रंग में रंग गया है. हथीन तहसील और राजस्थान के अलवर..भरतपुर जिलों की कई तहसीलें भी मुस्लिम बहुल हो चुकी है. कई तहसीलों में इनकी आबादी 90  प्रतिशत से भी ज्यादा है. मेवात के सभी तहसीलों में मुस्लिम आबादी पिछले चार दशकों के दौरान सबसे ज्यादा बढ़ी है. 2011 के जनगड़ना की रिपोर्ट को माने तो यहाँ मुस्लिम आबादी 62 प्रतिशत से बढ़कर अब 80 प्रतिशत तक हो गई है.

वहीँ भरतपुर की पहाड़ी तहसील वाले मेवात की बात करें तो यहाँ पर मुस्लिम आबादी 1991 में 63 थी...जो आज बढ़ कर 83  प्रतिशत हो गई है. आजादी से पहले यहाँ पर हिन्दू बहुसंख्यक थे मगर तबलीगी जमात ने जब अपना जेहादी आंदोलन का प्रचार प्रसार शुरू किया तो यहाँ के हिन्दू आबादी के लिए खतरा मडराने लगा. और आज हिन्दू यहाँ सबसे ज्यादा निशाने पर हैं.

2011 के जनगड़ना रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 91 लाख मुस्लिम आबादी सिर्फ मेवात के अन्दर है. अगर आकड़ें की बात करें तो 81 प्रतिशत की दर से यहाँ पर मुस्लिम आबादी बढ़ी है. वहीँ हिन्दू आबादी में सिर्फ 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है..जो कि मुस्लिम आबादी बृद्धि दर से काफी कम है. 2001 में यहां मुसलमानों की जनसंख्या 6.3 लाख से बढ़कर 9.1 लाख हो गई है. जबकि हिन्दू आबादी 1.8 से बढ़कर 2.1 सिर्फ रह गई है.

 

राजस्थान के भरतपुर कामां तहसील में 3.5 लाख मुस्लिम आबादी हैं. यहाँ की आबादी का 54 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मुस्लिम बहूल है. इस क्षेत्र में भी मुसलमानों की वृद्धि बहुत तेज़ी से हुई है. 2001-2011 के दौरान यहाँ पर मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी 48.4 थी...जो आज बढ़कर 54.2 प्रतिशत हो गई है.

अलवर जिले की अलवर और लछमनगढ़ तहसील भी मेवात क्षेत्र में आती है. इन दोनों तहसीलों में मुसलमानों की हिस्सेदारी 16.6 और 24.9 प्रतिशत है. यहाँ पर कुल 1.88 लाख मुस्लिम आबादी है. 2001-2011 में, यहाँ मुसलमान 38.8 प्रतिशत बढ़े हैं, जबकि हिन्दू आबादी में सिर्फ 19.2 प्रतिशत की बृद्धि हुई बढ़े हैं. अगर मेवात क्षेत्र में चाइल्ड रेश्यो की बात करें तो हिन्दू बच्चों की आबादी यहाँ पर 15.9 है. जबकि मुसलमानों के बच्चों की संख्या 24.6 है. ऐसे में पूरे रिपोर्ट की बात करें तो अब मेवात... सीरिया और अफगानिस्तान से भी ज्यादा डरावना साबित हो रहा है. ये रिपोर्ट जनसख्याँ नियंत्रण क़ानून के लिए काफी पुख्ता साबुत है. मगर फिर भी सरकारें जान कर भी अनजान बनी हुई है.


ऑनलाइन फ्रॉड का केंद्र मेवात

ओएलएक्स साइट्स पर फौजी बनकर दिखाते हैं वाहन

60 प्रतिशत  फ्रॉड की घटना हरियाणा व राजस्थान के मेवात में

ऑनलाइन फिशिंग की अपराध यहां आम है

मेवात में पुलिस गिरफ़्तारी के लिए नहीं जाती है

एटीएम कार्ड की डिटेल लेकर करते हैं फ्रॉड

पैसे ट्रांसफर करने के नाम पर भी करते हैं फ्रॉड

फोटोग्राफर, नक्शा बनवाने के बहाने करते हैं ठगी


सीसीटीवी कैमरे लगवाने के नाम पर भी ठगी करते हैं


ऑनलाइन सर्विस से जुड़ी सेवा प्रदाताओं को बनाते हैं निशाना


जामताड़ा की तरह फर्जी ओटीपी से करते हैं ठगी


रुकी हुईं इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर करते हैं ठगी


बैंकों के रुके हुए लोन के नाम पर करते हैं ठगी


जस्ट डायल से नंबर लेकर करते हैं ठगी


बैंक खातों को हैक कर निकालते हैं रकम


आधार लिंक व पेटीएम केवाईसी के नाम पर करते हैं ठगी

 


देशभर को ठग रही मेवाती गैंग

 

नूंह, हथीन और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र में दर्ज है 206 शिकायतें

मेवात में हुईं ऑनलाइन फ्रॉड की राज्यवार घटनाएं 

 

हरियाणा- 45

राजस्थान- 32

बेंगलुरु- 12

तमिलनाडु- 14

केरल- 8

पश्चिम बंगाल- 11

मध्यप्रदेश- 7

उत्तर प्रदेश- 15

पंजाब- 18

दिल्ली- 6

झारखंड- 15

बिहार- 23

 

नूंह के पुन्हाना के 10 गांव ऑनलाइन फ्रॉड का केंद्र है


इंदाना, नई, बिछोर, तिरवाडा और बासेडा फ्रॉड का प्रमुख अड्डा है


मेवात में सालाना 150 करोड़ से अधिक की ऑनलाइन ठगी की घटनाएं


मेवात और उसके आसपास के थाने में ऑनलाइन ठगी की 8700 शिकायतें


5 हजार मुकदमों का लिंक मेवात क्षेत्र से है मेवात का नूंह लंबे समय से सोने की नकली ईंट के नाम पर ठगी के लिए मशहूर है.

लश्कर के पैसों से बनी मेवात में मस्जिदः एनआईए

पाकिस्तान में खुलेआम घूमने वाला आतंकवादी सरगना हाफिज सईद अब भारतीय मुसलमानों का 'दिल जीतने' के लिए भारत में मस्जिद और मदरसे बनवा रहा है। उसके पैसे से बनने वाली एक मस्जिद की जांच इन दिनों राष्ट्रीय जांच एजेंसी एन.आई.ए. कर रही है। मरकजी मस्जिद के नाम से बनने वाली यह मस्जिद हरियाणा के पलवल जिले के गांव उटावड़ में बन रही है। हालांकि जांच के कारण इन दिनों मस्जिद का निर्माण कार्य बंद है। कहा जा रहा है कि यह इस इलाके की सबसे बड़ी मस्जिद है। मस्जिद के नाम पर मुस्लिमों के दबदबे वाली ग्राम पंचायत ने 20 बीघा जमीन दी है।बता दें कि यह गांव मेवात का हिस्सा है, जो हरियाणा में एकमात्र मुस्लिम-बहुल क्षेत्र है।

सूत्रों के अनुसार जुलाई महीने में एन.आई.ए. को पता चला कि दिल्ली के कुछ लोग दुबई स्थित फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफ.आई.एफ.) के लिए काम करते हैं। यह हाफिज सईद द्वारा गठित जमात-उद-दावा का सहयोगी संगठन है। जानकारों का कहना है कि कहने के लिए तो यह 'इंसानियत' के लिए काम करता है, पर इसका असली काम है आतंकवादियों को पैसे उपलब्ध कराना। यह कश्मीरी आतंकवादियों को भी हवाला के जरिए पैसा देता है। इसमें भारत के कुछ कट्टरवादी तत्व भी सहयोग करते हैं। इसकी भनक लगते ही एन.आई.ए. ने ऐसे तत्वों की निगरानी शुरू की। पुख्ता जानकारी के बाद 25 सितंबर को दिल्ली के निजामुद्दीन से मोहम्मद सलमान और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया गया। उसके दो साथी हैं मोहम्मद सलीम उर्फ मामा और सज्जाद अहमद वानी। इनके पास से 1.56 करोड़ रु. और 43,000 की नेपाली मुद्रा भी मिली थी।

सूत्रों के अनुसार मोहम्मद सलीम हवाला कारोबारी है और दिल्ली का रहने वाला है। वह दिल्ली और दुबई के बीच प्रमुख कड़ी था और हवाला के जरिए पैसा मंगाता था। उस पैसे को ठिकाने लगाने का काम सलमान करता था। सलमान मूलत: उटावड़ का रहने वाला है, लेकिन बरसों से दिल्ली में रहता है। दिल्ली में रहते हुए वह अपने गांव में मस्जिद बनवा रहा था। निर्माण कार्य देखने के लिए वह हर जुम्मे को उटावड़ जाता था। पता चला है कि इस मस्जिद का नक्शा सलमान ने दुबई में बनवाया था। सूत्रों के अनुसार वह अब तक हवाला के जरिए मिले 70,00000 रु. को ठिकाने लगा चुका है। कहा जा रहा है कि इसमें से कुछ पैसे आतंकवादियों को दिए गए और बाकी मस्जिद के निर्माण में खर्च हुए। वहीं सलमान के भाई यूसुफ का कहना है कि मस्जिद के निर्माण के लिए देश-विदेश से पैसा लाया तो गया है, लेकिन इसका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है। सज्जाद अहमद वानी कश्मीर का रहने वाला है और वह कई साल से आतंकवादियों को पैसे पहुंचाने का काम कर रहा था। सूत्रों का कहना है कि इन तीनों ने हवाला के जरिए आतंकवादियों तक पैसा पहुंचाने की बात कबूली है।

सूत्रों के अनुसार एफ.आई.एफ. का उपाध्यक्ष कामरान नाम का एक पाकिस्तानी है। वह दुबई में रहता है और वहीं से अनेक देशों में आतंकवादियों के लिए पैसे का इंतजाम करता है। सूत्रों ने यह भी बताया कि कामरान के साथ सलमान और उसके गुर्गों के गहरे रिश्ते हैं। सलमान कई बार दुबई जा चुका है। सूत्रों ने यह भी बताया कि सलमान अपने कुकर्मों को छिपाने के लिए मेवात और अन्य मुस्लिम-बहुल इलाकों में मस्जिद और मदरसों का निर्माण करवाता है और गरीब मुसलमानों के लिए सार्वजनिक निकाह का आयोजन करता है, और अनेक तरह से मदद भी करता है। इस कारण आम मुसलमानों के बीच उसकी 'समाजसेवक' वाली छवि है। सलमान तब्लीगी जमात से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि उसके अब्बा के भी तब्लीगी जमात से संबंध हैं। तब्लीगी जमात मुसलमान युवाओं को कट्टरवादी बनाने में अहम भूमिका निभाती है।

उटावड़ की इस मस्जिद में आतंकवादियों के पैसे लगने की खबर के बाद मेवात के अनेक लोग वहां बन रहीं दूसरी मस्जिदों और मदरसों की भी जांच की मांग कर रहे हैं। मीडिया रपटों के अनुसार मेवात के लोगों की इस मांग का ही असर है कि पिछले चार वर्ष में मेवात में जितनी भी मस्जिदें या मदरसे बने हैं, या अभी जो बन रहे हैं, उन सबकी जांच करने का निर्णय लिया गया है। उन लोगों की भी जांच करने का फैसला लिया गया है, जो किसी न किसी मस्जिद या मदरसे से जुड़े हैं और जो हर महीने या दो महीने पर विदेश जाते हैं। उटावड़ और उसके आसपास के इलाकों में पिछले दो वर्ष में कितने पासपोर्ट बने हैं, इसकी भी जांच शुरू कर दी गई है। एक जानकारी के अुनसार बहीन थाने के अंतर्गत 2017 में 774 और 2018 में अब तक 510 पासपोर्ट बनाए गए हैं। जांच एजेंसियां यह जानना चाहती हैं कि इनमें से कितने लोग विदेश गए और कब गए, कहां गए, क्यों गएसूत्रों के अनुसार जांच के दौरान यदि पता चलेगा कि सलमान और उसके गुर्गों ने हवाला के पैसे से और कहीं कुछ बनाया है तो एन.आई.ए. उन सबकी जांच करेगी।

उल्लेखनीय है कि पूरे मेवात में मस्जिदों और मदरसों की बाढ़ आई हुई है। हर गांव में एक से ज्यादा मस्जिदें और मदरसे हैं। 'भारत बचाओ संगठन' के संयोजक विक्रम सिंह यादव कहते हैं, ''एक ओर तो कहा जाता है कि मेवात के मुसलमान बहुत ही गरीब हैं, वहीं दूसरी ओर वे वहां मस्जिद और मदरसे आएदिन बन रहे हैं। जो लोग मदरसे या मस्जिद बनवा रहे हैं, वे गरीबों की मदद क्यों नहीं कर रहे हैं?'' इसका जवाब भी वही देते हैं। कहते हैं,''मेवात बहावी विचारधारा का केंद्र बन चुका है और यह विचारधारा किसी गैर-मुसलमान को बर्दाश्त नहीं करती। इसलिए वहां जो कुछ हो रहा है, उसके पीछे का मकसद है मेवात से हिंदुओं को भगाना।'' मेवात में ऐसे विचार रखने वालों की कोई कमी नहीं है। पिन्गवां निवासी जसवंत गोयल कहते हैं, ''उटावड़ में बन रही मस्जिद भारत की राजधानी दिल्ली की नाक के नीचे आतंकवादी अड्डा साबित हो सकती है, क्योंकि इससे पहले मेवात क्षेत्र में जितने भी आतंकवादी पकड़े गए हैं, वे किसी मस्जिद या मदरसे से ही पकड़े गए हैं।'' उन्होंने यह भी कहा, ''मेवात में आतंकवादियों को बचाने वाली मानसिकता भी दिखती है। यदि यहां पल रहे आतंकवादी कुछ करते हैं तो इससे मेवात के लोगों, चाहे वे हिंदू हों या मुसलमान, को भी नुकसान होगा, उनकी छवि खराब होगी। इसलिए मैं तो मेवात के लोगों से आग्रह करता हूं कि वे किसी भी दहशतगर्द को बचाने के लिए सामने न आएं।''

एक अन्य समाजसेवी कहते हैं, ''मेवात में मानसिक आतंकवाद पहले से है। अब आतंकवादी भी यहां जड़ें जमा रहे हैं। मस्जिदों और मदरसों में इन्हंे शरण दी जाती है। इसलिए यहां बन रहे या बन चुके मदरसों और मस्जिदों की जांच होनी चाहिए कि इनके लिए पैसा किसने दिया?'' इस संबंध में समाजसेवी बिजेंदर शास्त्री की टिप्पणी गौर करने लायक है। वे कहते हैं, ''गलत पैसे से बनने वाली मस्जिद इबादत के लिए तो सही जगह नहीं है। जरूर इसका मकसद कुछ और ही होगा जिसे मजहब का आवरण देकर दुनिया की नजरों से बचाने की कोशिश की जा रही है।'' खैर, देर से ही सही मेवात में जांच एजेंसियों ने अपना काम शुरू कर दिया है। उम्मीद है, मेवात में सक्रिय देश-विरोधी तत्व बेनकाब होंगे और वहां सभी समुदाय के लोग सौहार्द के साथ रह पाएंगे।

पूरे मेवात में बड़ी संख्या में मस्जिदों और मदरसों का निर्माण हो रहा है। मुख्य सड़क के किनारे हर मोड़ पर मस्जिदें बन रही हैं और 8-10 गाँवों के बीच एक बड़ा मदरसा बन रहा है। कोई भी अपराध करके अपराधी सड़क के किनारे की मस्जिद में छिप जाते हैं। जो अपराधी मस्जिद में छिप जाता है वह पुलिस की पकड़ से बाहर हो जाता है, क्योंकि पुलिस मस्जिद के अंदर तलाशी लेने से बचती है। एकाध बार पुलिस ने ऐसा किया तो पुलिस पर मजहबी ग्रंथों के अपमान का आरोप लगाकर खूब हंगामा मचाया गया।

 मेवात के कई हिस्सों में बंगलादेशी मुस्लिम घुसपैठियों और म्यांमार से भगाए गए रोहिंग्यायी मुस्लिमों को बसाया जा रहा है। इन्हें बसाने के लिए ग्राम पंचायतों की जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। केनाल रेस्ट हाउस (यह एक स्थान का नाम है), पुन्हाना में तम्बू लगाकर इन मुस्लिमों को रखा जाता है। इसके बाद अन्य पंचायतों में उन्हें बसाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन मुस्लिमों की मदद जमीयत उलेमा हिन्द के अलावा मेवात के अनेक मजहबी संगठन, पंचायत प्रतिनिधि और विभिन्न राजनीतिक दलों के मुस्लिम नेता कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब 200 विदेशी मुस्लिम परिवारों को नूंह के रेवसन और फिरोजपुर झिरका के पास बसाया गया है। सूत्रों के अनुसार इन दिल्ली जामा मस्जिद के इमाम बुखारी के द्वारा जारी धर्मान्तरण पत्र मुस्लिमों की मदद के लिए स्थानीय मुस्लिमों से पैसा वसूला जा रहा है। यह भी पता चला है कि इन मुस्लिमों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की कोशिश की जा रही है।

तब्लीगी जमात :: मेवात के मुस्लिमों में कट्टरवाद घोलने का काम तब्लीगी जमातें कर रही हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि जमात के लोग गांव-गांव घूमते हैं और मुस्लिम युवाओं को जिहाद और लव जिहाद के लिए उकसाते हैं। साथ ही हिन्दुओं को मुस्लिम बनाने का काम करते हैं। पिन्गवां के एक युवक ललित ने बताया कि करीब एक साल पहले मौलानाओं के भाषण से प्रभावित होकर वह मुस्लिम बन गया था और इस्लाम का प्रचार करने लगा था। किन्तु जल्दी ही उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और आर्य समाज के कार्यकर्ताओं के सहयोग से पुन: हिन्दु हो गया। इस तरह की घटनाएं मेवात में प्राय: रोज ही घटती हैं। मेवात के अधिकतर मुस्लिम युवा ट्रक चालक हैं। इस बहाने उन्हें पूरे भारत में जाने का मौका मिलता है। आए दिन ये युवा कहीं न कहीं से हिन्दु युवतियों को साथ ले आते हैं। कुछ दिन मौज-मस्ती करते हैं फिर उन्हें आपस में ही बेच देते हैं। आर्य वेद प्रचार मंडल मेवात के संरक्षक श्री पदमचंद आर्य ने बताया कि ऐसी अनेक युवतियों को हमारे कार्यकर्त्ताओं ने जान हथेली पर रखकर मुस्लिमों से छुड़ाया है।

इस्लामी शैली में सरकारी भवन :: मेवात में जो भी सरकारी भवन बन रहे हैं, उनमें इस्लामी शैली की छाप स्पष्ट रूप से दिखती है। उदाहरण के लिए आप नूंह में बन रहे नए सचिवालय और नूंह के पास ही नल्लड़ गांव में बन रहे चिकित्सा महाविद्यालय को ले सकते हैं। ये दोनों भवन इस्लामी शैली में बन रहे हैं। इनमें मस्जिद की तरह मीनारें और गुम्बद हैं। क्या हिन्दु बहुल क्षेत्र में कोई सरकारी भवन मंदिर की शैली में बन सकता है? यदि नहीं तो मेवात में ऐसा क्यों हो रहा है? मांडीखेड़ा का अल-आफिया जनरल अस्पताल, जिसका निर्माण ओमान के सुल्तान ने अपनी बेटी के नाम पर किया है, भी पूरी तरह इस्लामी शैली में है। सवाल उठता है कि इस्लामी शैली में एक अस्पताल के भवन का निर्माण क्यों किया गया? इसकी अनुमति किसने दी?

मेवात में आएदिन पुलिसकर्मियों की पिटाई होती है। पिछले 10 महीने में ऐसी 40 घटनाएं हो चुकी हैं। जब भी पुलिस किसी अपराधी, तस्कर, बलात्कारी या हत्यारे की धर-पकड़ के लिए जाती है तो स्थानीय लोग पुलिसकर्मियों को घेर कर पीटते हैं। दिल्ली में भी मेवात के युवा डकैती, हत्या, छीना-झपटी, बलात्कार आदि घटनाओं में शामिल पाए जाते हैं। दिल्ली में उन्हें मेवाती गिरोहके नाम से जाना जाता है। जब भी दिल्ली पुलिस मेवाती गिरोह के किसी अपराधी को पकड़ने के लिए मेवात जाती है तो उसकी भी पिटाई होती है।

मेवात में हिन्दुओं का हौसला बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक, भाजपा एवं आर्य समाज के कार्यकर्ता और कुछ अन्य संगठनों के लोग प्रयासरत हैं। प्रो. जयदेव आर्य कहते हैं, ‘जब भी हिन्दुओं के साथ कोई घटना होती है इन संगठनों के कार्यकर्ता ही उनकी ओर से आवाज उठाते हैं। इसके बाद ही प्रशासन हिन्दुओं की रक्षा के लिए कुछ कदम उठाता है।भारतीय शुद्धि सभा एवं गोरक्षा समिति के बैनर तले मेवात में काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सुन्दर मुनि कहते हैं, ‘मेवात में स्थिति तब ठीक हो सकती है जब मेव मुस्लिमों को उनकी प्राचीन संस्कृति से अवगत कराया जाए। उन्हें यह बताने की जरूरत है कि मेवात के हिन्दुओं और मुस्लिमों का खून एक ही है, फिर अपने हिन्दु भाइयों को प्रताड़ित क्यों कर रहे हो?’

मेवात में इस्लामिक धर्मांतरण का खेल सदियों पुराना

मेवात में इस्लामिक धर्मांतरण का खेल सदियों पुराना है. 14 वीं शताब्दी में तुगलक वंश के समय मेवात के लोगों को जबरन मुस्लिम बनाया गया था. फिर मेवाती हिन्दू वर्षों तक अपनी पहचान को बचाने में सफल रहे. 1920 के बाद कई मजहबी संगठनों ने मेवातियों को जबरन हरे रंग में रंगना शुरू कर दिया. इनके दिमाग में ऐसे जेहादी जहर घोला गया की यहां के मुस्लिम पाकिस्तान की मांग का समर्थन करने लगे. यही कारण है की जब पाकिस्तान बना तो यहां के बहुत से मुस्लिम पाकिस्तान चले गए. मगर जो यहीं रह गये वो अब मेवात को ही पाकिस्तानबनाने में लगे हैं. यही कारण है कि अब मेवात को लोग मिनी पाकिस्तान भी कहने लगे हैं.

 

हरियाणा के मेवात को जेहादियों ने बंगलादेशबना दिया है। बंगलादेश में करीब 8 प्रतिशत हिन्दू रह गए हैं, यही स्थिति मेवात की भी हो गई है. 1947 में बंगलादेश में करीब 30 प्रतिशत और मेवात में भी लगभग 30 प्रतिशत हिन्दू थे. अब पूरे मेवात को पाकिस्तानकी शक्ल देने देने का प्रयास तेजी से हो रहा है.

आज हरियाणा के मेवात में हिन्दुओं के साथ वह सब कुछ हो रहा है जो बंगलादेश या पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ होता है. हिन्दू लड़कियों और महिलाओं का अपहरण, उनका मतान्तरण और फिर किसी मुस्लिम के साथ जबरन निकाह अब यहाँ के जहादियों का प्रमुख धंधा बन चुका है. मेवात के सभी 508 गांव लगभग हिन्दू-विहीन हो चुके हैं. किसी- किसी गांव में हिन्दुओं के दो-चार परिवार ही सिर्फ रह गए हैं. ऐसे में अगर अब भी शासन और प्रशासन समय रहते नहीं जागा तो फिर मेवात पूरे देश के लिए नासूर बन जयेगा.