22 June 2020

लॉकडाउन में माज़ार जेहाद

जब आप अपने घरों में थे उस वक्त पूरे देशभर में एक माहा साजिश चल रही थी जी हाँ, लॉकडाउन में माहा साजिश...और ये माहा साजिश थी माज़ार जेहाद का.. जी हाँ, आपने बिलकुल सच सुना माज़ार जेहाद. लॉकडाउन से पहले जिस पार्क में आप मॉरनिंग वॉक के लिए नियमित रूप से जाते थे आज वहां कुकुरमुत्ते की तरह लावारिश मज़ारे उग आई है. दिल्ली-नोएडा सहित देश भर में सरकारी जमीन को हड़पने और भारत का इश्लामिकरण करने के लिए जगह जगह हजारों मजारे बनाई जा रही  है.


पार्क के जिस ग्राउंड पर आप वॉक करते थे योगाभ्याग और व्यायाम करते थे हो सकता आने वाले दिनों में वहां आपको योगा मैट तक बिछाने की जगह ना मिले. हां यदि आप नमाज पढ़ना चाहते हैं तो आपको चादर बिछाने की इज़ाजत जरूर मिल सकती है. हम ऐसा इसलिए कह  रहे हैं क्योकि यहाँ पर अब मुसलमानों का जेहादी कब्ज़ा हो चुका है.

आप बिल्कुल चौंकिये मत, यह सच है और सौ आना सच है। लॉकडाउन का फायदा उठा कर अवैध मजार बनाने वालों की गैंग ने पार्को और सूने जंगलों में तेजी से मजार बनाने का काम शुरू कर दिया है। यह काम एक अभियान की तरह किया जा रहा है. इसके पीछे और भी बड़ी साजिश है जिसका खुलासा हम परत दर परत करेंगे।

यह मजार नोएडा के सेक्टर 54 के जिस पार्क में बनाया गया है उस पार्क के दूसरे कोने में पहले से ही एक मजार बना हुआ है.  कुछ वर्ष पहले इस मजार के बनने और विकसित होने का सिलसिला भी इसी तरीके से हुई थी. पिछली सरकारों ने इस अवैध मजार को फलने फुलने का पूरा मौका दिया.


अब हम आपको लेचलते हैं देश की राजधानी दिल्ली में जी हाँ, दिल्ली के पॉश कहे जाने वाले महरौली और बसंत कुंज के बीच का ये इलाका है, संजय वन। संजय वन डीडीए की लैंड है, करीब 800 एकड़ में फैले इस वन में पहले से ही एक सूफी संत की मजार है. इस मजार पर पहले कुछ संदिग्ध लोगों का आना-जाना रहता है. शहर से अलग थलग इस वन के भीतर की गतिविधि संदिग्ध है। इस जंगल में लॉकडाउन के दौरान एक नहीं बल्कि आधा दर्जन के करीब नई मजारे बना दी गई है।

देखते ही देखते ये पूरा इलाका कुकुरमुत्ते की तरह पनपे माज़ारों से पटा पड़ा है. सूफी मजार के आसपास मजारों का काफिला तैयार हो गया है. तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि संजय वन के भीतर मजार जिहाद गैंग ने कैसे डीडीए की जमीन पर मजार बना कर कब्जा किया हुआ है. मजार जेहाद का खेल सिर्फ दिल्ली नॉएडा तक हीं सिमित नहीं बल्कि ये पूरे  देश भर में फैला हुआ है.


फर्रुखाबाद से जो मामला सामने आया है...उसको देखकर आप दंग रह जाएंगे...यहां शिवमंदिर को ही खंडित कर मज़ार बना दिया है...पीपल के पास रखे शिवलिंग को खंडित किया गया...और ये सब तब हुआ जब देश में लॉकडाउन लगा हुआ है...यहां बाहर से देखने पर तो आपको मंदिर नज़र आएगा लेकिन अंदर हैं 2 मज़ारें बना दी गई है.


देशभर में चल रहे मजार जेहाद के खेल पर सरकार और प्रशासन दोनों चुप हैं. ऐसे में अगर आप भी चुप बैठे रहे तो हो सकता की आपके घर और ऑफिस के सामने भी कल कुकुरमुत्ते की तरह यहाँ भी मज़ार जेहादी कोई नया मज़ार बना देंगे.

पुरी रथ यात्रा एक महान ऐतिहासिक पर्व

पुरी रथ यात्रा एक महान ऐतिहासिक पर्व है, जिसमें विश्व के सबसे विशाल रथ को खींचने की परंपरा है. यह रथ यात्रा मंदिरों के शहर पुरी में हर साल निकाली जाती है. तीन बड़े से रथों को खूब सजाया जाता है और उन पर भगवान जगन्नाथ, उनके भाई भगवान बलराम तथा बहन देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को रखकर उन्हें श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक लेकर जाते हैं.

ऐसा माना जाता है कि इस गुंडिचा मंदिर में ही भगवान जगन्नाथ का जन्म हुआ था. यह जगन्नाथ मंदिर से दो मील की दूरी पर स्थित है. यह पर्व ओडिशा के भव्य पर्वों में से एक है. रथ को खींचने और इस रथ यात्रा के दर्शनों के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालुगण एकत्रित होते हैं. जिस रथ पर भगवान की प्रतिमाएं होती हैं, उसे फूलों, चित्रकारी, छोटी मूर्तियों, लकड़ी एवं नक्काशी से सजाया जाता है 

सबसे पहले भगवान की काष्ठ की प्रतिमाओं को श्रीमंदिर से बाहर निकालने का कार्य किया जाता है. दिल के आकार के बने फूलों के मुकुट भगवान को पहनाए जाते हैं. श्रद्धालुओं के जनसैलाब के बीच भगवान को एक-एक पग धरते हुए रथ की ओर ले जाया जाता है. इसे पहांदी कहते हैं. इस दौरान तुरही और झांझ बजाते हैं. भगवान जगन्नाथ का दर्शन करना सौभाग्य माना जाता है किंतु उन्हें रथ पर सवार देखना आशीर्वाद होता है.


भगवान जगन्नाथ का लगभग 45 फुट ऊंचा रथ नंदीघोष कहलाता है. ये तीनों रथों में से सबसे बड़ा होता है जिसके 16 पहिये होते हैं. भगवान बालाभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को तालध्वज तथा दर्पदलान कहते हैं. ये रथ 44 फुट और 43 फुट ऊंचे होते हैं.


जब इष्ट देवों को रथों पर रख दिया जाता है तब पुरी के राजा गजपति हर एक रथ को साफ करते हैं और भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं. वह सड़क को भी साफ करते हैं जहां से रथों को गुज़रना होता है. इस अवसर को छेरा पहरा कहते हैं. इसके बाद श्रद्धालुगण बड़ा डंडा के माध्यम से उन रथों को खींचते हैं. उसके बाद ये रथ गुंडिचा मंदिर में जाकर रुकते हैं, जहां पर भगवान एक सप्ताह के लिए वहां ठहरते हैं. तत्पश्चात् उनकी वापसी यात्रा, श्रीमंदिर के लिए आरंभ होती है. इस समारोह को बहुधा यात्रा कहते हैं. ये हजारों साल पुरानी महान परंपरा है, जो सदियों से चली आरही है.


भारत को चौतरफा घेर रहा है चीन

चालबाज चीन अपने कुटिल रणनीति के तहत  लंबे समय से भारत को घेर रहा है. पड़ोसी देशों को कर्ज देकर उनपर कब्जा बढ़ा रहा है. चीन, भारत के पड़ोसी देशों से समझौते करके एक के बाद एक लगातार भारत को चौतरफा घेर रहा है. पाकिस्तान के अलावा श्रीलंका, म्यांमार, मालदीव और बांग्लादेश समेत कई देश चीन के इशारों पर चल रहे हैं. पाकिस्तान पूरी तरह चीन के हाथों का कठपुतली बन चुका है. चीन छोटे-छोटे देशों को अपना मोहरा बना रहा है. कर्ज देने के बदले उनकी जमीन या दूसरे रिसोर्सेज पर कब्ज़ा करते जा रहा है. चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर चाइना का अहम प्रोजेक्ट है. ये पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से समुद्र के रास्ते चीन के झिंजियांग तक पहुंचने की एक बड़ी परियोजना है. 2 हजार 442 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के जरिए चीन समुद्री रास्ते से पाकिस्तान की दूरी कम करना चाहता है. इसके जरिए कच्चे तेल, नेचुरल गैस जैसी चीजों का ट्रांसपोर्ट करने की योजना बना रहा है.

 

चीन से प्रेरित माओवादी ताकतों ने अब नेपाल को भारत विरोधी घोषित कर दिया है. नेपाल जिसे एक बफर देश माना जाता था, वह अब भारत के खिलाफ चीन के बहकावे में आकर खड़ा हो रहा है. नेपाल चीन के वन रोड-वन बेल्ट प्रोजेक्ट में भी शामिल हो चुका है. चीन लंबे समय से इसके लिए एक जाल बिछा रहा है. नेपाल में बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए 18 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट शुरू किया हैं.

 

बांग्लादेश को भी चीन लगातार भड़का रहा है. सत्तारूढ़ दल के भारत समर्थक रुख के बावजूद, बांग्लादेश में भारत विरोधी ताकतों को चीन मजबूत कर रहा है. बांग्लादेश पर 33 अरब डॉलर का कर्ज होने का अनुमान है, ऐसे में वह भी अब चीन के कब्जे में आ चुका है. चीन वहां बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट में 2 लाख 89 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर रहा है. वह बांग्लादेश के 3 बंदरगाहों का मॉर्डनाइजेशन के नाम भी कब्ज़ा कर चुका है. बांग्लादेश के दो छोरों को जोड़ने वाली पद्मा नदी पर 6.5 किलोमीटर लंबा पुल बनाने के लिए भी चीन अपना जाल बिछा चुका है.

 

मैत्रिपाल श्रीसेना की सरकार पर भारत का असर था. मगर चीन के दबाव में महिंदा राजपक्षे की सरकार ने चीन से बड़ा लोन लेकर हम्बनटोटा पोर्ट को 99 साल की लीज पर दे दिया है. इसके अलावा श्रीलंका में एयरपोर्ट, कोल पावर प्लांट और दो बड़े डेम सहित कई प्रोजेक्ट के लिए चीन 36 हजार 480 करोड़ रुपए का निवेश कर रहा है.

 

मालदीव में 38 से ज्यादा छोटे-बड़े द्वीप हैं जो हिन्द महासागर, अरब सागर और और बंगाल की खाड़ी से जुड़े हुए हैं. इसमें से 16 द्वीप को चीन लीज पर ले चुका है. चीन अगर इन द्वीपों पर कब्जा कर लेता है, तो वह भारत के व्यापारिक जहाजों के साथ-साथ नौसेना के काफिलों पर भी नजर रख सकता है. साथ ही युद्ध की स्थिति में इन द्वीपों पर अपने जहाज तैनात कर सकता है. चीन मालदीव में स्टोरेज डिपो भी बना रहा है. इस प्रकार चीन भारत को चौतरफ घेर रहा है. 

चीन के कब्जे में भारतीय बाजार

चीन भारतीय बजारों को पूरी तरीके से अपने कब्जे में ले चुका. स्मार्टफोन बाजार में चीनी कंपनियों का दबदबा है. आज चीन का उत्पाद भारतीय बजारों को निगल रहा है. चीन की मोबाइल निर्माता कंपनी श्याओमी भारत में नंबर-1 पर बना हुआ है. एक चौथाई से भी अधिक बाजार पर इसका कब्ज़ा है.

 

आज के समय में टिकटॉक को कौन नहीं जानता. हर युवा इसकी ओर खिंचा चला आ रहा है. चीनी कंपनी बाइटडांस का ये प्रोडक्ट भारत में करीब 11.9 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं. वही भारत में इन दिनों हेलो ऐप भी अब अपना बाज़ार बना रहा है. हेलो ऐप के करीब 5 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स हैं.


चीन की ही एक दूसरी मोबाइल कंपनी है वीवो, जिसने भारत के करीब 20 फीसदी बाजार पर कब्जा किया हुआ है. अगर चीन की श्याओमी, वीवो, ओपो और रीयलमी को एक साथ जोड़कर देखें तो इन सबने मिलकर भारत के करीब 65-67 फीसदी बाजार पर कब्जा किया हुआ है. चीन की कंपनी लेनोवो ने भी भारतीय कंप्यूटर बाज़ार पर कब्ज़ा कर चुकी है. लेनोवो स्मार्टफोन के अलावा पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, वर्कस्टेशन, सर्वर और इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइसों का निर्माण करती है.

 

हुआवेई ने दूरसंचार उपकरणों पर अपना कब्ज़ा जमा चुकी है. दूरसंचार कंपनियों के लिए मोबाइल नेटवर्क उपकरण बनाने के लिए हुआवेई भारत में भी अपना जाल बिछा चुकी है. कंपनी का स्मार्टवॉच हुआवेई वॉच 2 और स्मार्ट बैंड हुआवेई बैंड 2 प्रो भारतीय बाजार में अपना एकाधिकार स्थापित करने में लगी हुई है. 


भारत में करीब 700 चीनी कंपनियां अरबों रूपये का कारोबार कर रही है. इन्फ्रास्ट्रक्चर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक में है दखल चीनी कंपनियों का कब्ज़ा हो चुका है. भारत-चीन के बीच दवा का 39 अरब डॉलर का सालाना कारोबार है. चीन से कुल आयात में 80 फीसद से ज्यादा हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग के सामान, केमिकल और इससे जुड़े उत्पादों का है.

 

खिलौना से लेकर बड़े पर्व त्योहारों पर चाईनीज बाज़ारों का बोलबाला है. आज चाईना के वजह से भारतीय व्यापारी बेरोजगार और कंगाली के कगार पर हैं. भारतीय बाज़ारों की वजह से चीन मालामाल है और हम सब कंगाल. ऐसे में अब समय आगया है कि सबको मिलकर चीन को जरुर सबक सिखान होगा.


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