21 December 2024

अलविदा ओपी चौटाला ! हरियाणा के पूर्व CM ओपी चौटाला का निधन, पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल के सबसे बड़े बेटे थे, 89 साल की उम्र में गुरुग्राम में ली अंतिम सांस 87 साल की उम्र में पास की थी 10वीं-12वीं

 

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल के नेता ओम प्रकाश चौटाला का शुक्रवार को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। हरियाणा की सियासत के एक अहम किरदार रहे चौटाला रिकॉर्ड चार बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे और उनका अंतिम कार्यकाल 1999 से 2005 तक रहा।  'ताऊ' के नाम से मशहूर चौधरी देवी लाल चौटाला के परिवार का सियासी रसूख इतिहास में दर्ज है।

 

ओपी चौटाला का जीवन परिचय

 

1 जनवरी 1935 को सिरसा के डबवाली स्थित चौटाला गांव में जन्म

पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के सबसे बड़े बेटे थे ओपी  चौटाला

ओपी चौटाला ने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया

स्कूल की पढ़ाई छोड़ राजनीति में करियर की शुरुआत

87 वर्ष की उम्र में पास की 10वीं और 12वीं की परीक्षा

ओपी चौटाला की शादी स्नेह लता से हुई थी

चौटाला की पत्नी का निधन 2019 में हुआ

ओपी के दो बेटे अभय चौटाला और अजय चौटाला हैं

उनके दोनों बेटे हरियाणा की राजनीति में सक्रिय हैं

 

जनवरी 1935 में जन्मे ओमप्रकाश चौटाला 'ताऊ' के नाम से मशहूर चौधरी देवी लाल के पुत्र थे, जिन्होंने भारत के 6वें उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। देवी लाल 1971 तक कांग्रेस में रहे और दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। 1977 में देवी लाल जनता पार्टी में शामिल हुए तो 1987 में लोकदल में आ गए। देवी लाल के बेटे ओमप्रकाश चौटाला भी भारतीय राजनीति के दिग्गजों में से एक थे।

 

ओपी चौटाला का राजनीतिक सफर

 

वर्ष 1970 में राजनीतिक पारी की शुरुआत की

1970 में जनता दल की टिकट पर पहली बार विधायक बने

1970 में ऐलनाबाद से उप-चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे

ओपी चौटाला हरियाणा के 5 बार मुख्यमंत्री बने

1987 से 1990 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे

2 दिसंबर 1989 को पहली बार ओपी चौटाला मुख्यमंत्री बने

12 जुलाई 1990 को चौटाला दूसरी बार हरियाणा के CM बने

22 अप्रैल 1991 को तीसरी बार सीएम का पदभार संभाला

1998 में आम चुनाव के बाद ओपी चौटाला ने पार्टी का नाम बदला

हरियाणा लोक दल का नाम इंडियन नेशनल लोकदल कर दिया

24 जुलाई 1999 में चौटाला ने चौथी बार CM पद संभाला

2 मार्च 2000 को चौटाला पांचवीं बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने

ओम प्रकाश चौटाला के परिवार का भी हरियाणा की सियासत में दबदबा रहा है। दुष्यंत के सांसद बनने के बाद ही राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी हार गई। कारण था दुष्यंत के सांसद बनने के बाद पार्टी का दो खेमों में बंट जाना। पार्टी का एक गुट अभय चौटाला के साथ हो गया और दूसरा दुष्यंत के साथ। इनेलो की कमान अभय के पास पूरी तरह से आ गई। दिसंबर 2018 में दुष्यंत चौटाला ने जननायक जनता पार्टी की नींव रखी। तो आइए जानते हैं कि चौटाला परिवार में कौन-कौन है-

 

कौन-कौन हैं ओपी चौटाला के परिवार में

देवीलाल के चार बेटे

 

ओमप्रकाश चौटाला

स्व. प्रताप चौटाला

रंजीत सिंह

स्व. जगदीश चौटाला

 

ओमप्रकाश चौटाला के दो बेटे

अजय और अभय चौटाला

 

अजय और अभय के दो-दो बेटे

अजय चौटाला के बेटेः दुष्यंत और दिग्विजय

 

अभय चौटाला के बेटेः कर्ण और अर्जुन

 

प्रताप चौटाला के दो बेटेः रवि और जितेंद्र

 

रंजीत सिंह के दो बेटेः गगनदीप और स्व. संदीप सिंह

 

जगदीश चौटाला के तीन बेटेः आदित्य, अभिषेक और अनिरुद्ध

 

जब देवीलाल डिप्टी पीएम बने तो उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला 1989 से 91 तक मुख्यमंत्री रहे। 1991 में देवीलाल लोकसभा चुनाव हारे और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त हो गई। 1999 में ओमप्रकाश चौटाला ने भाजपा की मदद से हरियाणा में सरकार बनाई। 2005 तक वे हरियाणा के सीएम बने। 2001 में देवीलाल का देहांत हो गया।

 

चौटाला के निधन से हरियाणा और देश की राजनीति में शोक की लहर है। लेकिन जाने से पहले उन्होंने ऐसी मिसाल कायम की, जो हमेशा याद रहेगी। कल्पना कीजिए, जब आपके आसपास के लोग रिटायर होकर आराम कर रहे होते हैं, तब आप 87 साल की उम्र में 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास कर रहे हों! हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने ठीक यही किया था। उन्होंने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि प्रथम श्रेणी में पास की। 'सीखने की कोई उम्र नहीं होती', उन्होंने इस कहावत को साबित किया था। उन्होंने लाखों लोगों को प्रेरित किया कि अगर मन में ठान लिया जाए तो कुछ भी मुमकिन है।

 

ओम प्रकाश चौटाला की कहानी से प्रेरणा लेकर एक फिल्म भी बन चुकी है, जिसका नाम 'दसवीं' था। फिल्म एक्टर अभिषेक बच्चन ने इस फिल्म में एक नेता का किरदार निभाया था, अभिषेक बच्चन और निमरत कौर ने मुख्य भूमिका निभाई है। पीएम नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्‌टर, सीएम नायब सैनी, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा और पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल समेत बड़े नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।

 

मार्च 1991 में देवीलाल ने हुकुम सिंह को हटाकर ओमप्रकाश चौटाला को तीसरी बार हरियाणा का मुख्यमंत्री बनवा दिया। इस फैसले से राज्य में पार्टी के कई विधायक नाराज हो गए। कुछ विधायकों ने पार्टी भी छोड़ दी। नतीजा ये हुआ कि 15 दिनों के भीतर ही सरकार गिर गई। राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया। 15 महीने के भीतर तीसरी बार चौटाला को CM पद से इस्तीफा देना पड़ा।

 

ओमप्रकाश चौटाला की शुरुआती पढ़ाई ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया से हुई। वह हॉस्टल में रहकर वहां पढ़ाई कर रहे थे। इसके बाद आठवीं क्लास की पढ़ाई उन्होंने डबवाली के हाईस्कूल से की। उस जमाने में आठवीं तक की पढ़ाई को पर्याप्त माना जाता था। उन्होंने इसके बाद अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को ही आगे बढ़ाने का फैसला लिया।

 

आज ओम प्रकाश चौटाला के निधन से पूरा देश शोक में है उन्होंने राजनीति में तो बहुत कुछ किया, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में जो उन्होंने किया, वो और भी खास था। उनकी कहानी हमेशा याद रखी जाएगी।

19 December 2024

आंबेडकर की दुहाई धक्का-मुक्की, लड़ाई! संसद में 'धक्कामार सियासत'... ! प्रताप सारंगी-मुकेश राजपूत Vs राहुल गांधी! राहुल ने मारा धक्का, दो बीजेपी सांसद घायल! ICU में भर्ती हैं दोनों बीजेपी सांसद

 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संसद में बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर पर दिए बयान को लेकर सियासी संग्राम शुरू हो गया है। कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। मगर, प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर में जो हुआ, वो भारत के संसदीय इतिहास में काले अध्याय यानी ब्लैक थर्सडे के रूप में दर्ज हो गया है। राहुल गांधी के धक्का-मुक्की से बीजेपी सांसद प्रताप सारंगी और सांसद मुकेश राजपूत चोटिल हो गए। व्हीलचेयर पर बैठे सारंगी ने बताया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उन्हें धक्का दिया जिसके चलते वो गिर पड़े और चोटील हो गए। आरोप है कि राहुल ने मुकेश राजपूत को धक्का दिया, जिससे वह व्हीलचेयर पर बैठे सारंगी पर गिर पड़े।

 

संसद परिसर में जो भी हुआ, वह संसदीय इतिहास पर एक दाग की तरह दर्ज हो गया। आखिर ऐसा भी क्या विरोध कि किसी को अस्पताल में भर्ती कराना पड़े? क्या सारी संसदीय मान-मर्यादा भूल गए हमारे माननीय। अफसोस कि हम ऐसे लोकतंत्र में रह रहे हैं, जिसकी वजह से भारत को पूरी दुनिया में शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है। राहुल गांधी ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि हां किया है, धक्का-मुक्की से मुझे कुछ होने वाला नहीं है।

 

राहुल की 'धक्का-मुक्की क्या है पूरा मामला ?

 

10.30 बजे बड़ी संख्या में एनडीए के सांसद मकर द्वार पर तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे

एनडीए के प्रदर्शन के दौरान ही राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के सांसद वहां पहुंचते हैं, वह अंदर जाने की कोशिश करते हैं 

इसी दौरान दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की की नौबत आ जाती है, छोटी से जगह में कई सांसदों के जमा हो जाने से स्थिति बिगड़ती है

करीब 10 फुट की इस जगह में एनडीए और इंडिया ब्लॉक के सांसदों के साथ गर्मागर्मी और धक्कामुक्की होती है 

राहुल गांधी के साथ विपक्ष के तमाम सांसद घेरा बनाकर आगे बढ़ते हैं, इसमें इमरान मसूद समेत बाकी सांसद भी होते हैं

बीजेपी के सांसदों का आरोप है कि इसी दौरान राहुल गांधी की तरफ से बीजेपी सांसद मुकेश राजपूत को धक्का दिया जाता है

इस धक्के से मुकेश राजपूत के साथ पास खड़े सांसद प्रताप सारंगी भी नीचे गिर जाते हैं

प्रताप सारंगी के सिर में चोट आती है, घायल मुकेश राजपूत को भी आरएमएल में भर्ती कराया जाता है 

घटना के बाद बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज और अनुराग ठाकुर संसद मार्ग थाने पहुंचे

बीजेपी सांसदों का कहना है कि जिस तरह से हाथापाई और धक्का-मुक्की हुई है, वह इस मामले में आगे भी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे

 

हमारे माननीयों को एक बात यह समझनी होगी कि जिस संविधान, बाबा साहेब और गांधीजी की बात वो अपने भाषणों और संवाद में अकसर करते रहते हैं, कम से कम उनका मान तो रख लेते। आंबेडकर, गांधी या नेहरू में भले ही मतभेद रहे हों, मगर वो कभी ऐसी धक्का-मुक्की या हाथापाई पर नहीं उतरे थे। आंबेडकर और गांधी तो अहिंसा के धुर विरोधी रहे। दोनों ने जिंदगी भर अहिंसक सत्याग्रह किया, मगर अपने धरना-प्रदर्शन से किसी को आहत नहीं किया। क्या हमारे माननीयों को उनसे सीखना नहीं चाहिए।

 

फर्रुखाबाद से भाजपा सांसद मुकेश राजपूत को राहुल ने धक्का मारा और वे सारंगी के ऊपर गिरे पड़े। मुकेश राजपूत गंभिर रूप से भी चोटिल हुए हैं जिन्हें दिल्ली के RML अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वह इस वक्त आईसीयू में हैं। राहुल ने भले ही सफाई दे दी हो, मगर उनकी वजह से अगर किसी को चोट पहुंची है तो यह संसदीय गरिमा और मानवता के भी खिलाफ है। आरएमएल के एमएस डॉ. अजय शुक्ला ने बताया कि "हम प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत को जल्द ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों को सिर में चोट लगी है। दोनों को आईसीयू में भर्ती कराया गया है। प्रताप सारंगी को टांके लगाने पड़े हैं। फिलहाल, वह बेहोश हैं उसे चक्कर आ रहा है।

 

कहा जाता है कि किसी भी लोकतंत्र में विरोध करना अच्छे लोकतंत्र की निशानी है। अच्छे लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष, निष्ठावान न्यायपालिक और प्रेस की आजादी जरूरी है। मगर, जिस भी देश में संसद में मार-पीट या धक्कामुक्की होती है, उसकी आलोचना पूरी दुनिया में होती है। ये भी हमारे सांसदों को नहीं भुलना चाहिए।

 

बीजेपी के राज्यसभा सांसद फांगनोन कोन्याक ने भी राहुल गांधी पर संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें धक्का देने और असहज करने का आरोप लगाया। कोन्याक ने राहुल पर आरोप लगाते हुए कहा कि "एलओपी राहुल गांधी मेरे बहुत करीब आए... मुझे यह पसंद नहीं आया, उन्होंने चिल्लाना शुरू कर दिया... आज जो कुछ भी हुआ वह बहुत दुखद है, ऐसा नहीं होना चाहिए। जिस तरह से उन्होंने धमकी दी, वह हमें पसंद नहीं आया... मैंने इसकी शिकायत भी की है।"

 

पहले भी भारतीय संसद और विधानसभाओं का ऐसा तमाशा दुनिया देख चुकी है। मिलनाडु विधानसभा मे विश्वास मत के लिए विशेष सत्र बुलाया गया था। बहुमत परीक्षण से पहले विधानसभा में इतना हंगामा हुआ कि सदन में कुर्सियां उछलने लगीं। स्पीकर की कुर्सी और माइक्रोफोन तोड़ दिया गया, उनकी शर्ट फाड़ी गई। संविधान की किताब में हाथ में लेने और दोनों महापुरुषों की फोटो साथ में रखने से उनकी विरासत संभालने की मैच्योरिटी नहीं आ सकती। इसके लिए तन ही नहीं मन से भी उनके विचारों को अपनाना होगा, तभी संविधान और संसद की मर्यादा की रक्षा हो पाएगी। भाजपा सांसद सारंगी के घायल होने के बाद मनोज तिवारी ने राहुल गांधी के लिए सजा देने की मांग की है।

 

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि यह गृह मंत्री अमित शाह को बचाने की बीजेपी की साजिश है। राहुल गांधी ने किसी को धक्का नहीं दिया। उनकी आंखों के सामने खड़गे को धक्का दिया गया और वह जमीन पर गिर पड़े।

इस घटना के बाद बीजेपी ने इस मामले को लेकर दिल्ली के संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराई है। संसद मार्ग थाने में वरिष्ठ नेता अनुराग ठाकुर और बांसुरी स्वराज सहित कई बीजेपी नेताओं ने हिस्सा लिया।

 

पार्लियामेंट थाने में बीजेपी का डेलिगेशन जाकर अपनी बात रखी और राहुल गांधी पर उचित कार्रवाई की मांग की। वहीं कांग्रेस सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल ने भी संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में बीजेपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। अब देखना होगा होगा कि पुलिस इस पूरे मामले में कबतक कार्रवाई करती है।

18 December 2024

आंबेडकर पर सियासी संग्राम ! अमित शाह की टिप्पणी पर भड़का विपक्ष, पीएम मोदी ने संभाला मोर्चा, 'कांग्रेस का काला इतिहास उजागर'- PM मोदी

 

देश में एक बार फिर से बाबा साहेब बीआर आंबेडकर की विरासत और विचारों पर सियासत शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान डॉ. बीआर आंबेडकर के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा है। अमित शाह के बयान पर विपक्ष हंगामा कर रहा वहीं सरकार शाह के लिए बयान पर कायम है। विपक्ष ने अमित शाह पर डॉ. आंबेडकर का अपमान करने का गंभीर आरोप लगा रहा है। अमित शाह ने  बीआर आंबेडकर को लेकर क्या सदन में क्या कहा है पहले इसे देख लेते हैं।

 

बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस अमित शाह के भाषण का वीडियो कांट-छांट कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रही है और सस्ती राजनीति कर रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस ने बाबा साहब को चुनाव हराना का काम किया।

 

अमित शाह की संसद में अंबेडकर पर दिए बयान पर कांग्रेस ने का कहना है कि शाह ने अंबेडकर का अपमान किया। हरियाणा के सिरसा से कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि अगर संविधान ग्रंथ है तो अंबेडकर भगवान हैं। कांग्रेस ने शाह के इस्तीफे की मांग की है।

 

अमित शाह के बयान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को जवाब दिया। मोदी ने X पर 6 पोस्ट करते हुए लिखा- अगर कांग्रेस और उसका सड़ा हुआ तंत्र यह सोचता है कि उनके दुर्भावनापूर्ण झूठ उनके कई सालों के कुकर्मों, खासकर डॉ. अंबेडकर के प्रति उनके अपमान को छिपा सकते हैं, तो वे बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं! भारत के लोगों ने बार-बार देखा है कि कैसे एक वंश के नेतृत्व वाली एक पार्टी ने डॉ. अंबेडकर की विरासत को मिटाने और एससी/एसटी समुदायों को अपमानित करने के लिए हर संभव गंदी चाल चली है

 

राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, "यह संविधान के खिलाफ है। वे शुरू से कह रहे थे कि वे संविधान बदल देंगे।" वे अंबेडकर जी और उनकी विचारधारा के खिलाफ हैं। उनका एकमात्र काम संविधान को खत्म करना है और यह पूरा देश जानता है।

 

संविधान पर बहस के दौरान राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण पर बोलते हुए, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके इस्तीफे की मांग की। खड़गे ने कहा, ''उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर और संविधान का अपमान किया है।

 

राजद नेता तेजस्वी यादव ने बीआर अंबेडकर पर अमित शाह की टिप्पणी पर आलोचना करते कहा कि,  अमित शाह की बयान पर अम्बेडकर की कड़ी निंदा की जानी चाहिए। यह उनकी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। उनके हाव-भाव देखिए, उनकी बोली देखिए... यह पूरी तरह से स्पष्ट हो जाता है कि ये लोग वास्तव में बी.आर. का कितना सम्मान करते हैं।

 

राज्यसभा में संविधान पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण पर बोलते हुए कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह ने डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान किया है। ये साफ हो गया कि कौन किसका अपमान करता है। संविधान पर ज्यादा कुछ नहीं बोला और इतिहास में चले गये। वास्तविकता के बारे में बात नहीं की।

 

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने शाह के बयान पर कहा कि आज जिस तरह से गृह मंत्री ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के बारे में बात की, वह बेहद आपत्तिजनक है इस देश के दलितों के लिए तो पिछड़े वर्ग के लिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर भगवान का दर्जा रखते हैं।

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर बीजेपी कायम है, वहीं कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष हमलावर है। ऐसे में अब देखना होगा कि बाबा साहेब बीआर आंबेडकर की विरासत, विचारों पर सियासत और अपमान के नाम पर घमासान कबतक थमेगा।

संभल में ‘साक्षात’ शिव! संभल के मुस्लिम मोहल्ले में शिव मंदिर, संभल के खग्गू सराय में कार्तिक महादेव मंदिर, संभल में हुआ था 1978 में सबसे बड़ा दंगा

 

संभल एकबार फिर से सुर्खियों में है। इस बार मामला शिव मंदिर से जुड़ा हुआ है। संभल की शाही जामा मस्जिद से लगभग एक किलो मीटर दूर खग्गू सराय मोहल्ला में साक्षात शिवमंदिर मिलने से पूरे इलाके में हिन्दुओं के अंदर खुशी की लहर दौर पड़ी। 46 वर्ष बाद जब मंदिर का ताला खोला गया तो अंदर साक्षात शिन जी और हनुमान जी की मुर्तियों की पूजा पाठ करने के लिए हिन्दू श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। करीब 70 गज जमीन पर बने इस मंदिर में 46 साल बाद पहली बार पूजा की गई।

                                                                                

दरअसल 14 दिसंबर को संभल के DM राजेंद्र पेंसिया और SP कृष्ण बिश्नोई टीम के साथ बिजली चोरी पकड़ने खग्गू सराय मोहल्ले में गए थे। इसी दौरान बंद पड़े इस मंदिर का पता चला। 1978 में हुए दंगे के बाद से इस मंदिर में ताला लगा हुआ था। पुलिस-प्रशासन की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक होली के तीन दिन बाद हुए इस दंगे में 184 से ज्यादा लोग मारे गए थे। दंगे के बाद खग्गू सराय में रहने वाले 100 हिंदू परिवार पलायन कर गए।

 

24 नवंबर को जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान संभल में हिंसा भड़क गई थी। संभल में ये कोई पहली घटना नहीं है। संभल में दंगों का पुराना इतिहास है। बीते 88 साल में यहां 16 दंगे हुए हैं। ये पुलिस-प्रशासन के रिकॉर्ड रिकॉड हैं। संभल में सबसे बड़ा दंगा 1978 में हुआ था। तब खग्गू सराय को बनियों का मोहल्ला कहा जाता था। बनियों का मोहल्ला ये आज भी है, मगर उसमें एक भी हिंदू परिवार नहीं रहता। उनकी निशानी के तौर पर पुराना शिव-हनुमान मंदिर ही बचा है। 1978 के दंगे के बाद से इस मंदिर में लोगों का आना बंद हो गया।

 

संभल में दंगों का इतिहास

 

1947 बंटवारे के वक्त संभल में भी दंगे हुए। हातिमसराय इलाके के 20 से 25 लोगों ने बचने के लिए कोतवाली में शरण ली थी।

 

घर लौटते वक्त उन पर हमला हुआ, जिसमें जगदीश शरण नाम के शख्स की मौत हो गई थी।

 

1948 इस दंगे में हाकिमसराय के पास 6 लोग मारे गए थे। संभल में करीब 20 दिन तक कर्फ्यू लगा था।

 

1958 हिंदू इंटर कॉलेज में दोनों समुदाय के छात्रों के बीच हिंसा भड़की थी। इस दौरान 2 दिन कर्फ्यू लगा था।

 

1976 अफवाह उड़ी कि राजकुमार सैनी नाम के युवक ने एक मौलवी को पीटा है।

 

इसके बाद भड़के, दंगों में संभल के ऐतिहासिक सूरजकुंड मंदिर और मानस मंदिर को तोड़ा गया।

इसमें 5 लोगों की मौत हुई थी। 7 दिन संभल में कर्फ्यू लगा रहा।

 

1982 अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ताला खुला, तब संभल में बाजार बंद कराए गए थे। इस दौरान कारोबारी हरिशंकर रस्तोगी की हत्या कर दी गई थी।

 

1986 8 मार्च को शिवरात्रि पर शोभायात्रा निकाली जा रही थी।

 

अफवाह उड़ी कि हरिहर मंदिर में जल चढ़ाया जा रहा है।

 

ससे हिंसा भड़क गई। इस दंगे में 4 लोग मारे गए थे।

 

1992 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद संभल के नखासा तिराहे पर मुस्लिम समुदाय के 20 हजार से ज्यादा लोग जुटे थे।

 

सभी ने मिलकर पुलिस पर हमला कर दिया। बचाव में पुलिस ने फायरिंग की, जिसमें दो लोग मारे गए।

 

दंगों में 5 लोग मारे गए थे। 8 दिन तक कर्फ्यू लगा रहा था।

 

संभल में 24 नवंबर को हुई हिंसा के बाद पुलिस-प्रशासन ने ये इंटरनल रिपोर्ट बनाई है। इस रिपोर्ट में आजादी से पहले 1936 से 2019 तक हुए 16 दंगों की डिटेल है। रिपोर्ट में लिखा है कि संभल नगर पालिका एरिया में आजादी के वक्त 55% मुस्लिम और 45% हिंदू रहते थे। अब 80-85% मुस्लिम और 15-20% हिंदू आबादी है। संभल में हिंसा के बाद पुलिस की जांच में पता चला कि दीपा सराय इलाके में लोग बिजली चोरी कर रहे हैं। 150 से ज्यादा पुलिस जवान के साथ एक टीम ने 14 दिसंबर की सुबह 5 बजे यहां छापा मारा। सुबह 11 बजे टीम खग्गू सराय के बनिया मोहल्ला पहुंची। बनिया मोहल्ला में बिजली चोरी तो पकड़ी ही गई, पुराना मंदिर भी मिल गया है।

 

मीडिया में आते ही दूसरी जगह बस चुके हिंदू परिवार आने लगे। उन्होंने बताया कि मंदिर के पास एक कुआं और पीपल का पेड़ भी था। कुएं से पानी लेकर लोग मंदिर में जल चढ़ाते थे। पीपल की भी पूजा होती थी। पीपल का पेड़ तो अब नहीं है, लेकिन पुलिस ने लोगों की बताई जगह पर JCB से खुदाई कराई, तो कुएं के अवशेष मिल गए। मंदिर कितना पुराना है, ये पता करने के लिए ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम भी बुलाई गई है।  

 

संभल के डीएम राजेंद्र पैंसिया के आदेश पर मंदिर की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी तैनात कर दी है। मंदिर और आस-पास के क्षेत्र में CCTV, बिजली कनेक्शन लगा दिया गया है, साथ ही एक पुजारी भी मंदिर में रखा गया है जो सुबह- शाम आरती और पूजा- पाठ कराएंगे। यहां राउंड द क्लॉक सुरक्षा व्यवस्था है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था की गई है। क्लोज मॉनिटरिंग की जा रही है। जिससे कोई अराजक तत्व है, वो यहां न आ सके।

 

संभल के मोहल्ला खग्गू सराय स्थित श्री शिव मंदिर में डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण विश्नोई ने भी पूजा-अर्चना की। संभल में 46 साल बाद शिव मंदिर के कपाट खुलने के बाद पूजा-पाठ करने दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। मंदिर में भगवान भोलेनाथ का दूध से अभिषेक किया गया। महिलाएं भी पूजा-पाठ करने के लिए पहुंची और भजन-कीर्तन किया।

 

संभल से आई सरला ने बताया कि उन्हें जैसे ही पता चला कि यहां पर 46 साल से बंद भगवान भोलेनाथ के मंदिर को प्रशासन में खुलवाया है, तो वह सीधे भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए यहां पहुंची हैं। वह पहली बार मंदिर में पूजा करने आई हैं।

 

इस पूरे मामले पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कल संसद में संविधान पर चर्चा चल रही थी, लेकिन मुद्दा संभल का उठ रहा था। इन्हीं के समय में 46 साल पहले जो मंदिर बंद कर दिया गया था, वो सामने आ गया। इनकी वास्तविकता को सबके सामने ला दिया। संभल में इतना प्राचीन मंदिर क्या रातों-रात प्रशासन ने बना दिया? क्या वहां बजरंगबली की इतनी प्राचीन मूर्ति रातों-रात आ गई? क्या वहां शिवलिंग निकला है? क्या ये आस्था नहीं थी? उन दरिंदों को आज तक सजा क्यों नहीं मिली, जिन्होंने 46 वर्ष पहले संभल में नरसंहार किया था? इस पर चर्चा क्यों नहीं होती है? उन निर्दोष लोगों की हत्या हुई, उस पर चर्चा क्यों नहीं होती। इस पर जो बोलेगा, उसको धमकी दी जाएगी।

 

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि संभल में हनुमान जी का मंदिर और शिव जी का मंदिर 4 दशक से अधिक समय तक बंद रखा गया था। भय का माहौल बनाया गया और हिंदुओं को पलायन करने के लिए मजबूर किया गया। मंदिर खुलने के बाद लोग खुश हैं।

 

यूपी के संभल में मंदिर को फिर से खोलने और दशकों के बाद सुबह की आरती होने के एक दिन बाद, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम कहा कि भगवान का अवतार जल्द ही होने वाला है। सनातन का युग आ रहा है।

 

संभल शिव मंदिर मामले में एडवोकेट विष्णु शंकर जैन का कहना है कि संभल में जिला प्रशासन को एक ऐसा मंदिर मिला जो 46 साल से बंद था... यह सब साबित करता है कि हमारा प्राचीन नक्शा, जिसके बारे में मैं हमेशा कहता था कि वह अस्तित्व में है।'' खुदाई से यह साबित होता है कि संभल एक तीर्थ स्थल है... मंदिर के आसपास कई कुएं और अन्य मंदिर मिल रहे हैं जो इलाके के प्राचीन मानचित्र को साबित करते हैं... 12 दिसंबर का सुप्रीम कोर्ट का आदेश यहां लागू नहीं होता।

 

रातभर मंदिर की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई का काम चला। मंदिर के सामने की एक दीवार को तोड़ा गया है। जिससे मंदिर का गेट एकदम खुला हो जाए। किसी को आने जाने में दिक्कत न हो। आज सुबह हनुमान मंदिर में आरती भी की गई है। सुबह मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं।