25 January 2025

मां तुझे प्रणाम: सुनो गाथा वीरांगनाओं की...एक हाथ में किताब...दूजे में तलवार खूब लड़ी मर्दानी...वो रानी ‘हिन्दुस्तानी’ थी, कोमल हाथों से वज्र प्रहार तक...जब शान से लहराया तिरंगा आजाजी की मतवाली...जो मर मिटी देश पर

 

भरतीयों के दिलों में महिला स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति आदर और सम्मान आज भी कम नहीं हुई हैं जिन्होंने भारत को स्वतंत्र करवाने में अपनी मुख्य भूमिका निभाई थी। आज भी गणतंत्र दिवस हो या फिर स्वतंत्रता दिवस लोग इकट्ठे होकर आजाद जीवन के लिए उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों का शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने भारत को स्वतंत्र करवाने में अपनी जान की बाजी लगा दी थी। इसके साथ ही इतिहास इस बात का भी गवाह है कि उस दौर में जहां महिला को पर्दों के पीछे रखा जाता था जब महिलाएं घर, परिवार और समाज के डर से दहलीज नहीं लांघती थी, उस दौर में देश की इन महिला स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को आजाद करवाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उस दौर में महिलाएं देश की आजादी के लिए सामने आई और जितना पुरुषों ने अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने में भूमिका निभाई है उतना ही महिलाओं ने भी भारत को आजादी दिलाने में अपना योगदान दिया है। उन्हीं में से एक हैं

 


कित्तूर रानी चेन्नम्मा

भारत की आजादी में एक प्रमुख हस्ती थीं लेकिन हम शायद ही उनका नाम जानते हों।

 

वह उन कुछ और शुरुआती भारतीय शासकों में से थीं जिन्होंने भारत की आजादी के लिए ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

 

अपने बेटे और पति की मृत्यु के बाद अपने राज्य की जिम्मेदारी संभाली अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी साथ ही अपने राज्य को बचाने की कोशिश की

 

कित्तूर रानी चेन्नम्मा एक सेना का नेतृत्व किया और युद्ध के मैदान में    साहसपूर्वक लड़ीं और कित्तूर रानी चेन्नम्मा युद्ध के मैदान में बलिदान हो गई।

उनके साहस की रोशनी आज भी देश में है और उन्हें कर्नाटक की सबसे बहादुर महिला के रूप में याद किया जाता है

 

 

देश की आजादी में अनगिनत लोगों ने अपना योगदान दिया है और हर किसी की अपनी एक कहानी है जो उस दौर को बया करती है। 1942 का आंदोलन देखते ही देखते जन–क्रांति बन गया था और ऐसा माहौल तैयार हुआ की पांच साल बाद ही अंग्रेज हुकूमत ने अपना बोरिया बिस्तर यहां से समेट लिया। मगर इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता की जाते जाते अंग्रेजों ने हमारे देश में ऐसी आग लगाई जो आज भी भयावह रूप ले लेती है। उषा मेहता ने भारत छोड़ो आंदोलन के समय ब्रिटिश के खिलाफ एक सीक्रेट रेडियो यानी कांग्रेस रेडियो की शुरुवात की। उषा मेहता का जन्म 25 मार्च 1920 में हुआ था और सूरत के पास के गांव सरस में रहती थी। 5 साल की उम्र से ही वे अहिंसा के मार्ग को फॉलो करती थी और 8 साल की उम्र में सन 1928 में उन्होंने साइमन आयोग के खिलाफ विद्रोह में हिस्सा लिया था।



उषा मेहता

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिभागियों में से एक थीं

 

गांधी जी का उषा पर बहुत प्रभाव पड़ा, वह पांच साल की थीं जब उनकी मुलाकात गांधी जी से हुई

 

वह केवल आठ साल की थीं जब उन्होंने ‘साइमन वापस जाओ’ विरोध में भाग लिया था

 

वह स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह से स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्पित कर दिया

 

ब्रिटिश सरकार के खिलाफ रेडियो चैनल चलाने के आरोप में उन्हें जेल भी हुई थी

 

भारत की महान महिला स्वतंत्रता सेनानी मैडम भीकाजी कामा को अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति खड़ा करने वाली जननी माना जाता है। उन्होंने सबसे पहले भारतीय ध्वज फहराया था। भीकाजी कामा ने अंग्रेजों की तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई और भारत की आजादी की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा बॉम्बे में प्राप्त की। वह अपने छात्र जीवन के दौरान ऐसे माहौल से प्रभावित हुई, जहां भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन जड़ें जमा रहा था।

 


भीकाजी कामा


प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, जब ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस सहयोगी बन गए, तो फ्रांसीसी अधिकारियों ने उनकी ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के कारण उन्हें तीन साल के लिए नजरबंद कर दिया।

नजरबंदी के दौरान भी, मैडम कामा ने भारतीय, आयरिश और मिस्र के क्रांतिकारियों से संपर्क बनाए रखा और फ्रांसीसी समाजवादियों और रूसी नेतृत्व के साथ सहयोग किया।

75 वर्ष की आयु में 1935 में, उन्हें भारत लौटने की अनुमति मिली, जहां अगले ही वर्ष उनका निधन हो गया।

वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थीं. उन्हें मैडम कामा के नाम से भी जाना जाता था।

 

उन्होंने कई अनाथ लड़कियों को समृद्ध जीवन जीने में भी मदद की, और राष्ट्रीय आंदोलनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

 

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य की किस्से सभी ने पढ़े और सुने हैं। लेकिन अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाली झलकारी बाई के बारे ज्यादा लोगे को पता नहीं होगा। झलकारी बाई के सिर पर न रानी का ताज था न ही राज घराने की सत्ता। लेकिन फिर भी अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहूति दे दी। डलहौजी की नीति के तहत झांसी को हड़पने के लिए ब्रिटिश सेना ने किले पर हमला कर दिया। इस दौरान पूरी झांसी की सेना ने मिलकर अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब दिया।

 



झलकारी बाई

 

रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना में एक सैनिक, दुर्गा दल, रानी के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में से एक थी झलकारी बाई।

वह रानी को खतरे से बचाने के लिये अपनी जान जोखिम में डाल कर अंग्रेजों से खुद जंग लड़ी।

आज तक बुंदेलखंड के लोग उनकी वीरता की गाथा को याद करते हैं, और उन्हें अक्सर बुंदेली पहचान के प्रतिनिधि के रूप में जाना जाता है।

इस  क्षेत्र के कई दलित समुदाय उन्हें भगवान के अवतार के रूप में देखते हैं और उनके सम्मान में हर साल झलकारीबाई जयंती भी मनाते हैं।

 

भारत की वीरांगनाएं जिन्होंने देश को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया। हालांकि इनमें से कई वीरांगनाओं के किस्से कहानियां भुला दिए गए। उन्हें भले ही वह पहचान न मिली हो, जो अमर शहीदों को मिली है। परिवार, पति और बच्चों को ही अपना संसार बना लेने वाली इन महिलाओं के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी गाथा हर किसी को पता होनी चाहिए। ऐसी ही महिला स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की कहानी आज हम आपको बता रहे हैं।




तारा रानी श्रीवास्तव 

तारा रानी का जन्म बिहार के सारण में एक साधारण परिवार में हुआ था

वे 1942 में गांधी जी के भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल होकर सीवान पुलिस स्टेशन की छत पर भारतीय ध्वज फहराने की योजना बनाई

भीड़ इकट्ठा करने में कामयाब रहीं और 'इंकलाब' के नारे लगाते हुए सीवान पुलिस स्टेशन की ओर मार्च शुरू कर दिया

उनके पति फुलेन्दु बाबू  जब आगे बढ़ रहे थे, तो पुलिस ने गोली चला दी

फुलेंदु को गोली लगी और वह जमीन पर गिर गए

बिना किसी डर के तारा ने अपनी साड़ी की मदद से उस पर पट्टी बांधी

भारतीय ध्वज थामे हुए 'इंकलाब' का नारा लगाते हुए भीड़ को स्टेशन की ओर ले जाना जारी रखा

पति की मृत्यु हो गई थी, जब तारा वापस आई थी, लेकिन उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन करना जारी रखा

रानी गिडालू को रानी गाइदिन्ल्यू के नाम से भी जाना जाता है। वे भारत की नागा आध्यात्मिक एवं राजनीतिक नेत्री थीं। इन्‍होंने भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया। भारत की स्वतंत्रता के लिए रानी गाइदिनल्यू ने नागालैण्ड में क्रांतिकारी आन्दोलन चलाया था। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के समान ही वीरतापूर्ण कार्य करने के लिए इन्हें 'नागालैंड की रानी लक्ष्मीबाई' भी कहा जाता है।



रानी गाइदिन्ल्यू

रानी गाइदिन्ल्यू का जन्म 26 जनवरी 1915 को मणिपुर के तमेंगलोंग ज़िले के नुंगकाओ गांव में हुआ था।

कई लोग इस गांव को लुआंग ओ नाम से भी जानते हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई भारतीय परंपरा के अनुसार हुई थी।

कहा जाता है कि वो नागा जनजाति की थी, जो कि जेलियांग्रांग में आती है। 1930 में रानी गाइदिन्ल्यू 13 साल की उम्र में ही स्वतंत्रता की लड़ाई में कूद पड़ीं।

वे अपने भाई कोसिन व हायपोउ जदोनांग के साथ वे हेराका आंदोलन से जुड़ीं।

इस आंदोलन का लक्ष्य था क्षेत्र में दोबारा नागा राज स्थापित करना और अंग्रेज़ों को अपनी मिट्टी से खदेड़ना।

उन्‍होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए अमानवीय कर और नियमों के ख़िलाफ जेलियांग्रांग कबीले के लोग एकजुट होने लगे।

लोगों ने किसी भी तरह का कर देने से मना कर दिया। इसके बाद 17 की उम्र में उन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ दिया।

18 मार्च, 1932 को हान्ग्रुम गांव से तकरीबन 50-60 लोग अंग्रेज सिपाहियों पर हमला बोल दिया।

गैदिनल्यू को अंततः वर्ष 1932 में गिरफ्तार कर लिया गया था तब वह केवल 16 वर्ष की थी और बाद में उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा दी गई।

वह वर्ष 1947 में जेल से रिहा हुई थीं, गैदिनल्यू को "पहाड़ियों की बेटी" के रूप में वर्णित किया, और उनके साहस के लिये उन्हें 'रानी' की उपाधि दी गई। 


औपनिवेशिक शासन या ब्रिटिश राज से भारत की आजादी के संघर्ष में महिलाओं के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। महिलाओं ने हमारे लिए स्वतंत्रता अर्जित करने के लिए विभिन्न यातनाओं व शोषणों आदि का सामना किया।

22 January 2025

दिल्ली का चुनावी दंगल ! किसका होगा मंगल ? किसके पिटारे में क्या-क्या ? फ्री है फ्री... दिल्ली में सब कुछ फ्री ! दिल्ली में AAP, BJP और कांग्रेस के मुफ्त वादे

 

दिल्ली विधानसभा चुनाव में 'रेवड़ियों' के ऐलान का दौर जारी है। आम आदमी पार्टी ने बुधवार को मिडिल क्लास के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आगामी बजट को मिडिल क्लास को समर्पित करने की मांग करते हुए केंद्र सरकार के सामने 7 मांगें रखीं। केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी सड़क से संसद तक मिडिल क्लास की आवाज को बुलंद करेगी। बजट सत्र में आम आदमी पार्टी के सांसद मिडिल क्लास की आवाज उठाएंगे। केजरीवाल ने केंद्रीय आम बजट के बहाने बीजेपी पर निशाना साधा है।


केंद्र सरकार से केजरीवाल की 7 मांगें


शिक्षा का बजट 2 पर्सेंट से बढ़ाकर 10 पर्सेंट किया जाए

प्राइवेट स्कूलों की फीस पर लगाम लगाई जाए

उच्च शिक्षा के लिए सब्सिडी और स्कॉलशिप मिले

हेल्थ का बजट भी बढ़ाकर 10 पर्सेंट किया जाए

हेल्थ इंश्योरेंस से टैक्स को हटाया जाय

इनकम टैक्स की सीमा में छूट को 7 से बढ़ाकर 10 लाख करें

आवश्यक वस्तुओं से जीएसटी हटाई जाए

सीनियर सीटिजन्स के लिए मजबूत रिटायरमेंट प्लान और पेंशन की योजना बने

देश के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में मुफ्त इलाज हो

बुजुर्गों को पहले रेलवे में 50 पर्सेंट छूट मिलती थी, उसे शुरू किया जाए


अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मिडिल क्लास सिर्फ सरकार का एटीएम बनकर रह गया है। देश में मिडिल क्लास टैक्स टेरिरिज्म का शिकार हो रहा है। देश का मिडिल क्लास घर, बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा और अच्छा स्वास्थ्य चाहता है। इन्हीं सब जरूरतों को पूरा करने के लिए एक मिडfल क्लास इंसान पूरी जिंदगी मेहनत करता है।

 

दिल्ली की सत्ता से करीब ढाई-तीन दशक से दूर बीजेपी इस बार के विधानसभा चुनाव में एड़ी-चोटी का जोर लगाती दिख रही है। लक्ष्य है सत्ता से वनवास को खत्म करना। पार्टी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की घेरेबंदी तो कर ही रही है, उसकी मुफ्त की योजनाओं की काट के लिए एक से बढ़कर एक लोकलुभावन वादों की बौछार भी कर रही है। बीजेपी दिल्ली चुनाव के लिए अपने मैनिफेस्टो, जिसे वह संकल्प पत्र कहती है, को 3 हिस्सों में जारी कर रही है। अबतक दो हिस्से जारी हो चुके हैं और दोनों में ही 'मुफ्त की रेवड़ियों' की भरमार है।

 

भाजपा का संकल्प पत्र भाग-1

 

महिला समृद्धि के तहत महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये दिए जाएंगे

गर्भवती महिलाओं को 21000 रुपये दिए जाएंगे

होली-दिवाली पर एक-एक सिलेंडर मुफ्त दिया जाएगा

एलपीजी सब्सिडी 500 रुपये दी जाएगी

गर्भवती महिलाओं को न्यूट्रीशनल किट दिए जाएंगे

पांच लाख रुपये तक का अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा

आयुष्मान भारत योजना दिल्ली में लागू होगा

अटल कैंटीन योजना को लॉन्च किया जाएग

झुग्गियों में पांच रुपये में राशन दिया जाएगा

वरिष्ठ नागरिकों को 3000 रुपये तक की पेंशन दी जाएगी


भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणा पत्र का दूसरा हिस्सा भी जारी कर दिया है। इसमें पार्टी ने सरकारी संस्थानों में जरूरतमंद छात्रों को केजी से पीजी तक मुफ्त पढ़ाई का वादा किया है। इसके साथ ही यूपीएससी की परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को एक बार 15,000 रुपए देने की भी घोषणा की गई है। पार्टी ​ने दिल्ली के पॉलिटेक्निक और कौशल केंद्रों में पढ़ने वाले एससी वर्ग के छात्रों को डॉ. बीआर अंबेडकर के नाम पर 1,000 रुपए मासिक वजीफा देने का भी वादा किया है।

 

भाजपा का संकल्प पत्र भाग-2

 

सरकारी शिक्षण संस्थानों में जरूरतमंद छात्रों को केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा

युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ₹15,000 की वित्तीय सहायता

तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को स्टाइपेंड

डॉ. बी.आर अंबेडकर स्टाइपेंड योजना' के तहत ₹1,000 प्रति माह का स्टाइपेंड

ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए वेलफेयर बोर्ड, ₹10 लाख का जीवन बीमा

₹5 लाख का दुर्घटना बीमा एवं वाहन बीमा और उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति

घरेलू कामगारों के लिए वेलफेयर बोर्ड, ₹10 लाख का जीवन बीमा

₹5 लाख का दुर्घटना बीमा, उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति

घरेलू कामगारों के लिए 6 महीने की पेड मैटरनिटी लीव

भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति एवं एसआईटी का गठन

पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों की संख्या दोगुनी

केंद्र सरकार के सहयोग से दिल्ली के नागरिकों की समस्याओं का समाधान

 

अनुराग ठाकुर ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार की तरफ से दिल्ली में किए कुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाते हुए एसआईटी का गठन किया जाएगा। दिल्ली की सभी 70 सीटों पर 5 फरवरी को वोटिंग होगी। भाजपा 68 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 2 सीट पर वे सहयोगियों को समर्थन दिया है। केजरीवाल की नई दिल्ली सीट से पार्टी ने पूर्व CM साहिब सिंह वर्मा के बेटे और पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा को कैंडिडेट बनाया है। वहीं, CM आतिशी की सीट से पार्टी ने पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी को टिकट दिया है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025

सीट : 70        |        बहुमत : 36

वोटिंग- 5 फरवरी                 रिजल्ट- 8 फरवरी

कुल वोटर- 1.55 करोड़      महिला- 71.74 लाख

पुरुष- 83.49 लाख         कुल कैंडिडेट- 699

 

दिल्ली में 5 फ़रवरी को विधानसभा चुनावों के लिए वोटिंग होनी है। इन चुनावों में दिल्ली की सत्ता को बचाए रखना आम आदमी पार्टी के लिए बेहद अहम है। वहीं तीन दशकों से राज्य की सत्ता पर काबिज़ होने के लिए बीजेपी भी संघर्ष कर रही है। जबकि कांग्रेस पार्टी भी दिल्ली में अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन को दोबारा हासिल करने की कोशिश में है और इन तीनों ही प्रमुख दलों के लिए लोकलुभावन वादे चुनाव प्रचार का अहम हिस्सा बनते दिख रहे हैं।

 

'आप' के चुनावी वादे

 

18 साल और ज़्यादा उम्र की महिला को हर महीने 2100 रुपये मिलेंगे

60 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों का अस्पतालों में फ्री इलाज होगा

बिजली के दाम आधे होंगे, 24 घंटे बिजली

दिल्ली में जनलोकपाल बिल पास करेंगे

दिल्ली में महिला सुरक्षा के लिए 10 से 15 लाख CCTV कैमरा लगेंगे

20 हजार लीटर पानी मुफ्त देंगे

दिल्ली में 47 फास्ट ट्रैक खोले जाएंगे

3 से 6 महीने में दोषियों को सजा दिलाएंगे

मौजूदा कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा

दिल्ली के किसानों को सब्स‍िडी दी जाएगी

पूरी दिल्ली को वाईफाई से लैस करेंगे

दिल्ली में बिजली कंपनियों को रेगुलेट करेंगे

5 साल में हर घर में पानी की सप्लाई देंगे

500 नए स्कूल खोले जाएंगे

5 साल में दिल्ली में वैट के भाव सबसे कम करेंगे

डीटीसी बसों में महिला सुरक्षा के लिए गार्ड होंगे

बिजली कंपनियों का ऑडिट कराएंगे

सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्कीम दी जाएगी

12वीं कक्षा तक सरकारी स्कूलों में फ्री शिक्षा होगी

प्राइवेट स्कूलों में डोनेशन की व्यवस्था पारदर्शी करेंगे

12वीं क्लास के बाद छात्रों को बैंक से लोन मिलेगा

 

दिल्ली चुनाव में कांग्रेस भी पूरी दमखम के साथ मैदान में उतरी है। वह अपनी खोई जमीन पाने के लिए कई चुनावी घोषणाएं की। पार्टी ने बेरोजगार युवकों को 8500 रुपये हर महीने देने की बात कही। इसके साथ ही उन्हें एक साल की अप्रेंटिसशिप पर उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना का मकसद उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।


कांग्रेस के चुनावी वादे


बेरोजगार युवाओं को हर महीने 8500 रुपये की सहायता दी जाएगी

बेरोजगार युवकों को एक साल की अप्रेंटिसशिप देने का वादा किया गया है

500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर दिया जाएगा

मुफ्त राशन किट प्रदान करने का वादा किया गया है

300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया गया है

महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपए दिए जाएंगे

 

कांग्रेस नेता अजय माकन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर भ्रष्टाचार पर पाखंड का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सीएजी रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और आज 14 सीएजी रिपोर्ट में अब खुद केजरीवाल के खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।

दिल्ली के सियासी रण की बिसात अब पूरी तरह से बिछ चुकी है। चुनावी मैदान में अब 699 खिलाड़ी बचे हैं। 23 सियासी सूरमा के साथ सबसे बड़ी जंग नई दिल्ली सीट पर लड़ी जाएगी। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से जारी  किए गए संकल्प पत्र को लेकर आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने निशाना साधा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में हमने शिक्षा मुफ्त कर दी। वहीं भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने केजरीवाल को जवाब देते हुए कहा कि हम दिल्ली के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 15,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता देंगे। दो बार की यात्रा और आवेदन शुल्क की प्रतिपूर्ति करेंगे। यह मोदी की गारंटी है।

21 January 2025

ट्रंप का एक्शन टाइम: WHO से हटा अमेरिका, 78 फैसले रद्द, 1500 लोगों को दी माफी, मैक्सिको सीमा पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित, अमेरिका में थर्ड जेंडर अमान्य घोषित, राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल की घोषणा, अमेरिका में अवैध प्रवासियों की एंट्री बैन, पनामा नहर वापस छीनने की धमकी, कुर्सी पर बैठते ही आदेशों की झड़ी!

 

डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण कर ली है। इसके साथ ही उन्होंने कई मुकदमों, दो महाभियोग और दो बार जानलेवा हमले का सामना करने के बाद अमेरिका की सत्ता में आश्चर्यजनक वापसी की पटकथा लिखी। कड़काड़ाती ठंड के कारण 40 वर्षों में पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह कैपिटल हिल के अंदर आयोजित हुआ। जेडी वेंस ने उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। डोनाल्ड ट्रंप के इनागुरेशन डे इवेंट में अरबपतियों, उद्योगपतियों, उनकी कैबिनेट के सदस्यों और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतियों सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।



ट्रम्प ने सत्ता संभालते ही देश से लेकर विदेश तक अमेरिकी नीतियों में कई बड़े बदलाव किए हैं। शपथ के बाद 30 मिनट के भाषण में डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी के तहत दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही। साथ हीं अमेरिका में केवल महिला और पुरुष जेंडर को मान्यता देने का ऐलान किया। जो इस वक्त अमेरिका में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। ट्रम्प ने कहा- आज से अमेरिकी सरकार के लिए सिर्फ दो जेंडर होंगे पुरुष और महिला। मैं सभी सरकारी सेंसरशिप को तुरंत रोकने और अमेरिका में अभिव्यक्ति की आजादी को बहाल करने के लिए एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करूंगा। ट्रम्प ने चुनाव प्रचार के दौरान ट्रांसजेंडर समुदाय के खिलाफ बयान दिए थे। ट्रम्प के रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ का कहना था कि सेना में महिलाओं और ट्रांसजेंडर्स को शामिल करने से अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है।

 

ट्रम्प ने देश में अवैध प्रवासियों की एंट्री बैन करने और अवैध प्रवासियों को पकड़ कर बॉर्डर पर छोड़ने की पॉलिसी खत्म करने की बात कही है। ट्रम्प ने कहा- बाइडेन प्रशासन ने हमारे देश में अवैध रूप से एंट्री करने वाले खतरनाक अपराधियों को शरण दी है और उनकी हिफाजत की है। अमेरिका में दुनिया के सबसे ज्यादा अप्रवासी हैं। दुनिया के कुल 20% अप्रवासी अमेरिका में ही रहते हैं। 2023 तक यहां रहने वाले अप्रवासियों की कुल संख्या 4.78 करोड़ थी। ट्रम्प का मानना है कि दूसरे देशों से लोग अवैध तरीके से अमेरिका में घुसकर अपराध करते हैं। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अपने संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर नेशनल इमरजेंसी की घोषणा की। अमेरिका की दक्षिणी सीमा मेक्सिको से लगती है। अमेरिका को मेक्सिको बॉर्डर से बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों के घुसपैठ का सामना करना पड़ता है।

 

अमेरिका में अवैध प्रवासियों की स्थिति

देश              संख्या

मेक्सिको                1.07 करोड़

भारत                     28 लाख

चीन                       22 लाख

फिलीपींस               20 लाख

अल सल्वाडोर        14 लाख

 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीतने के बाद से ही अमेरिका में अवैध प्रवासियों को घुसपैठिया बताते रहे हैं। ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद ही अमेरिकी सीनेट ने अवैध अप्रवास को लेकर बिल पास किया। इस विधेयक को 64-35 से पारित किया गया। इस विधेयक को लैकेन रिले एक्ट नाम दिया गया है। 2007 से 2021 तक दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में अमेरिका में अवैध तरीके से प्रवेश करने वाले अप्रवासियों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी हुई है।

 

अमेरिका में कहां ज्यादा रहती है अवैध प्रवासी आबादी 

अमेरिकी शहर            कुल अवैध प्रवासी

कैलिफोर्निया                       19 लाख

फ्लोरिडा                                   09 लाख

न्यूयॉर्क                                      06 लाख

न्यू जर्सी                       4.5 लाख

इलिनोइस                                 04 लाख

 

ट्रम्प ने अमेरिका-मेक्सिको के दक्षिणी बॉर्डर पर इमरजेंसी लागू कर दी है। यहां से होने वाली सभी अवैध एंट्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। ट्रम्प सरकार अपराध करने वाले विदेशियों को उनके देश वापस भेजेगी। US-मेक्सिको बॉर्डर से आने वाले अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ट्रम्प का कहना है कि यहां से अवैध प्रवासी और अपराधी अमेरिका में एंट्री करते हैं। ट्रम्प इस बॉर्डर पर दीवार बनाने की बात भी कह चुके हैं।

 


ट्रम्प ने पनामा नहर को वापस लेने की भी घोषणा कर दी है। ट्रम्प ने कहा कि इस नहर की वजह से हमारे साथ बहुत बुरा बर्ताव किया गया है। इसे कभी गिफ्ट के तौर पर पनामा देश को नहीं दिया जाना चाहिए था। आज चीन पनामा नहर ऑपरेट कर रहा है। हमने इसे चीन को नहीं दिया। हमने इसे पनामा देश को दिया। हम इसे वापस लेने जा रहे हैं। इस नहर को अमेरिका ने 1999 में पनामा देश को गिफ्ट किया था, लेकिन इस पर अब चीन का कंट्रोल हो चुका है और यहां अमेरिकी जहाजों को ज्यादा टैक्स देना पड़ता है।


क्या है पनामा नहर विवाद ?

 

पनामा मध्य अमेरिका में स्थित एक देश है

यह देश उत्तर और दक्षिण अमेरिका को जोड़ने वाले एक संकरे भूभाग पर स्थित है

पनामा अपनी गगनचुंबी इमारतों के लिए जाना जाता है

इसे लैटिन अमेरिका का दुबई भी कहा जाता है

पनामा नहर एक मानव निर्मित जलमार्ग है

यह नहर अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है

इसकी कुल लंबाई करीब 82 किलोमीटर

औसत चौड़ाई 90 मीटर और न्यूनतम गहराई 12 मीटर है

नहर को पनामा की रीढ़ की हड्डी माना जाता है

नहर का नाम पनामा देश के नाम पर रखा गया है, यह नहर पनामा देश में है

सबसे पहले 1880 के दशक में फ्रांस ने पनामा नहर बनाने का काम शुरू किया था

टीम को भौगोलिक व जलवायु चुनौतियां से जूझना पड़ा

मलेरिया और यलो फीवर बीमारियों के चलते हजारों श्रमिकों की जान चली गई

ऐसे में फ्रांस ने अपनी कोशिश को विराम दे दिया

इसके बाद, 1904 में अमेरिका ने पनामा नहर के प्रोजेक्ट को अपने हाथ में लिया

अमेरिकी इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने बेहतर तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 1914 में नहर बना दी

नहर को बनाने में बड़ी संख्‍या में इंजीनियर, साइंटिस्ट और मजदूर लगे

उस वक्त इस नहर को बनाने 38 करोड़ अमेरिकी डॉलर खर्च हुए थे

 


जब पनामा नहर बनकर तैयार हुई, उसके बाद कई सालों तक इस पर अमेरिका का कंट्रोल रहा। धीरे-धीरे पनामा में इसका विरोध शुरू हुआ। तब साल 1977 में अमेरिका और पनामा के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए। समझौते में इस बात पर सहमति बनी कि 1999 तक पनामा नहर का संचालन अमेरिका करेगा। इसके बाद संचालन की जिम्मेदारी पनामा को सौंप दी जाएगी। ऐसा हुआ भी। 31 दिसंबर, 1999 को पनामा नहर का पूरा कंट्रोल पनामा के पास आ गया। मौजूदा समय में पनामा नहर का कंट्रोल पनामा सरकार के पास है। इसका संचालन और प्रबंधन पनामा कैनाल अथॉरिटी करती है।

 

अमेरिका के लिए पनामा नहर इतनी अहम क्यों है ?

 

पनामा के पास जब से इस नहर का कंट्रोल आया है, तब से उसके संचालन की तारीफ होती रही है

हर साल हजारों जहाज इस नहर से गुजरते हैं, जिससे पनामा की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होता है

पनामा की सरकार को इस नहर से सालाना एक अरब डॉलर से ज्यादा की ट्रांजिट फीस मिलती है

पनामा नहर से सबसे ज्‍यादा आवाजाही अमेरिकी पोतों की होती है

पनामा कैनाल अथॉरिटी की मानें तो पनामा नहर से 75%  कारगो या तो अमेरिका जाते हैं या अमेरिका से आते हैं

हर साल करीब 270 अरब डॉलर का कारोबार इस रूट से होता है

अगर अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार की बात करें तो महज पांच फीसदी कारोबार पनामा नहर मार्ग से होता है

पनामा नहर को कुशल इंजीनियरिंग का नतीजा बताया जाता है और वैश्विक व्यापार में इसे क्रांतिकारी बदलाव के रूप में भी देखा जाता है



कानूनी और राजनीतिक तौर पर अमेरिका के लिए पनामा नहर को अपने कंट्रोल में लेना आसान नहीं है। साल 1977 में दोनों देशों के बीच हुई टोरिजोस-कार्टर संधि के तहत अमेरिका ने नहर का पूरा कंट्रोल पनामा को दिया था। अब अमेरिका को नहर का कंट्रोल अपने हाथ में लेने के लिए पनामा की सहमति और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन की आवश्यक होगी। ट्रम्प के बयान के बाद पनामा की भी प्रतिक्र्या आई है। पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। मुलिनो ने साफ किया कि पनामा नहर पनामा के लोगों का है, और रहेगा। पनामा ने पनामा नहर पर अमेरिका को नियंत्रण देने से इनकार किया है। मुलिनो ने ट्रंप के इस दावे को भी गलत बताया, जिसमें उन्होंने कहा है कि चीन इस नहर का संचालन कर रहा है।


डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनकी सरकार ग्रीन न्यू डील को समाप्त कर देगी। ग्रीन न्यू डील में क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने की बात की गई है। इसके साथ ही ट्रम्प ने इलेक्ट्रिक वाहन की अनिवार्यता को खत्म करने की बात की। ट्रम्प ने कहा कि आप अपनी पसंद की कार खरीद सकेंगे। ट्रम्प कई बार घोषित रूप से जलवायु परिवर्तन पर शक जाहिर कर चुके हैं। ट्रम्प ने अमेरिकी हेल्थ सिस्टम की भी आलोचना की। ट्रम्प का मानना है कि हेल्थ सिस्टम इमरजेंसी में काम नहीं करता है। जबकि इस पर दुनिया में सबसे ज्यादा पैसा खर्च किया जाता है।

 

शपथ के बाद ट्रंप के बड़े फैसले

 

छह जनवरी 2021 को कैपिटल हिल पर हुए हमले के दोषी 1500 लोगों को माफी 

ड्रग्स कार्टेल को आतंकी संगठन घोषित किया जाएगा

अवैध तरीके से देश में दाखिल हो रहे लोगों से अमेरिकी लोगों को बचाया जाएगा

मेक्सिको और कनाडा पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा

 पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट से अमेरिका बाहर होगा

संघीय सरकार में मेरिट के आधार पर नियुक्तियां होंगी

सरकारी सेंसरशिप को समाप्त किया जाएगा

अमेरिका में स्वतंत्र भाषण को फिर से बहाल किया जाएगा

अमेरिका में थर्ड जेंडर अमान्य घोषित

यूएस-मैक्सिको सीमा पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित 

राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल की घोषणा 

इलेक्ट्रिक वाहन की अनिवार्यता समाप्त 

अमेरिका में जन्म से मिलने वाली नागरिकता खत्म

अमेरिका में टिक टॉक को 75 दिन की संजीवनी

 

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जो लोग हमारे उद्देश्य को रोकना चाहते हैं, उन्होंने मेरी आजादी छीनने और वास्तव में मेरी जान लेने की कोशिश की। कुछ महीने पहले, पेंसिल्वेनिया के एक खूबसूरत मैदान में, एक हत्यारे की गोली मेरे कान को चीरती हुई निकल गई। लेकिन मुझे तब भी एहसास था, और अब और भी अधिक विश्वास है, कि मेरी जान किसी कारण से बची थी। ईश्वर ने मुझे अमेरिका को फिर से महान बनाने के लिए बचाया था। मैं ऐतिहासिक कार्यकारी आदेशों की एक श्रृंखला पर हस्ताक्षर कर रहा हूं। इसके साथ हम क्रांति की शुरुआत करेंगे। हम फिर से दुनिया की अब तक की सबसे मजबूत सेना बनाएंगे।