07 November 2020

जिहाद के प्रकार एवं संक्षिप्त विवरण

 


1.  लव जिहाद: (Love Jihad)- मुस्लिम लड़का हिन्दू लड़की को पहले प्यार के झूठे जाल में फंसाता है और बाद में उसका धर्म परिवर्तना कर देता है. साथ ही लड़की को बाद में बेच देता है या फिर बच्चा पैदा करके छोड़ देता है. इसके अलावे लड़की को देह-व्यापार और मानव बम के लिए इस्तेमाल किया जाता है.



2. लैंड जिहाद: (Land Jihad)- लैंड जिहाद के जरिये बांग्लादेशी और रोहिंगीय घुसपैठियों को सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा कराया जारहा है. गरीब हिन्दू एवं आदिवासियों की जमीनों पर कब्ज़ा हो रहा है. साथ ही कुछ राज्य सरकारें विधानसभा में कानून बनाकर मुसलमानों को रेवड़ी की तरह जमीनें बाट रही है. सबसे ताज़ा उदहारण है जम्मू कश्मीर में रौशनी एक्ट इसके तहत हिन्दू बाहुल्य जम्मू में मुसलमानों को सरकारी जमीन पर बसाया गया.

3. रोजगार जिहाद: (Employment Jihad)- देशभर में गरीब हिन्दुओं के रोजगारों पर जबरदस्त हमला कर रहे हैं. सड़क के किनारे टायर पंचर बनाने, नाई का कार्य करनेवाले, मकान बनाने वाले मजदूर, राजमिस्त्री, गाड़ी बनाने वाले मिस्त्री, सब्जी-फल बेचने वाले जैसे सभी छोटे मोटे रोजगार के साधनों पर मुसलमानों का कब्ज़ा हो चुका है. अब बांग्लादेशी और रोहिंगीय भी इसमें शामिल हो गए हैं.

4.  बुद्धिजीवी जिहाद: (Intellectual Jihad)- देश के अंदर अर्बन नक्सलियों के समान इस्लामिक जिहादी भी हैं वे अपने-अपने तरीके से इस्लामिक आतंकवाद को जस्टिफाई करने का काम करते रहते हैं. ये वर्ग शातिर तरीके से अध्यात्मिक और शैक्षणिक स्तर पर इस्लामिक विचारों को बढ़ावा दते हैं.

5.  फिल्म जिहाद: (Film Jihad)- फिल्मों के जरिये हिन्दू देवी-देवताओं और हिन्दुओं बारे में नकारात्मक प्रस्तुति किया जा रहा है. हिन्दू योद्धाओं और वीरांगनाओं को इस्लामिक आक्रान्ताओं से कमतर और हारा हुआ दिखाया जाता है. हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले विषयों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जाता है.

6.  संगीत जिहाद: (Jusic Jihad)- ये एक बेहद ही गोपनीय जिहाद है. इसके जरिये अक्सर फिल्मों में अल्ला-मौला जैसे गाने को परोसा जाता है. इसके म्यूजिक और धून को ऐसे बनाया जाता है कि कोई भी सुनने वाला उसमे मग्न हो जाता है और अल्लाह, मोहम्मद जैसे शब्दों के जरिये उसे इस्लामिक के प्रति लागाव होने लगता है. वो मस्जिदों में जाने लगता है और उसे इस्लामिक इबादतों में विश्वास होने लगता है. आज का युवा पीढ़ी और खुद को आधुनिक बताने वाली हिन्दू लड़कियां सबसे अधिक इस जिहाद की शिकार होती है.

7.  विज्ञापन जिहाद: (Advertisement Jihad)- इसके जरिए बड़े कॉर्पोरेट जगत के विज्ञापनों से हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुचाने का कार्य किया जाता है. साथ हीं विज्ञापन में हमेशा हिन्दू लड़की को मुस्लिम के साथ प्यार या शादी करते दिखाया जाता है. इससे एक प्रकार के मानसिक परिवर्तन करने लव जिहाद को बढ़ावा दने में मुसलमानों को मदद मिलता है.  

8.  राजनैतिक जिहाद: (Political Jihad)- बड़ी योजना के तहत इस्लाम मतावलंबी आरक्षित सीटों पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं. अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की लड़कियों से विवाह कर उनके आरक्षित सीटों पर मुखिया, सरपंच जिला पार्षद बन इन कमजोर वर्गों के साथ अन्याय कर उनके अधिकारों का हनन कर रहे हैं. मस्जिदों से फतवा जारी करके मुस्लिम समर्थक उमीदवारों को वोट करने के लिए अपील करते है मौलवी. चुनाव आयोग से दलितों का परिसीमन बदलवा कर मुस्लिम उमीदवार को जिताया जा रहा है.

9.  घुसपैठ जिहाद: (Infiltration Jihad)- इसके जरिये बांग्लादेश, अफगानिस्तान की सीमा से मुसलमानों को भारत में घुसपैठ कराया जा रहा है. एक आँकड़े के अनुसार यह संख्या 3 करोड़ से 5 करोड़ के बीच में है. इन्हें सेक्युलर राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त है. इस्लामिक संगठन उसे बसाने का ब्यवस्था बनाने में लगे हैं.

10.  जनसंख्या जिहाद: (Population Jihad)- इसके जरिए तेजी से मुस्लिम आबादी बढ़ाई जा रही है. मुसलमानों द्वारा परिवार नियोजन का उपाय नहीं किया जाता है. प्रत्येक मुसलमान 2-3 शादियां करता है. इसप्रकार एक मुस्लिम 15 से 20 बच्चा पैदा करता है. इतना ही नहीं लव जिहाद, घुसपैठ के माध्यम से सुनियोजित तरीके से अपनी संख्या बढ़ाने के लिए हिन्दू लड़कियों से शादी करके बच्चा पैदा करके छोड़ देते हैं.

11. जन्म पंजीकरण जिहाद: (Birth Registration Jihad)- इसके जरिये एक मुसलमान 4 से पांच जगहों पर जन्म पजीकरण करा रहा है ताकि NRC लागू होने पर रोहिंगीय और बांग्लादेशी मुसलमानों को भारतीय नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत करने में आसानी हो. साथ हीं जघन्य अपराध में बचने और सरकारी सुविधाओं का लाभ हासिल कर सकें.

12. औषधीय जिहाद: (Medicinal Jihad)- चिकित्सा के द्वारा इस्लाम का काम यानी हिन्दुओं को समाप्त करना विश्व में इस्लाम की सत्ता को स्थापित करना हैं. अभी-अभी श्री लंका में एक चिकित्सक पकड़ा गया है जो हिन्दू महिलाओं की बच्चादानी निकालने, पुरुषों को नपुंसक बनाने की दवा देना कोई भी रोगी हो उसे इस प्रकार की दवा देना जिससे वह बच्चा नहीं पैदा कर सके. इस समय भारत में यह कार्य बहुत तेजी से हो रहा है. ये एक प्रकार से मानवता के विरुद्ध औषधीय जिहाद है.

13.  केटरिंग जिहाद:  (Catering Jihad)- भारत में अधिकतर मुस्लिम होटल में ये जिहाद चल रहा है उसमें यह कार्य जोरों से चल रहा है. आज सभी आधुनिक हिन्दू पति-पत्नी दोनों भोजन होटल से मंगाते हैं यादि केटरर्स मुस्लिम है तो वह नपुसंकता की दवा खाने में डाल देता है, यदि हिन्दू होटल वाला है तो भोजन पहुचाने वाला यदि मुस्लिम है तो वह रास्ते में भी दवा मिला रहा है. मुसलमानों का प्रथम कर्तब्य जिहाद बताया गया है. ऐसे में कोई भी मुस्लिम किसी भी प्रकार से जिहाद करने से नहीं चुकता है.

14.  आर्थिक जिहाद: (Economic Jihad)- इसके जरिये नकली नोटों को भारत में फैलाया जा रहा है ताकि भारत को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा सके. साथ ही सभी बड़े प्रोजेक्ट और संस्थाओं में बड़े मुस्लिम उद्योगपति निवेश कर के उसपर अपना कब्ज़ा कर रहे है. इसके लिए बड़े पैमाने पर विदेशों से धन हवाला और अन्य माध्यमों के जरिये लाया जारहा है.

15. ऐतिहासिक जिहाद: (Historical Jihad)- ये एक बेहद ही घातक जिहाद है, इसके जरिये पूरे हिन्दुओं की इतिहास को धवस्त करके इस्लामिक आक्रान्ताओं को महान और विजेता के रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है. सभी प्रकार के पाठ्यक्रम और स्कूलों में इस्लामिक इतिहास को बढ़ावा दिया जा रहा है. मुगलों की झूठी महानता का महिमामंडित किया जा  है. हिन्दू राजाओं को उनके इतिहास को हारा हुआ और झूठे तरीके से पेश किया जा रहा है.

16.  मीडिया जिहाद: (Media Jihad)- इसके जरिये ख़बरों के प्रत्येक माध्यम द्वारा इस्लामिक विचारों को फैलाया जा रहा है. साथ हीं मुसलमानों को जिहाद के लिए उकसाया जा रहा है. सभी प्रकार के जिहादी विषयों का प्रचार-प्रसार पड़े पैमाने पर किया जा रहा है. मुस्लिम पत्रकारों और जनसंपर्क संस्थाओं के द्वारा इस्लामिक कट्टरता को बेहद ही शातिर तरीके से प्रचार-प्रसार और उसका बितरण किया जा रहा है. ख़बरों में मिलावट करके हिन्दू समाज में भ्रम की स्थिति पैदा किया जा रहा है.

17.  झूठ जिहाद: (Falsehood Jihad)- इसके जरिये सभी प्रकार के झूठ को फैलाया जाता है. जिसमे प्रमुख रूप से हिन्दू देवताओं के बारे में झूठ, हिन्दू धर्म संस्कृति के बारे में झूठ, दंगा भड़काने का झूठ, हिन्दू नेताओं और पार्टी के बारे में झूठ फैलाया जाता है. झूठी अफवाहों के जरिये समाज में नफरत और सामाजिक सौहार्द को बिगड़ने के लिए किया जाता है. इसका सबसे जयादा उपयोग जम्मू कश्मीर में होता है जहां पर मुस्लिम युवकों को पत्थर बाजी और सेना पर हमला करने के लिए झूठी ख़बरों को फैला कर आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है.  

18. थूक जिहाद: (Sputum Jihad)- ये अबतक का सबसे घटिया किस्म का जिहाद है. इसमें प्रमुख रूप से भूमिका मुस्लिम व्यापारियों का होता है. साथ ही इसे जमीनी स्तर पर मुस्लिम ठेले-खोमचे वाले की होती है. ये लोग फलों, सब्जियों और खाने-पीने की चीजों पर थूक लगा देते है जिससे जो बीमारी बेचने वाले को होती है वही बीमारी खाने वाले को हो जाती है. 

19.  कोरोना जिहाद: (Corona Jihad)- ये सबसे नई किस्म का जिहाद है. ये तब सामने आया जब देशभर में कोरोना का कहर सामने आया था. तबलीगी जमात और कुछ अन्य मुस्लिम संगठन और मौलवियों को देखा गया की वो लोगों में जबरन कोरोना फ़ैलाने के लिए जगह- जगह थूक रहे थे. साथ ही डॉक्टर और नर्सों के ऊपर भी थूकने का मामला सामने आया था. साथ ही मुस्लिम बाहुल्य अधिकतर इलाके में कोरोना का केस इसी वजह से सामने आया था. इसके जरिये हिन्दुओं में माहामारी फ़ैलाने की कोशिश की जाती है.

20.  यूपीएससी जिहाद: (UPSC Jihad)- ये अबतक का सबसे बड़ा जिहाद है, इसके जरिये संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित होने वाले परीक्षा के जरिये मुस्लिम IAS और IPS अधिकारियों की घुसपैठ कराई जाती है. इस घुसपैठ से देश की सत्ता और नौकरशाही पर कब्जे का प्लान बनाया गया है. इसके लिए कोचिंग सेंटर बेहद ही रणनीतिक तरीके से चलाया जा रहा ताकि देश के सभी उच्च पदों पर मुस्लिम अधिकारीयों की भर्ती कराई जा सके.  

लव जिहादियों के खिलाफ लड़ने वाले योद्धा विजयकांत चौहान उर्फ़ जूनियर भगत सिंह

लव जिहादियों को फांसी दिलाने की हमारी मुहीम जारी है. हम इस महा मुहीम की सीरीज में उन सभी देशभक्तों को शामिल कर रहे हैं जो अपने कर्तब्य निष्ठा से हर दिन लव जिहादियों से लड़ रहे हैं.आज इसी कड़ी में हमारे साथ एक ऐसा लव जिहादियों से लड़ने वाले योद्धा शामिल हो रहे हैं. जिन्हें देखते हीं लव जिहादियों की रूह कापती है.



आज हमारे साथ मौजूद है उत्तरप्रदेश से सहारनपुर के रहने वाले लव जिहादियों से लड़ने वाले योद्धा शेरे हिंदुस्तान विजयकांत चौहान.... विजयकांत चौहान देश भर में जूनियर भगतसिंह के नाम से चर्चित हैं. विजय कान्त दो भाई हैं दोनों भाई देश और धर्म के लिए बाल्यकाल से समर्पित हैं...दोनों ने शादी नहीं की है. ये दोनों भाई आजीवन राष्ट्र सेवा का सपथ लिया है. इनके पिताजी 2005 में स्वर्गवासी हो गए. परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूटने के बावजूद भी ये अपने पथ से कभी डीगे नहीं.



इनका अपना कुछ भी नहीं है...आज भी ये गौशाला में रहते है...वही सोते है....हर मिनट हर घड़ी देश धर्म और लव जेहाद के विरूद्ध संघर्ष करते रहते हैं. देशभक्ति का बिगुल स्कूल कॉलेज चौक चौराहों पर प्रचार अपनी बाइक द्वारा करते हैं, बाईक पर हर वक्त भगतसिंह की प्रतिमा लगी रहती है...साथ हीं राष्ट्र ध्वज तिरंगा लहराता र्रहता है. इनकी राष्ट्रभक्ति कुछ इसकदर अपनी अमिट छटा भबिखेरती है की देश भक्ति गीत सुन राह चलते लोग भी झूमने-नाचने गाने लगते हैं...पूरी दुनिया इन्हें प्यार से पागल क्रांतिकारी गुंडा गौरक्षक धर्म रक्षक ना जाने कितने उपनामों से पुकारती है.



42 साल के विजयकांत चौहान पिछले 35 सालों से लव जिहादियों से लड़ रहे हैं. पूरा देश इनके राष्ट्र भक्ति की मुरीद है. हाल हीं में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत स्वामी अवधेशानंद जी गुजरात के उप मुख्यमंत्री नीतिन भाई पटेल इन्हें सम्मानित कर चुके हैं. इसके अलावा राजस्थान मुंबई हैदराबाद दिल्ली पंजाब हरियाणा बिहार मध्य प्रदेश देहरादून अहमदाबाद आदि कई स्थानों पर राष्ट्रभक्त सम्मान से सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं. युवाओं में देशभक्ति को जागृत करने और हिन्दू लड़कियों को लव जिहादियों से बचने के लिए जूनियर भगत सिंह स्कूल कॉलेज में अपना जागरूकता संबोधन करते हैं.



विजयकांत चौहान जी सिर्फ देश हीं नहीं विदेशों में भी चर्चा का विषय बने रहते हैं. हाल ही में अन्तर्राष्ट्रीय न्यूज जर्नलिस्ट पेरिस लंदन कनाडा आस्ट्रेलिया फ्रांस जर्मनी सिंगापुर अमेरिका चाइना भूटान इटली नीदरलैंड आदि के 4 दर्जन से भी ज्यादा न्यूज अख़बार टीवी और वेबसाइट ने इनके उपर डॉक्युमेंट्री बना चुके हैं. लव जिहाद पर विजयकांत जी द्वारा किए जा रहे कार्यों पर शॉर्ट डॉक्युमेंट्री फिल्में जारी अब भी जारी है.



वहीँ बॉलीवुड हीरोइन कल्कि कोचलिन भी इनका इंटरव्यू कर चुकी हैं...और कई सारे इंटरव्यू इनके हर महीने होते रहते हैं. बात चाहे लव जिहाद की हो या राष्ट्रवाद की इनका कदम हमेशा से आगे रहा है. एक बार खुद हीं लाल चौक पर कश्मीर में कड़ाके की ठंड में बाईक पर राष्ट्र ध्वज तिरंगा झंडा लेकर निकल पड़े थे. इनका संकल्प था की तिरंगा लहराकर आऊंगा और लाल चौक के गद्दार विधायक शब्बीर शाह की धुनाई कर के आऊंगा...वरना मुर्दा वापिस आऊंगा...और हुआ भी वही  दोनों कार्य सेना के सहयोग से पूरा किये...शब्बीर शाह की पीटाई पूरी दुनिया ने लाइव देखा था...और लाल चौक पर तिरंगा भी लहराया.



ये अब तक 5 हजार से ज्यादा हिन्दू  लड़कियों की जान लव जिहादियों से बचाया हैं. देशभर में संघर्ष के दौरान कोट-कचहरी, से लेकर पुलिस थाना तक और जिहादियों के फायरिंग का सामने करते हुए इनका ये युद्ध जारी है.

लगभग 200 से ज्यादा हिन्दू से मुस्लिम बनी लड़कियों को संघर्ष द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट नैनिताल उत्तराखंड हाईकोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट चंडीगढ़ हाईकोर्ट मुंबई हैदराबाद बिहार पंजाब से कानूनी लड़ाई लड़ कर घर वापसी कराई है. साथ हीं इन लड़कियों को हिन्दू लड़कों से शादी भी सम्मान पूर्वक कराई है. इनमे कुछ मामले ऐसे भी थे जहां इनके उपर गोलियां तक चलाई गई.



ये एक बड़े गौ भक्त भी हैं...अब तक लगभग 6 हजार से भी ज्यादा मृत गौवंश का सम्मान पूर्वक अंतिम संस्कार निशुल्क करा चुके हैं. इस कार्य के लिए इनका संस्था भगत सिंह एक चिंगारी मिशन वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज़ करा चुका है.

ये अबतक 10 हजार से भी ज्यादा जिंदा गौवंश पिछले 25 सालो के संघर्ष में आमने सामने की फायरिंग में गौ तस्करों से छुड़वाकर गौशाला और पुलिस के हवाले कर चुके हैं. अब तक 10 बार जेल जा चुके है और 100 से ज्यादा बार गिरफ्तार हो चुके है. 200 से ज्यादा फर्जी मुकदमे भी इनके उपर दर्ज हो चुके है. मगर ये हर बार बरी हुए हैं. कुछ थानों में ही ख़तम हो गए कुछ कोर्ट में ख़तम हो चुके है. अब तक 15 बार गोली चल चुकी है इनके उपर... 100 से ज्यादा बार हमले हुए है इनपर... हजारों बार जान से मारने की धमकियां देश विदेश से मिल चुकी है.



इनका पूरा जीवन देश और धर्म के नाम पर समर्पित है. हर महीने एक शाम माता के नाम, एक शाम भगतसिंह के नाम, मां तुझे प्रणाम, एक शाम क्रांतिवीर के नाम सांस्कृतिक देशभक्ति कार्यक्रमों द्वारा युवाओं में देश भक्ति हिंदुत्व और अन्यायों के विरूद्ध संघर्ष के लिए प्रेरित करते रहते हैं. लव जिहादियों को फांसी दिलाने की इस महा मुहीम में...लव जिहादियों के खिलाफ लड़ने वाले इस योद्धा को हम स्वागत करते है.

07 September 2020

संघ लोकसेवा आयोग के लिए संवैधानिक उपबंध

अनुच्छेद 315- संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग

इस अनुच्छेद के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होगा

अनुच्छेद 316- सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि

लोक सेवा आयोग के अध्‍यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति, संघ आयोग या संयुक्त आयोग है तो, राष्ट्रपति द्वारा और, यदि वह राज्य आयोग है तो, राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाएगी

अनुच्छेद 317- लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य का हटाया जाना और निलंबित किया जाना

खंड 3 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, लोक सेवा आयोग के अध्‍यक्ष या किसी अन्य सदस्य को केवल कदाचार के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश से उसे पद से हटाया जाएगा. अथवा राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यालय को हटाने के लिए निर्देश दे सकते हैं.

अनुच्छेद 318- आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों के बारे में नियम बनाने की शक्ति

संघ लोक सेवा आयोग या संयुक्त आयोग की दशा में राष्ट्रपति और राज्य आयोग की दशा में उस राज्य का राज्यपाल नियमों द्वारा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों का निर्धारण कर सकेगा

अनुच्छेद 319- आयोग के सदस्यों द्वारा ऐसे सदस्य न रहने पर पद धारण करने के संबंध में प्रतिषेध

संघ लोक सेवा आयोग का अध्‍यक्ष भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी भी और नियोजन का पात्र नहीं होगा

अनुच्छेद 320- लोक सेवा आयोगों के कृत्य

संघ और राज्य लोक सेवा आयोगों का यह कर्तव्य होगा कि वे संघ की सेवाओं और राज्य की सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाओं का संचालन करें

अनुच्छेद 321- लोक सेवा आयोगों के कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति

संसद द्वारा या किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाया गया कोई अधिनियम लोक संस्था की सेवाओं के संबंध में भी अतिरिक्त कृत्यों के प्रयोग के लिए उपबंध कर सकेगा

अनुच्छेद 322- लोक सेवा आयोगों के व्यय

संघ या राज्य लोक सेवा आयोग के व्यय, जिनके अंतर्गत आयोग के सदस्यों या कर्मचारी को या उनके संबंध में कोई वेतन, भत्ते और पेंशन हैं, भारत की संचित निधि या राज्य की संचित निधि से होंगे

अनुच्छेद 323- लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन

संघ आयोग का यह कर्तव्य होगा कि वह राष्ट्रपति को आयोग द्वारा किए गए कार्य के बारे में प्रतिवर्ष प्रतिवेदन दे

न्यायपालिका को अंधेरे में रख कर पत्रकारिता की हत्या

पत्रकारिता की हत्या न्यायपालिका को अंधेरे में रख कर किया गया. सुदर्शन न्यूज़ के प्रसिद्ध कार्यक्रम बिंदास बोल में आज रात 8:00 बजे UPSC जिहाद पर खुलासे को लेकर लाइव प्रसारण होना था. मगर अफजल प्रेमी गैंग और जेहादी गैंग ने मिलकर दिल्ली उच्च न्यालयसे कार्यक्रम का प्रसारण रोकने को लेकर स्टे आर्डर पास करा लिया. सबसे चौकाने वाली बात ये है कि अफजल प्रेमी गैंग और जेहादी गैंग इस खुलासे को रोकने के लिए पहले सर्वोच्च न्यालय गये थे. मगर सर्वोच्च न्यालय ने कार्यक्रम रोकने से मना कर दिया. 



इस बात को दिल्ली उच्च को नहीं बताया गया और कोर्ट को अंधेरे में रख कर स्टे आर्डर पास करा लिया गया. तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है की क्या ये न्यायपालिका की हत्या नहीं है क्या ये सदी का सबसे बड़ी न्यायिक त्रासदी नहीं है ? आखिर खुलासे से पहले ही क्यों डर गया जिहादी गैंग ? प्रसारण से पहले ही हिल गये वामपंथी ? सेक्युलर जमात को क्यों चुभ रहा है बिंदास बोल ? क्या देश में मीडिया की आजादी खतरे में है ? 



कहाँ हैं लोकतंत्र की दुहाई देने वाले अवार्ड वापसी गैंग ? क्या अब पत्रकारिता की धारा अफजल प्रेमी गैंग तय करेगा ? क्या मीडिया अब आजाद नहीं रहा ? इन सभी सवालों का जवाब आज पूरा देश पूछ रहा है. सेक्युलर जमात को इन सवालों का जवाब देना पड़ेगा. आप भी आवाज़ उठाईये और पत्रकारिता और न्यायपालिका की हत्या होने से बचाईये. जय हिन्द, जय हिन्दू राष्ट्र.


18 August 2020

भारत में मुग़लों मुस्लिम आक्रमणकारीयों की हार का इतिहास

आज हम अंग्रेजों से तो आजाद हो गएं हैं मगर इस सत्ता के हस्तांतरण वाली आजादी से भी बड़ी एक आजादी की जश्न आज भी बाकी है...आपको ये बात सुनने में भले हीं थोड़ी अटपट्टा सा लग रहा हो, लेकिन आज इस जश्न के लिए हर हिन्दुस्तानी बेसब्री से इतिज़ार कर रहा है...और ये बेसब्री भरी इतिज़ार है मुस्लिम अतितायियों पर मिली विजय पर्व मनाने की. अत्याचारी मुस्लिम आक्रमणकारीयों को सबसे बड़ी हार भारत में मिली थी.

एक या दो बार नहीं बल्कि अनेकों बार दुराचारी मुल्लापंथी हमलावरों को क्षत्रपति शिवाजी की मराठवाड़ा सेना से लेकर चितौरागढ़ की राजपूताना शासकों ने युद्ध में हरा कर महाविजय पाया था. मगर आज इस माहविजय को भुलाने की साजिस हो रही है..ऐसे में अब समय आगया है की मुस्लिम अतितायियों पर मिली विजय पर्व को मनाने के लिए कोई एक दिन जरुर होना चाहिए.

ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे योद्धाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने मुगलों और मुस्लिम आक्रमणकारियों को हरा कर धूल चटा दिए थे, इस योद्धाओं के आगे इस्लामिक आक्रान्ताओं के पसीने छूट गये थे. असम के योद्धा अहोम पूर्वी क्षेत्र में मुगलों के विस्तारवादी अभियान को सबसे बिराम दिया था. अगस्त 1667 में उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे मुगलों की सैनिक चौकी पर जोरदार हमला किया था. इस हमले में मुग़ल कमांडर सैयद फ़िरोज़ ख़ान सहित सभी मुग़ल फौजियों को बंदी बना लिया. इस हार के बाद मुगलों ने पूर्वी क्षेत्र की ओर देखना ही छोड़ दिया.

अटक से कटक तक केसरिया लहराने और हिंदू स्वराज स्थापित करने का कार्य किया बाजीराव प्रथम ने. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 19-20 साल के इस महान योद्धा ने तीन दिन तक दिल्ली के इस्लामिक सलतनत को बंधक बनाकर रखा. मुगल बादशाह की लालकिले से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हुई. इसके बाद धीरे-धीरे उसने महाराष्ट्र को ही नहीं पूरे पश्चिम भारत को बाजीराव प्रथम ने मुगल आधिपत्य से मुक्त कर दिया. बुंदेलखंड में भी मुगल सिपहसालार मोहम्मद बंगश को बाजीराव ने हराया. 

वीर शिवाजी ने पूरे मुगल साम्राज्य को अपने कदमों पर झुकाने में सफल रहे. शिवाजी ने धौखेबाज अफजल खां का पेट चीर दिया था. शिवाजी महाराज और अफजल खान की मुलाकात प्रतापगढ़ के पास शामियाने में हुई थी. अफजल खान जैसे ही शिवाजी महाराज से गले मिला उसने हाथ में बंधा चाकू शिवाजी की पीठ में घोपने की कोशिश की. शिवाजी ने सतर्कता बरती और अफजल खान का पेट बाघनख से चीर दिया. औरंगजेब ने शिवाजी को विजयी राजा की मान्यता दी. 1670 में सूरत नगर को दूसरी बार शिवाजी ने जीता. उन्होंने मुगल सेना को सूरत के पास फिर से हराया. 1674 तक शिवाजी ने उन सारे प्रदेशों पर अधिकार कर लिया जो मुग़लों के कब्जे में थे.

24 दिसंबर 1737 का दिन मराठा सेना ने मुगलों को जबरदस्त तरीके से हराया. निजाम ने अपनी जान बचाने के लिए संधि कर लिया और मालवा मराठों को सौंप दिया. मुगलों ने पचास लाख रुपये बतौर हर्जाना बाजीराव को सौंपे. भारतीय इतिहास के नायक महाराणा प्रताप ने आजीवन मुगलों का मुकाबला किया. महाराणा प्रताप ने बहलोल खान के सिर पर इतनी ताकत से वार किया कि उसे घोड़े समेत 2 टुकड़ों में काट दिया. इस युद्ध के बाद यह कहावत बनी कि "मेवाड़ के योद्धा सवार को एक ही वार में घोड़े समेत काट दिया करते हैं".

प्रताप के पुत्र ने दिवेर के शाही थाने पर हमला किया. यह युद्ध इतना भीषण था कि महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह ने मुगल सेनापति पर भाले का ऐसा वार किया कि भाला उसके शरीर और घोड़े को चीरता हुआ जमीन में जा धंसा और सेनापति मूर्ति की तरह जमीन में गड़ गया. राजपूत सेना ने अजमेर तक मुगलों को खदेड़ा. भीषण युद्ध के बाद बचे-खुचे 36000 मुग़ल सैनिकों ने महाराणा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया.

रानी कर्णावती ने शाहजहां के 30 हजार घुड़सवारों को गढ़वाल की सीमा में घेर लिया. इन मुलापंथी सैनिकों ने रानी के आगे आत्मसमपर्ण कर दिया. रानी दुर्गावती ने शाहजहां के सैनेकों को जीवनदान देने के लिए नाक कटवानी की शर्त रखी. मुगल सैनिकों के हथियार छीन लिए गये...आखिर में उनके एक एक करके नाक काट दिये गये. शाहजहां की ये सबसे बड़ी शर्मनाक हार थी. गुरु हरगोबिंद सिंह जी ने भी मुगलों को हर युद्ध में धूल चटाई. गुरु हरगोबिंद सिंह ने मुगलों के आगे कभी हार नहीं मानी. सारागढ़ी की जंग में 21 सिखों नें 10,000 मुगलों को हराया था.

महाराजा सूरजमल ने अपने जीवन में कई युद्ध लड़े और सभी जीते. युद्ध के दौरान हजारों दुश्मनों को नरक का रास्ता सूरजमल की तलवार ने दिखाया. चन्दौस का युद्ध 1746, बगरू का युद्ध 20 अगस्त 1748, मेवात का युद्ध 1 जनवरी 1750, घासेड़ा का युद्ध 1753 में हुआ, दिल्ली विजय 10 मई 1753 समेत ऐसे कई युद्ध सूरजमल ने जीते थे.

सूरजमल ने दिल्ली के मुस्लिम शासक बख्शी सलामत खान को मेवात के युद्ध में 1 जनवरी 1750 को हरा दिया. वहीँ तराइन के इतिहास में तीन युद्धों का जिक्र मिलता है. यह क्षेत्र आज हरियाणा के कुरुक्षेत्र में थानेश्वर के निकट का इलाका माना जाता है. साल 1191 में पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच तराइन का पहला युद्ध हुआ था जिसमें पृथ्वीराज चौहान की जीत हुई थी. ऐसे में सम्पूर्ण भारत में भगवा पताका लहराने का विजय इतिहास रचने वाले इन महान हिन्दू योद्धाओं और बिरंगानाओं की विजय गाथा का दिवस कब मनाया जायेगा..?


मराठा महासंघ के हिन्दू शासक

गुजरात- पीला जी गायकवाड

दिल्ली- बाजीराव पेशवा

मालवा- पिल्लै जी जाधव

कालपी- मल्हार राव होलकर

झाँसी- होलकर वंश

उज्जैन- रानो जी सिंधिया

सागर- बाजीराव पेशवा

नागपुर- भोसले वंश

ग्वालियर- सिंधिया राज वंश

बरौदा- पिल्लै जी गायकवाड

ओरछा- बाजीराव पेशवा

पंजाब-1 संबा सिंधिया 

पंजाब-2 दत्ता जी सिंधिया

इंदौर- अहिल्या बाई होलकर

बसीन- चिमना जी अप्पा

कोलाबा, सतारा, असीरगढ़

बुरहानपुर, तंजावुर, अहमदनगर,

बीजापुर, दौलताबाद- बाजीराव पेशवा

हैदराबाद- बाजीराव पेशवा

तिरुचिलापुरी- रघुजी भोसले

बरार- रघुजी भोसले

देवास- पंवार वंश

धार- पंवार वंश

बिठूर- पेशवा वंश

08 August 2020

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए केन्द्र ने साल 2030 तक का लक्ष्य रखा है.  शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केन्द्र सरकार दोनों का अधिकार होता हैराज्य सरकारें इसे पूरी तरह माने ये ज़रूरी नहीं है. जहाँ कहीं टकराव वाली स्थिति होती है, दोनों पक्षों को आम सहमति से इसे सुलझाने का सुझाव दिया गया है. 

पहले 6 साल से 14 साल के बच्चों के लिए आरटीई लागू किया गया था. अब 3 साल से 18 साल के बच्चों के लिए इसे लागू किया गया है. 

ये फार्मूला सरकारी और प्राइवेट सभी स्कूलों पर लागू होगा.

नई शिक्षा नीति में 3 लैंग्वेज फ़ॉर्मूले की बात की गई है, जिसमें कक्षा पाँच तक मातृ भाषा/ लोकल भाषा में पढ़ाई की बात की गई है.

जहाँ संभव हो, वहाँ कक्षा 8 तक इसी प्रक्रिया को अपनाया जाए.

संस्कृत भाषा के साथ तमिल, तेलुगू और कन्नड़ जैसी भारतीय भाषाओं में पढ़ाई पर भी ज़ोर दिया गया है.

सेकेंड्री सेक्शन में स्कूल चाहे तो विदेशी भाषा भी विकल्प के तौर पर दे सकेंगे. 

अब बोर्ड एग्जाम दो बार होंगे, इनको पास करने के लिए कोचिंग की ज़रूरत नहीं होगी.

परीक्षा का स्वरूप बदल कर अब छात्रों की 'क्षमताओं का आकलनाकिया जाएगा, ना कि उनके यादाश्त का. केंद्र की दलील है कि नंबरों का दवाब इससे ख़त्म होगा.

बोर्ड परीक्षाओं के अतिरिक्त राज्य सरकारें कक्षा 3, 5 और 8 में भी परीक्षाएँ लेंगी.

नई शिक्षा नीति में अंडर ग्रेजुएट कोर्स में दाख़िले के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से परीक्षा कराने की बात कही गई है.

रीजनल स्तर पर, राज्य स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर ओलंपियाड परीक्षाएं कराने के बारे में भी कहा गया है.

आईआईटी में प्रवेश के लिए इन परीक्षाओं को आधार बना कर छात्रों को दाख़िला देने  की बात की गई है. 

कोई भी नई यूनिवर्सिटी केवल एक विषय विशेष की पढ़ाई के लिए आगे से नहीं बनाई जाएगी.

2030 तक सभी यूनिवर्सिटी में अलग अलग स्ट्रीम की पढ़ाई एक साथ कराई जाएगी.

मेडिकल की पढ़ाई के लिए अलग एक्रिडेशन पॉलिसी बनाने की बात नई शिक्षा नीति में कही गई है. 

अब ग्रेजुएशन (अंडर ग्रेजुएट) में छात्र चार साल का कोर्स पढ़ेगें, जिसमें बीच में कोर्स को छोड़ने की गुंजाइश भी दी गई है.

पहले साल में कोर्स छोड़ने पर सर्टिफ़िकेट मिलेगा, दूसरे साल के बाद एडवांस सर्टिफ़िकेट मिलेगा और तीसरे साल के बाद डिग्री, और चार साल बाद की डिग्री होगी शोध के साथ. 

पोस्ट ग्रेजुएट में तीन तरह के विकल्प होंगे:-

पहला होगा दो साल का मास्टर्स, उनके लिए, जिन्होंने तीन साल का डिग्री कोर्स किया है. 

दूसरा विकल्प होगा चार साल के डिग्री कोर्स शोध के साथ करने वालों के लिए. ये छात्र एक साल का मास्टर्स अलग से कर सकते हैं.

तीसरा विकल्प होगा, 5 साल का इंटिग्रेटेड प्रोग्राम, जिसमें  ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन दोनों एक साथ ही हो जाए.

पीएचडी के लिए अनिवार्यता होगी चार साल की डिग्री शोध के साथ.

एमफिल को नई शिक्षा नीति में बंद करने का प्रावधान है. 

प्राइवेट संस्थाएँ जो उच्च शिक्षा देंगी उनको 25 फ़ीसदी से लेकर 100 फ़ीसदी तक स्कॉलरशिप अपने 50 फ़ीसदी छात्रों को देना होगा.

उच्च शिक्षा संस्थानों को ग्रांट देने का काम हायर एजुकेशन ग्रांट्स कमिशन करेगा.

09 July 2020

गोवा सरकार की ईसाई प्रेम, चर्च पर लुटायेगी 46 करोड़

गोवा सरकार ने चर्च के लिए 46 करोड़ रूपये सरकारी खजाने से लुटाने जा रही है. देश में ये अजीबोगरीब घटना देश और लोकतंत्र दोंनों के लिए बहुत बड़ी खतरे की घंटी है. संविधान के अनुसार कोई भी सरकार सरकारी पैसा धार्मिक कार्यों के लिए खर्च नही कर सकती है. गोवा सकार ने चर्च पर पैसा खर्च करने के लिए 4 महीने का एक लंबा चौड़ा बजट जारी किया है. बेसिलिका चर्च के उपर 46 करोड़ रूपये चार महीनों में खर्च करने की योजना है.

इतनी बड़ी राशी चर्च के सिर्फ सौंदर्यीकरण के ऊपर खर्च किया जायेगा. गोवा सरकार के इस एकतरफ फैसले से हिन्दुओं में काफी नराजगी है. गोवा सरकार के इस फैसले को लेकर कई सारे हिन्दू संगठनों ने आलोचना की है. गोवा सरकार सिर्फ चर्च को टूरिज्म को बढ़ावा देने के नाम पर अथाह धन लूटा रही है. जबकि वहीँ दूसरी ओर गोवा में हिन्दू मंदिर और अनेकों हिन्दुओ के धार्मिक स्थल खंडहर में तब्दील हो रहे है.

ईसाई मिशनरियों के दबाव में गोवा सरकार असंवैधानिक फैसले ले रही है. जिसे लेकर अब राज्यभर में सरकार की आलोचना हो रही है. ऐसे में सवाल खड़ा होता है की वोट के लिए सरकारी धन का उपयोग क्या लोकतंत्र का मजाक नहीं है. अगर गोवा सरकार को टूरिज्म का इतना ही चिंता है तो फिर वो हिन्दू धार्मिक स्थलों का सौदर्यीकरण क्यों नही करा रही है ? क्या गोवा सरकार को सिर्फ ईसाईयों का वोट चाहिए..? गोवा सरकार का ये फैसला बहुत बड़ी संवैधानिक त्रासदी है, जिसपर उसे पुनर्विचार करना चाहिए.