17 November 2020

सरकारी तंत्र की जंजीरों से प्रेस को आजादी कब ?

आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है जिसे आज पूरा पत्रकारिता जगत बधाई संदेशों और शुभकामनाओं सहित मना रहा है. चार जुलाई, 1966 को भारत में प्रेस परिषद की स्थापना की गई थी, जिसने 16 नवम्बर, 1966 से अपना पूर्ण रूप से कार्य शुरू किया था। तभी से 16 नवम्बर को 'राष्ट्रीय प्रेस दिवस' के रूप में मनाया जाता है। मगर आज इसी प्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है की सरकारी तंत्र की जंजीरों से आखिर कब मिलेगी प्रेस को आजादी ? क्योंकी ये आजादी कोई एक-आध दिन की बात नहीं है, बल्कि इसका एक लंबा इतिहास है.



प्रेस के अविष्कार से लेकर इसके नवजागरण तक एक सशक्त हथियार के रूप में हमेशा से हीं उपयोग होता रहा है. भारत में प्रेस ने आजादी की लड़ाई में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया था. बालगंगाधर तिलक से लेकर सुभाष चंद्रबोश और लाला लाजपत राय तक सबसे प्रेस को एक अचूक अस्त्र के रूप प्रयोग किया. मगर आज इसी प्रेस की आजादी पर अब सरकारी तंत्रों का कब्ज़ा है. आए दिन किसी भी छोटे-मोटे मुद्दे पर आज संपादक को सरकारी नोटिस थामा दिया जाता है. तो कभी किसी पत्रकार को पुलिस प्रशासन जब चाहता है घर से उठा लेता है. जिसे आज गुलामी वाली तंत्रों से मुक्त करने की आवश्कता है. प्रेस की आजादी को लेकर आज कई सवाल उठ रहे हैं। पत्रकार और पत्रकारिता के बारे में आज एक विशेष धारणा बना दिया गया है जिसे तोड़ने की जरूरत है.



मीडिया आज के समय में सबसे बड़ा और प्रभावशाली हथियार है, जिसके जरिये किसी भी संस्था या सत्ता को बेपर्दा किया जा सकता है. शायद यही कारण है की अब राष्ट विरोधी ताकतें भी मीडिया का सहारा ले रही है. इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट यानी आई.एफ.जे. के सर्वे के अनुसार 2016 से लेकर अबतक लगभग हजारों पत्रकारों की हत्या हो चुकी है. ये प्रेस की आजादी और उसके बढ़ते प्रभाव का नतीजा है. जान से मारने व डराने की धमकी आज पत्रकारों के लिए आम बात हो गयी है.



वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत तीन पायदान पीछे होते हुए 136 नंबर पर आ गया है। ये आकड़े बताने के लिए काफी है की भारत में प्रेस की आजादी पर बहुत बड़ा संकट है। सत्ता और मीडिया में हमेशा से हीं छत्तीस का आंकड़ा रहा है। लेकिन कई बार शक्तिशाली सत्ताएं प्रेस की गला घोटने से भी परहेज नहीं करती। जिसका सबसे बड़ा उदहारण 1975 का आपातकाल है. 



आज पत्रकारिता जगत को सरकारी तंत्र सत्ता और बाजार के हाथों की कठपुतली बनाना चाहता है. अगर कोई मीडिया संस्थान इसके इतर जाने का प्रयाश करता है तो फिर या तो उसे दबाने की कोशिश की जाती है या फिर गुलामी की तंत्रों से उसे जकड़ने की भरपूर प्रयास होती है. फिर भी देश में आज भी बहुत से ऐसे राष्ट्रीयवादी मीड़िया संस्थान हैं जो राष्ट्र की एकता और अखंडा के लिए अपने मुनाफे की प्रवाह किये हर रोज जिहादी ताकतों से लड़ रहे हैं...और कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति की अधिकारों की लड़ाई भी अपने जान की प्रवाह किये बगैर लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। एडविन वर्क द्वारा मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया। 



वहीं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (क) के वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जाता है। यानी की प्रेस की आजादी मौलिक अधिकार के अंतर्गत आती है। फिर भी समय-समय पर सरकार इस पर प्रतिबंध के जरिये जकड़ने की प्रयास करती है जो प्रेस की आजादी के लिए बेहद ही घातक है. इसलिए आज हम पूछ रहे हैं की सरकारी तंत्र की जंजीरों से प्रेस को आजादी कब ?

                          भारत में टीवी चैनल

प्रसारण मंत्रालय के अनुसार देश में कुल 877 सक्रिय टीवी चैनल है

न्‍यूज और करेंट अफेयर्स कैटेगरी में कुल 389 चैनल है

नॉन न्‍यूज कैटेगरी में कुल 488 चैनल है

                    भारत में समाचार पत्र

भारत के कुल समाचार पब्लिकेशंस की संख्‍या 1,10,851 है

हिन्‍दी अखबार और पत्रिकाओं की संख्‍या 44,557 है

अंग्रेजी में कुल पब्लिकेशंस की संख्‍या 14,083 है

                   भारत में न्यूज़ मैगज़ीन

देश में कुल 16136 न्यूज़ मैगज़ीन है

इसमें हिंदी के 46,229 न्यूज़ मैगज़ीन है

                   भारत में न्यूज़ एजेंसी

भारत में कुल 8 प्रिंट मीडिया के बड़े न्यूज़ एजेंसी हैं

ऑडियो-वीडियो के कुल 4 बड़े न्यूज़ एजेंसी हैं

                    भारत में न्यूज़ वेबसाइट

भारत में कुल 263000 न्यूज़ वेबसाइट है

भारत में 5 लाख से ज्यादा यूट्यूब चैनल है

13 November 2020

जकात फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया का सरकारी तंत्रों पर कब्जे का प्लान

जकात पूरे देश के सरकारी तंत्रों पर कब्जे का प्लान बना रहा है. जकात का मकसद सिर्फ सिविल सेवा परीक्षा तक ही सिमित नहीं है. जकात फाउंडेशन की वेबसाइट से प्राप्त “21वी शताब्दी कश्मीरी पुनर्जागरणनाम से मिले कागजातों में चौकाने वाले तथ्य सामने आये हैं. इस कागज़ातों में बताया गया है कि कैसे शताब्दियों से भौगोलिक सीमाएं बदलती आई है. साथ ही भारत पर होने वाले पहले इस्लामिक हमले  को प्रमुखता से दर्शाते हुए इस्लामिक हमले के बड़े चित्र को उकेरा गया है। जकात का ऐसा मानता है कि इंसान के किसी बड़े मकसद को भूगोल की सीमाओं में बांधा नहीं जा सकता.

नवजागरण में खिलाफत की तस्वीर के साथ देश के वर्तमान सीमाओं को भूलने की बात बेहद ही खतरनाक है. क्योंकि यही आवाजें कश्मीर में भारत के विरुद्ध लड़ने वाले अलगाववादी संगठनों की है. इन्हीं में से एक लेख इस्लामिक विश्वविद्यालय विज्ञान व तकनीकके नाम से लिखा गया गया है. जिसमे कहा गया कि तुम डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड एकाउंटेंट, अध्यापक और कंप्यूटर एक्सपर्ट बन सकते हो, मगर इन सब के ऊपर एक सिविल सर्विस का अधिकारी बैठा है. जब हमारे लड़के और लड़कियां शिक्षा और कानून मंत्रालय में बैठे होंगे तभी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया का अल्पसंख्यक दर्जा कोई नहीं छीन सकेगा.

जब हमारे लड़के-लड़कियां जिला अधिकारी होंगे तब अन्याय नहीं हो सकेगा. जब हमारे लड़के-लड़कियां पुलिस अधिकारी होंगे तब कोई भी मासूम को गिरफ्तार नहीं कर सकेगा. जकात सभी जगह अपने धर्म और समुदाय के लोगों बैठना चाहता है. इसके साथ-साथ जकात देश के बड़े सरकारी ऑफिस को कब्जा करने की योजना बना रहा है. जकात चाहता है कि सरकारी आदेश उसके लड़के-लड़कियों के हाथों से पास किया जाय. जकात के इस साजिश भरी सोच से स्पष्ट हो जाता है कि जकात अब पूरे देश की सरकारी तंत्रों पर 

कब्जे का प्लान बना रहा है. ऐसे में अगर जकात को नहीं रोका गया तो ये राष्ट्र और समाज के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा. जकात का मंसूबा वर्तमान सरकारी तंत्र को दीमक की तरह चाट कर उसका खात्मा करने के साथ-साथ उसकी जगह अपना तंत्र स्थापित करना है.

जकात फाउंडेशन ऑफ़ इण्डिया का भीमराव आंबेडकर पर हमला

जैसे-जैसे जकात को लेकर खुलासे हो रहा है, वैसे-वैसे उसके कारनामे का कच्चा चिट्ठा खुल कर सामने आरहा है. अब जकात का दायरा सिर्फ कोचिंग सेंटर तक हीं सिमित नहीं है. जकात की नजर अब देश की सत्ता और अनुसूचित जाती और जनजातियों के हक को हड़पने की दिशा में बढ़ चला है. जकात देश की सभी सरकारी तंत्रों से लेकर बाबा साहब भीमराव आंबेडकर जी के द्वारा दिए गये अनुसूचित जाती और जनजातियों के चुनावी सीटों पर भी कब्ज़ा करना चाहता है. जकात फाउंडेशन ऑफ़ इण्डिया लगातार बाबा साहब जी पर हमला कर रहा है.

मगर जय भीम और जय मीम के नारा देने वाले अब भी मुगालते में हैं की उनका ये बेमेल गठजोड़ उनका साथ देगा. जिस जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को आपत्ति है कि मुस्लिम बहुल लोकसभा सीट अनुसूचित जाती और जनजातियों SC के लिए रिजर्व्ड क्यों है? SC विरोधी जकात जय भीम करने वालों को कितनी बड़ी साजिस के तहत उन्हें मिटाने में लगा है शायद उनको इस बात का अभी तक अंदाज़ा नहीं है.  

जकात ये खुद दावा करता है कि महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग को उसने नोटिस भेजा था. जकात के नोटिस के बाद 30 वार्डों का परिसीमन बदला गया, या फिर उस वार्ड की SC रिजर्व्ड सीट को हटाया दिया गया. जकात ये भी दावा करता है कि उसने पनवेल और नांदेड क्षेत्रों में शिकायत दर्ज कराई थी. अप्रैल 2017 में दिल्ली चुनाव से ठीक पहले जकात फाउंडेशन ने दिल्ली चुनाव आयोग को नोटिस दिया था, जिससे कि परिसीमन को बदला जा सके. 

उत्तर प्रदेश के 554 शहरी स्थानीय निकाय चुनाव में पिछले तीन महीनों में जकात फाउंडेशन की ओर से हस्तछेप किया गया है. देश के विभिन्न मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में SC प्रत्याशियों के विरुद्ध चुनावी प्रक्रिया में हस्तछेप की बात जकात फाउंडेशन ने स्वीकारी है. इनका एक हीं सपना है की बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जी के संविधान का गला घोंट कर दलित शोषित वर्ग को कुचला जाय.

UPSC परीक्षा और इंटरव्यू में मुस्लिम को कैसे फायदा मिलता है!

शाह फैसल रिटेन में स्कोर किया 1136 नंबर लेकिन साक्षातकार में 300 में से 225 नंबर मिले और पहला स्थान प्राप्त किया

प्रकाश रापुरोहित रिटेन में स्कोर 1171 लेकिन इंटरव्यू में 300 में से नंबर दिए 165 रैंक 2 मिली

2018 यूपीएसी में मुस्लिम स्टूडेंट्स ने नॉन मुस्लिम से लिखित परिक्षा में 13 नंबर कम पाए

लेकिन इंटरव्यू में मुस्लिम उम्मीदवारों ने 12 नंबर ज्यादा पाए

साक्षात्कार में मुस्लिम उम्मीदवार के ज्यादा नंबर पाने से रैंक में 5 से 8 रैंक का अंतर हो गया

                        रिटेन में एवरेज स्कोर

मुस्लिम 793

नॉन मुस्लिम 806

इंटरव्यू में एवरेज स्कोर 

मुस्लिम 181

नॉन मुस्लिम 169

रैंक में अंतर

210 से 284 हो जाता है

सरकारी मदद, एनजीओ मदद, उम्र का लाभ, अटेंप्ट ज्यादा, भाषा, विषय, पेपर चेकर, इंटरव्यू में मदद, क्वालीफाइंग मार्कस, कोचिंग सेंटर

                        क्वालीफाइंग मार्कस

2019 हिंदू के लिए प्री आईएएस 95 मैन एग्जाम 775

2019 मुस्लिम के लिए प्री आईएएस 93 मैन एग्जाम 735


                               अटेंप्ट

यूपीएससी में हिंदू के लिए 6 अटेंप्ट

यूपीएससी में मुस्लिम के लिए 9 अटेंप्ट

                            उम्र का लाभ

यूपीएससी के लिए हिंदू के लिए अधिकतम 32 साल

यूपीएससी में मुस्लिम के लिए अधिकतम उम्र 35 साल

                       हिंदू स्टूडेंटस के खर्चे

3 लाख प्रतिवर्ष हाॅस्टल खर्च 3 साल का 9 लाख

2 लाख कोचिंग फीस प्रति 18 माह तो तीन साल का 4 लाख

1 लाख किताबें, नोट्स, स्टेश्नरी और लैपटोप खर्च

एक साल का 80 कन्वेंस फेयर तो 3 साल का 2 लाख 40 हजार

अन्य खर्चे 3 साल के 2 लाख

एक हिंदू स्टूडेंट आईएएस की कोचिंग को 3 साल की तैयारी के लिए 18 लाख 40 हजार रूपए चाहिए

           UPSC में हर साल बढ़ते मुसलमान

दस सालों में मुस्लिमों की सफलता का ग्राफ सौ फीसदी बढ़ गया है

2019 में 44 मुस्लिम उम्मीदवारों ने यूपीएससी पास किया है

30 उम्मीदवार जामिया मिल्लिया की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी के स्टूडेंटस

7 उममीदवार हमदर्द कोचिंग सेंटर लखनउ के पास आउट हुए

27 मुस्लिम उम्मीदवारों को जकात फाउंडेशन से आर्थिक सहायता मिली

2010 में 31 मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए थे

2011 में 21 मुस्लिम उम्मीदवार पास हुए थे

2015 में कुल 37 मुस्लिम उम्मीदवार पास हुए

2016 में 50 मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए

2016 में मुस्लिम उम्मीदवारों की सफलता कर दर 2.4 प्रतिशत थी

4 साल में मुस्लिम उम्मीदवारों की सफलता दी दर 4 प्रतिशत हो गई है

2017 में 52 मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए

2018 में 28 मुस्लिम उम्मीदवार पास हुए

5.4 प्रतिशत मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए हैं यूपीएससी में

2018 में 28 मुस्लिम उम्मीदवार पास हुए यूपीएसी में

2019 में मुस्लिम उम्मीदवारों ने 40 प्रतिशत की दर से बढ़ोत्तरी की है

         दूसरे समुदायों का हक मारते मुस्लिम

मुस्लिम समुदाय अब अल्पसंख्यक नहीं हैं क्योंकि उनकी जनसंख्या अब 40 करोड़ हो गई है

दूसरे समुदायों के हक को मुस्लिम समुदाय मार रहा है सिविल सेवा परिक्षा में

यूपीएसी के लिए सरकार ने 2020 में 219 मुस्लिम छात्रों को कोचिंग के लिए पैसा दिया अल्पसंख्यक के नाम पर

वहीं 36 ईसाईयों को तो 24 बौद्ध छात्रों को 9 पारसी छात्रों को मदद दी गई

स्टेट पीसीएस के लिए 1460 छात्रों को सरकार ने मदद की

जबकि 240 ईसाईयों को तो 160 बौद्धों को और सिर्फ 12 पारसी छात्रों को मदद दी

एसएससी के लिए सरकार ने मुस्लिम 1467 छात्रों को मदद दी

वहीं 165 ईसाईयों तो 13 पारसियों को सिर्फ मदद दी गई

पीएससी स्टेट लेवल पर 584 मुस्लिम स्टूडेंटस को मदद दी

वहीं 64 ईसाईयों को तो 26 बौद्धों को और 4 पारसियों को मदद दी

 जकात के जरिए मुस्लिम उम्मीदवारों की सहायता

जकात फाउंडेशन को सैयद जफर महमूद पूर्व आईएएस प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आएसडी

जकात फाउंडेशन को मदद उस ब्रिटिश संस्था से मिलती है जो भारत के खिलाफ आतंकी हमले करने वाले आतंकी ग्रुप हैं

2008 से जकात फाउंडेशन मुस्लिम युवाओं को फ्री कोचिंग देने की व्यवस्था की

जकात की मदद से 2019 में 27 मुस्लिम युवा यूपीएसी में शामिल हुए हैं

जकात की मदद से 9 उम्मीदवार यूपी से तो केरल से 8, जम्मू-कश्मीर से 3, बिहार महाराष्ट्र से दो-दो और कर्नाटक गुजरात से 1-1 मुस्लिम उम्मीवार पास हुआ है

जकात हर मुसलमान अपनी संपत्ति और आमदनी का ढ़ाई प्रतिशत देता है

जकात मुसलमान कभी देश के हित में नहीं देते

जकात से सिर्फ मुसलमानों के धार्मिक अड्डे बनाए जाते हैं

जकात से पास हुए मुस्लिम उम्मीदवार क्या दूसरे समुदायों की समस्याओं को कैसे सुनेंगे ?

         उड़ान योजना के तहत सरकारी मदद

सरकार नई उडान योजना के तहत अल्पसंख्यकों को सिविल सेवा परीक्षा के लिए मदद करती है

उड़ान योजना के तहत मुस्लिमों को सिविल सेवा परीक्षा के लिए 6 से 8 लाख रूपए की मदद करती है सरकार

मुसलमानों को यूपीएसी का प्री एग्जाम पास करने के लिए 1 लाख रूपए की मदद करती है सरकार

एसपीएसी प्री एग्जाम पास करने के लिए 50 हजार की मदद देती है सरकार मुसलमानों को

एएससी-सीजीएल प्री एग्जाम पास करने के लिए सरकार मुसलमानों को 25 हजार रूपए देती है

मुस्लिम उम्मीदवारों की कोचिंग के लिए 2019 में सरकार सरकार ने 8 करोड़ खर्च किए तो 2020 में 20 करोड़ रूपए खर्च में बढ़ दिए गए

2012 में मनमोहन सरकार ने यूपीएससी एकेडमी खोली

2015 में 15 करोड़ रूपए दिए मोदी सरकार ने यूपीएससी एकेडमी को

       उर्दू भाषा सिविल सेवा की कुंजी बनी

उदू भाषा को मुख्य एग्जाम में भाषा विकल्प रखा

मुख्य एग्जाम में मुस्लिमों के लिए उर्दू भाषा का विकल्प रखा है सरकार ने

आखिर मुसलमानों को उर्दू भाषा चुनने का विकल्प क्यों दिया ?

क्या अब देश उर्दू से चलेगा

क्या उदू भाषा के जरिए कोई पूरे देश के लोगों से डील करेगा

 सिविल सेवा पास हुए मुस्लिमों की देशविरोधी सोच

नादिया बेग कश्मीर के कुपवाड़ा से यूपीएससी रिजल्ट में 350वीं रैंक

एग्जाम पास होने के बाद नादिया बेग ने अपना पुराना ट्वीटर एकाउंट बंद कर दिया

पुराने ट्वीट में नादिया पाकिस्तानी आसिफ गफूर और इमरान खान की तरीफ कर रही हैं

कश्मीर पर भारत के अनाधिकृत कब्जे की बात करती है

कश्मीर को फ्री यानि भारत सरकार को कश्मीर छोड़ने की बात करती है

भारत के प्रधानमंत्री मोदी को किलर आफ डेमोक्रेसी बोलती है

350वीं रैंक पर आईएएस तो मिलने से रहा

अब नादिया को माइनारिटी कोटे से आईएफएस मिलेगा जो भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर काम करते हैं

पाकिस्तान समर्थक नादिया कैसे भारत के खिलाफ साजिश नहीं करेगी विदेश में ये कौन कह सकता है

क्या पाकिस्तानी आइडियोलोजी वाली महिला पाकिस्तान को हमारी खूफिया सूचना नहीं बेच सकती है ?

अगर रिवेन्यू वाली सर्विस आईआरएस मिल गई तो क्या गारंटी कि भारत का पैसा आतंकी संगठन के पास नहीं जाएगा ?

क्या इंटरव्यू नालेज के साथ-साथ देशप्रेम और देशहित के सवाल नहीं होने चाहिए

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का अलकायदा और तालीबान से लिंक

जिसने अमेरिका का दहला दिया। हाजारों निर्दोष लोगों को अमेरिका के वल्र्ड ट्रेड सेंटर में हवाई जहाज घुसाकर मौत के घाट उतार दिया। ऐसे ही आतंकियों और आतंकी संग्ठनों से तार जुडे हैं जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के।

जी हां, जकात फाउंडेशन आफ इंडिया लादेन के संगठन से जुडा पाया गया। आईए देखते हैं ये पूरी स्टोरी क्या है। जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मदीना ट्रस्ट से पैसा मिला है। फिर वहीं बैंक और उसी ब्रांच में पैसा आया। जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मदीना ट्रस्ट से ये पैसा बैंक ऑफ इंडिया की बहादुर शाह जफर स्थित ब्रांच के अकाउंट में आया।

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मिला ये पैसा 2007-2008 में 168031 रू. तो 2010-2011 में 637650 रू. मिले। वहीं 2011-2012 में 630835 रू. मिले तो 2012-2013 में 519817 रू. मिले। जबकि 2014-2015 में 959345 रू. तो 2015-2016 में 1190203 रू. मिले। वहीं 2017-2018 में 1273960 रू. तो 2018-2019 में 1364694 रू. मिले जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया। मदीना ट्रस्ट, यूके स्थित भारतीय दूतावास पर हुए सितंबर 2019 के हमले में शामिल था। 

मदीना ट्रस्ट का एक ट्रस्टी जाहिद परवेज इस्लामिक फाउंडेशन का भी ट्रस्टी है। 2003 की द टाइम्स यूके की खबर के हिसाब से इस्लामिक फाउंडेशन के दो ट्रस्टी अलकायदा एवं तालिबान से लिंक की वजह से यूएन की प्रतिबंधित लिस्ट में थे।

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का आईएसआईएस लिंक

अब आपको हम वो दिखा रहे हैं जो देश के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। दुनिया में सबसे खूंखार आतंकी संगठन है आईएसआईएस जिसका सरगना है अबु बकर बगदादी। इसी आतंकी संगठन से भी जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का डायरेक्ट और इडायरेक्ट कनेक्शन है।

जी हां, दिल्ली का जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया अबु बकर अल बगदादी से जुडा हुआ है। जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका से चंदे के रूप में पैसा मिला है। गृहमंत्रालय यानि एफसीआरए के दस्तावेजों से हमें पता चला कि जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को 2015-2016 में 1132574 रूपए मिले थे जकात फाउंडेशन आफ अमेरिका से।

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका से ये पैसा बैंक ऑफ इंडिया के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित ब्रांच के एकाउंट के जरिए मिला। ये सभी दस्तावेज हमारे पास हैं। अब आगे बढते है. जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका का एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर है खलिल देमिर। जकात फाउंडेशन ऑफ आमेरिका का खलिल देमिर बेनेवलेंस इंटरनेशनल फाउंडेशन का अधिकारी रहा है।

बेनेवलेंस इंटरनेशनल फाउंडेशन को यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने आतंकियों को पैसे देने का दोषी पाया और आतंकी संगठन घोषित किया। बेनेवलेंस इंटरनेशन फाउंडेशन ने 2002 में अलकायदा और चेचन्या के आतंकियों को पैसा दिया था।  पैसे देने की ये रिर्पोट यूएस की आईआरएस यानि आयकर विभाग के सन 2000 के दस्तावेजों में सामने आई है।

खलिल देमिर की जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका का लिंक आतंकी संगठन टर्किश हयूमेनेटेरियन रिलीफ आर्गेनाइजेशन से है। यहीं टर्किश हयूमेनेटेरियन रिलीफ आर्गेनाइजेशन के तथाकथित लिंक आईएसआईएस और दूसरे आतंकी संगठनों से भी हैं। अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि कैसे जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को पैसे देने वाले लोग दुनिया के खूंखार आतंकी संगठनों से जुडे हैं। आखिर जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को ऐसे आतंकी संगठनों से पैसे लेने की क्या जरूरत पडी।

क्या भारत में इन आतंकी संगठनों की जडों को मजबूत करने का षडसंत्र है ये। क्या भारत के युवाओं को भी आईएसआईएस आतंकियों की तरह बनाने का षडयंत्र चलाया जा रहा है।

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का जाकिर लिंक

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के जाकिर नाईक से लिंक चैंकाने वाले हैं। वहीं जाकिर नाइक है जिसे आतंकियों का आका कहा जाता है जो भारत छोडकर भाग गया है। जी हां, नाईक जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया से जुडा है। जाकिर नाईक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन इंटरनेशनल यूके का डायरेक्टर हैं तो सैयद जफर महमूद जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल के डायरेक्टर हैं। जाफर हुसैन कुरैशी जाकिर नाईक की इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन इंटरनेशनल का 9 साल तक डायरेटक्टर भी रहा है।

जफर हुसैन कुरैशी सैयद जफर महमूद की जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल का आज भी डायरेक्टर है। जाकिर नाईक और सैयद जफर महमूद के बीच की सबसे बड़ी कड़ी यहीं जाफर हुसैन कुरैशी रहा है। जाकिर नाईक के साथ 9 सालो तक काम करने वाले की मानसिकता क्या होगी और भारत के प्रति उसकी सोच कैसी होगी आप समझ सकते हैं। जिस जाकिर के छोटे से भाषण से हजारों युवा आतंकी बन जाते हैं।

मुस्लिम युवा दूसरे समुदायों के लोगों का गला काटते हैं। ऐसे में वो आदमी जो जाकिर नाईक के साथ 3285 दिन और 78 हजार घंटे साथ रहा हो उसकी सोच क्या होगी ? अंदाजा लगाया जा सकती है। यहीं आदमी कुरैशी सीधे जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया से जुडा हुआ है। ऐसे में जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के पैसों से यूपीएससी की कोचिंग लेने वाले मुस्लिम युवाओं की सोच कैसी होगी आप खुद सोच सकते हैं।


UPSC जिहाद: जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का पर्दाफाश

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को 1993 में बनाया गया. जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का मुख्य उदेश्य है सरकारी नौकरियों में भर्ती करने के लिए कोचिंग देना. जकात से 2009 से 2019 तक 119 छात्र आईएएस आईपीएस आईआरएस और दूसरी सरकारी सेवाओं में चयनित हुए

2020 में 40 मुस्लिम छात्र यूपीएससी में चयनित हुए जिनमें से 27 जकात फाउंडेशन के फैलो रहे हैं. जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के फाउंडर प्रेसिडेंट हैं सैयद जफर महमूद. सैयद जफर महमूद स्वयं एक आईआरएस आफिसर रहे हैं. सैयद जफर महमूद पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहान सिंह के ओएसडी रहे है और पीएमओ में सच्चर कमेटी के इंचार्ज भी।

 जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का आईएसआई कनेक्शन !

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को यूके के मुस्लिम ऐड से लाखों रूपए की डोनेशन मिली

एफसीआरए दस्तावेजों के हिसाब से जकात फाउंडेशन को पैसा मिला

2006-2007 में 23,15,675

2010-2011 में 575640

2011-2012 में 308609

2013-2014 में 490000

राजधानी दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच से यूके के मुस्लिम ऐड का पैसा जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रांसफर हुए। 

मुस्लिम ऐड यूके की पाकिस्तान ईकाई मुस्लिम ऐड पाकिस्तान का चेयरमैन जनरल खालिद लतीफ आईएसआई का पूर्व जनरल रहा है। 

जनरल खालिद लतीफ पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी में भारत के खिलाफ काम करने वाला बड़ा जनरल रहा है

मुस्लिम ऐड पाकिस्तान खुलकर आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के साथ काम करता है

आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन ने भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया है

मुस्लिम ऐड पाकिस्तान के दिए हुए पैसे से आतंकियों ने भारत में कई बेगुनाह मसूमों की जान ली है।

 जकात फाउंडेशन ऑफ  इंडिया के जाकिर नाईक से लिंक

जाकिर नाईक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन इंटरनेशनल यूके का डायरेक्टर है

सैयद जफर महमूद जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल का डायरेक्टर है

जाफर हुसैन कुरैशी जाकिर नाईक की इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन इंटरनेशनल का 9 साल तक डायरेटक्टर रहा है

जफर हुसैन कुरैशी, सैयद जफर महमूद की जकात फाउंडेशन आॅफ इंडिया इंटरनेशनल का आज भी डायरेक्टर है

जाकिर नाईक और सैयद जफर महमूद के बीच की सबसे बड़ी कड़ी रहा जफर हुसैन कुरैशी

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का आईएसआईएस लिंक

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका से चंदे के रूप में पैसा मिला है।

एफसीआरए के दस्तावेजों से हमें पता चला कि जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को 2015-2016 में 1132574 रूपए मिले

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका से ये पैसा बैंक ऑफ इंडिया के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित ब्रांच के एकाउंट के जरिए मिला

जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका का एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर खलिल देमिर है

जकात फाउंडेशन ऑफ आमेरिका के खलिल देमिर बेनेवलेंस इंटरनेशनल फाउंडेशन का अधिकारी रहा है

बेनेवलेंस इंटरनेशनल फाउंडेशन को यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने आतंकियों को पैसे देने का दोषी पाया और आतंकी संगठन घोषित किया

बेनेवलेंस इंटरनेशन फाउंडेशन ने 2002 में अलकायदा और चेचन्या के आतंकियों को पैसा दिया था

पैसे देने की ये रिर्पोट यूएस की आईआरएस यानि आयकर विभाग के सन 2000 के दस्तावेजों में सामने आई है

खलिल देमिर की जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका का लिंक आतंकी संगठन टर्किश हयूमेनेटेरियन रिलीफ आर्गेनाइजेशन से है 

टर्किश हयूमेनेटेरियन रिलीफ आर्गेनाइजेशन के तथाकथित लिंक आईएआईएस और दूसरे आतंकी संगठनों से हैं

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया अलकायदा और तालीबान से लिंक

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मदीना ट्रस्ट से पैसा मिला है जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मदीना ट्रस्ट से ये पैसा बैंक ऑफ इंडिया की बहादुर शाह जफर स्थित ब्रांच के अकाउंट में आया

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मिले पैसे का विवरण

2007-2008 168031

2010-2011 637650

2011-2012 630835

2012-2013 519817

2014-2015 959345

2015-2016 1190203

2017-2018 1273960

2018-2019 1364694

मदीना ट्रस्ट, यूके स्थित भारतीय दूतावास पर हुए सितंबर 2019 के हमले में शामिल थी 

मदीना ट्रस्ट का एक ट्रस्टी जाहिद परवेज इस्लामिक फाउंडेशन का भी ट्रस्टी है

2003 की द टाइम्स यूके की खबर के हिसाब से इस्लामिक फाउंडेशन के दो ट्रस्टी अलकायदा एवं तालिबान से लिंक की वजह से यूएन की प्रतिबंधित संस्थाओं की लिस्ट में थे।