14 March 2022

मुस्लिमों के लिए केंद्र द्वारा आर्थिक मदद मगर बीजेपी को क्या मिला ?

मुस्लिमों के लिए आर्थिक मदद

 

 अल्पसंख्यकों के लिए 3511 करोड़ रुपये के बजट को बढ़ाकर 4700 करोड़ किया


पीएम मोदी ने देश के मुसलमानों के लिए सऊदी अरब से आग्रह कर हज कोटा दो लाख तक बढ़वाया


केंद्र सरकार ने हज यात्रा पर लगने वाली जीएसटी को 18 फीसदी से घटाकर 5 किया

 

पहली बार 2018 में मेहरम (पुरुष साथी) के बिना 1300 मुस्लिम महिलाएं हज यात्रा पर गईं


छह लाख से अधिक वक्फ बोर्ड एवं वक्फ संपत्तियों के दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कराया


अल्पसंख्यक लड़कियों की शादी के लिए 51 हजार की मदद

मुसलमानों के लिए केंद्र सरकार की योजनाएं मगर बीजेपी को क्या मिला ?

छात्रवृत्ति योजनाएं:

अल्पसंख्यक छात्रो के लिए मौलाना आजाद राष्ट्रीय अध्येतावृति योजना

 

"पढ़ो परदेश"-  अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित विद्यार्थियों के लिए विदेश में अध्ययन हेतु शैक्षिक ऋण पर ब्याज इमदाद की योजना

 

नया सवेरा- अल्पसंख्यक सामुदायो से संबंधित अभ्यर्थी/ विधार्थी के लियें नि:शुल्क कोचिंग और सम्बद्ध योजना

 

नई उड़ान- संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, राज्य लोक सेवा आयोगों के परीक्षाओं के लिए योजना

 

आर्थिक सशक्तिकरण:

 

"सीखो ओैर कमाओ" - अल्पसंख्यकों का कौशल विकास

 

मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय कौशल अकादमी (मानस)

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम के माध्यम से रियायती ऋण

 

"नई रोशनी" - अल्पसंख्यक महिलाओं में नेतृत्व-क्षमता विकास की योजना

 

वक्फ़ प्रबंधन

 

कौमी वक्फ बोर्ड तरक्कियाती योजना- राज्य वक्फ बोर्ड के अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण तथा सुदृढ़ीकरण की योजना

 

शहरी वक्फ़ संपत्ति विकास योजना- वक्फ़ को सहायता अनुदान के लिए योजना 

 

मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन के लिए सहायता अनुदान

 

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम को इक्विटी

 

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम की राज्य एजेंसियों को सहायता

मुसलमानों को सबसे ज़्यादा देने वाले BJP को क्या मिला ?

मुस्लिम बहुल जिला V/s बीजेपी उत्तर प्रदेश

 

आजमगढ़

कुल सीट 10

BJP- सभी सीट हारी

 

रामपुर

कुल सीट 5

BJP सभी सीट हारी

 

शामली

कुल सीट 3

BJP सभी सीट हारी

 

कैराना- दंगाई नाहिद हसन जीते

BJP सीट हारी

 

बेहट- उमर अली खान जीते

BJP सीट हारी

थाना भवन शामली

 

अशरफ अली खान जीते

BJP सीट हारी

 


नजिबाबाद

तसलीम अहमद जीते

BJP सीट हारी


कांठ

कमाल अख्तर जीते

BJP सीट हारी


ठाकुरद्वारा

 

नवाब जान जीते

BJP सीट हारी


मुरादाबाद

नासिर कुरैशी जीते

BJP सीट हारी


कुंदरकी

जियाउर्र रहमान जीते 

BJP सीट हारी


बिलारी

फहीम इरफान जीते 

BJP सीट हारी


संभल

इकबाल महमूद जीते

BJP सीट हारी

 
 
स्वार

अब्दुल्ला आजम खान  जीते

BJP सीट हारी

 
चमरौआ

नसीर खान जीते
BJP सीट हारी

 

रामपुर

आजम खान जीते

BJP सीट हारी


अमरोहा

महबूब अली जीते
BJP सीट हारी

 

सिवालखास

गुलाम मोहम्मद जीते

BJP सीट हारी


किठौर

शाहिद मंजूर जीते 

BJP सीट हारी


मेरठ

रफीक अंसारी जीते

BJP सीट हारी

 

बहेड़ी

अताउर्रहमान जीते 

BJP सीट हारी



 
भोजिपुरा

शहजील इस्लाम अंसारी जीते

BJP सीट हारी


सिसामऊ

इरफान सोलंकी जीते


मुस्लिम बहुल क्षेत्र V/s बीजेपी

उत्तराखंड

 

पिरान कलियर

फुरकान अहमद जीते

BJP- सीट हारी

 

मंगलौर

करीम अंसारी जीते

BJP- सीट हारी

 

लक्सर

शहजाद जीते

BJP- सीट हारी


                       मलेरकोटला- पंजाब

मोहम्मद जमील जीते

BJP सीट हारी 

 

मुस्लिम बहुल क्षेत्र V/s बीजेपी

मणिपुर

जिरीबाम

अचबुद्दीन जिरीबाम जीते

BJP सीट हारी

 

खेतीगांव

शेख नूरुल हसन जीते

BJP सीट हारी

 

लिलोंग

मोहम्मद अब्दुल नासिर जीते

BJP सीट हारी


सबका साथ, सबका विकास ने BJP को वोट क्यों नहीं दिया ?

हर बार की तरह इस बार भी मुस्लिम वोटरों ने बीजेपी के साथ छल किया है. बीजेपी का नारा है सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास ! मगर मुसलमानों ने इसे धता बताते हुए अपने अजेंडे पर वोट किया. एका-दूका मुस्लिम बाहुल्य सीट पर हीं बीजेपी के उमीदवार चुनाव जीत पाए. ऐसे में मुस्लिम वोटरों द्वारा किये गए विश्वाघात को लेकर राजनितिक गलियारों काफी हलचल है. 

उत्तर प्रदेश के मोहम्मदी विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों की जबरदस्त एकजुटता देखने को मिली. मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुस्लिम गांवों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है.

विधानसभा क्षेत्र मोहम्मदी के गांव सिसौरा नासिर में बूथ सं 234 पर सपा को 688 वोट मिले जबकि भाजपा को सिर्फ एक वोट मिला. बूथ सं 335 पर सपा को 669, भाजपा को 12, बूथ सं 236 पर सपा को 658 और भाजपा को 34 मत मिले. बूथ संख्या 237 पर सपा को 717, भाजपा को 82 मत मिले. ये मत के आकड़ें साबित करता है कि मुस्लिम वोटरों ने बीजेपी उमीदवारों को एक सिरे से खारिज कर मुस्लिम उमीदवार के पक्ष में वोट दिया.

इसी तरह सिसौरा सहमत के बूथ सं 237 सहमत पर सपा को 501, भाजपा को 11, कोटा मुगल के बूथ 222 पर सपा को 321, भाजपा को 77 मत मिले. किरियारा के बूथ संख्या 227 पर सपा को 494 भाजपा को 193 वोट मिले. बूथ 228 पर सपा को 616 और भाजपा को 13 वोट मिले. बूथ सं 229 पर सपा को 528 और भाजपा को 49 वोट मिले. 

कसराबल बूथ सं 242 पर सपा को 379 भाजपा को 96, महमदपुर ताजपुर बूथ पर सपा को 462, भाजपा को 44 मत मिले. ये सभी विधान सभा क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य हैं और जीतने वाले प्रत्यासी मुस्लिम समुदाय से हैं.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार सभी की निगाहें मुस्लिम बहुल सीटों पर थी, जहां पर सपा, बसपा, कांग्रेस की साख दांव पर थी तो बीजेपी ने भी सेंधमारी के लिए हरसंभव कोशिश की मगर फिर भी बीजेपी के मंसूबों पर मुस्लिम वोटरों ने पानी फेर दिया.

उत्तर प्रदेश के 403 सीटों में से 143 सीटों पर मुस्लिम अपना असर रखते हैं. इनमें से 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी बीस से तीस फीसदी के बीच है. 73 सीटें ऐसी हैं, जहां मुसलमान तीस फीसदी से ज्यादा हैं. सूबे की करीब तीन दर्जन ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां मुस्लिम उम्मीदवार अपने दम पर जीत दर्ज कर सकते हैं. इनमें ज्यादातर सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, तराई वाले इलाके और पूर्वी उत्तर प्रदेश की हैं. 

यूपी में मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बरेली, बिजनौर, मेरठ, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर और संभल जिले हैं. तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि मुसलमानों को सबसे ज़्यादा देने वाली BJP को क्या मिला ?

अब सरकारों से हिन्दू एजेंडा लागू करवाओ: हिन्दू हित की बात हुई, अब हिन्दू हित के कार्य करो

 

उत्तर प्रदेश में हिन्दू एजेंडा

 

लव जिहाद कानून को और कठोर बनाया जाएगा 

चित्रकूट और बनारस में सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना

श्री कृष्ण जन्मभूमि का जीर्णोद्धार

प्रदेश के सभी हिन्दू धार्मिक स्थलों का विकास

एंटी रोमियो स्क्वायड को मजबूत बनाया जाएगा  

 

उत्तराखंड में हिन्दू एजेंडा

 

सरकार बनते हीं यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होगा

साधु-संतों के साथ अन्याय नहीं होगा

बढ़ती मुस्लिम आबादी से राज्य के जनसंख्याकी असुंतलन को रोका जाएगा 

धर्मांतरण पर पूरी तरीके से रोक लगेगी

राज्य में जो धर्मांतरण कानून है उसको और कठोर बनाएंगे

 

गोवा में हिन्दू एजेंडा

 

गोवा में पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार होगा

गुप्त इसाईयत पर नियंत्रण

पड़ोसी राज्यों से आने वाले मुसलमानों की बढ़ती संख्या पर रोक

हिन्दू मंदिरों पर अन्य धर्मों का कब्ज़ा 

बीफ़ की बिक्री और गौ हत्या पर प्रतिबंध

 

मणिपुर में हिन्दू एजेंडा

 

ऐतिहासिक मंदिरों का जीर्णोद्धार

ईसाई धर्मांतरण और विदेशी एनजीओ पर नियंत्रण

नागा जनजाति समुदाय की सुरक्षा

ट्राइबल संस्कृति और उसका संरक्षण

राज्य के सीमा विवाद का समाधान 

08 March 2022

कोचिंग के मदरसे से जिहादी एजेंडा, गजवा-ए-हिन्द की नौकरशाही !

देश में यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के नाम पर एक बार फिर से जिहादी एजेंडा सामने आया है. इस कोचिंग जिहाद के केंद्र बिंदु में है विजन आईएएस नामक  कोचिंग सेंटर. ये कोचिंग सेंटर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कराता ऐसा इसका दावा है. मगर जब इस कोचिंग सेंटर के एक के बाद जिहादी अजेंडे का विडियो सामने आया तो सबको हैरत में डाल दिया. हमारे पास विजन आईएएस कोचिंग के कुछ ऐसे वीडियो सामने आए हैं जो कोचिंग सेंटर के विज़न पर सवालिया निशान लगा रहे हैं.

इस विडियो को सुनने के बाद सवाल खड़ा होता है कि "विज़न आईएएस" आईएएस बनाने का कोचिंग सेंटर है या फिर जिहाद की फैक्ट्री है ?

कुछ विडियो ऐसे हैं जो न्यूज़ चैनल पर दिखाने लायक नहीं हैं. उन सभी विडियो में 90 के दशक में कश्मीर में इस्लामिक जिहाद और हिन्दुओं की बर्बरतापूर्ण हत्याओं, बलात्कार, पलायन का खुलकर समर्थन किया गया है. वही टीपू सुल्तान को हीरो और मराठों को दुसरे दर्जे का लड़ाका बताया गया है.

विज़न आईएएस के तथाकथित वामपंथी कोचिंग टीचर स्मृति शाह के वीडियो ने सबको सन्न कर दिया है. वामपंथी स्मृति शाह शेख अब्दुल्ला को सबसे ज़्यादा लिबरल और सोशलिस्ट बताते नहीं थक रहीं हैं.

इन सभी वीडियो में सबसे अधिक विवाद इस्लाम को लिबरल बताने और उसे सबसे अच्छा मजहब घोषित करने को लेकर हो रहा है. वीडियो में महिला टीचर पूछती हैं कि बताओ भक्ति आंदोलन का उद्देश्य क्या था? बच्चे जब जवाब में समानता बोलते हैं तो टीचर कहती हैं. सातवीं-आठवीं शताब्दी में कुछ नहीं था, इस्लाम आ गया था, इसलिए ये शुरू हुआ. 

वह कहती हैं, “इस्लाम बहुत लिबरल था वह समानता के बारे में बात करता था. कोई जाति व्यवस्था भी नहीं थी. ऐसे अनेको विडियो है जिसे आज हम आपको इस पूरे एक घंटे के शो दिखाएंगे.

22 February 2022

नोएडा के मामूरा गांव में ईसाई धर्मांतरण

देश में ईसाई धर्मांतरण का धंधा जोरों पर है..आए दिन कोई न कोई घटना ईसाई धर्मांतरण से जुड़ा हुआ सामने आही जाता है. धर्मांतरण से जुड़ा ये ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश के नोएडा से आया है. नोएडा के ममूरा गाँव में चल रहे ईसाई धर्मांतरण के खेल को सुदर्शन न्यूज़ ने जब उजागर किया तो पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बन गया. आस-पास में रहने वाले लोगों ये पता भी नहीं है कि ये परिवार अब हिन्दू धर्म छोड़ के ईसाई बन गया है. 

नोएडा के मामूरा गांव में ये पूरा धर्मांतरण का धंधा चल रहा था. धर्मांतरण के इस अड्डे पर जब सुदर्शन संवाददाता आँचल यादव पहुंची, तो उस वक्त वहां पर मसीह के प्रार्थनाएं चल रही थी. इस स्थान पर अक्सर भोले-भाले हिन्दुओं का आना जाना लगा रहता है. हिंदू संगठन के लोगों ने जब इन गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया तो उन्हें कुछ संदेह हुआ, जिसके बाद लोगों ने इसकी सुचना सुदर्शन न्यूज़ को दी. धर्मांतरण गिरोह के विधर्मियों ने भोले-भाले हिन्दुओं को हिंदू धर्म के भजन कीर्तन का सहारा लेकर धर्म परिवर्तन का कार्य कर रहे थे.

ईसा मसीह की भजन कीर्तन के नाम पर हिंदुओं को गुमराह करने के इस तरीके से लोग सन्न हैं. हिंदू संगठन के लोगों द्वारा इस घटना की सुचना पुलिस को दी गई, जहां पर कई परिवार बैठकर बाइबल पढ़ रहे थे. घटना स्थल से इसाई धर्म  कि बहुत सारी पुस्तकें मिली है. नोएडा पुलिस ने पूरे प्रकरण की छानबीन शुरू कर दी है.

इस पूरे धर्मांतरण के धंधे को बढ़ावा देने वाला मुख्य सरगना महेंदर और शिवा है जो हिंदू नाम रख कर.. हिंदुओं के बीच में रहकर... इस साजिश को अंजाम दे रहे थे. यह पूरा खेल लोगों को भ्रमित कर अंजाम दिया जा रहा था. धर्मान्तरित हुए लोगों का कहना है उन्हें ये बताया गया था कि अगर तुम्हारा बच्चा या परिवार में कोई सदस्य बीमार है तो बाइबल पढ़ने से ठीक हो जाएगा.

ऐसी अंधविश्वास वाली बातें लाचार गरीब लोगों में फैला कर उनको कन्वर्ट करने का काम ये धंधा संक्रमण की तरह देशभर में फ़ैल रहा है. इसे वक्त रहते नहीं रोका गया तो ये हिन्दू धर्म में कैंसर की तरह फ़ैल जाएगा.

19 February 2022

नारी सम्मान पर कविता- तन मन मर्यादा को ढक ले ऐसा चीर कहां पाऊंगी

लेकर दुःशासन दुर्योधन वाली पीर कहां जाऊंगी

तन मन मर्यादा को ढक ले ऐसा चीर कहां पाऊंगी

 

स्त्री संरक्षण करने को कौन अड़ेगा

अब धर्म युद्ध में आगे कौन बढ़ेगा

वस्त्र हरण यदि आज द्रौपदी का हो

श्री कृष्ण रूप में बोलो कौन लड़ेगा

 

द्वापर को कलयुग से जोड़े वो जंजीर कहां पाऊंगी

तन मन मर्यादा को ढक ले ऐसा चीर कहां पाऊंगी

 

कुत्सित वंचक वीभत्स श्रगाल खड़े हैं

खलकामी सब बन करके काल खड़े हैं

हर एक दिशा में सिया हरण करने को

रावण बहरूपी लेकर जाल खड़े हैं

 

नर नैनों में नारी हेतु गंगा का नीर कहां पाऊंगी

तन मन मर्यादा को ढक ले ऐसा चीर कहां पाऊंगी

 

न्याय को तकते नेत्र हैं निर्बल देखे

दुरुपयोग करते बाहुबल देखे

दंभ, दर्प, मिथ्या आश्वासन वाले

भ्रष्ट शासकों के अगणित छल देखे

 

स्वच्छ करे मैली सत्ता अब इतना धीर कहां पाऊंगी

तन मन मर्यादा को ढक ले ऐसा चीर कहां पाऊंगी

 

दुष्कृत्यों का समुचित परिणाम बने जो

सत्पथ का अधिनायक अविराम बने जो

राज धर्म और प्रजा का पालक बन कर

कलयुग में भी पुरुषोत्तम राम बने जो

 

योगी के अतिरिक्त कहो ऐसा रणधीर कहां पाऊंगी

तन मन मर्यादा को ढक ले ऐसा चीर कहां पाऊंगी

15 February 2022

दुनिया के देश जहां हिजाब प्रतिबंधित है

फ़्रांस: 11 अप्रैल 2011 से फ़्रांस में हिजाब को बैन है. नियम के उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

 

रूस: रूस में हिजाब पर 2012 से प्रतिबंध है. सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी. लेकिन अदालन ने भी सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया.

 

चीन: चीन की शी जिनपिंग सरकार ने भी स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. स्कूल और सरकारी कार्यालयों में हिजाब वालों की एंट्री बैन है. चीन में  दाढ़ी बढ़ाने पर भी प्रतिबंध है.

 

कनाडा: सार्वजनिक रूप से चेहरा ढकने या हिजाब पहनने पर रोक लगा हुआ है. यहां पर 2012 में हिजाब पर बैन लगाया गया था.

 

इटली:  इटली में बुरका या हिजाब पहनने पर रोक है. जुर्माने का भी प्रावधान है.

 

श्रीलंका: यहां अगर कोई भी महिला बुर्का पहनती है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाती है.

 

डेनमार्क: यहां पर भी  चेहरा ढकने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. अगर कोई भी महिला चेहरा ढकती है तो उसे 12000 रुपए जुर्माना देना पड़ता है.

 

नीदरलैंड: सार्वजनिक स्थानों में हिजाब या चेहरा ढकने पर रोक लगी है. यदि कोई व्यक्ति हिजाब या चेहरा ढके हुए पकड़ा जाता है, तो उसे जुर्माना देना पड़ सकता है.

 

बुलगेरिया: 2016 से यहां पर हिजाब बैन है. नियम की अवहेलना करने पर 66 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता है. सुरक्षा एजेंसियां इसपर निगरानी भी करती है.

 

हिजाब के आड़ में गजवा ए हिन्द का एजेंडा

देशभर में हिजाब पर महासंग्राम जारी है. कर्नाटक के उडुपी कॉलेज से शुरू हुआ ये विवाद अब देशभर में फ़ैल चुका है. इस विवाद का मूल वजह है कर्नाटक सरकार का एक आदेश जिसे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम 1983 की धारा 133 को लागू कर दिया है. जिसके तहत सभी छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक संस्थानों में यूनिफार्म का पालन करना अनिवार्य होगा. निजी संस्थानों में भी यह नियम लागू होगा, इसके लिए सरकार ने निजी संस्थानों को निर्देश जारी किया है. निजी शैक्षणिक संस्थान अपने सुविधा अनुसार संस्थान की ड्रेस का निर्धारण कर सकते हैं.

कर्नाटक के उडुपी कॉलेज से जुड़े हुए हिजाब विवाद की आंच उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हिजाब विवाद राजनीतिक व सामाजिक मुद्दा बन रहा है. शैक्षणिक संस्थानों द्वारा हिजाब को प्रतिबंधित करने वाले आदेश को कर्नाटक के छात्राओं ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में पीआईएल दाखिल की थी. जिसके बाद इस विषय पर पूरे देश में चर्चा हो रही है कि मुस्लिम महिलाओं को शिक्षा संस्थानों में हिजाब पहन कर आना चाहिए या नहीं? जहां एक पक्ष शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब को प्रतिबंधित करने की मांग कर रहा है वहीं दूसरा पक्ष इसे अपना संवैधानिक अधिकार बता रहा है.

हिजाब विवाद पर सुनवाई कर रही कर्नाटक हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने अब इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है. अब तक मामले की सुनवाई जस्टिस  कृष्णा दीक्षित की सिंगल बेंच कर रही थी. अब यह मामला हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस को सौंप दिया गया है.

इस विवाद की शुरुआत तब शुरू हुई, जब गवर्नमेंट पीयू कॉलेज फॉर विमेन में छह छात्राओं को हिजाब पहन कर आने से रोक दिया गया. छात्राओं ने कॉलेज के फैसले को मानने से इनकार कर दिया था और हाईकोर्ट में इसके खिलाफ दायर कर दी. छात्राओं ने इस फैसले के विरोध में कक्षाओं का बहिष्कार कर रखा है.

कर्नाटक के स्कूल एवं कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है. मगर सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है. चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना की बेंच ने कहा कि उचित समय पर हम इस अर्जी पर सुनवाई करेंगे.

अदालत ने अर्जी दाखिल करने वालों को नसीहत दी है कि वे इस मामले को ज्यादा बड़े लेवल पर न फैलाएं. चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना की बेंच ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे इसे राष्ट्रीय मुद्दा न बनाएं.

इस पूरे विवाद में पाकिस्तान और अमेरिका भी कूद पड़े हैं. पाकिस्तान और  अमेरिका इसे धार्मिक आजादी बता कर हिजाब विवाद को धार्मिक अधिकारों पर हमला बता रहे है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले में दूसरे देशों को दखलअंदाजी न करने को कहा है. फिलहाल इस पूरे मसले पर अब सबकी निगाहें कर्नाटक हाई कोर्ट पर टिकी हुई है. ऐसे में अब देखना ये होगा कि कोर्ट क्या कुछ फैसला सुनाता है.

किशन भरवाड हत्याकांड में गुजरात ATS के चौंकाने वाले खुलासे

किशन भरवाड हत्याकांड में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. ये खुलासा किया है गुजरता ATS ने. ATS के खुलासे के अनुसार जिहादी तत्व सुदर्शन न्यूज के चेयरमैन और मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके जी कि हत्या की साजिश रच रहे थे.  जाँच एजेंसियों ने कुल 26 नामों का खुलासा किया है. इन 26 लोगों में सुरेश चव्हाणके जी का भी नाम शामिल है. 

ATS के रिपोर्ट के मुताबिक इन जिहादियों का लिंक पाकिस्तान और कई खूंखार आतंकी संगठनों से होने कि संभावना है. उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते, तेलंगाना पुलिस और अन्य कई जाँच एजेंसियां ​​अहमदाबाद में चल रही जाँच में शामिल हुई थी. इन सभी एजेंसियों के साझा रिपोर्ट से साबित हुआ है कि सुरेश चव्हाणके जी के हत्या का षड्यंत्र रचा जा चुका था. गिरफ्तार किये गए जिहादियों के पास से अवैध हथियार, विस्फोटक पदार्थ और गोला-बारूद बरामद हुआ है.

गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने दिल्ली के मौलाना कमर गनी को कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया था और उसके कार्यालय से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए थे, इसके बैंक खातों की जाँच की जा रही है. कमर गनी का भी लिंक इस हत्या की साजिश से जुड़े होने की संभावना है.

रिपोर्ट के मुताबिक मौलाना अय्यूब के मोबाइल फोन में करीब 26 प्रोफाइल मिले हैं, ये सभी 26 लोग निशाने पर थे. मौलाना अय्यूब को अहमदाबाद के जमालपुर से गिरफ्तार किया गया था, उस पर भारवाड के हत्यारों को बंदूक मुहैया कराने का आरोप है. पुलिस के पास इस बात के पुख्ता साबुत है कि ये आरोपी किशन भरवाड की तरह सुरेश चव्हाणके जी सहित 26 लोगों की हत्या करना चाहते थे.

फिलहाल गिरफ्तार किये गए आरोपियों को धंधुका की मजिस्ट्रेट अदालत ने 10 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. किशन भरवाड की हत्या के बाद से अबतक कुल 6 मौलवियों को गिरफ्तार किया गया है. 6 मौलवियों सहित 8 लोग इस वक्त इस पूरे प्रकरण में पुलिस कस्टडी में हैं. पूरे साजिश का कच्चा चिट्ठा खोलने के लिए राज्य और केंद्र स्तर कि जाँच एजेंसियाँ जुटी हुई है. ​​मामले की जाँच कर रही हैं एजेंसियों के अनुसार किसी बड़ी साजिश का संदेह है. जिसकी कड़ियों को जोड़ने के प्रयास किये जा रहे हैं.