13 November 2020

UPSC परीक्षा और इंटरव्यू में मुस्लिम को कैसे फायदा मिलता है!

शाह फैसल रिटेन में स्कोर किया 1136 नंबर लेकिन साक्षातकार में 300 में से 225 नंबर मिले और पहला स्थान प्राप्त किया

प्रकाश रापुरोहित रिटेन में स्कोर 1171 लेकिन इंटरव्यू में 300 में से नंबर दिए 165 रैंक 2 मिली

2018 यूपीएसी में मुस्लिम स्टूडेंट्स ने नॉन मुस्लिम से लिखित परिक्षा में 13 नंबर कम पाए

लेकिन इंटरव्यू में मुस्लिम उम्मीदवारों ने 12 नंबर ज्यादा पाए

साक्षात्कार में मुस्लिम उम्मीदवार के ज्यादा नंबर पाने से रैंक में 5 से 8 रैंक का अंतर हो गया

                        रिटेन में एवरेज स्कोर

मुस्लिम 793

नॉन मुस्लिम 806

इंटरव्यू में एवरेज स्कोर 

मुस्लिम 181

नॉन मुस्लिम 169

रैंक में अंतर

210 से 284 हो जाता है

सरकारी मदद, एनजीओ मदद, उम्र का लाभ, अटेंप्ट ज्यादा, भाषा, विषय, पेपर चेकर, इंटरव्यू में मदद, क्वालीफाइंग मार्कस, कोचिंग सेंटर

                        क्वालीफाइंग मार्कस

2019 हिंदू के लिए प्री आईएएस 95 मैन एग्जाम 775

2019 मुस्लिम के लिए प्री आईएएस 93 मैन एग्जाम 735


                               अटेंप्ट

यूपीएससी में हिंदू के लिए 6 अटेंप्ट

यूपीएससी में मुस्लिम के लिए 9 अटेंप्ट

                            उम्र का लाभ

यूपीएससी के लिए हिंदू के लिए अधिकतम 32 साल

यूपीएससी में मुस्लिम के लिए अधिकतम उम्र 35 साल

                       हिंदू स्टूडेंटस के खर्चे

3 लाख प्रतिवर्ष हाॅस्टल खर्च 3 साल का 9 लाख

2 लाख कोचिंग फीस प्रति 18 माह तो तीन साल का 4 लाख

1 लाख किताबें, नोट्स, स्टेश्नरी और लैपटोप खर्च

एक साल का 80 कन्वेंस फेयर तो 3 साल का 2 लाख 40 हजार

अन्य खर्चे 3 साल के 2 लाख

एक हिंदू स्टूडेंट आईएएस की कोचिंग को 3 साल की तैयारी के लिए 18 लाख 40 हजार रूपए चाहिए

           UPSC में हर साल बढ़ते मुसलमान

दस सालों में मुस्लिमों की सफलता का ग्राफ सौ फीसदी बढ़ गया है

2019 में 44 मुस्लिम उम्मीदवारों ने यूपीएससी पास किया है

30 उम्मीदवार जामिया मिल्लिया की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी के स्टूडेंटस

7 उममीदवार हमदर्द कोचिंग सेंटर लखनउ के पास आउट हुए

27 मुस्लिम उम्मीदवारों को जकात फाउंडेशन से आर्थिक सहायता मिली

2010 में 31 मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए थे

2011 में 21 मुस्लिम उम्मीदवार पास हुए थे

2015 में कुल 37 मुस्लिम उम्मीदवार पास हुए

2016 में 50 मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए

2016 में मुस्लिम उम्मीदवारों की सफलता कर दर 2.4 प्रतिशत थी

4 साल में मुस्लिम उम्मीदवारों की सफलता दी दर 4 प्रतिशत हो गई है

2017 में 52 मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए

2018 में 28 मुस्लिम उम्मीदवार पास हुए

5.4 प्रतिशत मुस्लिम उम्मीदवार सफल हुए हैं यूपीएससी में

2018 में 28 मुस्लिम उम्मीदवार पास हुए यूपीएसी में

2019 में मुस्लिम उम्मीदवारों ने 40 प्रतिशत की दर से बढ़ोत्तरी की है

         दूसरे समुदायों का हक मारते मुस्लिम

मुस्लिम समुदाय अब अल्पसंख्यक नहीं हैं क्योंकि उनकी जनसंख्या अब 40 करोड़ हो गई है

दूसरे समुदायों के हक को मुस्लिम समुदाय मार रहा है सिविल सेवा परिक्षा में

यूपीएसी के लिए सरकार ने 2020 में 219 मुस्लिम छात्रों को कोचिंग के लिए पैसा दिया अल्पसंख्यक के नाम पर

वहीं 36 ईसाईयों को तो 24 बौद्ध छात्रों को 9 पारसी छात्रों को मदद दी गई

स्टेट पीसीएस के लिए 1460 छात्रों को सरकार ने मदद की

जबकि 240 ईसाईयों को तो 160 बौद्धों को और सिर्फ 12 पारसी छात्रों को मदद दी

एसएससी के लिए सरकार ने मुस्लिम 1467 छात्रों को मदद दी

वहीं 165 ईसाईयों तो 13 पारसियों को सिर्फ मदद दी गई

पीएससी स्टेट लेवल पर 584 मुस्लिम स्टूडेंटस को मदद दी

वहीं 64 ईसाईयों को तो 26 बौद्धों को और 4 पारसियों को मदद दी

 जकात के जरिए मुस्लिम उम्मीदवारों की सहायता

जकात फाउंडेशन को सैयद जफर महमूद पूर्व आईएएस प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आएसडी

जकात फाउंडेशन को मदद उस ब्रिटिश संस्था से मिलती है जो भारत के खिलाफ आतंकी हमले करने वाले आतंकी ग्रुप हैं

2008 से जकात फाउंडेशन मुस्लिम युवाओं को फ्री कोचिंग देने की व्यवस्था की

जकात की मदद से 2019 में 27 मुस्लिम युवा यूपीएसी में शामिल हुए हैं

जकात की मदद से 9 उम्मीदवार यूपी से तो केरल से 8, जम्मू-कश्मीर से 3, बिहार महाराष्ट्र से दो-दो और कर्नाटक गुजरात से 1-1 मुस्लिम उम्मीवार पास हुआ है

जकात हर मुसलमान अपनी संपत्ति और आमदनी का ढ़ाई प्रतिशत देता है

जकात मुसलमान कभी देश के हित में नहीं देते

जकात से सिर्फ मुसलमानों के धार्मिक अड्डे बनाए जाते हैं

जकात से पास हुए मुस्लिम उम्मीदवार क्या दूसरे समुदायों की समस्याओं को कैसे सुनेंगे ?

         उड़ान योजना के तहत सरकारी मदद

सरकार नई उडान योजना के तहत अल्पसंख्यकों को सिविल सेवा परीक्षा के लिए मदद करती है

उड़ान योजना के तहत मुस्लिमों को सिविल सेवा परीक्षा के लिए 6 से 8 लाख रूपए की मदद करती है सरकार

मुसलमानों को यूपीएसी का प्री एग्जाम पास करने के लिए 1 लाख रूपए की मदद करती है सरकार

एसपीएसी प्री एग्जाम पास करने के लिए 50 हजार की मदद देती है सरकार मुसलमानों को

एएससी-सीजीएल प्री एग्जाम पास करने के लिए सरकार मुसलमानों को 25 हजार रूपए देती है

मुस्लिम उम्मीदवारों की कोचिंग के लिए 2019 में सरकार सरकार ने 8 करोड़ खर्च किए तो 2020 में 20 करोड़ रूपए खर्च में बढ़ दिए गए

2012 में मनमोहन सरकार ने यूपीएससी एकेडमी खोली

2015 में 15 करोड़ रूपए दिए मोदी सरकार ने यूपीएससी एकेडमी को

       उर्दू भाषा सिविल सेवा की कुंजी बनी

उदू भाषा को मुख्य एग्जाम में भाषा विकल्प रखा

मुख्य एग्जाम में मुस्लिमों के लिए उर्दू भाषा का विकल्प रखा है सरकार ने

आखिर मुसलमानों को उर्दू भाषा चुनने का विकल्प क्यों दिया ?

क्या अब देश उर्दू से चलेगा

क्या उदू भाषा के जरिए कोई पूरे देश के लोगों से डील करेगा

 सिविल सेवा पास हुए मुस्लिमों की देशविरोधी सोच

नादिया बेग कश्मीर के कुपवाड़ा से यूपीएससी रिजल्ट में 350वीं रैंक

एग्जाम पास होने के बाद नादिया बेग ने अपना पुराना ट्वीटर एकाउंट बंद कर दिया

पुराने ट्वीट में नादिया पाकिस्तानी आसिफ गफूर और इमरान खान की तरीफ कर रही हैं

कश्मीर पर भारत के अनाधिकृत कब्जे की बात करती है

कश्मीर को फ्री यानि भारत सरकार को कश्मीर छोड़ने की बात करती है

भारत के प्रधानमंत्री मोदी को किलर आफ डेमोक्रेसी बोलती है

350वीं रैंक पर आईएएस तो मिलने से रहा

अब नादिया को माइनारिटी कोटे से आईएफएस मिलेगा जो भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर काम करते हैं

पाकिस्तान समर्थक नादिया कैसे भारत के खिलाफ साजिश नहीं करेगी विदेश में ये कौन कह सकता है

क्या पाकिस्तानी आइडियोलोजी वाली महिला पाकिस्तान को हमारी खूफिया सूचना नहीं बेच सकती है ?

अगर रिवेन्यू वाली सर्विस आईआरएस मिल गई तो क्या गारंटी कि भारत का पैसा आतंकी संगठन के पास नहीं जाएगा ?

क्या इंटरव्यू नालेज के साथ-साथ देशप्रेम और देशहित के सवाल नहीं होने चाहिए

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का अलकायदा और तालीबान से लिंक

जिसने अमेरिका का दहला दिया। हाजारों निर्दोष लोगों को अमेरिका के वल्र्ड ट्रेड सेंटर में हवाई जहाज घुसाकर मौत के घाट उतार दिया। ऐसे ही आतंकियों और आतंकी संग्ठनों से तार जुडे हैं जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के।

जी हां, जकात फाउंडेशन आफ इंडिया लादेन के संगठन से जुडा पाया गया। आईए देखते हैं ये पूरी स्टोरी क्या है। जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मदीना ट्रस्ट से पैसा मिला है। फिर वहीं बैंक और उसी ब्रांच में पैसा आया। जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मदीना ट्रस्ट से ये पैसा बैंक ऑफ इंडिया की बहादुर शाह जफर स्थित ब्रांच के अकाउंट में आया।

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मिला ये पैसा 2007-2008 में 168031 रू. तो 2010-2011 में 637650 रू. मिले। वहीं 2011-2012 में 630835 रू. मिले तो 2012-2013 में 519817 रू. मिले। जबकि 2014-2015 में 959345 रू. तो 2015-2016 में 1190203 रू. मिले। वहीं 2017-2018 में 1273960 रू. तो 2018-2019 में 1364694 रू. मिले जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया। मदीना ट्रस्ट, यूके स्थित भारतीय दूतावास पर हुए सितंबर 2019 के हमले में शामिल था। 

मदीना ट्रस्ट का एक ट्रस्टी जाहिद परवेज इस्लामिक फाउंडेशन का भी ट्रस्टी है। 2003 की द टाइम्स यूके की खबर के हिसाब से इस्लामिक फाउंडेशन के दो ट्रस्टी अलकायदा एवं तालिबान से लिंक की वजह से यूएन की प्रतिबंधित लिस्ट में थे।

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का आईएसआईएस लिंक

अब आपको हम वो दिखा रहे हैं जो देश के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। दुनिया में सबसे खूंखार आतंकी संगठन है आईएसआईएस जिसका सरगना है अबु बकर बगदादी। इसी आतंकी संगठन से भी जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का डायरेक्ट और इडायरेक्ट कनेक्शन है।

जी हां, दिल्ली का जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया अबु बकर अल बगदादी से जुडा हुआ है। जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका से चंदे के रूप में पैसा मिला है। गृहमंत्रालय यानि एफसीआरए के दस्तावेजों से हमें पता चला कि जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को 2015-2016 में 1132574 रूपए मिले थे जकात फाउंडेशन आफ अमेरिका से।

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका से ये पैसा बैंक ऑफ इंडिया के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित ब्रांच के एकाउंट के जरिए मिला। ये सभी दस्तावेज हमारे पास हैं। अब आगे बढते है. जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका का एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर है खलिल देमिर। जकात फाउंडेशन ऑफ आमेरिका का खलिल देमिर बेनेवलेंस इंटरनेशनल फाउंडेशन का अधिकारी रहा है।

बेनेवलेंस इंटरनेशनल फाउंडेशन को यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने आतंकियों को पैसे देने का दोषी पाया और आतंकी संगठन घोषित किया। बेनेवलेंस इंटरनेशन फाउंडेशन ने 2002 में अलकायदा और चेचन्या के आतंकियों को पैसा दिया था।  पैसे देने की ये रिर्पोट यूएस की आईआरएस यानि आयकर विभाग के सन 2000 के दस्तावेजों में सामने आई है।

खलिल देमिर की जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका का लिंक आतंकी संगठन टर्किश हयूमेनेटेरियन रिलीफ आर्गेनाइजेशन से है। यहीं टर्किश हयूमेनेटेरियन रिलीफ आर्गेनाइजेशन के तथाकथित लिंक आईएसआईएस और दूसरे आतंकी संगठनों से भी हैं। अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि कैसे जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को पैसे देने वाले लोग दुनिया के खूंखार आतंकी संगठनों से जुडे हैं। आखिर जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को ऐसे आतंकी संगठनों से पैसे लेने की क्या जरूरत पडी।

क्या भारत में इन आतंकी संगठनों की जडों को मजबूत करने का षडसंत्र है ये। क्या भारत के युवाओं को भी आईएसआईएस आतंकियों की तरह बनाने का षडयंत्र चलाया जा रहा है।

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का जाकिर लिंक

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के जाकिर नाईक से लिंक चैंकाने वाले हैं। वहीं जाकिर नाइक है जिसे आतंकियों का आका कहा जाता है जो भारत छोडकर भाग गया है। जी हां, नाईक जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया से जुडा है। जाकिर नाईक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन इंटरनेशनल यूके का डायरेक्टर हैं तो सैयद जफर महमूद जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल के डायरेक्टर हैं। जाफर हुसैन कुरैशी जाकिर नाईक की इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन इंटरनेशनल का 9 साल तक डायरेटक्टर भी रहा है।

जफर हुसैन कुरैशी सैयद जफर महमूद की जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल का आज भी डायरेक्टर है। जाकिर नाईक और सैयद जफर महमूद के बीच की सबसे बड़ी कड़ी यहीं जाफर हुसैन कुरैशी रहा है। जाकिर नाईक के साथ 9 सालो तक काम करने वाले की मानसिकता क्या होगी और भारत के प्रति उसकी सोच कैसी होगी आप समझ सकते हैं। जिस जाकिर के छोटे से भाषण से हजारों युवा आतंकी बन जाते हैं।

मुस्लिम युवा दूसरे समुदायों के लोगों का गला काटते हैं। ऐसे में वो आदमी जो जाकिर नाईक के साथ 3285 दिन और 78 हजार घंटे साथ रहा हो उसकी सोच क्या होगी ? अंदाजा लगाया जा सकती है। यहीं आदमी कुरैशी सीधे जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया से जुडा हुआ है। ऐसे में जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के पैसों से यूपीएससी की कोचिंग लेने वाले मुस्लिम युवाओं की सोच कैसी होगी आप खुद सोच सकते हैं।


UPSC जिहाद: जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का पर्दाफाश

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को 1993 में बनाया गया. जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का मुख्य उदेश्य है सरकारी नौकरियों में भर्ती करने के लिए कोचिंग देना. जकात से 2009 से 2019 तक 119 छात्र आईएएस आईपीएस आईआरएस और दूसरी सरकारी सेवाओं में चयनित हुए

2020 में 40 मुस्लिम छात्र यूपीएससी में चयनित हुए जिनमें से 27 जकात फाउंडेशन के फैलो रहे हैं. जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया के फाउंडर प्रेसिडेंट हैं सैयद जफर महमूद. सैयद जफर महमूद स्वयं एक आईआरएस आफिसर रहे हैं. सैयद जफर महमूद पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहान सिंह के ओएसडी रहे है और पीएमओ में सच्चर कमेटी के इंचार्ज भी।

 जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का आईएसआई कनेक्शन !

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को यूके के मुस्लिम ऐड से लाखों रूपए की डोनेशन मिली

एफसीआरए दस्तावेजों के हिसाब से जकात फाउंडेशन को पैसा मिला

2006-2007 में 23,15,675

2010-2011 में 575640

2011-2012 में 308609

2013-2014 में 490000

राजधानी दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच से यूके के मुस्लिम ऐड का पैसा जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रांसफर हुए। 

मुस्लिम ऐड यूके की पाकिस्तान ईकाई मुस्लिम ऐड पाकिस्तान का चेयरमैन जनरल खालिद लतीफ आईएसआई का पूर्व जनरल रहा है। 

जनरल खालिद लतीफ पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी में भारत के खिलाफ काम करने वाला बड़ा जनरल रहा है

मुस्लिम ऐड पाकिस्तान खुलकर आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के साथ काम करता है

आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन ने भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया है

मुस्लिम ऐड पाकिस्तान के दिए हुए पैसे से आतंकियों ने भारत में कई बेगुनाह मसूमों की जान ली है।

 जकात फाउंडेशन ऑफ  इंडिया के जाकिर नाईक से लिंक

जाकिर नाईक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन इंटरनेशनल यूके का डायरेक्टर है

सैयद जफर महमूद जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया इंटरनेशनल का डायरेक्टर है

जाफर हुसैन कुरैशी जाकिर नाईक की इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन इंटरनेशनल का 9 साल तक डायरेटक्टर रहा है

जफर हुसैन कुरैशी, सैयद जफर महमूद की जकात फाउंडेशन आॅफ इंडिया इंटरनेशनल का आज भी डायरेक्टर है

जाकिर नाईक और सैयद जफर महमूद के बीच की सबसे बड़ी कड़ी रहा जफर हुसैन कुरैशी

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया का आईएसआईएस लिंक

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका से चंदे के रूप में पैसा मिला है।

एफसीआरए के दस्तावेजों से हमें पता चला कि जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को 2015-2016 में 1132574 रूपए मिले

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका से ये पैसा बैंक ऑफ इंडिया के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित ब्रांच के एकाउंट के जरिए मिला

जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका का एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर खलिल देमिर है

जकात फाउंडेशन ऑफ आमेरिका के खलिल देमिर बेनेवलेंस इंटरनेशनल फाउंडेशन का अधिकारी रहा है

बेनेवलेंस इंटरनेशनल फाउंडेशन को यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने आतंकियों को पैसे देने का दोषी पाया और आतंकी संगठन घोषित किया

बेनेवलेंस इंटरनेशन फाउंडेशन ने 2002 में अलकायदा और चेचन्या के आतंकियों को पैसा दिया था

पैसे देने की ये रिर्पोट यूएस की आईआरएस यानि आयकर विभाग के सन 2000 के दस्तावेजों में सामने आई है

खलिल देमिर की जकात फाउंडेशन ऑफ अमेरिका का लिंक आतंकी संगठन टर्किश हयूमेनेटेरियन रिलीफ आर्गेनाइजेशन से है 

टर्किश हयूमेनेटेरियन रिलीफ आर्गेनाइजेशन के तथाकथित लिंक आईएआईएस और दूसरे आतंकी संगठनों से हैं

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया अलकायदा और तालीबान से लिंक

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मदीना ट्रस्ट से पैसा मिला है जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मदीना ट्रस्ट से ये पैसा बैंक ऑफ इंडिया की बहादुर शाह जफर स्थित ब्रांच के अकाउंट में आया

जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया को मिले पैसे का विवरण

2007-2008 168031

2010-2011 637650

2011-2012 630835

2012-2013 519817

2014-2015 959345

2015-2016 1190203

2017-2018 1273960

2018-2019 1364694

मदीना ट्रस्ट, यूके स्थित भारतीय दूतावास पर हुए सितंबर 2019 के हमले में शामिल थी 

मदीना ट्रस्ट का एक ट्रस्टी जाहिद परवेज इस्लामिक फाउंडेशन का भी ट्रस्टी है

2003 की द टाइम्स यूके की खबर के हिसाब से इस्लामिक फाउंडेशन के दो ट्रस्टी अलकायदा एवं तालिबान से लिंक की वजह से यूएन की प्रतिबंधित संस्थाओं की लिस्ट में थे।

बढ़ती आबादी से दिल्ली बना मिनी पाकिस्तान

दिल्ली में अलग अलग जगहों पर नए पाकिस्तान बनने लगे हैं। दिल्ली में ये अलग पाकिस्तान सिर्फ 40 प्रतिषत मुस्लिम आबादी के दम पर बने हैं। दिल्ली के इन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भारत का कानून नहीं चलता। जैसे ही आप इन क्षेत्रों में घुसेंगे सबसे पहले गंदगी आपका स्वागत करने के लिए खडी होगी। सडकों पर बुर्के में लिपटी महिलाएं और मूछ कटी लंबी दाढी वाले पुरूश हर ओर दिखाई देंगे। दुकानों पर खुलेआम पषुओं को काटा जाता दिखाई दे जाएगा।

मीट की दुकानों पर खुलेआम खुला मीट बिकता हुआ मिलेगा, जिस पर मक्खियां भिनकती हुई दिखाई दे जाएंगी। ये मक्खियां बीमारियों को पूरे क्षेत्र में फैला रही होती हैं। ऐसे में आसानी से ये क्षेत्र बीमरियां फैलाने के अडडे बन जाते हैं जब किसी, कोरोना जैसे वायरस का हमला होता है। क्योंकि ज्यादातर बीमारियां ऐसे ही पषु पक्षियों से फैलती हैं जो मीट के इन खुले मार्केटस में काटे और बेचे जाते हैं। दिल्ली के 10 विधानसभा क्षेत्रों में ऐसा ही हाल हो गया है।

बल्लीमारान, मटिया महल, चांदनी चैक, ओखला और सीलमपुर दिल्ली के बडे पाकिस्तान बन गए हैं। इन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से पहले भी आतंकी पकडे जाते रहे हैं। बाटला हाउस और जामिया क्षेत्र पीएफआई और सिमी के आतंकियों के गढ बने हुए हैं। बाटला क्षेत्र में पीएफआई कें आतंकी वाकायदे आॅफिस खोलकर आतंक की पौध तैयार करते हैं और चंदा इकटठा करते हैं मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में।

आतंकी संगठन पीएफआई के कई आफिस खुले हुए हैं इन सभी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में। पुलिस भी इन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में जाने से घबराती है। क्योंकि इन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भारत का कानून कोई नहीं मानता। पुलिस को दौडा दौडा कर पीटा गया है कई बार इन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में। बाटला हाउस कांड को कौन भूला है, जहां आतंकियों को पनाह दे रखी थी स्थानीय लोगों ने।

पुलिस मुठभेड में जब आतंकियों को मार गिराया गया, तो मुस्लिम नेताओं ने कहा था कि सोनियां गांधी आतंकियों की मुठभेड पर रोईं थीं। क्योंकि कांग्रेस पुलिस के जवानों के साथ नहीं आतंकियों के साथ खडी थी। कांग्रेस के नेताओं ने षहीद इस्पेक्टर षर्मा का अपमान तक किया था आतंकियों का साथ देकर। वहीं आतंकियों के स्लीपर सैल इन क्षेत्रों में आसानी से छुपे रहते हैं।

साथ ही बांग्लादेषी घुसपैठिए और रोहिंग्या बडे मजे से इन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भारत के वोटर बन जाते हैं। क्योंकि बांग्लादेषियों के वोट किस पार्टी को मिलते हैं ये सभी जानते हैं। इन पार्टियों के नेता आसानी से इन घुसपैठियों की वोटर आईडी बनवा देते हैं। पुलिस के अनुसार, 10 मुस्लिम बहुल विधानसभाओं में सबसे ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज होते हैं।

ये अपराधी कौन होते हैं, आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं। क्योंकि इन अपराधियों को कोई फर्क नहीं पडता ऐसे अपराध करने में जो दूसरे समुदाय के लोगों को डराना धमकाना और मारना काटना होता है। ऐसे में दिल्ली में बने इन नए पाकिस्तान में दिल्ली वालों का रहना दुभर हो गया है।

बढ़ती जनसंख्या से दिल्ली का इस्लामीकरण

1951, दिल्ली में मुस्लिमों की आबादी सिर्फ 6 प्रतिषत थी। दिल्ली में कोई भी क्षेत्र मुस्लिम बहुल नहीं था आजादी के वक्त। लेकिन दिल्ली का धीरे धीरे इस्लामीकरण षुरू हो गया। आज दिल्ली में मुस्लिम आबादी 16 प्रतिषत के करीब हो गई है। 16 प्रतिषत तो दिल्ली में लीगल मुस्लिम आबादी है। लेकिन दिल्ली में अवैध बांग्लादेषी और रोहिंग्याओं की संख्या अलग है। दिल्ली में 10 लाख से ज्यादा की संख्या तो 2011 में सामने आई

ऐसे में दिल्ली में 40 लाख से ज्यादा मुस्लिम आबादी हो गई है। दिल्ली के 11 जिलों में से 4 जिलों में मुस्लिम आबादी 30 प्रतिषत से ज्यादा हो गई है। सेंट्रल दिल्ली में सबसे ज्यादा करीब 37 प्रतिषत मुस्लिम आबादी हो गई है। वहीं षहादरा जिले में करीब 36 प्रतिषत तक मुस्लिम आबादी बढ गई है तो नाॅर्थ इस्ट दिल्ली में करीब 35 प्रतिषत मुस्लिम आबादी बढ गई है। दिल्ली के इन जिलों में 1951 में मुस्लिम आबादी 10 प्रतिषत से ज्यादा कहीं भी नहीं थी। वहीं दिल्ली की 10 विधानसभा ऐसी हो गई हैं जहां मुस्लिम आबादी 35 प्रतिषत से ज्यादा है। 

दिल्ली की 5 विधानसभाओं में मुस्लिम आबादी 40 प्रतिषत से ज्यादा हो गई है। दिल्ली में चांदनी चैक, बल्लीमारान, मटिया महल, ओखला और सीलमपुर में 40 प्रतिषत से ज्यादा मुस्लिम आबादी है। वहीं दिल्ली की रिठाला, षहादरा, सीमापुरी, बदरपुर और मुस्तफाबाद 35 प्रतिषत से ज्यादा मुस्लिम आबादी है।

 दिल्ली की इन विधानसभाओं में नेता सिर्फ मुस्लिमों के घरों के आगे ही मत्था टेक रहे हैं। बाकी समुदायों की न तो कोई परेषानी सुनने वाला है और न ही उनको कोई महत्व दिया जा रहा है। इन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मुस्लिमों के गली गैंग बन गए हैं। गलियों में दूसरे समुदायों की बहन बेटियों को छेडा जाता है। 

जब दूसरे समुदाय के लोग मुस्लिम अपराधियों का विरोध करते हैं तो मुस्लिम अपराधी खुलेआम लोगों का गला काट देते हैं। क्योंकि इन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कानून का कोई राज नहीं चलता। डरे सहमें दूसरे समुदाय के लोग मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं। मुस्लिम दूसरे समुदाय के लोगों को इस तरीके से परेषान करते हैं कि वो अपना घरबार छोडने को मजबूर हो जाएं।  

बढ़ती आबादी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाय ?

विस्फोटक स्थिति में जा पहुंची जनसंख्या पर हर हाल में काबू पाना है। बेलगाम जनसंख्या पर काबू पाने के लिए सबसे कारगर तरीका परिवार नियोजन अपनाना ही है। कितने बड़े आश्चर्य का विषय है कि सरकार परिवार नियोजन कार्यक्रमों एवं योजनाओं पर करोड़ों रूपये खर्च करके संचालन कर रही है। इसके बावजूद कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल पा रहे हैं। 11 मई, 2000 को राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन किया गया थाजिसका उद्देश्य बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए समग्र मार्गदर्शन प्रदान करना था। इसके तहत कई तरह के बहुआयामी प्रयास भी किए गए। 

योजना के व्यापक व बहुक्षेत्रीय समन्वय को सुनिश्चित करने तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की योजनाओं को लागू करने के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का मई, 2005 में पुर्नगठन किया गया। लेकिन विडंबनावश हर तरह के प्रयासों के बावजूद विकराल होती जनसंख्या पर तनिक भी अंकुश नहीं लग पा रहा है। भारत सरकारनेताओं और नीति निर्माताओं को एक मजबूत जनसंख्या नीति बनाने के लिए पहल करनी चाहिएजिससे देश की आर्थिक विकास दर का बढ़ती आबादी की मांग के साथ तालमेल बिठाया जा सके। 

आबादी पर नियंत्रण पाने के लिए जो बड़े कदम उठाए जा चुके हैं उन्हें और जोर देकर लागू करने की जरुरत है। महिलाओं और बच्चियों के कल्याण और उनकी स्थिति को बेहतर करनाशिक्षा के प्रसारगर्भनिरोधक और परिवार नियोजन के तरीकेसेक्स शिक्षापुरुष नसबंदी को बढ़ावा और बच्चों के जन्म में अंतरगरीबों में गर्भनिरोधकों और कंडोम का मुफ्त वितरणमहिला सशक्तिकरण को बढ़ावागरीबों के लिए ज्यादा स्वास्थ्य सेवा केंद्र आदि कुछ ऐसे कदम हैं जो आबादी को काबू करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। 

दुनिया में अलग अलग क्षेत्रों में भारत की ताकत को नहीं नकारा जा सकता। चाहे वो विज्ञान और तकनीकमेडिसिन और स्वास्थ्य सेवाव्यापार और उद्योगसेनासंचारमनोरंजनसाहित्य आदि कुछ भी हों। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार द्वारा जन जागरुकता बढ़ाने और जनसंख्या नियंत्रण के कड़े मानदंड बनाने से देश की आबादी पर नियंत्रण पाया जा सकता है और इससे देश की आर्थिक समृद्धि बढ़ेगी।

अधिक आबादी के प्रभाव

विकराल होती जनसंख्या के कारण इन बुनियादी आवश्यकताओं का अभाव निरन्तर बढ़ता चला जा रहा है। विकासशील देशों में गिने जाने वाले भारत देश में आज भी 2.2 करोड़ लोग खुले आसमान के नीचे खाना खाने को मजबूर हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 60 करोड़ लोग खुले में शौच करते हैं। नंगे बदन फुटपाथों पर भूखे सोने वाले लोगों की संख्या में भी तीव्र गति से इजाफा होता चला जा रहा है।

मंहगाई के कारण आम आदमी का जीना ही दुर्भर हो गया है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2004 से वर्ष 2013 तक खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में 157 फीसदी की बढ़ौतरी हुई है। स्वास्थ्य और कुपोषण की समस्याएं एकदम विकट होती चली जा रही हैं। भारत में भूख और कुपोषण से प्रभावित लोगों की संख्या विश्व में सबसे अधिक 25 करोड़ 30 लाख है। भूख और कुपोषण सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार देश के 48 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं और उनका वजन सामान्य से भी कम है। विश्व स्तरीय रिपोर्टों के अनुसार विश्व में कुल 14 करोड़ 60 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हैं, जिनमें 6 करोड़ बच्चे भारत के हैं। ऐसे में विश्व का हर तीसरा कुपोषित बच्चा भारत का है।

देश में मातृ-मृत्यु दर के आंकड़े भी बड़े चैंकाने वाले हैं। यूनिसेफ के अनुसार लगभग 2 लाख महिलाएं प्रतिवर्ष प्रसव के दौरान दम तोड़ जाती हैं और आधे से अधिक महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं। जनसंख्या की अपार वृद्धि ने गरीबी, बेकारी, भूखमरी, बेरोजगारी में भारी बढ़ौतरी की है। वर्ष 2004-03 से वर्ष 2011-12 के दौरान रोजगार में वृद्धि दर केवल 0.3 प्रतिशत रही। इससे पहले वर्ष 1999-2000 से वर्ष 2004-05 के दौरान रोजगार वृद्धि दर 2.8 प्रतिशत रही थी। आंकड़ों से सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि बेरोजगारी का स्तर कितनी तेजी से बढ़ता चला जा रहा है। देश में गरीबी का दंश असहनीय हो चुका है। इस समय देश में दस में से तीन लोग गरीब हैं। इससे पहले भारत सरकार द्वारा नियुक्त अर्जुन सेन गुप्त आयोग ने रिपोर्ट दी थी कि भारत के 77 प्रतिशत लोग यानि लगभग 83 करोड़ 70 लाख लोग 20 रूपये से भी कम रोजाना की आय पर किसी तरह गुजारा करते हैं। इनमें से 20 करोड़ से अधिक लोग तो केवल और केवल 12 रूपये रोज से ही अपना गुजारा चलाने को विवश हैं।

शहरी भारत के लगभग चार फीसदी हिस्से पर मलिन बस्तियां बनी हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2009 में देश के 400 छोटे-बड़े शहरों में 30 करोड़ लोगों में से 6 करोड़ से अधिक लोग 55000 मलिन बस्तियों में रहने को विवश थे। देश के न्यायालयों में न्याय पाने वालों की कतार दिनोंदिन बढ़ती ही चली जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 30 नवम्बर, 2012 तक सुप्रीम कोर्ट में कुल 65703 मामले लंबित थे और 31 दिसम्बर, 2011 तक कुल 6445 ऐसे मामले थे, जिनमें लोग न्याय पाने के लिए पाँच साल से अधिक समय से इंतजार कर रहे थे।

 30 सितम्बर, 2012 तक देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में बलात्कार से जूड़े 23792 और उच्चतम न्यायालय में 425 मामले लंबित थे। 31 मार्च 2013 तक भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत देश की विभिन्न अदालतों में 6816 मामले लंबित थे। वर्ष 2011 की शुरूआत में सीबीआई अदालतों में 9928 और विशेष अदालतों में 10010 मामले लंबित थे। वर्ष 2011 तक देश की विभिन्न अदालतों में विचाराधीन दहेज हत्या से जुड़े कुल 29669 मामले लंबित थे।

जनसंख्या के बढ़ते ग्राफ के साथ ही कृषि क्षेत्र पर दबाव बढना स्वभाविक ही है। एक तरफ  खाद्यान्न की मांग बढ़ी है और दूसरी तरफ कृषि भूमि में भारी कमी आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की उपजाऊ भूमि का 25 फीसदी हिस्सा रेगिस्थानी भूमि में तब्दील हो चुका है और 32 फीसदी भूमि बंजर हो चुकी है। इस समय देश में अभी 18.3 करोड़ हेक्टेयर भूमि ही कृषि योग्य है, जिसमें से कई कारणों के चलते मात्र 14.1 करोड़ हेक्टेयर में ही कृषि हो पा रही है।

एक शोध रिपोर्ट में चिंता जाहिर की गई है कि जब देश की आबादी डेढ़ अरब के आसपास होगी, तब हम 1.69 करोड़ टन खाद्यान्न की कमी से जूझ रहे होंगे। प्राकृतिक आपदाओं में निरन्तर बढ़ौतरी होती चली जा रही है। सूर्य की पराबैंगनी किरणों से बचाने वाली सबसे महत्वपूर्ण ओजोन परत निरन्तर क्षीण होती चली जा रही है। पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता चला जा रहा है।

ईंधन की आपूर्ति के लिए वनों की तेजी से कटाई हो रही है और प्रतिवर्ष एक प्रतिशत वन भूमि मरूभूमि में तब्दील होती चली जा रही है। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण की समस्या विकट से विकटतम होती चली जा रही है। पर्यावरणविदों के अनुसार स्वस्थ पर्यावरण के लिए कम से कम 33 प्रतिशत भूमि पर वन होने चाहिएं, जबकि हमारे यहां मात्र 11 प्रतिशत भूमि पर ही वन मौजूद हैं। सबसे बड़ी चिंता का विषय है कि देश में जल स्तर निरन्तर घटता चला जा रहा है।

 पानी की बढ़ती मांग और अत्यधिक जल दोहन के कारण देश में पानी की मात्रा बेहद सीमित होती चली जा रही है, जिसके कारण पीने के पानी की समस्या भी अत्यन्त विकराल स्वरूप लेती चली जा रही है। वर्ष 2010 की विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत में जल स्तर निरन्तर घटता चला जा रहा है। सबसे बड़ी चिंता का विषय है कि देश का एक तिहाई से अधिक हिस्सा डार्क जोन में चला गया है। देश के कुल 5723 ब्लॉकों में से 839 ब्लॉक भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन के कारण एकदम डार्क जो में चले गये हैं और 225 ब्लॉक क्रिटिकल एवं 550 ब्लॉक सेमी. क्रिटिकल जोन में शामिल हो गये हैं। हालांकि पहले से कहीं अधिक साक्षरता देशभर में बढ़ी है। लेकिन, इसके बावजूद एक बड़ी आबादी आज भी निरक्षर है और बहुत बड़ी चुनौती का विषय है।

गाँवों में साक्षरता की स्थिति अत्यन्त चिंतनीय है। गाँवों में 29.3 प्रतिशत पुरूष और आधे से अधिक 53.9 प्रतिशत महिलाएं निरक्षता का जीवन जी रहे हैं। जबकि शहरों में भी 13.7 प्रतिशत पुरूष और 27.1 प्रतिशत महिलाएं अनपढ़ हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक संकुल की एडवांस रिपोर्ट-2011 के मुताबिक इस समय 81 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं और 5.6 करोड़ बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं।

 

बढ़ती जनसंख्या के महत्वपूर्ण आंकडे

हमारे देश की जनसंख्या गत 2001-2011 के दशक में 17.6 प्रतिशत की दर से 18.1 करोड़ बढकर 1 अरब 22 करोड़ हो गई है। जनगणना-2011 के अनुसार देश में 62 करोड 37 लाख 24 हजार 248 पुरूष और 58 करोड़ 64 लाख 69 हजार 174 महिलाएं हैं। जनसंख्या के मामले में हमारा देश विश्व में चीन के बाद दूसरे स्थान पर आता है। एक अनुमान के मुताबिक सन् 2022 तक जनसंख्या के मामले में विश्व में भारत का प्रथम स्थान हो जाएगा।

भारत में विश्व की कुल जनसंख्या का 17.23 प्रतिशत निवास करती है, जबकि देश का क्षेत्रफल विश्व के कुल क्षेत्र का मात्र 2.45 प्रतिशत ही है। एक नजरिए से विश्व का हर छठा व्यक्ति भारतीय है। कितने बड़े आश्चर्य का विषय है कि हमारे देश की जनसंख्या प्रतिवर्ष आस्टे्रलिया की जनसंख्या के बराबर बढ़ जाती है और विश्व के प्रत्येक 6 व्यक्तियों में से एक भारतीय शामिल हो जाता है।

वहीं 2017 में भारत की जनसंख्या 1 अरब 36 करोड हो गई है। जिनमें पुरूष 70 करोड तो महिलाएं 65 करोड हो गई हैं। 1951 में भारत की जनसंख्या 36 करोड थी। 1951 के बाद लगातार बढती जनसंख्या देश के लिए खतरा पैदा करने लगी है। आज भारत ही नहीं दुनियां जनसंख्या विस्फोट के खतरे में है। दुनिया में एक मिनट में 240 बच्चे पैदा हो रहे हैं।

वहीं इनमें से हर रोज 7 हजार बच्चे मृत पैदा होते हैं क्योंकि हम उन्हें दुनियां में लाने के लिए सही संसाधन नहीं लगा रहे हैं। जबकि हर रोज दुनियां में 3.50 लाख बच्चे पैदा होते हैं। 1000 ई. में दुनिया की आबादी 40 करोड थी जो 2050 तक 12 अरब हो जाएगी। वहीं भारत की आबादी 2020 में 1 अरब 50 करोड हो जाएगी। जबकि 2030 में 1 अरब 75 करोड के साथ भारत दुनियां का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश हो जाएगा। जबकि 2050 में 2 अरब जनसंख्या भारत में आवास और खाने के लिए लडेगी।

 

दुनियां में धार्मिक जनसंख्या और बदलाव

2035 तक भारत में मुसलमानों की आबादी बढ़ कर 92.5 करोड़ हो जाएगी और हिन्दू आबादी सिर्फ 90.2 करोड़ तक ही पहुंच पाएगी. 2040 आते-आते हिन्दू त्योहार मनाए जाने बंद हो जाएंगे, बड़े पैमाने पर धर्मांतरण और गैर मुस्लिमों का नरसंहार होगा और 2050 तक पहुंचते-पहुंचते मुसलमान 140 करोड़ से भी ज्यादा हो जाएंगे और भारत एक मुस्लिम राष्ट्र हो जाएगा. वहीं चैंकाने वाला खुलासा, 2055 से 2060 के बीच हिंदुओं पर होगा मुस्लिमों का दबदबा बताता है। एक नए सर्वे में हिंदुओं को लेकर चैकाने वाला खुलासा किया गया है।

प्यू रिसर्च सेंटर ने अपने एक सर्वे में दावा किया है कि भारत में 2055-60 के दौरान हिंदुओं की जनसंख्या में भारी गिरावट आएगी। इसकी वजह भारत में घटती प्रजनन दर है। एक नए शोध के अनुसार वर्ष 2050 तक भारत इंडोनेशिया को पीछे छोड़ पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा मुसलमान आबादी वाला देश बन जाएगा. इतना ही नहीं शोध में कहा गया है कि पूरी दुनिया में मुसलमानों और ईसाइयों की आबादी लगभग बराबर हो जाएगी. वॉशिंगटन स्थित प्यू रिसर्च सेंटर का कहना है कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आबादी हिंदू धर्म मानने वालों की होगी।

अगले चार दशकों में ईसाई धर्म सबसे बड़ा धार्मिक समूह बना रहेगा लेकिन किसी भी धर्म के मुकाबले इस्लाम सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ेगा. गौरतलब है कि इस वक्त दुनिया में ईसाई धर्म सबसे बड़ा समूह है उसके बाद मुसलमान आते हैं और तीसरी सबसे बड़ी आबादी ऐसे लोगों की है जो किसी धर्म को नहीं मानते। अगर मौजूदा ट्रेंड बरकरार रहा तो वर्ष 2070 तक इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समूह बन जाएगा. बढ़ती आबादी से अगले चार बरसों में अंदाजा है कि दुनिया की आबादी 9.3 अरब तक पहुंच जाएगी और मुसलमानों की संख्या में 73 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, ईसाइयों की संख्या 35 प्रतिशत बढ़ेगी और हिंदुओ की संख्या में 34 प्रतिशत की वृद्धि होगी.

शोध में कहा गया है कि इस वक्त मुसलमानों में बच्चे पैदा करने की दर सबसे ज्यादा है यानि औसतन हर महिला 4 से अधिक बच्चे पैदा कर रही है, ईसाइयों में हर महिला औसतन 3 से अधिक बच्चों को जन्म दे रही है. हिंदुओं में बच्चे पैदा करने की औसत दर 2 है. वर्ष 2010 में पूरी दुनिया की 27 प्रतिशत आबादी 15 साल से कम उम्र की थी वहीं 34 प्रतिशत मुसलमान आबादी 15 साल से कम थी और हिंदुओं में ये प्रतिशत 30 प्रतिशत था.

इसे एक बड़ी वजह है, कि मुसलमानों की संख्या दुनिया की आबादी के मुकाबले ज्यादा तेज रफ्तार से बढ़ेगी. वहीं हिंदू और ईसाई उसी रफ्तार से बढ़ेंगे जिस रफ्तार से दुनिया की आबादी बढ़ रही है. रिपोर्ट में बच्चे पैदा करने की दर के अलावा धार्मिक आबादी में इस उलटफेर के पीछे धर्मांतरण को भी एक बड़ा कारण बताया गया है।

आनेवाले दशकों में ईसाई धर्म को धर्मांतरण से सबसे ज्यादा नुकसान होने के आसार हैं और कहा गया है कि चार करोड़ लोग ईसाई धर्म अपना लेंगे. शोध में कहा गया है कि दस करोड़ साठ लाख लोग ईसाई धर्म को छोड़ देंगे. उसी तरह एक करोड़ 12 लाख लोग इस्लाम को अपनाएंगे जबकि लगभग 92 लाख लोग इस्लाम को छोड़ देंगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये अनुमान मौजूदा डाटा के आधार पर लगाए गए हैं लेकिन सामाजिक आंदोलन, युद्ध और प्राकृतिक विपदाओं के कारण ये बदल भी सकते हैं.

बढ़ती आबादी से असुरक्षा और क्राईम की घटनाएं

भारत में होती घुसपैठ ने जनसंख्या को न सिर्फ बढाया है बल्कि विस्फोटक बना दिया है। भारत में 10 लाख बांग्लादेशी घुसकर लाखों बच्चे पैदा कर रहे हैं। आज बच्चे पैदा करने में सबसे आगे बांग्लादेशी घुसपैठिए ही हैं। वहीं बांग्लादेसी बस्तियों में क्या होता है किसी को पूरी तरह से पता नहीं है। दिल्ली की बांग्लादेसी बस्तियों में ही क्राईम का रेट सबसे हाई है।

हमारी टीम बांग्लादेसी बस्तियों में जाकर रिपोर्टिंग कर चुकी है। कैसे बांग्लादेसी अपनी बस्तियों में किसी को आसानी से नहीं घुसने देते। घुसपैठियों से न सिर्फ भारत की डेमोग्रेफिक स्थिति में बदलाव आया है बल्कि कुछ राज्यों में तो स्थाई निवासी पलायन कर चुके हैं। कश्मीर और असम का बोडो क्षेत्र, स्थाई निवासियों के पलायन के सबसे बडे उदाहरण हैं। अब जम्मू कश्मीर में बांग्लादेसी घुसपैठिए और रोहिंग्या, जनसंसाधनों पर कब्जा जमा रहे हैं। बंगाल में बांग्लादेसी घुसपैठिए, अब सरकार में ताकतवर हो गए हैं। क्योंकि बंगाल में जनसंख्या के आधार पर इनके वोट हर राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं।

ऐसे में हर राजनीतिक दल इनके क्राईम से लेकर कुकर्मों में साथ देता है। क्योंकि इन राजनीतिक दलों को वोट चाहिए। वोट की राजनीति अब देश के लिए न सिर्फ खतरनाक होती जा रही है बल्कि ये देश को तोडने की ओर बढ रही है। वहीं बढती जनसंख्या डेमोग्रेफिक बदलाव ला रही है। क्योंकि जहां कुछ कटटरपंथी पनप गए वहां देश का नहीं, कटटरपंथी मौलानाओं का राज हो जाता है।

भारत के 65 जिले ऐसे हो गए हैं जहां मुसलमानों की जनसंख्या बहुसंख्यक है। इन क्षेत्रों में सरकार का कोई कानून नहीं होता। अगर पुलिस जाती भी है तो पुलिस को पीटने तक की वारदातें सामने आ चुकी हैं। उत्तर प्रदेश का संभल देश के सामने जीता जागता उदाहरण है। कैसे संभल में उन्मादी भीड ने पुलिस को दौडा दौडा का पीटा। संभल में नारे लगे..... कश्मीर को संभल बना देंगे। ऐसे में बढती जनसंख्या हम सबके सामने कई चुनौतियां लेकर आ गई है।