17 October 2021

बांग्लादेश में हिन्दुओं, मंदिरों और दुर्गा पंडालों पर जिहादी हमला

बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के तमाम दावों के बाद भी देश में हिंदू मंदिरों पर हमले बढ़ते ही जा रहे हैं. एक के बाद एक लगातार हिन्दुओं और उनके धार्मिक स्थलों पर जिहादी हमले जारी है. दुर्गा मंदिरों में तोड़फोड़ के कुछ घंटे बाद ही नोआखाली इलाके में करीब 200 मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ ने इस्‍कॉन मंदिर पर हमला कर दिया. कट्टरपंथी हमलावरों ने इस्‍कॉन के सदस्‍य पार्थ दास की बेहद क्रूर तरीके से हत्‍या कर दी. इस्‍कॉन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पार्थ का शव मंदिर के पास तालाब से बरामद हुआ. 


इस्‍कॉन ने बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हिंदुओं की सुरक्षा की गुहार लगाई है और दोषियों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की मांग की है. हमलावरों ने मंदिर के सामने बने दुर्गापूजा पंडाल को भी तहस-नहस कर दिया. इस घटना के एक दिन पहले ही बांग्लादेश में कई दुर्गा पांडालों पर हमला कर तोड़फोड़ की गई. उन्मादियों की भीड़ ने चांदपुर के हाजीगंज, चट्टोग्राम के बंशखली और कॉक्स बाजार के पेकुआ में हिंदू मंदिरों और पांडालों पर हमला किया.

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 5 हिन्दुओं की मौत हुई है. साथ हीं कई लोग अब भी लापाता हैं. बांग्लादेश में दुर्गा पूजा समारोह के दौरान कुछ अज्ञात जिहादियों ने दुर्गा पंडालों को क्षतिग्रस्त कर दिया, तो कुछ को आग के हवाले कर दिया. स्थिति इतनी खौफनाक और भयानक रूप ले चुकी है कि शेख हसीना सरकार को 22 जिलों में अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती करनी पड़ी है.


भारत सरकार ने कहा है कि वह बांग्लादेश में दुर्गा पूजा समारोह के दौरान घटी घटना अप्रिय और चिंताजनक है. सरकार लगातार वहां के सरकार के संपर्क में है. बांग्‍लादेश में हिन्दू मंदिरों पर ये कोई पहला हमला नहीं है. बांग्‍लादेश में आए दिन हिन्दुओं पर हमले हो रहे हैं. धार्मिक स्थ्लों को निशाना बनाया जारहा है. एक बार फिर से बांग्‍लादेश कट्टरपंथी जिहादियों के कब्जे में है. 


मगर सबसे बड़ा सवाल यहां विश्व समुदय से भी है कि आखिर अबतक किसी देश ने इसपर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी ? अपने आप को सुपर पावर कहने वाले देश चुप्पी क्यों साधे हुए हैं. लोकतंत्र की दुहाई देने वाले आज मौन क्यों हैं ?   

12 October 2021

इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो टूक: राम-कृष्ण के बिना भारत अधूरा

इलाहाबाद हाईकोर्ट आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है, पर कुछ प्रतिबंध भी है. अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी को दूसरे की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है. भगवान राम और कृष्ण के खिलाफ सोशल मीडिया में अश्लील टिप्पणी के मामले में कोर्ट ने कहा कि राम के बिना भारत अधूरा है. जिस देश में रह रहे हैं उस देश के महापुरुषों व संस्कृति का सम्मान करना जरूरी है. कोई ईश्वर को माने या न माने, उसे किसी की आस्था पर चोट पहुंचाने का अधिकार नहीं है.


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि भगवान राम, श्रीकृष्ण, रामायण और गीता इनके रचयिताओं, भारतीय संस्कृति की धरोहर महर्षि वाल्मीकि और महर्षि वेदव्यास को भारतीय संसद में कानून लाकर सम्मान देने की आवश्यकता है. कोर्ट ने कहा कि स्कूलों में इनकी शिक्षा अनिवार्य रूप से दिया जाना चाहिए. क्योंकि शिक्षा से ही व्यक्ति संस्कारित होता है. वह जीवन मूल्यों और संस्कृति से विज्ञ होता है. कोर्ट ने कहा कि अच्छी शिक्षा ही बेहतर मनुष्य का निर्माण करती है. बहुतायत शिक्षा पाश्चात्य इतिहासकारों पर ही आधारित है, जिन्होंने चाटुकारिता और स्वार्थ में आकर भारतीय संस्कृति को बहुत नुकसान पहुंचाया है.


कोर्ट ने कहा हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की रही है. सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः. सर्वे भद्राणि पश्यंतु, मां कश्चित दुःख भाग भवेत. ऐसी कामना करने वाले लोग हैं. कोर्ट ने भगवान राम कृष्ण के खिलाफ अश्लील टिप्पणी करने वाले आकाश जाटव उर्फ सूर्य प्रकाश को दोबारा ऐसा अपराध न करने की चेतावनी देते हुए सशर्त जमानत मंजूर कर ली है.

सरकारी वकील ने कहा कि याची अहमदाबाद अपने मामा के घर गया था. जहां अपना सिम कार्ड मामा के लड़के के मोबाइल फोन में लगाकर अश्लील पोस्ट डाली है. मामला तूल पकडने के बाद जब एफआईआर दर्ज हुई तो उसने मोबाइल फोन और सिम कार्ड तोड़कर फेंक दिया. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा संविधान बहुत उदार है. धर्म न मानने वाला नास्तिक हो सकता है. इससे किसी को दूसरे की आस्था को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं मिल जाता.

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा कि मानव खोपड़ी हाथ में लेकर नृत्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. यह अपराध है. कोर्ट ने यह भी कहा की ईद पर गोवध पर पाबंदी है, वध करना अपराध है, सूचना प्रौद्योगिकी कानून में भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम गैर जमानती अपराध है. अभिव्यक्ति की आजादी असीमित नहीं है. राज्य सुरक्षा, अफवाह फैलाना, अश्लीलता फैलाना अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि यह अपराध है.


कोर्ट ने कहा हमारे ऋषि मुनियों ने इंसान को भगवान बनने के रास्ते दिखाये है. टैगोर जी ने कहा कि रामायण महाभारत में भारत की आत्मा के दर्शन होते हैं. सामाजिक समरसता रामायण से इतर कहीं नहीं दिखती. सबरी के जूठे बेर खाने से लेकर निषादराज को गले लगाने तक सामाजिक समरसता का ही संदेश दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि तांडव सीरीज पर अभिव्यक्ति के असीमित अधिकार नहीं हैं.

भगवत गीता में कर्म फल सिद्धांत का वर्णन है. आत्मा अमर है. वह कपड़े की तरह शरीर वैसे बदलती है. जैसे बछड़ा झुंड में अपनी मां को ढूंढ़ लेता है. मन शरीर का हिस्सा है. सुख दुख का अहसास शरीर को ही होता है. भगवान कृष्ण ने कहा कर्म पर ध्यान दो,फल मुझ पर छोड़ो. वसुधैव कुटुंबकम् के भाव अन्य किसी भी देश में नहीं है. धर्म रक्षार्थ भगवान आते हैं।धर्म की हानि होने पर भगवान अवतार लेते हैं.

राम-कृष्ण के खिलाफ अश्लील टिप्पणी माफी योग्य नहीं है. हिन्दुओं में ही नहीं मुसलमानों में भी कृष्ण भक्त रहे हैं. कोर्ट ने उदाहरण के तौर पर बताया कि रसखान, अमीर खुसरो, आलम शेख, वाजिद अली शाह, नज़ीर अकबराबादी राम कृष्ण भक्त रहे हैं. कोर्ट ने कहा ऐसे में अभिव्यक्ति के नाम पर असीमित स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती, और देश में अगर राम कृष्ण का अपमान होता है तो यह पूरे देश का अपमान है, जो बिल्कुल बर्दाश्त के लायक नहीं है.

जिहादी अनस हक्कानी ने किया गज़नवी का महिमामंडन

तालिबान अब अपना जिहादी चेहरा दुनिया के सामने दिखाना शुरू कर दिया है. तालिबान के शीर्ष नेता अनस हक्कानी ने महमूद गज़नवी और सोमनाथ मंदिर की मूर्ति तोड़ने की कुकृत्य का महिमामंडन किया है. अनस हक्कानी ने कहा कि उनके शासनकाल ने तालिबान में गर्व और साहस का संचार किया था. ऐसे में आप समझ सकते हैं की तालिबान का चरित्र कैसा है और उसकी हिन्दू विरोधी बयान कितनी जहरीली है. 


बीते दिनों अनस हक्कानी ने सुल्तान महमूद गज़नवी की दरगाह का दौरा किया. इस दौरे के बाद हक्कानी ने सार्वजनिक तौर पर गज़नवी का महिमामंडन किया,  अनस हक्कानी ने अपने ट्वीट में कहा कि, जिन्होंने अतीत में सोमनाथ की मूर्ति को तोड़ा था, उसपर मुझे गर्व है. इसके बाद से इसे लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा शुरू होगया. कई हिन्दू कार्यकर्ताओं ने अनस हक्कानी की आलोचना की और कड़े शब्दों में जवाब दिया.


अनस हक्कानी अपने जहरीले बयान में आगे ये भी कहा की आज हमने 10वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध मुस्लिम योद्धा और मुजाहिद सुल्तान महमूद गज़नवी की दरगाह का दौरा किया. हम गज़नी की सराहना करते हैं जिन्होंने इस क्षेत्र में एक मजबूत मुस्लिम शासन स्थापित किया और सोमनाथ की मूर्ति को तोड़ा.


गजनवी और सोमनाथ मंदिर के इतिहास की बात करें तो, महमूद गज़नवी ने भारत पर 17 बार हमला किया था. गजनवी ने आक्रमण कर गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर को नष्ट कर दिया था. सोमनाथ पर अपने आक्रमण के दौरान महमूद गज़नवी ने ज्योतिर्लिंग को तोड़ा और हजारों भक्तों को मार डाला, जो मंदिर की रक्षा करने की कोशिश कर रहे थे.


समकालीन सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारत के पहले गृह मंत्री वल्लभभाई पटेल के आदेश के तहत शुरू किया गया था और उनकी मृत्यु के बाद मई 1951 में पूरा हुआ था. भाजपा नेता कपिल शर्मा और कई अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने हक्कानी को याद दिलाने के लिए ट्विटर पर जवाब दिया. कपिल मिश्र ने अपने ट्वीट में लिखा- सोमनाथ आज भी ऊँचा खड़ा है, जबकि गज़नवी के शहर नष्ट हो रहे हैं.

अब मार्क्स जिहाद! बड़ा आरोप, सभी को 100 में 100 नंबर कैसे मिले ?

दिल्ली विश्वविद्यालय का एडमिशन एक बार फिर से चर्चा में है. शत प्रतिशत कटऑफ के साथ विवादों का नाता तो हमेशा से हीं D.U में रहा है, मगर इस बार के कटऑफ में अब जिहाद भी जुड़ गया है. तो चलिए हम आपको बताते हैं की क्या है मार्क्स जिहाद और कैसे देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय में वामपंथ की जड़े मजबूत करने के लिए रचा जा रहा है एक बड़ा साजिश. 


D.U के किरोड़ीमल कॉलेज में मार्क्स जिहाद के तहत मिले एडमिशन मिलने का दावा किया है एशोसिएट प्रोफेसर राकेश पांडेय ने. प्रोफेसर पांडेय ने अपने फेसबुक पोस्ट में बेहद हीं गंभीर सवाल किया है. प्रोफेसर राकेश पांडेय के अनुसार केरल एजुकेशन बोर्ड से मार्क्स जिहाद का ये पूरा खेल चल रहा है. उनके द्वारा लिखे पोस्ट के अनुसार किरोड़ीमल कॉलेज में जो एडमिशन हुए हैं उसके पीछे एक बड़ा मार्क्स जिहाद होने की संभावना है.


प्रोफेसर राकेश पांडेय का पोस्ट ज्यों हीं सामने आया पूरा लेफ्ट विंग और NSUI तथा लेफ्ट स्टूडेंट विंग के प्रोफेसर, राकेश पांडेय के खिलाफ लामबंद हो गए. प्रोफेसर राकेश पांडेय ने कहा है कि केरल बोर्ड ने मार्क्स जिहाद के तहत 100 फीसदी अंक दिए, तथा उसी के तरह DU के किरोड़ीमल कॉलेज में 26 छात्रों को एडमिशन मिला.


विवाद होने पर प्रोफेसर पांडेय ने कहा है कि जब आप धर्म के प्रचार के लिए प्यार का दुरुपयोग करने लगते हैं तब यह लव जिहाद बन जाता है. ठीक उसी प्रकार से  यह मार्क्स जिहाद वह है, जब आप वामपंथी विचारधारा फैलाने के लिए अंकों का दुरुपयोग करते हैं. मेरे लिए वामपंथी और जिहादी एक जैसे ही हैं. मैं इनके बीच अंतर नहीं करता. जिहाद सिर्फ धर्म नहीं बल्कि इसका अधिक व्यापक अर्थ है, जो इसमें फिट बैठता है.

हो सकता है कि कुछ समूह केरल शिक्षा बोर्ड की सलाह से वामपंथी विचारधारा को आगे बढ़ाने में शामिल हों. ऐसे में अब पूरे एडमिशन पर सवाल खड़ा हो गया है. छात्र अब ये मांग करने लगे हैं की इसकी तत्काल जाँच कराई जाय, ताकि छात्रों के भविष्य को मार्क्स जिहाद से बचाया जा सके. 


तो वहीँ दूसरी ओर अब इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस नेता और केरल से सांसद शशि थरूर ने इसपर ट्वीट करते हुए लिखा है कि किसी भी चलन के लिए "जिहाद" का उपयोग सभी सीमाओं को पार कर रहा है. मैंने हमेशा डीयू में प्रवेश के लिए मुख्य मानदंड के रूप में अंकों पर अधिक निर्भरता की निंदा की है. लेकिन यह हास्यास्पद है.


यदि "जिहाद" का अर्थ संघर्ष है तो केरल के छात्रों ने 100% अंक प्राप्त करने के लिए डीयू तक पहुंचने के लिए संघर्ष किया है. यदि आप चाहें तो उन्हें अंदर जाने देने से पहले उनका साक्षात्कार लें, लेकिन उनके अंकों का प्रदर्शन न करें! केरल विरोधी यह पूर्वाग्रह अब खत्म होना चाहिए!

पिछले कई वर्षों से जारी है मार्क्स जिहाद 

प्रोफेसर राकेश पाण्डेय जो आरोप लगाया है वो बेहद गंभीर और पूरे शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला है. राकेश पाण्डेय ने वामपंध पर एक बड़ा प्रहार किया है. उनका कहना है, ऐसा लगता है कि कोई योजना दो-तीन साल से चल रही है. इसे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे विश्वविद्यालयों में राजनीतिक वामपंथियों से जुड़े लोगों की ढीली पकड़ से जोड़ा जा सकता है. इसलिए, वे अब दिल्ली विश्वविद्यालय में इसे फैलाना चाहते हैं.


प्रोफेसर राकेश पाण्डेय ने आरोप लगाया है की राज्य बोर्ड की मार्क्स प्रणाली के साथ एक विशेष राज्य के छात्रों को अधिक संख्या उतीर्ण कराया जारहा है. प्रोफेसर पाण्डेय जो बात कह रहे हैं उसकी पूरी पड़ताल अब हम आपके सामने रख रहे हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक पाठ्यक्रमों के प्रवेश पैटर्न में हाल में देखी गई घटना मार्क्स जिहाद की ओर इशारा करते हैं.


सूत्रों की मानें तो पिछले साल दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रमों में लगभग 940 छात्रों ने अपने सर्वश्रेष्ठ चार विषयों में 100 प्रतिशत अंकों के साथ प्रवेश लिया. वास्तव में, यह संख्या 2016 में 150 से बढ़कर वर्ष 2019 में 450 से अधिक हो गई. लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया. 2019 में पंजीकृत 300 की वृद्धि में से लगभग 205 केवल केरल बोर्ड से थे.

अब यहां सवाल ये है की केरल बोर्ड से संबंधित ऐसे आवेदक और सर्वश्रेष्ठ चार विषयों में 100% का सही अंक प्राप्त करने वाले, 2016 में मात्र 3 से बढ़कर 2019 में 208 हो गए थे. सीबीएसई बोर्ड के लिए इसी तरह के आंकड़े 2016 में 145 और 160 थे. 2019 में सीबीएसई के लिए भी इस साल ये संख्या बढ़ गई. 


लेकिन इसे कोविड -19 ऑनलाइन परीक्षा-मूल्यांकन 2020 के कारण हुई उदार तरीके से मार्क्स देना इसका मूल कारण बताया जा रहा है. सीबीएसई के लिए ये संख्या 2019 में 160 से बढ़कर 2020 में 650 हो गई और केरल बोर्ड के लिए यह 208 से बढ़कर 290 हो गई. लेकिन केरल बोर्ड के लिए 2016 में 3 से 2019 में 208 तक हुई. इस विस्फोटक बढ़ोतरी के कारणों का पता चलना चहिये ताकी सत्य सामने आसके.

क्या कश्मीर को 90 के दशक में लौटाने की साजिश हो रही है ?

कश्मीर में हुई एक के बाद आतंकी वारदातों के बाद से घाटी में फिर से 1990 के दशक जैसे हालात पैदा हो गया है. ऐसे एक बार हमें फिर से इतिहास की तरफ मुड़ कर देखना होगा कि आखिर क्या कुछ हुआ था उस वक्त. कैसी थी वो काली रात, कैसे रातों रात पूरा कश्मीर घाटी हिन्दू विहीन हो गया था. तो आईये हम आपको बताते है के कैसे हिन्दुओं में दहशत पैदा कर कश्मीर घाटी को सुलगाया गया था.


देश की आजादी के बाद धरती के जन्नत कश्मीर में जहन्नुम का मौहाल बन चुका था. 19 जनवरी 1990 की काली रात को करीब तीन लाख कश्मीरी पंडितों को अपना आशियाना छोड़कर पलायन को मजबूर होना पड़ा था. अलगावादियों ने कश्मीरी पंडितों के घर पर एक नोटिस चस्पा की गई. जिसपर लिखा था कि या तो मुस्लिम बन जाओ या फिर कश्मीर छोड़कर भाग जाओ...या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ.


इस दौरान कश्मीरी पंडितों की बहू, बेटियों के साथ उग्रवादियों ने बलात्कार और लूट-पाट की वारदात को अंजाम देने लगे. हर तरफ कत्लेआम हो रहा था. जन्नत में हर ओर मौत और दहशत का मंजर था. कश्मीर में हथियारबंद आंदोलन शुरु होने के बाद उसी रात तीन लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडित अपने परिवार के साथ अपना घर, अपनी जन्मभूमि छोड़ने पर मजबूर हो गए.


घाटी से पलायन करने के बाद कश्मीरी पंडित जम्मू और देश के अलग-अलग इलाकों में रहने को मजबूर हो गए. यहां भी उनके साथ अत्याचार सालों तक होता रहा. इस नरसंहार में कुल जिसमें 700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. आतंकियों ने कश्मीरी हिन्दुओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया और उसके बाद उनकी हत्या के दी गई. 


घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण किए गए. मस्जिदों में भारत एवं हिंदू विरोधी भाषण दिए गए. सभी कश्मीरियों को इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाने का हुक्म सुनाया गया था. उधर पाकिस्तान की तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने टीवी पर कश्मीरी मुस्लिमों को भारत से अलग होने के लिए भड़काना शुरू कर दिया था.


इस सबके बीच कश्मीर से पंडित रातों -रात अपना सबकुछ छोड़ने के मजबूर हो गए. वर्तमान हालात कुछ इसी ओर इशारा कर रहा है. तो यहां सवाल ये खड़ा होता हैं की क्या एक बार फिर कश्मीर घाटी में 1990 जैसे हालात पैदा किया जा रहा है ?


कश्मीर में हुए अबतक के बड़े नरसंहार

 

डोडा नरसंहार: अगस्त 14, 1993 को बस रोककर 15 हिंदुओं की हत्या कर दी गई

संग्रामपुर नरसंहार: मार्च 21, 1997 घर में घुसकर 7 कश्मीरी पंडितों को किडनैप कर मार डाला गया

वंधामा नरसंहार: जनवरी 25, 1998 को हथियारबंद आतंकियों ने 4 कश्मीरी परिवार के 23 लोगों को गोलियों से भून कर मार डाला

प्रानकोट नरसंहार: अप्रैल 17, 1998 को उधमपुर जिले के प्रानकोट गांव में एक कश्मीरी हिन्दू परिवार के 27 मौत के घाट उतार दिया था

 इसमें 11 बच्चे भी शामिल थे. इस नरसंहार के बाद डर से पौनी और रियासी के 1000 हिंदुओं ने पलायन किया था

2000 में अनंतनाग के पहलगाम में 30 अमरनाथ यात्रियों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी

20 मार्च 2000 चित्ती सिंघपोरा नरसंहार होला मना रहे 36 सिखों की गुरुद्वारे के सामने आतंकियों ने गोली मार कर हत्या कर दी

2001 में डोडा में 6 हिंदुओं की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी

2001 जम्मू कश्मीर रेलवे स्टेशन नरसंहार, सेना के भेष में आतंकियों ने रेलवे स्टेशन पर गोलीबारी कर दी, इसमें 11 लोगों की मौत हो गई

2002 में जम्मू के रघुनाथ मंदिर पर आतंकियों ने दो बार हमला किया

 पहला हमला 30 मार्च और दूसरा 24 नवंबर को किया गया

इन दोनों हमलों में 15 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी 

2002 क्वासिम नगर नरसंहार: 29 हिन्दू मजदूरों को मारडाला गया

इनमें 13 महिलाएं और एक बच्चा शामिल था

2003 नदिमार्ग नरसंहार: पुलवामा जिले के नदिमार्ग गांव में आतंकियों ने 24 हिंदुओं को मौत के घाट उतार दिया था


1990  में कश्मीरी पंडितों पर आतंकी कहर


कश्मीर में हिंदुओं पर कहर टूटने का सिलसिला 1989 में शुरू हुआ

जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी ने शुरू किया था हमला

कश्मीर में इस्लामिक ड्रेस कोड लागू कर दिया गया था

उसने नारा दिया हम सब एक, तुम भागो या मरो

इसके बाद कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड़ दी

करोड़ों के मालिक कश्मीरी पंडित अपनी पुश्तैनी जमीन जायदाद छोड़ दिए

रिफ्यूजी कैंपों में रहने को मजबूर हो गए कश्मीरी पंडित


1990 में लगे थे नारे मुस्लिम बनो या कश्मीर छोड़ो

 

कश्मीरी पंडितों के घर के दरवाजों पर पोस्टर लगा दिया गया था

 जिसमें लिखा था 'या तो मुस्लिम बन जाओ या कश्मीर छोड़ दो

पाकिस्तान की तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने दिया था भड़काऊ भाषण

टीवी पर कश्मीरी मुस्लिमों को भड़काया था बेनजीर भुट्टो ने

भारत से अलग होने के लिए भड़काना शुरू कर दिया था भुट्टो ने

कश्मीर से पंडित रातों -रात अपना सबकुछ छोड़ने के मजबूर हो गए


1990 में सरेआम हुए थे बलात्कार


कश्मीरी पंडित नर्स के साथ आतंकियों ने सामूहिक बलात्कार किया था

बाद में उसे पीट-पीट कर उसकी हत्या कर दी गई

घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार हुआ

लड़कियों के अपहरण किए गए, हालात बदतर हो गए थे

स्थानीय उर्दू अखबार, हिज्ब-उल-मुजाहिदीन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी

सभी हिन्दुओं को अपना सामान बांध कर कश्मीर छोड़ने के लिए कहा गया था

एक अन्य स्थानीय समाचार पत्र, अल सफा भी यही बात दोहराया था

मस्जिदों में भारत एवं हिंदू विरोधी भाषण दिए जाने लगे थे

सभी कश्मीरियों को कहा गया की इस्लामिक ड्रेस कोड अपनाएं


कश्मीर को फिर से जलाने की साजिश पाकिस्तानी षड्यंत्र का पर्दाफाश

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर से आतंकी सक्रिय हो गए हैं. कश्मीर घाटी में एक बार फिर से नब्बे की दशक जैसे हालात पैदा करने की साजिश सीमापार से रची जा रही है. आर्टिकल 370 हटने के बाद से हतोत्साहित होकर आतंकी आम लोगों को निशाना बनाने लगे हैं. एक कश्मीरी पंडित सहित तीन लोगों की हत्या के बाद एक बार फिर आतंकियों ने दो लोगों की हत्या कर दी, जिसमें एक हिंदू और एक सिख है. 


आतंकियों ने श्रीनगर के ईदगाह इलाके में स्थित एक स्कूल में शिक्षकों को लाइन में खड़े कराकर पहले उनकी पहचान की, मोबाइल फोन की जाँच की, उनके आइडेंटिटी कार्ड चेक किए, इसके साथ ही आतंकियों ने उनसे पूछताछ भी की और उनमें से जो मुस्लिम थे उन्हें छोड़ दिया. फिर दो गैर-मुस्लिम शिक्षकों की पहचान कर हत्या कर दी.


शिक्षिका सतिंदर कौर और शिक्षक दीपक चंद की जिस प्रकार से हत्या हुई है उसको लेकर लोगों में खौफ और गुस्से का माहौल है. सतिंदर कौर की माँ ये सवाल पूछ रही है की आतंकवादी को गोली क्यों नहीं मारी गई, उनकी बेटी की क्या कसूर थी? सतिंदर कौर स्कूल की प्रिंसिपल और दीपक कौल शिक्षक और कश्मीरी पंडित थे. आतंकी पहले से ही घात लगाए हुए थे और जैसे ही स्कूल खोलने के लिए दोनों शिक्षक वहाँ पहुँचे, आतंकी स्कूल में घुस गए.


आतंकियों की तलाश में सुरक्षाबलों ने भी सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. बीते एक सप्ताह के भीतर घाटी में 7 नागरिकों की हत्या हुई है. इसमें से 4 गैर-मुस्लिम हैं. माना जा रहा है कि इस तरह के हमलों का मकसद गैर-मुस्लिमों को डराना है, ताकि कश्मीरी पंडित घाटी में बसने के लिए तैयार ना हों और जो गैर-मुस्लिम घाटी में हैं, वे डरकर भाग जाएँ.


5 अक्टूबर को आतंकियों ने अलग-अलग हमलों में तीन आम नागरिकों की हत्या कर दी थी. मारे गए लोगों में से एक कश्मीरी पंडित माखनलाल बिंदरू श्रीनगर के प्रसिद्ध केमिस्ट थे. आतंकियों ने उनके दुकान में घुसकर उन्हें गोली मारी थी. दूसरी घटना में श्रीनगर के लाल बाजार इलाके में शाम के करीब साढ़े आठ बजे बिहार के गोलगप्पा बेचने वाले व्यक्ति की हत्या कर दी गई. 


पुलिस के अनुसार, श्रीनगर के मदीन साहब लालबाजार के पास आतंकियों द्वारा मारे गए शख्स की पहचान वीरेंद्र पासवान के तौर पर हुई है. हालिया घटना के बाद से सरकार और सेना दोदों एक्शन में है, जल्द हीं घटना को अंजाम देने वाले आतंकियों को ढेर कर दिया जाएगा.

06 October 2021

जानिए कितना बड़ा है ड्रग्स का आतंकी अर्थव्यवस्था

ड्रग्स के नशे से मरने वालों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है. मरने वालों की संख्या में 60 फीसद तक बढ़ गई है. विश्व में ड्रग्स के नशे के कारण तीन करोड़ लोग डिस्‍ऑर्डर का शिकार हो रहे हैं. नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटरिएट के एक रिपोर्ट के अनुसार ये पूरा व्यापार अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर, बांग्लादेश के रास्ते होता है. अफगानिस्तान दुनिया में अफीम का सबसे बड़ा उत्पादक है. यहां सालाना 5000 से 6000 टन अफीम पैदा होती है. अफगानिस्तान से नाटो सेनाओं की वापसी के बाद इसके उत्पादन में और बढ़ोतरी हुई है. 


एम्स में नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (एनडीडीटीसी) के 2019 के एक सर्वेक्षण अनुसार देश में 3.1 करोड़ लोग मारिजुयाना ड्रग्स का सेवन करते हैं. मुंबई पुलिस के नारकोटिक्स सेल के अनुसार अच्छी क्वॉलिटी वाला 10 ग्राम वीड करीब 5,000 रुपये में मिलता है. ड्रग्स का धंधा पूरी दुनिया में फैला है और भारत की भौगोलिक स्थिति उसकी सप्लाई में अहम भूमिका निभाती है. भारत हेरोइन और हशीश का उत्पादन करने वाले देशों के बीच में स्थित है. गोल्डन ट्रायंगल (थाइलैंड-लाओस-म्यांमार) और गोल्डन क्रीसेंट (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान) के कई देशों की सीमाएं भारत से मिलती हैं. इसकी वजह से भारत में ड्रग्स को पहुंचाना आसान हो जाता है. एजेंसियों के अधिकारियों के अनुसार देश में हर साल करीब 10 लाख करोड़ रुपये का ड्रग कारोबार किया जाता है. जिसमे अधिकतर कारोबारों आतंकी गतिविधियों में शामिल होते हैं.


ऐसे में यह बात समझनी होगी कि देश में इतने बड़े पैमाने पर ड्रग के अवैध धंधे तभी चल सकते हैं, जब इसका सीधा संबंध अन्तराष्ट्रीय गिरोह से जुड़ा हुआ हो.  नाइजीरिया, इजरायल और रूस के विदेशी नागिरक गोवा में चार्टर्ड प्लेन के जरिये ड्रग के अवैध बिजनेस का पूरा ईकोसिस्टम तैयार कर अपना व्यापर करते हैं.


संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स ऐंड क्राइम ऑफिस ने भी भारत को ड्रग्स के अवैध कारोबार वाले देशों में शामिल किया है. उसने चेताया है कि भारत में ड्रग बेहद आसानी से ऑनलाइन मिल जाती है. संयुक्त राष्ट्र की 2019 की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर में इंटरनेट पर ड्रग्स खरीदने का प्रचलन बढ़ रहा है. कुछ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ड्रग्स की बिक्री के लिए क्रिप्टोकरंसी का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.  इससे होने वाले आय को बड़े आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता है.

बॉलीवुड: नशे का कारोबार और आतंकवाद

बॉलीवुड में ड्रग्स का नशा और कारोबार लगातार बढ़ते जारहा है. कई ऐसे मौके आए जब ये मांग उठी कि फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों का ब्लड टेस्ट अनिवार्य हो जाए ताकि ड्रग्स और नशे के कारोबार का पर्दाफाश हो सके. बॉलीवुड के चमचमाते और महंगे कालीन के नीचे दबी नशे की सड़ांध अब आतंकवाद तक पहुंच चुकी है. अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट बॉलीवुड पर पूरी तरीके से कब्ज़ा कर चुका है. मुंबई में हर वर्ष तीन-चार बार रस्मी आदायगी के नाम पर छापेमारी होती है, जिसमे कुछ ड्रग पैडलर ड्रग्स के साथ पकड़े जाते हैं लेकिन नशीली दवाओं के छत्ते तक नारकोटिक्स के हाथ नहीं पहुंचते. 


बॉलीवुड में पैसा और सोहरत के आसरे अपने आप को बड़ा बादशाह बताने वाले शाहरुख़ के बेटे को जब NCB ने ड्रग्स सेवन के आरोप में पकड़ा तो बॉलीवुड का सड़ांध एक बार फिर उजागर होगया. खुले तौर पर जिन फ़िल्मी हस्तियों के ड्रग एडिक्ट होने की जानकारी है, उनमें बड़े नाम शामिल हैं. संजय दत्त, रणबीर कपूर, फरदीन खान और विजय राज लंबे समय तक एडिक्ट रहे हैं. लेकिन इस ड्रग्स गिरोह में शाहरुख़ खान के बेटा आर्यन खान का भी नाम जुड़ गया है.

मुंबई-गोआ-दिल्ली ड्रग्स के बाज़ार के बड़े केंद्र हैं. मुंबई में बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट अपना ड्रग्स का कारोबार चलाता है, जिसका सीधा संबंध आतंकी संगठन और उसके आकाओं के साथ होता है.


ड्रग्स का जहर अब टीवी इंडस्ट्री में भी घुस गया है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने कुछ दिन पहले बेंगलुरु से एक पूर्व टीवी अभिनेत्री अनिखा को गिरफ्तार किया तो ड्रग्स का टीवी इंडस्ट्री कनेक्शन भी खुलकर सामने आ गया. बिग बॉस की एक प्रतियोगी मुमैथ खान ड्रग्स के साथ गिरफ्तार हो चुकी है. अपूर्व अग्निहोत्री अपनी पत्नी के साथ एक रेव पार्टी से गिरफ्तार हो चुके हैं.


बॉलीवुड पर अभी एक गाना बहुत प्रासंगिक हो गया है. इतना नशा क्यों छा रहा है, तूने हवा में क्या भांग मिलाया. बॉलीवुड की हवाओं में ड्रग्स की खुमारी घुली हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिसार के अपने एक जनसभा में कहा था कि ड्रग्स के नशे से आतंकवादियों के हाथ मजबूत हो रहे हैं. जिस पैसे से नशीले पदार्थ खरीदे जाते हैं उस पैसे से आतंकवादी बम, बंदूक और गोली खरीदते हैं. उन्हीं हथियारों से वे हमारे सैनिकों को मारते हैं. तो ऐसे में अब एकबार फिर से शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग्स सेवन के बाद से सवाल उठने लगा है की क्या आर्यन का नशा आतंकियों को ऑक्सिजन प्रदान कर रहा है ?

05 October 2021

IAS धर्मांतरण कांड का बॉलीवुड कनेक्शन

आईएएस धर्मांतरण कांड की कड़ी जैसे-जैसे जुड़ रही है वैसे-वैसे जिहाद की परत दर परत पूरी कहानी खुलकर सामने आरही है. सीनियर आईएएस पर एक और बड़ा खुलासा हुआ है. कैंप ऑफिस में आईएएस के धर्मांतरण पर बातचीत करने के दौरान अभिनेता अमिर खान और शाहरूख खान से संपर्क होने का जिक्र एक मुस्लिम युवक वीडियो में कर रहा है. मुस्लिम युवक बता रहा है कि सीनियर आईएएस की बातचीत के वीडियो से आमिर खान इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने बहनोई को आईएएस इफ्तखारुद्दीन से मिलने के लिए भेजा. 


इस वीडियो को भी जांच के लिए एसआईटी टीम ने फोरेंसिक लैब में भेज दी है. वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कानपुर कमिश्नर कैंप ऑफिस में चल रही बातचीत में सीनियर आईएएस यूपीएसआरटीसी के एमडी मुहम्मद इफ्तिखारुद्दीन भी बैठा हुआ है. इस दौरान एक मुस्लिम युवक खड़ा होकर अपनी बात रखता है.

मुस्लिम युवक आगे बता रहा है कि आमिर खान के बहनोई को कुछ धार्मिक पुस्तकें भी दी गईं. उन पुस्तकों के पढ़ने के बाद आमिर खान बहुत प्रभावित हुए. वहीं बातचीत करता हुआ युवक यह भी कह रहा कि आईएएस की संबोधन से शाहरुख खान इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने कुरआन पढ़ना शुरू कर दिया. ऐसे में अब इस धर्मांतरण कांड को बॉलीवुड से भी जोड़ कर देखा जारहा है.

मामले की जांच कर रही एसआईटी कानपुर कमिश्नर के कैंप ऑफिस में जांच-पड़ताल कर रही है. जांच में बातचीत वाला स्थल कमिश्नर आवास के भीतर का ही निकल कर सामने आया है. आईएएस के साथ शामिल होने वाले युवक, अधेड़ और बुजुर्ग एक-एक की तलाश की जा रही है. इससे कि यह साफ हो सके कि वह कौन लोग हैं...? क्या करते हैं, कहां रहते हैं...? एक रिपोर्ट के अनुसार धर्मांतरण के लिए कानपुर ही नहीं बल्कि कई राज्यों के मुस्लिम इसमें शामिल होने के लिए आते थे.

जब आईएएस का बंगला खाली हुआ तो उस वक्त उसके आवास की सफाई के दौरान, धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाला साहित्य भारी मात्रा में बरामद हुआ था. मगर IAS से जुड़ा हुआ मामला होने के चलते तब इस घटना को दबा दिया गया था.. और अब शाहरुख, आमिर का कनेक्शन भी सामने आ गया है. ऐसे में अब ये सवाल खड़ा होने लगा है कि IAS इफ्तिखारुद्दीन और शाहरुख, आमिर के संबंधों की जांच भी क्यों न हो, ताकि IAS: धर्मांतरण कांड का बॉलीवुड कनेक्शन का पटाक्षेप हो सके.

वीडियो का अनुवाद: मौलवी:- आमिर और शाहरुख़ के बारे में बताते हुए:   

इफ्तिखारुद्दीन के बारे में आप सभी अपनी फरमा रहे थे, मैं एक छोटा सा आदमी हूँ आप सब के सामने. जो करते हैं अल्लाह करते हैं, अल्लाह जब किसी बंदे से मोहब्बत करवाते हैं. वो काम ले लेते हैं जो इंसान सोच नहीं सकता. अल्लाह ने एक किताब भिजवाया. जिसे आमिर खान तक भी पहुंचवाया.

जो साहब यहां (इफ्तिखारुद्दीन) बोलते थे उसकी रिकार्डिंग करके वहां उनको (आमिर) को भेजते थे. उसका ये नतीजा हुआ कि आमिर ने पिछले दिनों अपने बहनोई आईएम खान को कानपुर भेजा. आमिर ने अपने बहनोई से कहा, जाओ उनसे मिलकर आओ, आमिर खान के बहनोई फैमिली के साथ यहां आए.

आमिर खान ने सलाम भिजवाया, किताब को शाहरूख खान को भी दिया. शाहरुख खान किताब को कुरान समझकर पढ़ने लगे हैं. अल्लाह का ऐसा ये पैगाम है, अल्लाह ताला तक आज वो अपनी बात पहुंचा रहे हैं.

हम लोग तसव्वुर नहीं कर सकते थे वो इतना बड़ा आदमी (आमिर खान) है. यहां से बहुत सारी किताबें ले जाकर उन्होंने आमिर खान को दिया. आमिर खान ने कहा, मैं चाहता हूं कि मेरे भांजे तक भी किताब पहुंचे.

ये अल्लाह का हीं करामातें हैं जिससे ये सब होरहा है. आज अल्लाह ने हम सब को यहां भेजा है. इसका हम सब को फायदा उठाना चहिए...और आप कुरान को देखेंगे 6 हजार 6 सौ 66 आयतों में 13 सौ आयत अल्लाह के ऐतराम और मोहब्बत से जुड़ा हुआ है.

मगर अफ़सोस हम लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं. अल्लाह के लिए काम करना चाहिए. कुरान लोगों की नशे और भलाई के लिए निकाली गई है.

अल्लाह की नेकी क्या है इसके लिए हीं हम सब लोग यहां इक्कठा हुए हैं. इस काम को करना अल्लाह के तरफ सबसे बड़ी नेकी है. अल्लाह ताला हम सब पर नज़र बनाए रखे.