16 September 2022

कब-कब कहाँ-कहाँ मुसलामनों ने की हिन्दू भक्ति और पूजा- पाठ

25 अक्टूबर 2021, बेंगलुरु के भगवती अम्मा मंदिर में फैमिदा शरीफ ने रिश्तेदारों के साथ की पूजा अर्चना।

 

2.     11 अप्रैल 2022, वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी की मुस्लिम महिलाओं ने की आरती।

 

3.     7 जुलाई 2022, उत्तराखंड के मुस्लिम परिवार ने हरिद्वार से कांवड़ उठाकर देवबंद में श्री मंकेश्वर मंदिर में किया जलाभिषेक।

 

4.     3 मार्च 2022, कर्नाटक के गडग जिले में मुस्लिम दंपती ने हिंदू संत को घर पर किया आमंत्रित, संत के चरणों की पूजा की। ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप भी किया।

 

5.     2 सितंबर 2022, उत्तर प्रदेश में हरिगढ़ में मुस्लिम महिला रूबी आसिफ खान ने भगवान गणेश जी की मूर्ति को अपने घर में स्थापित किया

 

6.      17 जुलाई 2022, यूपी के मैनपुरी में बुर्का पहने वाली महिला ने भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगी

 

7.     15 सितंबर 2022, सहारनपुर में राव मुशर्रफ अली ने शिवलिंग पर भगवान महादेव का जलाभिषेक कर कहा, हमारे पूर्वज हिन्दू थे

महादेव की भक्ति पर भड़के मौलाना, देवबंद के मुसलमान ने सहारनपुर के महादेव मंदिर में किया जलाभिषेक, हर-हर महादेव के मंत्रोच्चार के साथ कहा, हमारे पूर्वज थे मुस्लिम, हम करते रहेंगे शिव भक्ती

सहारनपुर के देवबंद में उलेमाओं के फतवे को दरकिनार कर राव मुशर्रफ अली पुण्डीर ने शिवमंदिर में जल चढ़ाकर मंत्रोच्चारण के साथ भगवान शिव की पूजा की. राव मुशर्रफ अली राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के जिला संयोजक हैं जिन्होंने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया. उनके ये जलाभिषेक वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मौलानाओं ने आलोचना करना शुरू कर दी. 

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में मंत्रोच्चारण को सुनकर कोई भी इस बात का अंदाजा नहीं लगा सकता है कि जलाभिषेक करने वाला शख्स मुस्लिम है. मगर लोगों का महादेव और सनातन धर्म के प्रति बढ़ते आस्था से मौलानाओ में घबराहट है. बन्हेड़ा के रहने वाले राव मुशर्रफ का कहना है कि हमने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया हम सब पर भगवान भोलेनाथ की कृपा बनी रहे और मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं और अपने धर्म का भी सम्मान करने वाला व्यक्ति हूं.

राव मुशर्रफ अली पुण्डीर ने शिवमंदिर में पूजा करने का मकसद भी बताया, पुंडीर ने कहा कि हम चाहते हैं कि देश में भाईचारा और शांति बनी रहे। हमसे पहले हमारे पूर्वज भी भगवान शिव का जलाभिषेक किया करते थे. अपने पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मैंने भगवान शिव के मंदिर में जाकर जलाभिषेक किया है और जब भगवान शिव मुझे वाराणसी बुलाएंगे तो मैं ज्ञानवापी में जाकर भी भगवान भोलेनाथ पर जलाभिषेक करूंगा.राव मुशर्रफ का ये वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद विवादों में आ गए हैं ऐसे में उनको लेकर सूबे में सियासी पारा चढ़ सकता है.

कई बार उन्हें जान से मारने की धमकियां भी आईं हैं. इन धमकियों के खिलाफ उन्होंने स्थानीय पुलिस थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवा रखी है. ऐसे में यहां सवाल ये है कि मुसलमान की महादेव भक्ती पर मौलानाओं को आपत्ति क्यों ?

 

कौन हैं राव मुशर्रफ अली पुण्डीर ?


देवबंद के बंहेडा गांव के निवासी हैं राव मुशर्र अली

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के जिला संयोजक भी हैं

सनातन धर्म में इनकी गहरी आस्था है

राव मुशर्रफ अली पुण्डीर पहले भी भगवान महादेव की पूजा कर चुके हैं

राव मुशर्रफ अली वाराणसी के ज्ञानवापी मंदिर में भी जलाभिषेक करना चाहते हैं

मुशर्र अली का कहना है कि वो सभी धर्मों का सम्मान करते हैं

इन्हें कई बार जान से मारने की धमकियां भी आईं हैं

14 September 2022

साधु-संतों के विरुद्ध बढ़ते हमलों के पीछे कौन? महाराष्ट्र के सांगली में नागा साधु पर हमला, विधर्मियों ने बेरहमी से साधु को पीटा।

महाराष्ट्र के सांगली जिले में 4 साधुओं को बच्चा चोरी के शक में बेरहमी से पीटने का मामला सामने आने के बाद पालघर की घटना को फिर से सुर्ख़ियों में आगया है. ये घटना सांगली की जाट तहसील के लवंगा गाँव की है. वीडियो में दिख रहे ये चारों साधु यहाँ उत्तर प्रदेश के मथुरा से आए थे और पंढरपुर दर्शन के लिए जा रहे थे. बताया जा रहा है कि स्थानीय लोग इन साधुओं की भाषा नहीं समझ पाए और बच्चा चोर समझ कर इनकी लाठी-डंडों से पिटाई कर दी. मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है. 

साधुओं के मुताबिक, वे उत्तर प्रदेश के मथुरा से कर्नाटक देव दर्शन के लिए आए थे. वहाँ से पंढरपुर दर्शन के लिए जा रहे थे. रात को गाँव के एक मंदिर में ठहरे थे. दूसरे दिन सुबह एक बच्चे से रास्ता पूछते समय ग्रामीणों को लगा की वे बच्‍चा चोर हैं, जिसके बाद ग्रामीण उन्हें लाठी, डंडों से पीटने लगे. जिन साधुओं के साथ यह घटना हुई, वे मथुरा के श्री पंचमनामा जूना अखाड़ा के हैं.

महाराष्ट्र में साधुओं के साथ मारपीट की ये पहली घटना नहीं है. दो साल पहले पालघर जिले में 2 साधुओं की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. जूना अखाड़ा के महंत कल्पवृक्ष गिरी महाराज और महंत सुशील गिरी महाराज अपने ड्राइवर निलेश तेलगडे के साथ मुंबई से गुजरात अपने गुरु भाई को समाधि देने के लिए जा रहे थे. लेकिन 16 अप्रैल 2020 की रात पालघर के दहानु तालुका के आदिवासी बहुल गडचिंचले गाँव में सैकड़ों लोगों की भीड़ ने उन तीनों पर हमला किया और उनकी पीट-पीट कर हत्या कर दी.

पालघर में साधुओं की लिंचिंग के बाद मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि आदिवासी इलाकों में हिंदू संतों के खिलाफ एक हवा बनाई गई और इसी कारण संतों की मॉब लिंचिंग हुई. उस साजिश में ईसाई मिशनरियों के हाथ होने के भी संकेत मिले थे. अब इसी तरह की घटना फिर से सामने आने के बाद सवाल खड़ा होता है कि आखिर साधु-संतों के विरुद्ध बढ़ते हमलों के पीछे कौन है ?


कुछ महत्वपूर्ण सवाल

 

01.सांगली में साधु-संतों के साथ हुई मारपीट को पुलिस सामान्य घटना क्यों बता रही है ?

 

02.पालघर में पहले भी 2 साधुओं की पीट पीटकर हत्या हो चुकी है, फिर भी पुलिस किसी साजिश के एंगल पर जांच क्यों नहीं कर रही है ?

 

03.भगवाधारी साधुओं को बच्चा चोर के रूप में प्रचारित करने वाले लोग कौन हैं, इसपर कभी कोई जाँच क्यों नहीं होती ?

 

04.इतने संवेदनशील मामले पर अबतक किसी भी बड़े संत या हिन्दू संगठन की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई ?

 

05.बॉलीवुड और सेक्युलर जमात साधु-संतों के साथ बर्बरता होने पर मौन क्यों साध लेता है ?

 

06.बच्चा चोर बता कर ग्रामीण को लाठी- डंडों से पीटने के लिए किसने उकसाया ?

 

07.जिन साधुओं के साथ यह घटना हुई उनका न तो पुलिस ने बयान लिया और ना हीं इलाज कराया क्यों ?

 

08.बार-बार जूना अखाड़ा के हीं साधु- संतों के साथ लिंचिंग की घटना सामने आरही है, क्या हमलों का पैटर्न एक जैसा नहीं है ?

 

09.कौन है जिसको हिंदू साधुओं पर हो रहे हमलों से लाभ हैं, उनका इसमें हाथ होने की जाँच क्यों नहीं ?

 

10.अलग- अलग घटनाओं की अलग-अलग पुलिस से जाँच करवाने के बजाय केंद्रीय स्तर से अखिल भारतीय जाँच क्यों नहीं की जाती ?



13 September 2022

महाराष्ट्र के अहमदनगर में मुस्लिम लड़की सानिया से शादी करने पर हिंदू आदिवासी युवक दीपक बरर्डे था लापता, आज मिली नदी में लाश

महाराष्ट्र के अहमदनगर में मुस्लिम लड़की सानिया से शादी करने पर हिंदू आदिवासी युवक दीपक बरर्डे पिछले 10 दिनों से लापता है. दीपक के परिवार का रो रो कर बुरा हाल. हर जगह दीपक का परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है, मगर दीपक के परिवार को न्याय नहीं मिल पा रहा है. सुदर्शन न्यूज दीपक के परिवार की आवाज उठाने के लिए आगे आया है, चैनल लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है. इस मामले में पुलिस ने 6 जिहादियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन पुलिस अभीतक दीपक का पता नहीं लगा सका है. कोई खबर नहीं मिलने के कारण परिवार में आक्रोश और बेचैनी है. पीड़ित परिवार की यही मांग है कि उनका बेटा जल्द से जल्द मिल जाय.

अब सवाल ये भी खड़े हो रहे हैं कि आखिर कहां गया हिंदू युवक दीपक, क्या जिहादियों ने दीपक की हत्या कर दी है? श्रीरामपुर में बीजेपी के विधायक नितेश राणे, पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक उईके के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में राष्ट्रीय श्रीराम संघ और समस्त हिंदू संगठन के लोगों ने भारी संख्या में सड़क पर उतर कर आवाज उठाई. भोकर गांव में मुस्लिम लड़की सानिया का घर है, और हिंदू आदिवासी युवक दीपक भी यही का रहने वाला है. दीपक को 10 दिन से सानिया के जिहादी रिश्तेदारों ने अगवा किया हुआ है ऐसा परिवार वालों का आरोप है. पुलिस उलटे मुस्लिम लड़की सानिया के परिवार की सुरक्षा में पुलिस के जवानों की तैनाती कर दी है.

भोकर गांव के हिंदू आदिवासी युवक दीपक रावसाहेब बर्डे ने 2  महीने पहले मजनु बबन शेख की बेटी सानिया से शादी की थी. जब इसकी जानकारी मुस्लिम लड़की सानिया के परिवार वालों को मिली तो परिवार वालों ने सानिया को पुणे के वाघोली में मामा इमरान अब्बास शेख के घर भेज दिया था. 30 अगस्त को सानिया के मामा ने जबरजस्ती सानिया से फोन करवा कर हिंदू युवक दीपक को मिलने के बहाने पुणे के वाघोली गांव बुलवाया, सानिया के फोन पर बुलाने के चलते दीपक वाघोली पहुंचा, तब से अभ तक दीपक का कोई अता पता नहीं है. फिलहाल पुलिस मामले में कार्रवाई का आश्वासन दे रही है तो वहीं परिवार न्याय की गुहार के लिए दर-दर भटक रहा है.

विदेशी नेता जिनके लिए शोक घोषित हो चुका है

मॉरिशस के प्रधानमंत्री: भारतीय मूल के मॉरिशस के पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति अनिरुद्ध जगन्नाथ के निधन पर भारत में 5 जून 2021 को राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी

 

ओमान के सुल्तान: 10 जनवरी 2020 को ओमान के सुल्तान कबूस बिन सईद अल सईद का निधन होने पर 13 जनवरी 2020 को भारत में एक दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया गया था


सिंगापुर के प्रधानमंत्री: वर्ष 2015 में सिंगापुर के पहले प्रधानमंत्री और ली कुआन यू के निधन पर भारत में 29 मार्च 2015 को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी



पोप जॉन पॉल द्वितीय: अप्रैल 2005 में पोप जॉन पॉल द्वितीय की मृत्यु के बाद तीन दिवसीय राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी


ल्सन मंडेला: वर्ष 2013 में दक्षिण के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. नेल्सन मंडेला के निधन पर भारत में 6 से 10 दिसंबर तक पांच दिवसीय राजकीय शोक मनाया गया था


UAE के राष्ट्रपति: UAE के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक शेख खलीफा बिन जायद अल नाह्यान के मृत्यु पर 14 मई 2022 को एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था


सऊदी अरब के सुल्तान: सउदी अरब के सुल्तान शाह अब्दुल्ला के निधन पर 24 जनवरी 2015 को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी

राष्ट्रीय शोक घोषित करने के नियम

गणमान्य व्यक्तियों के मामले में केंद्र को यह अधिकार है कि विशेष निर्देश जारी कर राष्ट्रीय शोक का ऐलान कर सकती है

देश में किसी बड़ी आपदा के वक्त भी राष्ट्रीय शोकघोषित किया जा सकता है

फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज को झुकाया जाता है

शोक के दौरान सभी महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में लगे राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहते हैं

देश के बाहर भारतीय दूतावासों और उच्‍चायोगों में भी राष्‍ट्रीय ध्‍वज को भी आधा झुकाया जाता है

किसी तरह के औपचारिक और सरकारी कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाता है

राजकीय शोक की अवधि के दौरान समारोहों और आधिकारिक मनोरंजन की भी मनाही रहती है

अंग्रेजों के निशानी जो मोदी जी ने हटाए

नौसेना के झंडे से अंग्रेजों का निशान हटाए

साल 2014 से 2016 तक 1500 अंग्रेजी कानूनों को हटाए

25 हजार से ज्यादा अंग्रेजी शर्तों को भी खत्म किए  

राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किए

किंग जॉर्ज पंचम के जगह नेताजी सुभाए चंद्र बोस की प्रतिमा लगाए

पीएम आवास के रेस कोर्स का नाम कल्याण मार्ग किए

डलहौजी रोड का नाम बदलकर दारा शिकोह रोड किए

गुजरात के कांडला पोर्ट का नाम भी दीनदयाल पोर्ट किए

रखा गया

लुटेरे अंग्रेजों की रानी के मृत्यु पर राष्ट्रीय शोक क्यों ? 11 सितंबर को तिरंगा झुकाए नहीं, हर घर तिरंगा पुनः लगाए।

70 वर्षों से ब्रिटेन की सर्वोच्च शासक रहीं एलिजाबेथ के निधन के बाद यूनाइटेड किंगडम सहित 14 अन्य कॉमनवेल्थ देशों के राष्ट्रीय ध्वज को झुका दिया गया है. भारत सरकार ने भी 11 सितंबर को राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. मगर इसे लेकर लोगों में आक्रोश और गुस्सा है. लोग सवाल उठा रहे है कि अंग्रेजों की लुटेरी  रानी के राष्ट्रीय शोक क्या स्वतंत्रता सेनानियों और अपने प्राण न्योछावर करने वाले बलिदानियों का अपमान नहीं है ?

अंग्रेजों द्वारा भारत में 200 वर्षों में मचाई गई तबाही के लिए कभी माफी नहीं मांगी गई उसके रानी के लिए शोक कई अहम सवाल खड़े करते हैं. पहले सवाल यही उठ सकता है कि माफ़ी माँगने की ज़रूरत ही क्यों है? माफ़ी इसीलिए माँगनी है, क्योंकि अंग्रेजों के समय में 3 करोड़ के आसपास लोग भूख से मर गए.

1943 में बंगाल में आया अकाल इसका एक उदाहरण है, जब अंग्रेजों ने लोगों को बचाने की बजाए अपना खजाना भरना ही उचित समझा. दूसरे विश्व युद्ध में अंग्रेजों की सेना में शामिल 54,000 भारतीयों को अपनी जान गँवानी पड़ी. फिर भी भारत ऐसे देश की रानी के लिए उतना उदार भाव क्यों दिखा रहा है.

अग्रेजों द्वारा कोहिनूर हिरा लूटकर ले गए थे जिसका कीमत 8000 करोड़ है, बंगाल प्रेसिडेंसी में पहली बार गवर्नर बना रॉबर्ट क्लाइव अपने साथ 369 करोड़ रुपए लूटकर ले गया था, जिससे वो यूरोप के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक बन गया. इन सभी लूट का गवाह थी एलिज़ाबेथ मगर फिर भी लूटेरों की रानी का महिमामंडन से देश हैरान है. अन्य मीडिया संस्थान अब भी महिमामंडित करने से बाज़ नहीं आरहे हैं.

अंग्रेजों के जमाने के कानून जो आज भी चल रहे हैं

1836- बंगाल डिस्ट्रिक्ट एक्ट

1844- सेंट्रल एक्साइज एक्ट

1850- पब्लिक सर्वेंट (इंक्वायरीज) एक्ट

1860- इंडियन पीनल कोड

1861- पुलिस एक्ट

1869- डिवोर्स एक्ट

1872- एविडेंस एक्ट

1882- ट्रांसफर ऑफ प्रोपर्टी एक्ट

1874- मैरिड वीमन प्रोपर्टी एक्ट

1880- रिलीजियस प्रोपर्टी एक्ट

1922— दिल्ली यूनिवसर्टी एक्ट

इसके अतिरिक्त 211 अन्य कानून भी हैं

नीलगंज में आजाद हिंद फौज हत्याकांड- नेताजी के सैनिकों का नरसंहार

पश्चिम बंगाल के नीलगंज में 2,300 आजाद हिंद फ़ौज के सैनिकों पर मशीनगन चलाकर उन्हें मार डाला था

नेताजी सुभाषचंद्र बोस को कमजोर करने के लिए  नीलगंज के आर्मी कैंप में सैनिकों को बेदर्दी से कत्ल कर दिया गया

25 सितंबर, 1945 की रात ब्रिटिश आर्मी ने आजाद हिंद फौज का नरसंहार किया थासैनिकों की हत्या के बाद नौआई नदी में उनके शव को फेंक दिया गया था. आजाद हिंद फौज के सैनिकों के शव ट्रकों में भरकर लाए गए थे फेंकने के लिए


मानगढ़ जनसंहार- सबसे बड़ी बलिदानी

गुजरात की सीमा पर स्थित मानगढ़ की पहाड़ी पर अंग्रेजों ने 17 नवंबर, 1913 को 1,500 से ज्यादा भीलों को मौत के घाट उतार दिया था.

आदिवासी नेता और सुधारक गोविंद गुरु के 1,500 समर्थकों को गोलियों से भून दिया था

गोविंद गुरु ने सशक्तीकरण के लिए 'भगत आंदोलन' चलाया थाइस आंदोलन के कारण अंग्रेजों की सत्ता हिल गई थी.


'भगत आंदोलन' के कारण गांव-गांव में स्वतंत्रता आंदोलन की इकाइयां स्थापित हुई थीलोग मारे गए, जख्मी हुए और करीब 900 को जिंदा पकड़ लिया गया मगर मानगढ़ हिल पर अंग्रेज कब्ज़ा नहीं कर सके.

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और बर्बरता की घटनाएं

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार हमले हो रहे हैं

पिछले नौ साल में हिंदुओं पर 3600 से ज्यादा हमले हुए हैं

बांग्लादेश में 1990, 1995, 1999, 2002 में बड़े दंगे हुए थे

इन दंगों में हिंदुओं को ही निशाना बनाया गया था

बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करना आम बात है

लड़कियों का अपहरण, दुष्कर्म जैसी वारदात यहां आम हो गई हैं

बांग्लादेश के जन्म होने के बाद 1974 में जनगणना हुई थी

जनगणना के मुताबिक देश में 1974 में 13.5 फीसदी हिंदू थे

वर्ष 2011 में देश में महज 8.5 प्रतिशत हिंदू ही रह गए थे

2011 से 2021 तक इसमें करीब तीन फीसदी की और गिरावट आ चुकी है

हिंदुओं की संख्या साल-दर-साल लगातार घटती जा रही है

हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की मुख्य वजह उनकी जमीन हड़पने की कोशिश है

मुस्लिम आबादी गरीब हिंदुओं के घर जला देती है

घर जलने से ये हिंदू परिवार पलायन करने को मजबूर होते हैं

हिन्दू पलायन कर जाते हैं तो उनकी जमीन पर मुसलमान कब्जा कर लेते हैं


बांग्लादेश में बीते 6 महीनों के भीतर हुई घटनाएं

 

बांग्लादेशी हिंदुओं पर हुए अत्याचार के इस साल के आंकड़े जारी हुए है

ये आंकड़े जनवरी 2022 से लेकर जून 2022 तक के हैं

यानि सिर्फ़ 6 महीने के आंकड़े हैं जो डरावनी है

बीते 6 महीनों के भीतर ही 79 हिंदुओं की वहां के इस्लामिक कट्टरपंथी हत्या कर चुके हैं

बीते 6 महीनों में ही बांग्लादेश में हिंदुओं पर 501 संगठित हमले हुए हैं

59 मंदिरों पर हमले हुए और उन्हें तोड़ा गया

219 मूर्तिपूजकों का अपहरण हुए हैं

विभिन्न मंदिरों से 50 मूर्तियां चुराई गई

13 महिलाओं के साथ बलात्कार हुए

10 माहिलाओं के साथ गैंग रेप हुआ

तीन को बलात्कार के बाद मार डाला गया

19 माहिलाओं के साथ बलात्कार का प्रयास किया गया

95 हिंदुओं का जबरदस्ती धर्मांतरण किया गया

21 लोगों को धर्मांतरित करने की कोशिश की गई

63 घटनाओं में हिंदुओं के साथ धार्मिक बेअदबीकी गई

बीते 6 महीनों में ही 468 हिंदू घरों को तोड़ा और लूटा गया

343 घरों को आग लगाई गई

93 हिंदू व्यापारियों पर हमले हुए

2159.36 एकड़ हिंदुओं की भूमि पर कब्जा कर लिया गया

419.63 एकड़ पर कब्ज़ा होने वाला है

17 हिंदू घर और 29 व्यापार पर कब्ज़ा हो चुका है

29 मंदिरों की जमीनों पर कब्ज़ा हो चुका है

132 हिंदुओं के घर कब्जाए जा चुके है

717 हिंदू परिवारों को उनके घरों से भगाने की कोशिश की गई है

8943 परिवारों को घर छोड़कर भागने के लिए धमकाया जा चुका है

154 हिंदू परिवार देश छोड़कर भाग गए हैं

3897 परिवार अभी भी भागने के प्रयास में हैं

 


 

 

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचारों के अति के लिए बांग्लादेशी प्रधानमंत्री पर दबाव बनाओ। शेख़ हसीना के सामने हिंदू आक्रोश प्रकट करें।

बांग्लादेश में पिछले कई वर्षों से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार हमले हो रहे हैं. वर्ष 1971 में बांग्लादेश के जन्म होने के साथ ही हिंदू समुदाय के साथ मार-पीट, लूट, बलात्कार शुरू हो गई थी. बांग्लादेश के जन्म होने के बाद 1974 में जनगणना हुई थी. इसके मुताबिक देश में 1974 में 13.5 फीसदी हिंदू थे, लेकिन वर्ष 2011 में देश में महज 8.5 प्रतिशत हिंदू ही रह गए थे. 2011 से 2021 तक इसमें करीब तीन फीसदी की और गिरावट आ चुकी है. आज स्थिति यह है कि हिंदुओं की संख्या साल-दर-साल लगातार घटती जा रही है.


इसके बाद से ऐसा कोई साल नहीं जब अल्पसंख्यक समुदाय को हमले का सामना न करना पड़ा हो. पिछले नौ साल में हिंदुओं पर 3600 से ज्यादा हमले हुए हैं. ये मानवाधिकार संगठनों का आंकड़ा है. बांग्लादेश में 1990, 1995, 1999, 2002 में बड़े दंगे हुए थे. इनमें हिंदुओं को ही निशाना बनाया गया था. अब तो बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करना, हिंदुओं के घर जलाना, बच्चों और लड़कियों का अपहरण, दुष्कर्म जैसी वारदात यहां आम हो गई हैं.

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की मुख्य वजह उनकी जमीन हड़पने की कोशिश है. बांग्लादेश के कई अख़बारों और मीडिया संस्थानों ने भी इस तथ्य की ओर इशारा किया गया है. दरअसल, यहां के हिंसा के पैटर्न में देखा गया है कि बहुसंख्यक आबादी गरीब हिंदुओं के घर जला देती है. घर जलने से ये हिंदू परिवार पलायन करने को मजबूर होते हैं और जब वे पलायन कर जाते हैं तो उनकी जमीन पर मुसलमान कब्जा कर लेते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना से दिल्ली में मुलाकात की. इस दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच कई अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. इसलिए अब हिन्दू समाज ये कह रहा है कि क्यों न बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचारों के अति के लिए बांग्लादेशी प्रधानमंत्री पर दबाव बनाया जाय ?

 

 

पवित्र गंगा नदी में जिहादी अधर्म, गंगा नदी में नाव पर बैठकर पकाया मांस, हस्सान और आसिफ गिरफ्तार।

देशभर में जिहादियों का कुत्सित प्रयास जारी है. प्रयागराज के संगम में एक आपत्तिजनक वीडियो सामने आया है. इस प्रकरण में 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है. प्रयागराज पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपितों की पहचान हस्सान अहमद और मोहम्मद आसिफ के तौर पर हुई है. गंगा नदी के पास मांस व हुक्का का सेवन कर रहे कुछ मुसलमानों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इसके बाद प्रयागराज पुलिस ने आईपीसी की धारा 153, 295 के तहत थाना दारागंज में केस दर्ज किया था.

हिंदू समाज के आस्था केंद्र नागवासुकी मंदिर के पास बनाया गया था. वीडियो में नजर आ रही नाव में 8 लोग थे. उसके आसपास कई और नौकाएँ भी थीं. सबमें श्रद्धालु सवार थे. इन्हीं के बीच हस्सान वाली नाव पर मांस पकाया गया.

वीडियो देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है कि आरोपितों ने खुद ही वीडियो को बनाकर इसे वायरल किया है. प्रयागराज के SSP शैलेश पांडेय ने 31 अगस्त 2022 को वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान के निर्देश दिए थे. जाँच के बाद 1 सितंबर को कुल 8 आरोपितों को नामजद किया गया. पुलिस जब तलाश में जुटी तो ये लोग फरार थे. पुलिस ने लगातार छापेमारी करके इनमें से 2 को गिरफ्तार कर लिया है. इनसे आगे पूछताछ हो रही है.

 

मुस्लिम लड़की से प्यार करने पर हिंदू लड़के को फांसी पर लटकाया, UP के बरेली में तालिबानी सजा।

उत्तर प्रदेश के बरेली में लव जिहाद की एक वीभत्स घटना सामने आई है. मुस्लिम लड़की से जब एक हिन्दू लड़का सुनील कुमार ने प्रेम किया तो उसे मारकर जिहादियों ने शव को पेड़ से लटका दिया. लड़का जब घर पर रात में नहीं आया तो सुबह में परिजनों से उसे ढूँढना शुरू किया. मगर जब परिजनों ने लड़के को देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. जिहादियों ने लड़के की शव को आम के पेड़ से लटका कर फांसी दे दिया था. शव के मुँह में कपड़ा ठूँसा हुआ था और हाथ-पैर को रस्सी से बाँध दिया गया था.

शीशगढ़ थाना क्षेत्र के जियानगला गाँव के रहने वाले 22 वर्षीय मृतक के पिता आशा राम ने मामले में गाँव के ही 6 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई है. शिकायत के आधार पर पुलिस ने कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है.

अपनी शिकायत में मृतक के पिता ने कहा है कि उनके बेटे सुनील कुमार का गाँव के ही निसार अहमद की बेटी से प्रेम प्रसंग चल रहा था. इसको लेकर झगड़ा भी हुआ था. बाद में ग्राम प्रधान ने फैसला करा दिया था, लेकिन निसार अहमद अपने मन में रंजिश पाले हुए था.

मृतक के पिता का कहना है कि 2 सितंबर की रात 1 बजे बेटे के मोबाइल नंबर से ह्वाट्सग्रुप में एक ऑडियो और फोटो डाला गया था. इस ऑडियो फाइल में उनका लड़का कह रहा था, “मुझे छोड़ दो. ग्राम प्रधान ने फैसला करा दिया है तो मुझे क्यों मार रहे हो.

इस हत्या में फजल, यासीन, गुड्‌डू उर्फ अबरार, इसरार अहमद, अबरार अहमद, सरफराज अहमद पर FIR दर्ज हुआ है.

परली वैधनाथ के गणेश उत्सव में कव्वाली का विरोध, एनसीपी विधायक का कव्वाली प्रेम।

देशभर में गणपती उत्सव का धूम है. गणेश उत्सव पूरे सनातन परंपरा के अनुसार आयोजित किया जाता है. मगर कुछ लोग ऐसे भी हैं कि इस उत्साह को इस्लामिक रंग देने से नहीं चुकते हैं. महाराष्ट्र के परली वैजनाथ में पूर्व मंत्री और NCP विधायक धनंजय मुंडे द्वारा आयोजित गणपती फेस्टिवल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मगर कार्यक्रम में मुस्लिम कव्वाली बजा कर इस्लामिक रूप देने से हिन्दुओं में गुस्सा और आक्रोश है. 

भगवान गणपती बाप्पा के सामने मुस्लिम समाज की कव्वाली प्रोगाम का आयोजन कर वोटों का ध्रुवीकरण करने का प्रयास किया गया. हद तो तब हो गई जब बाप्पा के सामने हीं अल्लाह हु अकबर जैसे पक्षपाती नारे भी लगाए गए. कव्वाली की इस धुन से गणपती बाप्पा का अपमान हुआ है, इसलिए लोग विधायक पर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं.

प्रोग्राम शुरू होने से पहले ही परली वैजनाथ के मार्केट में कल सुबह से हिन्दू समाज की तरफ से भारी नाराजी व्यक्त की जा रही थी, बावजूद इसके इस तरह का आयोजन किया गया और हिंदू आस्था का अपमान हुआ. जिस तरह से ये कार्यक्रम कराया गया उसके बाद एक बार फिर से NCP विधायक धनंजय मुंडे के चाल, चरित्र और चेहरा उजागर हुआ है. विधायक ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए धार्मिक आस्था का सहारा लिए है, ताकि मुस्लिम वोटरों को खुश किया जा सके. सुदर्शन न्यूज़ हमेशा अली मौला जैसे गाने को हिन्दू त्योहारों में और कथा वाचकों द्वारा इसके उपयोग पर विरोध जताते रहा है.  

हरिगढ़ में बप्पा की पूजा करने पर फतवा, गणेश पूजा करने वाली मुस्लिम महिला रूबी पर मौलवी ने जारी किया फतवा।

अलीगढ़ में घर में गणपति की स्थापना और पूजन करने पर एक मुस्लिम परिवार के खिलाफ देवबंद के मुफ्ती ने फतवा जारी किया है. मुफ्ती ने कहा है कि ये गैर इस्लामी है. घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा करने वाली रूबी आसिफ खान बीजेपी की महिला मोर्चा की मंडल उपाध्यक्ष भी हैं. रूबी के गणेश पूजा को मुफ्ती अरशद फारूकी ने गैर इस्लामी बताया है.

रूबी का कहना है कि ऐसे मौलवी और मुफ्ती सच्चे मुसलमान नहीं हैं. ये देश का बंटवारा करना चाहते हैं. रूबी का कहना है कि पहले भी उनके खिलाफ फतवे जारी होते रहे हैं, इस बार भी फतवे की उनको कोई परवाह नहीं है.

रूबी ने मुफ्ती अरशद फारूकी को जिहादी सोच वाला कट्टर मौलवी बताया है. रूबी का कहना है कि वो हमेशा हिंदुओं के पर्वों को मनाती रही हैं और आगे भी मनाती रहेंगी.

फतवा जारी करने वाला मौलवी पहले भी उनके खिलाफ पोस्टर तक लगवा चुका है. रूबी के घर में गणेश प्रतिमा स्थापित होने और उसकी पूजा के बारे में सोशल मीडिया के जरिए मुफ्ती अरशद फारूकी से राय पूछी गई थी. इस पर मुफ्ती ने कहा कि भगवान गणेश को हिंदू अति पूजनीय मानते हैं और उनको ज्ञान के साथ सुख और समृद्धि देने वाला कहते हैं, लेकिन इस्लाम की बात करें, तो इस धर्म में मूर्ति पूजा नहीं होती.

इस्लाम में अल्लाह के सिवाय किसी को पूजा नहीं की जाती. जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे इस्लाम के खिलाफ हैं. ऐसा करने वालों के खिलाफ वही हुक्म जारी होता है, जो इस्लाम के खिलाफ जाने वालों के लिए है. मौलवी के इस बयान का चारों तरफ आलोचना हो रही है. कुछ लोग फतवा जारी करने वाले मौलवी को हिन्दू आस्था पर चोट पहुंचाने वाला बताया है. लोगों का कहना है इसकी गिरफ़्तारी होनी चाहिए जो फतवे के नाम पर समाज में इस्लामिक कट्टरता का जहर घोल रहा है.

काशी मथुरा के बाद अब बदायूं की बारी।

काशी मथुरा के बाद अब UP के बदायूं की जामा मस्जिद को नीलकंठ महादेव का मंदिर होने का दावा किया गया है. इसको लेकर सिविल कोर्ट में वाद दायर किया गया है. शुक्रवार को वादी की याचिका पर सिविल कोर्ट के जज ने वाद दायर करने की अनुमति दी है. वहीं सुनवाई के लिए 9 सितंबर 2022 की तारीख मुकर्रर की गई है. जबकि मस्जिद की इंतजामिया कमेटी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया गया है. याचिका में पहले पक्षकार स्वयं भगवान नीलकंठ महादेव महाराज बनाए गए हैं. मस्जिद विवाद धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. अब मामले को लेकर पुलिस प्रशासन भी अलर्ट मोड़ पर आ गया है.

अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने इसे लेकर कोर्ट में दावा किया है. इनके मुताबिक जामा मस्जिद को राजा महीपाल का किला व नीलकंठ महादेव का मंदिर है. याचिका को शुक्रवार को अदालत ने संज्ञान लिया है, अब जल्द हीं इसपर सुनवाई होगी.

याचिका में वादी ने जहां ऐतिहासिक पुस्तकों में मस्जिद के नीलकंठ महादेव मंदिर होने के जिक्र का हवाला दिया है. वहीं सूचना व जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित कराई जाने वाली पुस्तक में दिए गए इतिहास में भी इस तथ्य के होने का दावा करते हैं.

बदायूं की जामा मस्जिद देश की सबसे बड़ी मस्जिदों की श्रेणी में शुमार है और यह सातवीं सबसे बड़ी मस्जिद है. दिल्ली की जामा मस्जिद के बाद देश की तीसरी पुरानी मस्जिदों में भी इसे गिना जाता है जो अब विवादों में है. हिन्दुओं ने इसे लेकर अब आपना दावा किया है और उमीद जताया है कि जल्द हीं नीलकंठ महादेव मंदिर को मुसलमानों से मुक्त करा लिया जाएगा.