08 October 2022

कितना बदला आपका मुस्कान पहले और अब !

पहले

मुस्कान चेहरे पर दिखती थी

लोग हमेशा मुस्कुराते हुए खुश रहते थे

पहले लोग एक साथ खुशियां मानते थे

सिमित संसाधनों में भी मुस्कान बनी रहती थी

दूसरों की तरक्की में भी मुस्कुराते थे

किसी बात का जवाब मुस्कुरा कर देते थे

चेहरे पर असली ख़ुशी झलकती थी

मन में कोई द्वेष नहीं होता था

 

अब

बनावटी मुस्कान सिर्फ एमोज़ी में दिखती है

लोग सोशल मीडिया पर नकली मुस्कान दिखाते हैं

संपन्नता बढ़ने के बाद भी लोग मुस्कुराते नहीं हैं

दूसरे की ख़ुशी में दुखी नज़र आते हैं

इंसान चेहरे पर गम की झलक लिए घूम रहा है

मुस्कान की मुखौटे ने लोगों को निराश किया है

मुस्कुराहटों की कमी से लोगों में बीमारियां बढ़ी है

मुस्कुराने से होने वाले फायदेI

मुस्कुराने से मन प्रसन्न होता है बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक है।


किसी भी व्यक्ति को तनाव मुक्त करने में मुस्कान बहुत सहायक साबित होती है।

 

मुस्कुराने से उत्साह बढ़ता है और मन में सकारात्मकता जागृत होती है।

 

मुस्कान से बढ़ा हुआ रक्तचाप कम होता है।

 

मुस्कुराने से शरीर से एंडोर्फिंस निकलता है जो प्राकृतिक रूप से एक दर्द निवारक का काम करता है।

 

दर्द के समय में मुस्कुराना आपको थोड़ी राहत दे सकता है।

 

मुस्कान खूबसूरती बढ़ाने में भी सहायक होता है।

 

मुस्कुराने से चेहरे की मसल्स की एक्सरसाइज होती है।

 

मुस्कुराने से त्वचा में कसाव आता है और चेहरे पर असमय झुर्रियां नहीं पड़ती।

क्या लोग मुस्कुराना भूल गए हैं, क्या नकली मुस्कान का जमाना है ? विश्व मुस्कान दिवस पर विशेष लेख I

इंसान का चेहरा उसके दिल का आईना होता है. जो दिल में है वो चेहरे पर दिखता है और अगर उस चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाए तो कहने ही क्या. किसी ने ख़ूब कहा है 'मुस्कुराहट चेहरे का आईना है.' कभी-कभी इंसान का दर्द भी मुस्कुराहट बन कर चेहरे पर आ जाता है, तो कभी यही मुस्कुराहट किसी की खुशी की वजह बन जाती है. एक बच्चे की मुस्कुराहट हमारी सारी चिंताओं को कुछ पलों के लिए दूर कर देती है. और एक आशिक़ के लिए उसके प्रेमिका की मुस्कान भी बहुत कुछ बता देती है. 

 

हरेक मुस्कान को पढ़ना आसान नहीं. लेकिन झूठी मुस्कान को बहुत आसानी से पढ़ा जा सकता है. कहते हैं जब हम दिल से मुस्कुराते हैं तो हमारी आंखें भी मुस्कुराती हैं. लेकिन जब हम झूठ मूठ का मुस्कुराते हैं, तो, आंखें हमारा साथ नहीं देती. हम जिन लोगों से हर रोज़ मिलते हैं, उनके चेहरे का आकार और हावभाव हमारे ज़हन में एक गहरी छाप छोड़ देते हैं. जब उस चेहरे पर झूठी मुस्कान तारी होती है तो हम उसे भांप लेते हैं.

 

बहरहाल मुस्कुराना जिंदा दिली की पहचान है. इसलिए जब भी मुस्कुराहट आए तो उसे रोकिए नहीं. बल्कि दिल खोलकर हंसिए मुस्कुराइए. मुस्कुराने से मन प्रसन्न होता है बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक है. किसी भी व्यक्ति को तनाव मुक्त करने में मुस्कान बहुत सहायक साबित होती है. मुस्कुराने से उत्साह बढ़ता है और मन में सकारात्मकता जागृत होती है.

 

वहीँ मुस्कुराने से शरीर से एंडोर्फिंस निकलता है जो प्राकृतिक रूप से एक दर्द निवारक का काम करता है. ऐसे में दर्द के समय में मुस्कुराना आपको थोड़ी राहत दे सकता है. मुस्कान खूबसूरती बढ़ाने में भी सहायक होता है. साथ हीं मुस्कुराने से चेहरे की मसल्स की एक्सरसाइज होती है और मुस्कुराने से त्वचा में कसाव आता है और चेहरे पर असमय झुर्रियां नहीं पड़ती. इसलिए आप भी विश्व मुस्कान दिवस पर मुस्कुराईये.

हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान करने वाले मंत्री को बर्खास्त कर गिरफ्तार करोI

इंटरनेट पर आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम का हिंदू देवी-देवताओं की पूजा नहीं करने की शपथ लेने वाला वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है. वीडियो सामने आने के नाद लोगों में गुस्सा और नाराजगी है. लोग मुख्यमंत्री से मंत्री को तुरंत बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं. नराज हिन्दुओं ने मंत्री राजेंद्र पाल गौतम के खिलाफ दिल्ली पुलिस से भी शिकायत की है.

इस पूरे प्रकरण के बाद से राजनीति भी शुरू हो गई है. दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि लगभग 10 हजार की भीड़ में राजेंद्र पाल गौतम ने हिंदू देवी देवताओं के प्रति अपमान का भाव दिखाया है. उन्होंने नफरत फैलाने की कोशिश की है. उनके व्यवहार की सिर्फ निंदा नहीं, बल्कि उन्हें सजा मिलनी चाहिए उनका अपराध अक्षम्य है.

दिल्ली से सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि ये दोहरा चरित्र है, उन्हें तुरंत हिंदू देवी देवताओं का अपमान करने वाले अपने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. मंत्री ने नफरत फैलाने का कार्य किया है.

करोलबाग में दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम की मौजूदगी में हिंदू देवी-देवताओं के अपमान मामले में विश्व हिंदू परिषद ने भी कड़ा विरोध जताया है. VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से संपूर्ण हिंदू समाज से माफी की अपील की है. साथ ही आम आदमी पार्टी के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को बर्खास्त करने की मांग की है.  

05 October 2022

बुजुर्गों के प्रति दुर्व्यवहार और वर्तमान स्थिति।

WHO के अनुसार 4 से 6 प्रतिशत बुजुर्ग किसी न किसी प्रकार के दुर्व्यवहार से पीड़ित हैं। 

दुर्व्यवहार से संबंधित एक बड़ा प्रतिशत रिपोर्ट नहीं किया जाता है।


नौ फीसद बुजुर्गों को शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।


13 फीसद बुजुर्ग मानसिक प्रताड़ना के शिकार हैं।


भारत में 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या 12.5 फीसद थी, जो साल 2030 तक बढ़कर 20 फीसद हो जाएगी।


सर्वे के अनुसार लगभग 44 फीसद बुजुर्गों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया जाता है।


53 फीसद बुजुर्गों का कहना है कि समाज में उनके साथ भेदभाव किया जाता है।


अस्पताल, बस अड्डों, बसों, बिल भरने के दौरान और बाजार में उनके साथ दुर्व्यवहार होता है।


64 फीसद बुजुर्गों का कहना है कि बढ़ती उम्र या कमजोर होने की वजह से लोग उनके साथ रूखा बर्ताव करते हैं।

देश में बढ़ती बुजुर्गों की आबादी।

नेशनल स्टैटिक्स ऑफिस के एक अध्ययन के अनुसार देश में बुजुर्गों की आबादी वर्ष 1961 से लगातार बढ़ रही है।


देश में बुजुर्गों की कुल संख्या 2021 तक 13.8 करोड़ हो गई है।


जिनमें 6.7 करोड़ पुरुष और 7.1 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।


वर्ष 2031 में बुजुर्गों की तादाद 19.38 करोड़ तक होने का अनुमान है।


इसमें 9.29 करोड़ बुजुर्ग पुरुष और 10.09 करोड़ बुजुर्ग महिलाएं शमिल होंगी। 


लगभग 13 फीसद बुजुर्गों को बुनियादी जरूरतों की चीजें और सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जातीं।


बुजुर्गों के अनुभवों से सीखने के बजाए उन्हें वृद्धाश्रम में क्यों भेज रहे हैं ? वृद्धजन जीवंत तीर्थ हैं, आओ उनका सम्मान करें। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस विशेष।

आज समाज में अधिकांश बुजुर्ग अपमान झेलने को मजबूर हैं. उन्हें यंत्रणाएं मिल रही हैं. बुजुर्गों की समस्याओं के प्रति परिवार, समाज और सरकार सब उदासीन हैं. ये आज के दौर का कटु सत्य है. बुजुर्ग समाज का बड़ा प्रतिशत स्वयं को समाज से कटा हुआ और मानसिक रूप से दमित महसूस कर रहा है. यह असंवेदनशीलता बुजुर्गों के लिए काफी पीड़ादायी है. बदलते दौर ने लोगों की सोच में बदलाव लाने के साथ-साथ बुजुर्गों के प्रति आदर का भाव भी खत्म कर दिया है. 

आधुनिक समाज में बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में धकेल कर उन्हें समाज से अलग कर दिया है. या फिर वे घर में इतने प्रताडि़त किए जाते हैं कि खुद ही घर छोड़कर चले जाते हैं. वृद्धजन हमारी अनुभवों से निर्मित एक पूंजी हैं, हमारी परंपरा और संस्कृति भी हैं. मगर आज तिनका-तिनका जोड़कर अपने बच्चों के लिए आशियाना बनाने वाली पुरानी पीढ़ी के ये लोग अब खुद आशियाने की तलाश में दर-ब-दर भटक रहे हैं.

आज स्थिति ये है कि वृद्धाश्रम में उनके सिर पर छत है और ना हीं पेट भरने के लिए भोजन. मां-बाप ने अपना खून-पसीना एक करके जिन बच्चों को पढ़ाया-लिखाया था, आज वही संतान इन्हें दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर दिए हैं. देश में बुजुर्ग बेहद दयनीय दशा में हैं,

बुजुर्गों की दयनीय होती जा रही स्थिति के लिए जिम्मेदार है पश्चिमी संस्कृति. जिसका अनुसरण करने की होड़ में हम लगे हुए हैं। बगैर कुछ सोचे-समझे हम भी दूसरों की देखा-देखी एकल परिवार प्रणाली को अपना कर अपनों से ही किनारा कर रहे हैं. ऐसा करके हम अपने हाथों अपने बच्चों को उस प्यार, संस्कार, आशीर्वाद व स्पर्श से वंचित कर रहे हैं, जो उनकी जिंदगी को संवार सकता है.

ऐसे में जरूरत इस बात की है कि परिवार में आरंभ से ही बुजुर्गों के प्रति अपनेपन का भाव विकसित किया जाए. विश्व में भारत ही ऐसा देश है जहां आयु को आशीर्वाद व शुभ-कामनाओं के साथ जोड़ा गया है. जुग-जुग जियो, शतायु हो जैसे आशीर्वचन आज भी सुनने को मिलते हैं. ऐसे में नई भावनात्मक सोच विकसित करने की जरूरत है ताकि हमारे बुजुर्ग परिवार व समाज में खोया सम्मान पा सकें और अपनापन महसूस कर सकें. परिवार की शान कहे जाने वाले हमारे बड़े-बुजुर्ग आज परिवार में अपने ही अस्तित्व को तलाशते नजर आ रहे हैं, यह हमारे लिए गंभीर चिंतन का विषय है. वृद्धजन जीवंत तीर्थ हैं, आओ उनका सम्मान करें.

 

भारत में ह्रदय रोगियों के मानसिक कारण, परिणाम और उपाय।

                                                              मानसिक कारण


आत्म गौरव का अनुभव ना होना।

गर्व की अनुभूति का गर्व नहीं होना।

गौरव की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक लड़ने की मनोदशा नहीं होना।

स्वयं का क्या होगा इस भय से लगातार उदासी से घिरे रहना।

हर वक्त अनजान सी बेचैनी महसूस करना।

किसी न किसी वजह से मूड खराब रहना।

जिंदगी से कोई उम्मीद न होना।

मन में अपराध बोध का होना।

हर वक्त जिंदगी को बोझ मानना।

मनपसंद काम न कर पाने की लाचारी।

पसंदीदा कार्यों में रुचि न रहना।

तड़के नींद खुल जाना।

बहुत ज्यादा नींद आना।

भूख कम लगने से लगातार वजन गिरना।

मन में सुसाइड के ख्याल आना।

खुदकुशी की कोशिश करना।


                                                मानसिक परिणाम


आत्म गौरव भूल कर पराभूत मनोदशा में पहुँचे हैं।

दिव्य लक्ष प्राप्ति के लिए परिश्रम करने की क्षमता समाप्त हुई।

समाज व व्यक्ति भी पराक्रम की पराकाष्ठा करने के लिए आगे नहीं आते।

साम्राज्य विस्तार की सोच भी नहीं रही, इसलिए जो है वह भी बचा नहीं पा रहे हैं।

पराक्रम और परिश्रम तो दूर हम प्रेम दया करुणा भी भूल गए।

व्यक्ति मनुष्य न रहकर मशीन बनता जा रहा है।

आत्महत्या की संख्या बढ़ गई है।

सही-गलत का बोध का स्मरण नहीं रहा।

छोटी-छोटी बातों के लिए अपराध को अंजाम दे रहे हैं।


मानसिक उपाय


मन में प्रेम और करुना का भाव रखा जाय।

अपनों से नजदीकियां बढ़ाई जाय।

सामाजिक सहयोग और समर्थन दें।

सनातन संस्कृति से जीवन शैली ठीक किया जाय।

योग-ध्यान अपनाएं।

पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार से मन में शांति लाया जाय।

तकनीक को जीवन में हावी न होने दिया जाय।

पराक्रम और परिश्रम में समय को लगाया जाय।

लक्ष्य सिद्धि के लिए ध्यान एकाग्र किया जाय।

मन में खुद के प्रति गौरवान्वित महसूस करें।

 

भारत में ह्रदय रोग के कारण परिणाम और उपाय

                                                                     शारीरिक कारण


विकृत जीवन शैली का प्रभाव

मल्टी टास्किंग कार्यों में शामिल

ओवरलोडेड कार्य करना

मेंटल स्ट्रेस का भार

नियमित रूप से व्यायाम की कमी

संतुलित खानपान का अभाव

जंक फूड का अत्यधिक सेवन

धू्म्रपान, तंबाकू का सेवन

तनाव, मोटापा, शराब का सेवन

आनुवांशिकता और उच्च रक्तचाप

फूड सप्लीमेंट का सेवन

मांस पेशियां बढ़ाने के लिए दवाओं का सेवन

 

शारीरिक परिणाम


हृदय की मांसपेशियां कमजोर होंगी

कोरोनरी आर्टरी की अन्य बीमारी बढ़ेगी

ह्रदय आघात हो सकता है

हृदय वॉल्व की क्षमता में कमी

साँस की तकलीफ होगी

पैरों और एड़ियों में सूजन

हृदय की धड़कन में अनियमितता

 

शारीरिक उपाय


हर दिन व्यायाम करना चाहिए

सेहतमंद खान-पान करें

धूम्रपान का सेवन बिल्कुल न करें

नियमित चेक-अप करवाएं

ज़िंदगी जीने के सेहतमंद तौर-तरीके अपनाएं

हाई फाइबर और लो फैट वाली डाइट अपनाएं

फलों के अलावा हरी सब्जियों का सेवन करें

भारत में ह्रदय रोग की स्थिति।

दुनिया सहित भारत में तेज़ी से ह्रदय रोगियों की संख्या बढ़ रही है।

भारत में हर साल लाखों लोग हृदय रोगों से ग्रस्त हो रहे हैं।

हार्ट अटैक के चलते मौतें भी लगातार बढ़ रही हैं।

मरने वालों में युवाओं की तादाद बढ़ रही है।

मौतों की सालाना संख्या 47 लाख तक पहुंच गई है।

1990 से पहले करीब 22 लाख के आसपास थी।

ग्रामीण आबादी में मृत्यु दर 1.6% से 7.4% है।

शहरी आबादी में 1% से बढ़कर 13.2% तक पहुंच गई है।

 

क्या हिंदुस्तानियों का ह्रदय कमजोर हो गया है ? शारीरिक ही नहीं मानसिक दुर्बलता का हो उपाय ? विश्व हृदय दिवस पर विशेष।

दुनिया सहित भारत में तेज़ी से ह्रदय रोगियों की संख्या बढ़ रही है. भारत में हर साल लाखों लोग हृदय रोगों से ग्रस्त हो रहे हैं. साथ ही, हार्ट अटैक के चलते मौतें भी लगातार बढ़ रही हैं. इसमें युवाओं की तादाद भी कम नहीं है. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, भारत में कार्डियो वेस्कुलर डिसीज (सीवीडी) से मौतों की सालाना संख्या 47 लाख तक पहुंच गई है. यह आकड़ा 1990 से पहले करीब 22 लाख के आसपास थी.

बीते तीन दशक में कोरोनरी हृदय रोगों की भारत में प्रसार दर काफी तेजी से बढ़ी है. ग्रामीण आबादी में 1.6% से 7.4% और शहरी आबादी में 1% से बढ़कर 13.2% तक पहुंच गई है.

डॉक्टरों के अनुसार हृदय रोग के कई कारण है, इनमे प्रमुख रूप से विकृत जीवन शैली, व्यायाम की कमी, संतुलित खानपान का अभाव, जंक फूड का सेवन, धू्म्रपान, तंबाकू का सेवन, तनाव, मोटापा, शराब का सेवन, आनुवांशिकता, उच्च रक्तचाप, ज्यादा व्यायाम व फूड सप्लीमेंट का सेवन, मांस पेशियां बढ़ाने के लिए दवाओं का सेवन आदि हृदय रोग के मुख्य कारण हैं. साथ हीं भारत में होने वाले प्राचीन और पारंपरिक खेलों से भी लोग तेज़ी से दूर हो रहे हैं. जिसके कारण तेज़ी से शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ रही है. ऐसे भारतीय जीवन शैली को एकबार फिर से अपनाना होगा.

विश्व में हृदय रोगी मरीजों में 15% महिलाएं हैं. आंकड़ों को देखें तो विश्व में 80% लोगों की मौत का कारण भी हार्ट अटैक ही माना गया है. एक सर्वे के अनुसार हर साल हार्ट की बीमारी में बरती जाने वाली लापरवाही के कारण विश्व में तकरीबन 2 करोड़ लोग की मौत हो जाती है. चिकित्सकों का मानना है कि दिल यानी शरीर का वो सबसे खूबसूरत हिस्सा जिसके बिना जीवन ही संभव नहीं है. तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या हिंदुस्तानियों का ह्रदय कमजोर हो गया है ?  इसलिए आज हम पूछ रहे हैं कि शारीरिक हीं नहीं मानसिक दुर्बलता का क्या हो उपाय ?

29 September 2022

सिमी क्या है ?

पूरा नाम स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया

आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन से संबंध

स्थापना 25 अप्रैल 1977 उत्तर प्रदेश

उदेश्य- प्राचिन सांस्कृतिक को मिटाना

पहचान, विरासत के प्रभाव को समाप्त करना

इस्लामिक राज की स्थापना करना

भारत के खिलाफ जिहाद की घोषणा

9/11 हमले के बाद आतंकवादी संगठन घोषित

UAPA के तहत प्रतिबंधित किया गया था

2006 में मालेगाँव धमाके में शामिल

दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट में शामिल

 

PFI पर गृह मंत्रालय का गजट नोटिफिकेशन, पांच वर्ष के लिए आतंकी संगठन हुआ बैन।

PFI के संस्थापक सदस्य सिमी के नेता रहे हैं।

PFI का सम्बन्ध जमात-उल-मुजाहिदीन से भी है।

मात-उल-मुजाहिदीन प्रतिबंधित संगठन है।

PFI का सम्बन्ध ISIS के साथ है।

PFI आतंकी मामलों में शामिल रहा है।

देश की संविधान का अनादर करता है।

आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।

हिंसक और विध्वंसक कार्यों में संलिप्त।

कॉलेज प्रोफेसर का हाथ काटना।

अन्य धर्मों से जुड़े लोगों की निर्मम हत्या।

सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना।

वैश्विक आतंकवादी समूहों के साथ सम्पर्क।

धन के स्रोत खाताधारकों से मेल नहीं खाते।

  

इस्लामिक आतंकवादी संगठन PFI पर लगा बैन, हिन्कीदुओं की हुई ऐतिहासिक जीत, अब है PFI समर्थकों की बारी!

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर भारत सरकार ने आज आखिर अपना चाबुक चला हीं दिया. PFI पर बड़ी कार्रवाई करते हुए गृह मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों के लिए बैन लगा दिया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पीएफआई पर कई गंभीर सबूत जुटाएं है जिसके बाद गृह मंत्रालय ने ये कड़े कदम उठाए हैं. अधिसूचना जारी कर सरकार ने बताया है कि PFI का अधिकांश शीर्ष नेतृत्व पहले प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का हिस्सा था. पीएफआई के प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) से भी संबंध हैं. 

सुदर्शन न्यूज़ इस विषय को 2005 से लगातार उठा रहा है. पीएफआई पर बैन लगाने के लिए बिंदास बोल में सुरेश चव्हाणके जी भी लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं. सिमी भारत में जिहादी छात्रों द्वारा इस्लामिक आंदोलन के रूप में उभरा था, जिसका गठन 25 अप्रैल 1977 को उत्तर प्रदेश के हरिगढ़ में हुआ था. तब सिमी भारत के प्राचिन सांस्कृतिक पहचान और विरासत के प्रभाव को समाप्त कर इस्लामिक राज की स्थापना करना चाहता था. सिमी ने भारत के खिलाफ जिहाद की घोषणा की और देखते हीं देखते इसके जिहादी मनसूबे सामने आने लगे. सिमी अपने जिहादी उद्देश्य के तहत भारत में दार-उल-इस्लाम यानि कि (इस्लाम की भूमि) बना कर आतंकवाद और नफरत का बीज बोने के लिए अपने एजेंडे में जुटा रहा.

भारत सरकार ने 2001 के 9/11 हमले के बाद से सिमी को आतंकवादी संगठन घोषित कर इस पर प्रतिबन्ध लगा दिया. सिमी को अनलॉफुल ऐक्टिविटीज प्रिवेंशन ऐक्ट 1967 (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित किया गया था. 2006 में सिमी कार्यकर्ता नूरूलहुदा को मालेगाँव धमाके मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था. 7 दिसंबर 2008 को सिमी के सरगना सफदर नागोरी, आमिल परवाज, शिवली सहित 10 जिहादियों को मध्य प्रदेश की स्पेशल पुलिस टास्क फोर्स ने आतंकी गतिविधियों के चलते गिरफ्तार था. दिल्ली में हुए सीरियल ब्लास्ट में 30 लोगों की मौत हो गई थी इस धमाके के भी तार सिमी से जुड़े थे. सिमी के पांच आतंकवादियों को तेलंगाना के नलगोंडा जिले में पुलिस ने मार गिराया गया. पांचों आतंकवादियों को हैदराबाद में पुलिसकर्मियों पर सिलसिलेवार हमलों के बाद 2010 में गिरफ्तार किया गया था. वहीं भोपाल की सेंट्रल जेल से आठ सिमी आतंकी फरार हो गए थे जिन्हें बाद में पुलिस ने मार गिराया था. 

इसके बात सिमी ने अपना पहचान छुपाया और बेंगलुरु में 19 दिसंबर 2006 में एक मीटिंग हुई जिसमें पीएफआई फॉर्म किया गया. इसे तीन संगठनों को मिलाकर बनाया गया. ये संगठन थे- द नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट, मनीता नीति पसरई और कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी. तीनों को मिलाकर बना PFI फिर से अपने आतंकी मंसूबों को अंजाम देना शुरू कर दिया. और आज अंततः इसके भी कारनामों का घड़ा भर गया और गृह मंत्रालय ने पांच वर्षों के लिए बैन लगा दिया. मगर सवाल अब भी बना हुआ है कि इसपर स्थाई प्रतिबंध कब और कैसे लगेगा ? साथ हीं इसके समर्थकों की भी गिरफ़्तारी कब होगी ?


                  गृह मंत्रालय का गजट नोटिफिकेशन

 

·         PFI के संस्थापक सदस्य सिमी के नेता रहे हैं।

·         PFI का सम्बन्ध जमात-उल-मुजाहिदीन से भी है।

·          जमात-उल-मुजाहिदीन प्रतिबंधित संगठन है।

·         PFI का सम्बन्ध ISIS के साथ है।

·         PFI आतंकी मामलों में शामिल रहा है।

·         देश की संविधान का अनादर करता है।

·         आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।

·         हिंसक और विध्वंसक कार्यों में संलिप्त।

·         कॉलेज प्रोफेसर का हाथ काटना।

·         अन्य धर्मों से जुड़े लोगों की निर्मम हत्या।

·         सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना।

·         वैश्विक आतंकवादी समूहों के साथ सम्पर्क।

·         धन के स्रोत खाताधारकों से मेल नहीं खाते।

 


27 September 2022

नवरात्रि का आध्यात्मिक, धार्मिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक एवं पारंपरिक महत्व।

                                       नवरात्रि का धार्मिक महत्व

 

नवरात्रि उत्सव देवी अंबा का प्रतिनिधित्व है।

रावण वध के लिए चंडी देवी का पूजन हुआ।

देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था।

रावण वध के बाद विजयादशमी की शुरुआत।

देवी दुर्गा की पूजन से आत्मिक शुद्धी की प्राप्ति।

 

                नवरात्रि का आर्थिक महत्व

 

हाट-बाजार आर्थिक आयाम को जोड़ते हैं।

छोटे-छोटे दुकानदारों का जीविकापार्जन होता है।

पूजा सामाग्री की बिक्री में बढ़ोतरी होती है।

भारतीय बाज़ारों को मजबूती मिलती है।

देशी उत्पादों को बढ़ावा मिलता है।


                    नवरात्रि का आध्यात्मिक  महत्व


नवरात्रि के दौरान देवी की पूजा होती है।

शारदीय नवरात्र वैभव और भोग प्रदान देने वाले है।

गुप्त नवरात्र तंत्र स‌िद्ध‌ि के ल‌िए उपयोगी है।

तीसरे द‌िन भगवान व‌‌िष्णु मत्स्य रूप में पहला अवतार लिए थे।

सूर्य 12 राश‌ियों में भ्रमण पूरा करते हैं।

देवी के कहने पर ब्रह्मा जी सृष्ट‌ि न‌िर्माण किए।


                          नवरात्रि का ऐतिहासिक महत्व

 

मां दुर्गा ने महिषासुर से 9 दिनों तक युद्ध किया।

दसवें दिन महिषासुर का वध किया।

इसलिए 9 दिनों तक मां शक्ति की आराधना की जाती है।

भगवान श्री राम जी ने भी नवरात्रि पूजन किया।

रावण ने भी शक्ति की पूजा की।

 

                    नवरात्रि का सांस्कृतिक महत्व

 

नवरात्रि उत्सव देश को एक धागे में जोड़ते हैं।

मेले से देश की सांस्कृतिक झलक दिखती है।

स्थानीय स्तर पर समाज में एकजुट आती है।

पारिवारिक स्तर पर लोगों में मेलजोल बढ़ता है।

मन में भक्ति भावना उत्पन्न होता है।

समाज में सदाचार का वातावरण बनाता है। 


                   नवरात्रि का वैज्ञानिक महत्व

 

वातावरण कीटाणुओं रहित हो जाता है।

शक्तिशाली तरंगों का वायुमंडल में संचार।

आत्मिक, यौगिक, मानसिक शक्ति की प्राप्ति होती है।

प्रकृति के बहुत सारे अवरोध खत्म हो जाते हैं।

दुर्गापूजन से बौधिक विकास भी होता है।

शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता बढ़ता है।

उपवास से शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन होता है।

सूर्य परिक्रमा से इस वक्त सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड शुद्ध होता है।