29 November 2024

महाराष्ट्र का किंग कौन ? देवेंद्र फडणवीस या एकनाथ शिंदे ? महाराष्ट्र में सीएम पर सस्पेंस बरकरार बीजेपी नेतृत्व तलाश रहा मराठा विकल्प ?

 

महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन होगा? इसको लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है। दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह के साथ महायुति के तीनों नेताओं की बैठक के बाद भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई ऐलान नहीं हो पाया। सरकार गठन को लेकर अबतक कोई प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ी है। एकनाथ शिंदे ने अमित शाह के साथ हुई बैठक को अच्छी और सकारात्मक बताया है। मुंबई में भी महायुति की एक और बैठक होनी थी, लेकिन ये भी बैठक फिलहाल टल गई है। मुख्यमंत्री पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सरकार बनाने को लेकर होने वाली इस देरी पर अब विपक्ष भी सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

 

देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि 'मुख्यमंत्री पद को लेकर वरिष्ठ नेता विचार-विमर्श कर रहे हैं। जल्द ही कोई फैसला लिया जाएगा।' 'मुख्यमंत्री पद पर चर्चा का जवाब जल्द ही मिल जाएगा। महायुति में शामिल तीनों दलों के नेता मिलकर फैसला करेंगे। पहले मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला होगा, फिर मंत्रियों के नाम तय किए जाएंगे। महाराष्ट्र बीजेपी प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि बीजेपी में हर कोई देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है। 'महायुति में शामिल सहयोगी दलों के कार्यकर्ता अपने नेताओं को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। तीनों दलों के नेता बैठकर फैसला करेंगे। बीजेपी कार्यकर्ता केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से कभी नाराज नहीं होता। उनका फैसला अंतिम होता है। पार्टी नेता सही फैसला लेते हैं। महायुति के मुख्यमंत्री जल्द ही शपथ लेंगे।'

 

शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि उनका खेमा महायुति के साथ है। फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो भी वे उद्धव ठाकरे की तरह अलग नहीं होंगे। 'हम उद्धव ठाकरे नहीं हैं जो मुख्यमंत्री पद नहीं मिलने पर चले जाएंगे।'

 

चुनाव से पहले महायुति ने कहा था कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री पद पर फैसला नतीजों के बाद लिया जाएगा। 23 नवंबर को नतीजों की घोषणा के कुछ घंटों बाद शिंदे ने कहा था कि मुख्यमंत्री पद पर फैसला गठबंधन के नेता लेंगे। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। फिलहाल वो कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने हुए हैं। विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो  है जिससे नई सरकार को जल्द शपथ दिलाने की आवश्यकता बढ़ गई। जिसे लेकर अब सवाल भी उठने लगा है।

 

अगर सूत्रों की माने तो शिंदे को मुख्यमंत्री पद नहीं दिया जाता है, तो उन्होंने गृह मंत्रालय का पद मिल सकता है। इसकी मांग खुद शिंदे ने की है। देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने की राह में सबसे बड़ी बाधा एकनाथ शिंदे हैं। मगर देवेंद्र  फडणवीस के लिए राहत वाली बात ये भी है कि शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने अपनी दावेदारी वापस ले ली है। एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री न बनने की सूरत में उनके नये रोल को लेकर भी अलग अलग तरह के कयास लगाये जा रहे हैं। कभी उनके केंद्र सरकार का हिस्सा बनने तो कभी महाराष्ट्र में ही उनकी भूमिका तलाशी जा रही है, और ऐसी चर्चाएं अंदर बाहर दोनों तरफ हो रही हैं- महायुति के एक और मजबूत पार्टनर एनसीपी नेता अजित पवार ने तो पहले बीजेपी के मुख्यमंत्री को अपना समर्थन दे दिया है। अजित पवार की ही तरह अब एकनाथ शिंदे ने भी साफ कर दिया है कि उनको भी बीजेपी हाईकमान का फैसला खुशी- खुशी मंजूर होगा। इस बीच उनके बेटे को डिप्टी सीएम बनाये जाने की भी चर्चा चल रही है।


एकनाथ शिंदे और अजित पवार ने अपनी तरफ से भले ही देवेंद्र फडणवीस के रास्ते के कांटे साफ कर दिये हों, लेकिन जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता अमित शाह की मंजूरी नहीं मिल जाती, तबतक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। हायुति को मिली 230 विधानसभा सीटों में से बीजेपी को 132 सीटें मिल जाने के साथ ही देवेंद्र फडणवीस की मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी पक्की हो गई थी, लेकिन ये तो अब तक पक्का नहीं हो पाया है कि वो मुख्यमंत्री बनने ही जा रहे हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी नेतृत्व देवेंद्र फडणवीस के अलावा कुछ और भी नाम पर विचार कर रहा है। बीजेपी में मराठा नेताओं की बात करें तो एक नाम तो विनोद तावड़े भी हैं, जो देवेंद्र फडणवीस के कट्टर विरोधी हैं, और हाल ही में विवादों में भी थे। मराठा चेहरों में आशीष शेलार और राधाकृष्ण विखे पाटिल जैसे नेता भी हैं। राधाकृष्ण विखे पाटिल को अमित शाह का करीबी भी माना जाता है- अगर मराठा समुदाय से बीजेपी आलाकमान को कोई मराठा नेता पसंद आ गया तो देवेंद्र फडणवीस के लिए मुश्किल भी हो सकती है।

 

नई कैबिनेट में बीजेपी आधे पद अपने पास रख सकती है। वहीं, माना जा रहा है कि नई सरकार में एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को तीन बड़े विभागों सहित महाराष्ट्र के 12 कैबिनेट पद मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो महायुति गठबंधन में तीसरी पार्टी अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी को कैबिनेट में नौ सीटें मिलने की संभावना है। महाराष्ट्र कैबिनेट में अधिकतम 43 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि महाराष्ट्र कैबिनेट में एकनाथ शिंदे को शहरी विकास, लोक निर्माण विभाग और जल संसाधन जैसे प्रमुख विभाग मिल सकते हैं। इस राजनीतिक उठापटक के बीच, महाराष्ट्र की जनता नए मुख्यमंत्री के नाम का बेसब्री से इंतजार कर रही है। देखना होगा कि आखिरकार किसके सिर पर मुख्यमंत्री का ताज सजता है। क्या फडणवीस फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे या शिंदे को यह जिम्मेदारी मिलेगी? या फिर कोई और चेहरा सामने आएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

27 November 2024

अडाणी पर न्यूयॉर्क में धोखाधड़ी का आरोप, विपक्ष के निशाने पर गौतम अडानी, न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में हुई सुनवाई, अरबों की धोखाधड़ी और रिश्वत के आरोप

 

देश के दिग्गज उद्योगपति गौतम अडानी एक बार फिर से चर्चा में हैं। अडानी के उपर आरोप है कि भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स के ठेके हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को लगभग ₹2,250 करोड़ की रिश्वत ऑफर की। उसके बाद अडानी समूह ने इन प्रोजेक्ट्स के लिए अमेरिकी निवेशकों से फंड जुटाया। आरोप यह भी है कि अडानी समूह ने निवेशकों को रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की जानकारी नहीं दी। इन प्रोजेक्ट्स से समूह को 20 वर्षों में लगभग $2 बिलियन का मुनाफा होने का अनुमान था। इसे लेकर विपक्ष हमलावर है। संसद सत्र शुरू होने के ठीक पहले विपक्ष को एक नया मुद्दा मिल गया है। हर बार संसद सत्र से पहले अडानी को लेकर राहुल गांधी कोई न कोई आरोप लगाते हैं। इस बार राहुल को बना बनाया मुद्दा मिल गया है। अडानी पर अमेरिका में धोखाधड़ी-रिश्वत देने का आरोप सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर तीखा वार किया है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी का कहना है कि अडानी की तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए लेकिन उन्हें ना गिरफ्तार किया जाएगा, ना उनकी जांच होगी। एक सीएम 10-15 करोड़ के आरोप में जेल चला जाता है लेकिन अडानी जी 2 हजार करोड़ रुपये का स्कैम करते हैं और कुछ नहीं होता है। सरकार अडानी के साथ खड़ी है। राहुल गांधी इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।

 

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कहा कि, किसी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने से पहले पढ़ना हमेशा अच्छा होता है। जब तक दोषी ना माना जाए, तब तक वे निर्दोष हैं। संबित पात्रा ने भी राहुल गांधी गांधी के बयान पर सवाल खड़ा किया है।  संबित पात्रा ने कहा कि भारत के बाजार पर आघात करना चाहते हैं राहुल गांधी। गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी ये सहन नहीं कर पा रहा है कि भारत लगातार दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है।

 

सवाल उठ रहा है कि अडानी समूह का प्रोजेक्ट इंडिया में है, लेकिन अमेरिका में भारतीय अफसरों को लेकर कैसे जांच शुरू हो गई है? दरअसल, पूरा मामला अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और एक दूसरे फर्म से जुड़ा हुआ है। 24 अक्टूबर 2024 को ये मामला US कोर्ट में दर्ज किया गया। बुधवार को इसकी न्यूयॉर्क कोर्ट में सुनवाई हुई. अमेरिका के अटॉर्नी ऑफिस का कहना है कि अडानी ग्रुप ने भारत में सोलर एनर्जी से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करीब 2200 करोड़ रुपए की रिश्वत पेशकश की है। अडानी पर आरोप है कि रिश्वत के इन पैसों को जुटाने के लिए उन्होंने अमेरिकी, विदेशी निवेशकों और बैंकों से झूठ बोला। अमेरिका में मामला इसलिए दर्ज हुआ, क्योंकि प्रोजेक्ट में अमेरिका के इन्वेस्टर्स का पैसा लगा था। अमेरिकी कानून के तहत उस पैसे को रिश्वत के रूप में देना अपराध है। इसे लेकर आम आदमी ने भी सवाल खड़ा किया है।

 

इस संबंध में अमेरिकी अभियोजकों ने अडानी ग्रुप के अध्यक्ष गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी, विनीत जैन और कंपनी के अन्य 6 अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। अभियोजकों का कहना है कि राज्यों में बिजली वितरण कंपनियों के साथ सौर ऊर्जा कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए अडानी ग्रुप ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर 2200 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की डील की थी। ये रिश्वत कथित तौर पर 2020 और 2024 के बीच दी गई है। यह फैक्ट अमेरिकी बैंकों और निवेशकों से छिपाया गया और सौर ऊर्जा परियोजना के लिए अरबों डॉलर का फंड जुटा लिया गया। अडानी ग्रुप को ऊर्जा कॉन्ट्रैक्ट हासिल करके 2 बिलियन डॉलर का मुनाफा कमाने की उम्मीद थी। इस मुद्दे को पूरा विपक्ष भूनाने की भरपूर प्रयास कर रहा है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के बाद लेफ्ट के नेता भी इसमे कूद पड़े हैं। 


सीपीआई (एम) नेता बृंदा करात, गौतम अडानी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग कर रही हैं। अडानी की गिरफ्तारी और भ्रष्टाचार के आरोपों पर मुकदमा चलाने के साथ-साथ उनके खिलाफ सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रही हैं। हिंडनबर्ग खुलासे के बावजूद अदानी का बचाव करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी न्याय विभाग को हस्तक्षेप करना पड़ा, क्योंकि भारत सरकार को अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए। यह हमारे लिए शर्म की बात है। पीएम मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार उन्हें और उनकी कंपनियों को बचा रही है और उसे भारत और भारत के संसाधनों को लूटने की अनुमति, लाइसेंस और संरक्षण दे रहा है।

 

रिश्वतखोरी के आरोप भारतीय अधिकारियों से जुड़े हैं, लेकिन, अमेरिकी कानून कहता है कि यदि कोई भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला अमेरिकी निवेशकों या बाजार के हितों से संबंधित है तो ऐसे मामलों को कोर्ट में आगे बढ़ाया जा सकता है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि जिस अवधि में कथित तौर पर रिश्वत दिए जाने का आरोप लगाया जा रहा है, ठीक उसी समय 2023 में अमेरिका स्थित शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी ग्रुप को लेकर एक विवादित रिपोर्ट भी जारी की थी। इस रिपोर्ट में अडानी समूह पर स्टॉक हेरफेर और अकाउंटिंग धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। इससे अडानी ग्रुप के बाजार मूल्य में 150 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था।

 

रिश्वत आंध्र प्रदेश के अफसरों को मिला ?

 

भारतीय ऊर्जा कंपनी और अमेरिकी इश्यूअर ने सरकारी स्वामित्व वाली सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को 12 गीगावाट सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया था।

 

SECI को सौर ऊर्जा खरीदने के लिए भारत में खरीदार नहीं मिल पाए। ऐसे में खरीदारों के बिना सौदा आगे नहीं बढ़ सकता था और दोनों कंपनियों के सामने बड़े नुकसान का जोखिम था।

 

इस बीच, अडानी ग्रुप और एज्योर पावर ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना बनाई। ऐसा आरोप अडानी समूह पर लग रहा है।

 

तय किया गया कि सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वो राज्य बिजली वितरण कंपनियों को SECI के साथ बिजली आपूर्ति समझौते में शामिल होने के लिए तैयार करेंगे।

 

भारतीय अफसरों को करीब 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने का वादा किया, जिसका एक बड़ा हिस्सा आंध्र प्रदेश के अधिकारियों को दिया गया।

 

इसके बाद कुछ राज्य बिजली कंपनियां सहमत हुईं और दोनों कंपनियों से सौर ऊर्जा खरीदने के लिए SECI के साथ समझौता किया।

आरोप है कि भारतीय ऊर्जा कंपनी और अमेरिकी इश्यूअर ने मिलकर रिश्वत का भुगतान किया।

अपनी संलिप्तता छिपाने के लिए कोड नामों का इस्तेमाल किया गया। पूरा कम्युनिकेशन एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग के जरिए किया गया। इन दोनों कंपनियों ने कथित तौर पर अमेरिकी बैंकों और निवेशकों से 175 मिलियन डॉलर से अधिक जुटाए थे।

 

हालांकि, यूएस इश्यूअर में नेतृत्व परिवर्तन हुए, जिसके कारण काफी बदलाव हुए। रंजीत गुप्ता ने 2019-2022 तक एज्योर पावर के सीईओ के रूप में काम किया। 2022-2023 तक रूपेश अग्रवाल ने कार्यभार संभाला. परियोजना में शामिल कुछ अधिकारियों को इस्तीफा देने के लिए कहा गया।

 

रिश्वत देने का प्लान बनाने के लिए हुईं बैठकें ?

 

आरोप के अनुसार बैठकें आयोजित की गईं कि रिश्वत का भुगतान कैसे किया जाए, ताकि किसी को पता ना चल सके।

 

विकल्पों में परियोजना के कुछ हिस्सों को ट्रांसफर करने पर भी चर्चा हुई। गौतम अडानी ने भी इस संबंध में कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों से व्यक्तिगत मुलाकात की।

 

अमेरिकी अथॉरिटीज इस मामले की जांच कर रही हैं कि क्या अडानी ग्रुप ने अपने फायदे के लिए रिश्वत देने की कोशिश की और एनर्जी कॉन्ट्रेक्ट हासिल करने के लिए क्या उन्होंने भारत सरकार के अधिकारियों को गलत पेमेंट्स किए हैं?

इस मामले में अमेरिका की कोर्ट में सुनवाई के बाद गौतम अडानी और उनके भतीजे के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुए हैं।

 

अडानी ग्रुप ने सफाई में क्या कहा ?

 

अडानी ग्रुप ने सफाई में आरोप को निराधार बताया हैं।

जब तक दोष साबित नहीं हो जाता, तब तक प्रतिवादी निर्दोष माना जाता है।

सभी संभव कानूनी उपाय किए जाएंगे

अडानी ग्रुप ने हमेशा सभी सेक्टर्स में पारदर्शिता और रेग्युलेटरी नियमों का अनुपालन किया है

हम अपने शेयरहोल्डर्स, पार्टनर और समूह की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को आश्वस्त करते हैं कि हम एक कानून का पालन करने वाले संगठन हैं, जो सभी कानूनों का पूरी तरह से अनुपालन करता है।

 

अडानी ग्रुप ने अपने बयान में कहा, अमेरिकी न्याय विभाग और SEC ने हमारे बोर्ड के सदस्यों गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले के अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने एक अभियोग जारी किया है। US स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने हमारे बोर्ड के सदस्य विनीत जैन को भी इसमें शामिल किया है। इन घटनाक्रमों के मद्देनजर हमारी सहायक कंपनियों ने फिलहाल प्रस्तावित USD नामित बॉन्ड पेशकशों के साथ आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया है। अमेरिका से लगे आरोपों के बाद अडानी ग्रुप की कंपनियों ने 600 मिलियन डॉलर के बॉन्ड को रद्द कर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2024, 28 नवंबर से 15 दिसंबर तक चलेगा महोत्सव, उड़ीसा और तंजानिया होंगे पार्टनर ब्रह्म सरोवर पर होगा धर्म सम्मेलन

 यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥

 

हे पार्थ मैं अवतार लेता हूं। मैं प्रकट होता हूं। जब जब धर्म की हानि होती है, तब तब मैं आता हूं। जब जब अधर्म बढ़ता है तब तब मैं साकार रूप से लोगों के सम्मुख प्रकट होता हूं, सज्जन लोगों की रक्षा के लिए मैं आता हूंदुष्टों के विनाश करने के लिए मैं आता हूं, धर्म की स्थापना के लिए मैं आता हूं और युग युग में जन्म लेता हूं।

 

भगवान श्री कृष्ण के इसी उदेश्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रत्येक वर्ष अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन हरियाणा के कुरूक्षेत्र में आयोजित किया जाता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में प्रेसवार्ता कर अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। ओडिशा के कैबिनेट मंत्री सूर्यवंशी सूरज और तंजानिया की हाई कमिश्नर अनीशा और स्वामी ज्ञानानंद जी की मौजूदगी में कार्यक्रम की घोषणा की गई।

 

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2024

 

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 28 नवंबर से 15 दिसंबर तक आयोजन होगा

यह पूरा आयोजन 18 दिन तक हरियाणा के कुरुक्षेत्र में चलेगा

2016 से यह महोत्सव लगातार आयोजित हो रहा है

महोत्सव में लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं

इस मेले को देश विदेश में लोकप्रियता मिली है

2023 में इस महोत्सव में 45 लाख लोगों ने भाग लिया

धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र 48 कोस में फैला हुआ है

यहां 182 महाभारत कालीन तीर्थ हैं

5162 वर्ष पहले भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र की धरती पर गीता उपदेश दिया था

   

मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि 2019 में मॉरिशस, लंदन, कनाडा, आस्ट्रेलिया, श्रीलंका और इंग्लैंड में भी अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव मनाया गया था। गीता के 5151 वर्ष पूरे होने पर पीएम मोदी ने चिंता जाहिर की थी। पीएम मोदी ने कहा था, कि गीता का संदेश पूरी दुनिया में जाना चाहिए। गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज पूरी दुनिया में गीता का संदेश फैला रहे हैं।

 

उड़ीसा और तंजानिया होंगे पार्टनर

 

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में तंजानिया भागीदारी के रूप में शामिल होगा

तंजानिया में भी गीता और श्रीमद्भागवत का आयोजन होता रहता है

इस बार गीता महोत्सव में ओडिशा सहयोगी राज्य के रूप में शामिल होगा

इस महोत्सव पर ब्रह्म सरोवर के पास भव्य गंगा महाआरती होगी

28 नवंबर को कुरुक्षेत्र के सभी तीर्थ पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे

5 दिसंबर को ब्रह्म सरोवर पर पूजन से इस महोत्सव को विधिवत शुरुआत होगी

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में तीन दिन की संगोष्ठी होगी

ब्रह्म सरोवर पर धर्म सम्मेलन होगा

ज्योतिसर तीर्थ पर 18 हजार विद्यार्थी वैश्विक पाठ करेंगे

 

इस आयोजन में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियां शामिल होंगी, जो दुनियाभर से आए श्रद्धालुओं और गीता प्रेमियों के लिए एक आकर्षण का केंद्र होगा। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने गीता के संदेश को घर-घर पहुंचाने की अपील की। सैनी ने कहा कि, गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने का मार्गदर्शक है। यह आयोजन युवाओं को गीता के विचारों से प्रेरित करने का भी एक सार्थक प्रयास है।

 

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का मुख्य केन्द्र कुरुक्षेत्र है। कुरुक्षेत्र वह भूमि है जहां भगवान श्री कृष्ण ने गीता का उपदेशा अर्जुन को दिया था। यह स्थान इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रसिद्ध ऋषि मनु ने यहां मनुस्मृति लिखी थी। ऋग्वेद और सामवेद की रचना भी यहीं पर हुई थी। भगवान कृष्ण के अलावा, गौतम बुद्ध और प्रख्यात सिख गुरुओं जैसे दिव्य व्यक्तित्वों ने इस भूमि का दौरा किया था। श्रीमद्भगवद्गीता अपनी स्थापना के समय से ही हिंदुओं के लिए दार्शनिक मार्गदर्शक और आध्यात्मिक शिक्षक का केन्द्र बिन्दू रही है। गीता में, भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कई सबक सिखाए हैं, जिन्हें किसी के भी जीवन जीने का आदर्श साधन माना जाता है।

 

गीता महोत्सव से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

 

हरियाणा सरकार ने वर्ष 2016 से गीता महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने की शुरुआत की है

2023 में यह महोत्सव 7 से 24 दिसंबर तक आयोजित किया गया था

2022 में यह महोत्सव 19 नवंबर से 6 दिसंबर तक आयोजित किया गया

2019 में यह उत्सव पहली बार मॉरीशस और लंदन में मनाया गया था

2022 में नेपाल इस महोत्सव का पार्टनर देश था

2024 में श्रीलंका में इस महोत्सव का आयोजन किया जाएगा

गीता जयंती मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है

 

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में भारत ही नहीं, विदेशों से भी पर्यटक यहां पर आते हैं, और महोत्सव का लुत्फ उठाते हैं। हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक यहां पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहुंचते हैं। उनके साथ-साथ प्रदेश और देश के बड़े वीआईपी भी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शिरकत करने के लिए पहुंचते हैं। गीता महोत्सव कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि के महत्व पर जोर देता है। गीता महोत्सव से हरियाणा की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। साथ ही गीता के प्रचार- प्रचार से भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को पूरी दुनिया में आगे बढ़ाता है।


महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की सुनामी, महायुति को 4 गुना ज्यादा सीटें, महाराष्ट्र में MVA की बड़ी हार, झारखंड में हेमंत सोरेन की वापसी, यूपी उपचुनाव में सिमटती

 

महाराष्ट्र, झारखंड सहित उप चुनावों के परिणाम सामने आ चुके हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन 228 से अधिक सीटों लीड करते हुए महाराष्ट्र की राजनीति में इतिहास रच दिया है। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात ये भी है कि बीजेपी ने 149 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से 125 से अधिक सीटों पर जीत लगभग पक्की कर ली है। लोकसभा चुनाव के परिणामों को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा था कि विधानसभा चुनावों में बीजेपी और उसके नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को भारी नुक़सान हो सकता है। मगर इस जात ने ये साबित कर दिया है कि देश में बाजेपी और मोदी लहर अभी भी बरकरार है।

 

महायुति सरकार की रणनीति और लाडली बहिन योजना, के साथ ही हिंदुत्व और जातियों को एकजुट करने में बीजेपी और महायुति गठबंधन कामयाबी रही है। पांच महीनों में महायुति गठबंधन ने ऐसा बहुत सारे प्रयाए किए जिससे राज्य में लोगों को इसका सीधा लाभ मिला। सबसे पहले लाडली बहिन योजना लाई गई जिसमें ढाई करोड़ महिलाओं के अकाउंट में चार महीने का पैसा आया। इसके साथ ही बंटेंगे तो कटेंगे नारा ने हिंदू वोट बैंक को कएकजुट करने में काभी कारगर सिद्ध  हुआ।

 

बड़ी जीत के पीछे महायुति की रणनीति

 

महाराष्ट्र चुनाव में योगी आदित्यनाथ का बंटेंगे तो कटेंगे का नारा हिट रहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हैं तो सेफ है का नारा भी काम कर गया

लोकसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी की जीत के बाद बीजेपी सतर्क हुई

बीजेपी और संघ ने भी अपनी रणनीति बदली

महायुति में शिवसेना और अजित पवार गुट आने से मराठा वोट एकजुट हुआ

 

एनसीपी के वोटरों को महायुति की ओर मोड़ने में NCP अहम भूमिका निभाई

 

शिंदे ने भी शिव सेना के वोटरों को महायुति से जोड़ने में सफलता पाई

मराठा फैक्टर और बेरोजगारी का मुद्दा महाविकास अघाड़ी के पक्ष में नहीं रहा

कांग्रेस का संविधान बचाओं का दांव नहीं चला

मराठा आरक्षण का दांव भी कांग्रेस का काम नहीं आया

लाडली बहना योजना ने भी बड़ी बढ़त दिलाई

 

प्रचंड जीत में इस फैक्टर का भी बड़ा योगदान दिख रहा है

कांग्रेस का बेरोजगारी का मुद्दा भी बेकार साबित हुआ

महाराष्ट्र में सोयाबीन की एमएसपी की गारंटी का मुद्दा भी नहीं चला

शरद पवार की एनसीपी महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर असफल रही

 

मुस्लिम वोटरों ने भी इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कोई खास रूची नहीं दिखी। 70-80 फ़ीसदी मुसलमानों ने लोकसभा में मतदान किया था। इस बार मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर मुसलमानों का मतदान प्रतिशत वापस 35-40 प्रतिशत हो रहा। संविधान का मसला बीजेपी ने अच्छे तरीक़े से ठंडा किया जिसके बाद दलित वोट वापस बीजेपी के साथ जुड़ गए। इसके साथ ही आरक्षण के लिए सब-कैटेगरी बनाई गई जिसके बाद बौद्ध वोटर बीजेपी के साथ आए। पिछली बार बीजेपी अपने मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को ये समझाने में असफल रही थी कि वो उनके गठबंधन के साथी अजित पवार की पार्टी को वोट दे और समर्थन करे लेकिन हार के बाद बीजेपी इस मुद्दे पर दमखम से लग गई वहीं स्थानीय मुद्दों को लेकर भी काम किया। ये सभी फैक्टर मिलकर महायुती को बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

 

महाविकास अघाड़ी को महाराष्ट्र चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। पूरे चुनाव में महाविकास अघाड़ी के दल साथ काम करते नज़र नहीं आए। कांग्रेस ये मानकर चल रही थी कि को हमारा आधार ज़्यादा है तो हमें ही अधिक सीटें मिलनी चाहिए। इससे कांग्रेस-शिवसेना में तनाव बना हुआ था। वहीं राहुल गांधी अदानी, धारावी और महंगाई जैसे ग़ैर मुद्दे पर केंद्रित रहे। साथ ही बाग़ियों की तरफ से महाविकास अघाड़ी को अधिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा बड़ा कारण ये है कि जो लोकसभा में शरद पवार के प्रति सहानुभूति थी, इस चुनाव में कम हुई है।

 

झारखंड विधानसभा चुनाव की अगर बात करें तो झारखंड मुक्ति मोर्चा की अगुवाई वाला गठबंधन एक बार फिर से सत्ता में वापसी की है। अब तक हुई वोटों की गिनती में साफ हो चुका है कि इंडिया गठबंधन शानदार बहुमत के साथ सत्ता में आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हेमंत सोरेन की सरकार की जीत में 'मैन ऑफ द मैच' कौन रहा?

 

मंईयां सम्मान योजना ने किया कमाल


हेमंत सोरेन पिछले साल ईडी की कार्रवाई में जेल चले गए थे

जेल से बाहर आने के बाद हेमंत सोरेन ने चंपाई सोरेन को हटाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली

लोकसभा चुनाव में वोटरों का रुझान देखकर सोरेन ने तत्काल मंईयां सम्मान योजना लॉन्च की

योजना के जरिए ताबड़तोड़ तीन किस्त जारी कर दी गई

मंईयां सम्मान योजना में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर होता है

योजना के जरिए झारखंड की 51 लाख महिलाओं के बैंक खाते में डायरेक्ट 1000 रुपये ट्रांसफर किए जाते हैं

योजना के तहत तीन किस्त का पैसा एक साथ 3000 रुपये ट्रांसफर किए

 

हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री रहते हुए गिरफ्तारी के बाद कोर्ट से जमानत मिलने पर झारखंड की जनता के बीच उन्हें काफी सहानुभूति मिली है। जेएमएम के पूरे कैंपेन को देखें तो सीएम हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन तमाम रैलियों में यही बताते दिखे कि केंद्र सरकार ने उन्हें किस तरह से झूठे केस में फंसाया और जेल भेजने का काम किया।

 

पूरी जेएमएम यह बताने में जुटी रही कि बीजेपी आदिवासी को आगे बढ़ने नहीं देना चाहती है। वहीं बीजेपी पूरे चुनाव प्रचार में खुद को आदिवासी हितैषी बताने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तक का नाम लेती रही, लेकिन शायद झारखंड की जनता उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया है।

 

महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा के साथ ही 15 राज्यों की 46 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों का हरिणाम अब सामने आ चुका है। अगर उप चुनावों की बात करें तो 9 सीटों पर हुए उपचुनाव में एनडीए ने 7 सीटों पर अपनी जीत लगभग तय कर ली है। वहीं, समाजवादी पार्टी महज दो सीटों पर सिमटती दिख रही है। यूपी चुनाव 2022 में इन 9 में से 4 सीटों पर सपा को जीत मिली थी। वहीं, भाजपा तीन, रालोद एक और निषाद पार्टी एक सीट पर जीती थी। सात सीटों पर आगे बढ़ते हुए एनडीए उम्मीवारों ने भाजपा नेतृत्व को खुशी मनाने का मौका दे दिया है। विधानसभा की 7 सीटों पर विजयी बढ़त के बाद मुख्‍यमंत्री योगी आ आदिदनाथ ने बड़ा संदेश दिया है। साथ ही सपा के सपनों पर पानी फेर दिया है।

 

लोकसभा चुनाव में कई सीटों पर निराशा हाथ लगने के बाद इस उपचुनाव की कमान खुद मुख्‍यमंत्री योगी आद‍त्‍यनाथ ने संभाली थी। योगी ने न सिर्फ सीट पर जोर-शोर से प्रचार किया, बल्‍क‍ि अपने नए नारे 'बटेंगे तो कटेंगे' के सहारे हिन्दू वोटों को एकजुट करने में सफल रहे।