12 June 2021

ऑल्ट न्यूज़ के जुबैर की झूठ का पर्दाफाश

गत डेढ़ दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में एक नई क्रांतिमान स्थापित करने वाला सुदर्शन न्यूज अब कुछ जिहादियों को रास नहीं आरहा है. इसमें वामपंथी, सेकुलर और जिहादी तत्वों के साथ-साथ वे लोग भी शामिल हैं, जो फर्जी गंगा-जमुनी तहजीब को भारत की थाती मानते हैं. यही कारण है कि अब सुदर्शन न्यूज़ चैनल और इसके संपादक सुरेश चौहानके के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की लगभग सभी धाराओं के अंतर्गत मुकदमे दायर रकहो चुके हैं पर सच तो सच होता है और इसलिए ये सारे मुकदमे किसी न्यायालय में नहीं टिकते हैं और सुदर्शन चैनल हर बार आरोपों से बरी होता रहा है.

इसके बावजूद कुछ लोग या संगठन किसी न किसी बहाने इस चैनल पर मुकदमा करने से बाज नहीं आ रहे हैं, वह भी सुनी-सुनाई बातों को आधार बना कर. साथ हीं कुछ फर्जी फैक्ट चेकर भी अपने जिहादी एजेंडे के तहत सुदर्शन के कंटेंट को झूट और अपने प्रोपेगेंडा के तहत बार-बार मिसइंटरप्रेट करने की अपनी नाकाम कोशिशें करते रहते हैं.

इस बार यह काम किया है ऑल्ट न्यूज़ के मोहम्मद जुबैर ने. जुबैर ने अपने फैक्ट चेक में चैनल पर आरोप लगाया गया है कि डिजिटल मिसाइल से निशाना साधते हुए जो मस्जिद दिखाया गया है वह पवित्र स्थल मदीना स्थित मस्जिद ए नबवीऔर मदीना शहर का है. दरअसल, जिस मस्जिद की ओर मिसाइल गिरते हुए दिखाया गया है वह मस्जिद ए नबवीहै ही नहीं और उस मस्जिद के पीछे जिस शहर का दृश्य दिखाया गया है, वह भी  मदीना का नहीं, बल्कि गाजा का है. 

वही गाजा, जहां हमास के आतंकवादी रहते हैं और उन्हें खत्म करने के लिए ही पिछले दिनों इजरायल ने वहां जबर्दस्त बमबारी की थी. ऐसे में अब जुबैर जैसे फर्जी फैक्ट चेकर की गिरफ्तारी की मांग भी उठने लगी...ताकि समाज में झूठ और नफरत का माहौल खड़ा होने से रोका जा सके.

झूठ के आधार पर हुई FIR का पर्दाफाश

जिहादी तत्वों द्वारा FIR को अब एक टूल्स के रूप में इस्तेमाल किया जारहा है. आए दिन किसी न किसी के ऊपर फर्जी FIR दर्ज करा कर उसे चुप कराने या फिर उसे अपने मुहीम से पीछे हटने के लिए दबाव बनाया जाता है. सुदर्शन के ऊपर भी FIR जिहादी की साजिश चल रही हैं.

आए दिन कोई न कोई जिहादी संगठन चैनल पर FIR दर्ज करा कर अपने FIR जिहाद के मनसूबे को अंजाम देना चाहते हैं. जिहादियों के निशाने पर सिर्फ सुदर्शन हीं नहीं है बल्कि तमाम ऐसे राष्ट्रवादी संस्था और उससे जुड़े लोग हैं जो आए दिन किसी न किसी जिहाद या धर्मांतरण के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते हैं.

मुंबई के रजा अकादमी ने सुदर्शन के ऊपर आधारहीन और बेबुनियाद आरोप लगाया है. मुंबई पुलिस ने भी बिना तथ्यों के जाँच किये आननफानन में FIR दर्ज कर लिया.

जिहादियों द्वारा पत्रकारों और संपादकों को लगातार निशाना बनाया जारहा है. पिछले साल ज़ी न्यूज़ के प्रधान संपादक सुधीर चौधरी के ऊपर भी FIR दर्ज करा  दिया गया था. आरोप ये था की जम्मू में ज़मीन जिहाद और केरल में लव जिहाद के ख़िलाफ़ उन्होंने प्रोग्राम किया था...

वहीँ सूफ़ी संत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के बारे में कथित टिप्पणी के मामले में न्यूज़ एंकर अमीश देवगन के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर कराया गया था. न्यूज़ एंकर कि बस ज़ुबान फिसल गई थी इसे भी लेकर एक बड़ा FIR जिहाद छेड़ा गया था. ऐसे तमाम राष्ट्रवादी और हिंदूवादी पत्रकारों और संगठनों को आए दिन FIR जिहाद का सामना करना पड़ता है. ऐसे में अब सवाल ये उठाने लगा है की क्यों न देश में FIR को रोकने के लिए कानून बनाया जाय ? 

ग़ाज़ा के हमदर्द रज़ा अकादमी को खुली चुनौती

सुदर्शन न्यूज़ लगातार जिहादियों के खिलाफ आवाज़ उठा रहा...सुदर्शन के राष्ट्रवादी मुहीम से जिहादियों में खौफ माहौल है. उन्हें ये नहीं सूझ रहा है की वो क्या करें और क्या न करें. सुदर्शन के बुलंद आवाज़ और बेबाक राष्ट्रवादी आवाज़ को दबाने के लिए अपनी एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं. मगर सुदर्शन न तो कभी झुका है है ना हीं झुकेगा.

सुदर्शन न्यूज़ इजराइल के समर्थन में लगातार अपना पसंदीता प्रोग्राम बिंदास बोल रात 8 बजे कर रहा है.. हमेशा टी तरह. पिछले दिनों सुदर्शन न्यूज़ ने अपने बिंदास बोल प्रोग्राम में एक, 1-2 सेकंड का एक ग्राफ़िक वाइप दिखाया था...वाइप में आर्टिस्टिक अभिव्यक्ति के तहत सिर्फ सांकेतिक तौर पर दिखाया गया था. इस वाइप में एक सांकेतिक मस्जिद पर मिसाइल दागते हुए दिखाया गया है. 

जबकि जिहादी तत्व और कुछ कट्टर संगठन इसपर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं...बिना किसी आधार कट्टर जिहादी तत्वों का आरोप है की उपरोक्त मस्जिद को अल नवाबी मदीना मस्जिद बताया जारहा है. जबकि तथा कथित मस्जिद सिर्फ एक सांकेतिक गुंबद है.

ऐसे में सवाल खड़ा होता हो की क्या किसी खास मकसद से सुदर्शन को निशाना बनाया जा रहा है. क्या इसके पीछे सुदर्शन को बदनाम करने और सामजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास तो नहीं है..? ऐसे तमाम ऐसे सवाल है जिसे आज देश की जनता पूछ रही है.

राष्ट्रवाद व धर्म की रक्षा के हमारे प्रयासों से तमाम चरमपंथी तत्व हमारे विरुद्ध लगातार साजिशें रचते हैं. इस मस्जिद को गलत तरीके से पेश कर सुदर्शन के खिलाफ ट्विटर पर ट्रेंड चलाया गया. ऐसे में सवाल यहां भी खड़ा होता है की क्या जिहादी तत्व सुदर्शन से भयभीत हैं..? आज सच से सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा पाने वाले अब झूठ फैलाकर अफवाहों का माहौल खड़ा कर रहे हैं.  

धर्म के आधार पर फिलिस्तीन का साथ क्यों ?

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष जारी है. इस जंग में अब तक करीब 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं. इसी बीच इजरायल के समर्थन और विरोध करने वालों की होड़ लगी हुई है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्वीट कर समर्थन देने वालों देशों का शुक्रिया जताया है... लेकिन इसमें भारत का जिक्र नहीं किया गया है. बेंजामिन नेतन्याहू के इस ट्वीट पर भारतीयों अब सवाल पूछ रहे हैं की इसमें भारतीय ध्वज कहां है ?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन सभी देशों का धन्यवाद दिया है जिसने इजरायल के साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए और आतंकवादी हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया हैभारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से इजरायल और फिलिस्तीन के बीच चल रही हिंसा पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. 

हालांकि संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने पिछले दिनों कहा था कि दोनों पक्षों को जमीन पर यथास्थिति बदलने से बचना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा था कि तत्काल हिंसा खत्म करने और तनाव घटाने की ज़रूरत है. लगातर चल रहे संघर्ष की वजह से दोनों देशों को काफी नुकसान हुआ है. लेकिन फिलिस्तीन सबसे ज्यादा प्रभावित है. इजरायल ने गाजा में हमास के प्रमुख के घर पर बमबारी की है इसके जवाब में हमास ने भी तेल अवीव में रॉकेट दागे हैं.

इजरायल की ओर से की गई एयर स्ट्राइक में चार फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं. इजरायल ने  फिलिस्तीन के साथ चल रहे संघर्ष के लिए हमास को दोषी ठहराया है. देशवासियों को संबोधित करते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि  ये लड़ाई आतंक के खिलाफ है. हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि इससे नागरिकों की जान खतरे में न पड़े. अभी हम ऑपरेशन के बीच हैं, यह खत्म नहीं हुआ है और जब तक जरूरी होगा यह ऑपरेशन चलता रहेगा.


कुछ महत्वपूर्ण सवाल 


1.   फिलिस्तीन के समर्थन करने वालों का समर्थन करने की तर्क का आधार क्या है ? 


2.  केवल फिलिस्तीन मुस्लिम देश है इस मुद्दे के आधार पर समर्थन क्यों किया जाय ?


3.  इस्लाम के नाम पर फिलिस्तीन का सर्थन करने वाले हिंदुस्थान पाकिस्तान लड़ाई में किसका समर्थन करेंगे ?

 

4.  राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए देश के सभी नागरिकों का दृष्टिकोण  एक समान होना चाहिए, यह क्यों भुला दिया जाता है ?


5.  नागरिकों का मत विभाजन राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के लिए ख़तरा होता हैं, यह क्यों भुलाया जा रहा है ?


6.  क्या यह स्वतंत्रता पूर्व तुर्की के ख़लीफ़ा के लिए किए गए ख़िलाफ़त आंदोलन के समान नहीं हैं ?


7.  ख़िलाफ़त आंदोलन के कारण पाकिस्तान की भावना मज़बूत हुईं थी, क्या फिलिस्तीन के कारण एक और विभाजन का भाव नहीं बनाएगी ?


8.  राष्ट्रीय नीति से इतर कोई अन्य नीति राष्ट्रद्रोह नहीं तो और क्या हैं ?


9.   इस्लाम में सबसे पहले धर्म की मान्यता हैं, तो ऐसे लोग विभाजन के समय पाकिस्तान क्यों नहीं गए ?


10.    बात-बात पर हिंदू-मुस्लिम की अलग राय रखने का हठ देश हित में नहीं है, फिर भी ये हठ क्यों ?

“घर बिकाऊ है” का बोर्ड लगाने वाले हिन्दुओं का साथ दो

हिन्दुओं पर हमले और पलायन की ये कोई पहली घटना नहीं...आए दिन देशभर के हिन्दुओं पर ऐसे हमलें होरहे हैं... बात चाहे उत्तर प्रदेश की हो या फिर पंजाब या फिर बंगाल की हरतरफ हिन्दू जिहादी प्रतारणना का शिकार होरहा है... हाल ही में मेरठ नया कैराना बन रहा है.. यहाँ से हिन्दू पलायन करने को मज़बूर हैं. स्थिति भयावह है क्योंकि लोग अपने घरों को छोड़-छाड़ कर जा रहे हैं और अपनी संपत्ति को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं. कैराना में हिन्दुओं के पलायन की ख़बर आए दिन सामने आती है.

 हरियाणा के मेवात में जो हाल हिन्दुओं का है वह किसी से छुपा नहीं है...आज मेवात मॉडल पूरे में अपनाया जारहा है...लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के भीतर आने वाले मेरठ के प्रह्लाद नगर में कुल 125 परिवारों द्वारा पलायन की ख़बरें सामने आई हैं.. यह मुस्लिम बहुल इलाक़ा है, जहाँ 425 बहुसंख्यक परिवार रहते थे मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुँच चुकी है. लोगों का साफ़ कहना है कि एक विशेष समुदाय के लोगों द्वारा ऐसी परिस्थितियाँ पैदा की गई कि वे पलायन को मजबूर हुए.

हिन्दू बाहुल्य इलाके में सांप्रदायिक तनाव वाली घटना के बाद पुलिस तो आती है लेकिन 2-3 दिन बाद हालात जस के तस होजाता है. समुदाय विशेष के शरारती तत्व स्टंटबाजी, लूटपाट, छेड़छाड़ जैसी हरकतें कर के लोगों को परेशान करते हैं... ये जिहादी आतंक देशभर में जारी है.

देश में लगभग हर रोज़ मुस्लिम बाहुल्य इलाके में लोग मकान बेचने को विवश हैं और आए दिन लोगों के पलायन की ख़बर आ रही है... कहीं पर छात्राएँ नहीं जाती है तो कहीं पर लव जिहाद की शिकार होजाती हैं....कुछ दिन पहले गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने राज्यसभा में कहा, था की देवबंद, सहारनपुर, मेरठ बदायूं सहित दर्ज़न भर जिले में हिंदू परिवारों का पलायन जारी है. 

2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान बजरंग दल ने आरोप लगाया था कि कानून व्यवस्था बिगड़ने के कारण देवबंद से 40 हिंदू परिवार पलायन कर गए हैं. 2016 में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब गोरखपुर से सांसद थे तब उन्होंने मांग की थी कि इसकी केंद्रीय जांच होनी चाहिए. 

विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने हिंदुओं के पलायन को एक बड़ा मुद्दा बनाया था. उस समय बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी इलाहाबाद में हुई पार्टी के राष्ट्रीय कार्यपरिषद की बैठक में इस मुद्दे को उठाया था. तत्कालीन कैराना सांसद हुकुम सिंह ने हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाया था. उन्होंने उस समय दो साल की अवधि में कैराना से पलायन करने वाले करीब 340 परिवारों की सूची को जारी किया था. मगर आज भी ये स्थिति कम नहीं हुई है..हिन्दू पलायन को मजबूर हैं.

गाजियाबाद के अर्थला से हिन्दुओं का पलायन रोको

देश में लगातार जिहादियों का आतंक जारी है हर दिन कोई न कोई हिन्दू परिवार जिहादी आतंक का शिकार होरहा है...ताज़ा मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद से...गाजियाबाद का हिंडन विहार आज जिहादियों के जद में है...आज पूरा क्षेत्र हिंदू विहीन हो चुका है...जिहादियों के अत्याचार की तस्वीरें आपको हिला कर रख देगी... हिंडन विहार से सटे मात्र किलोमीटर दूर गाजियाबाद के संजय कॉलोनी अर्थला वार्ड नंबर 44 से जो दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है उसे सुन कर आपका दिल दहल जायेगा....एक असहाय हिन्दू परिवार पर 200 की भीड़ अचानक से पूरे प्री-प्लान के साथ जिहादियों पर टूट पड़ा. 

परिवार का कहना है कि सुंदर यादव के घर के सामने जो पीड़ित परिवार है जिहादी गुट बनाकर खड़े हुए थे... और गाली गलौज करते थे. परिवार ने जब इस बात का विरोध किया तो 200 जिहादी हिंदू परिवार पर सुंदर यादव के घर में जबरन घुस कर महिलाओं के साथ बदसलूकी की उनके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और जब कामयाब नहीं हो पाए तो महिलाओं के प्राइवेट पार्ट्स तक पर चोट पहुंचाई और महिलाओं को घर से उठाकर लेजारहे थे. 

विरोध करने पर घर में मौजूद सभी पुरुष पुरुषों और बच्चों पर तलवार और चाकूओं से हमला कर दिया... महिलाओं के ऊपर लोहे की रड और घातक हथियारों से कदर पीटा की उनके शारीर पर चोट के निशान साफ तौर पर देख रहा है...ग़ाज़ियाबाद के अर्थला में लगातार हिंदू आबादी जिहादी आतंक से घाट रही है लोग अपने घरों को छोड़ के लगातार पलायन कर रहे हैं...पूरे  क्षेत्र का हिन्दू परिवार खौफ के साये में जी रहा है... आज अगर एक्का दुक्का कहीं पर हिन्दू बचे भी हैं तो उसे लगातार जिहादियों के द्वारा सताया जारहा है...आज क्षेत्र का हिन्दू अपने घरों से बाहर निकलने से में डर रहा है.

 हिंदू परिवारों का कहना है जिस दिन यह वारदात घटित हुई उस दिन शाम को अर्थला वार्ड नंबर 44 से पार्षद दिलशाद मलिक के संरक्षण में पहले जिहादियों ने पूरे मोहल्ले की लाइट कटवाई उसके बाद जितने हिंदू परिवार उस जगह पर रहते हैं सबके घरों की कुंडी लगा दी जैसे कोई अन्य हिंदू परिवार, पीड़ित परिवार की मदद के लिए सामने नहीं आसके. स्थानीय हिन्दुओं का कहना है की अर्थला में रहने पर उनको डर लगता है. 

आज इस तरीके से महिलाओं के ऊपर हमला किया गया है उससे महिलायें और लड़कियां सहमी हुई है...छोटे बच्चों के चेहरे पर भय का माहौल है... हिंदू परिवारों ने अपने घरों पर पोस्टर लगा दिया है... ‘ये मकान बिकाऊ है’ विशेष धर्म के लोगों के आतंक के कारण....कई हिंदू परिवारों के घर के बाहर लगे पोस्टर खुद पुलिस ने फाड़ दिया है अपनी छबी बचाने के कारण. पीड़ित परिवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है. ऐसे में अब देखना ये होगा की इन जिहादियों पर कब तक कार्रवाई होती है.

रघु रामकृष्ण राजू को राजद्रोह में गिरफ़्तारी क्यों ?

आंध्र प्रदेश सरकार लगातार हिन्दुओं की आवाज़ दबा रही है...आंध्र की सीआईडी ने शुक्रवार रात नरसापुर लोकसभा क्षेत्र से वाईएसआरसीपी के बागी सांसद रघु रामकृष्ण राजू को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया है. हैदराबाद में उनके घर से गिरफ्तार किए गए राजू को विजयवाड़ा ले जाया गया. सीआईडी ने बतायाराजू पर आरोप है कि वह नफरत फैलाने वाले भाषणों से समुदायों में द्वेष फैलाने और सरकार के खिलाफ असंतोष को बढ़ावा देने के कृत्य में शामिल हैं. 

जबकी सच्चाई ये है की सांसद रघु रामकृष्ण राजू आंध्र प्रदेश में ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ लगातर आवाज़ उठा रहे थे...ऐसे में ईसाई मिस्नरियों को ये बात रास नहीं आरही थी और वो लगातार सरकार पर दबाव बना रहे थे...

सांसद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-124 ए (राजद्रोह), 153ए (समुदायों में द्वेष उत्पन्न करना, 505 (बयान से तनाव पैदा करना), 120बी (साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है. सांसद के खिलाफ सीआईडी में एडीजी पीवी सुनील कुमार (आईपीएस) के आदेश पर मामला दर्ज किया गया है. मगर सवाल यहां खड़ा होता है की क्या इस देश में हिन्दू हित की बात करना राजद्रोह है...क्या ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ आवाज़ उठाना नफरत फैलाना है..?

सांसद राजू ने करीब एक साल पहले वाईएसआर कांग्रेस से बगावत कर दी थी और कई महीनों से मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की सरकार के खिलाफ टिप्पणी कर रहे हैं. गत कुछ दिनों से वह कोविड संकट के कुप्रबंधन को लेकर राज्य सरकार की आलोचना कर रहे हैं. हैदराबाद स्थित आवास में सांसद जब अपना जन्मदिन मना रहे थे तभी सीआईडी ने उन्हें पकड़ा. गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए राजू के बेटे भरत ने कहा कि उनके पिता को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वह राज्य सरकार की गलतियों पर सवाल उठा रहे हैं.

इजरायल का साथ दो कल की लड़ाई का साथी है इजराइल

इजरायल और फलस्तीन के बीच अब युद्ध और तेज हो गया है. गाजा में इजरायल और फलस्तीन के बीच जारी संघर्ष लगातार जारी है. इसी बीच वेस्ट बैंक में हिंसा भड़क गई है. यहां इजरायली बलों के साथ एक हिंसक झड़प में 11 फलस्तीनियों की मौत हो गई है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चेतावनी जारी कर दी है कि 'यह अभी खत्म नहीं हुआ है. मतलब साफ है जबतक इजरायल अपने दुश्मनों का सफाया नहीं कर देता है तबतक वो चैन से बैठने वाल नहीं है. 

इजरायली सेना का कहना है की फलस्तीनी प्रदर्शनकारियों ने वेस्ट बैंक में इजरायली बलों पर पत्थर और मॉलटोव कॉकटेल्स फेंके हैं, इससे क्षेत्र में जारी तनाव और बढ़ गया हैं. इजरायली सेना ने बताया है की फलस्तीन सोमवार से अब तक इजरायल पर दो हजार से ज्यादा रॉकेट दाग चुका है.

इजरायल ने गाजा में जमीन के नीचे सुरंग में बनाए गए हमास के ठिकानों को नष्ट करने के लिए भीषण बमबारी की है. गाजा में हमास की भूमिगत सुरंगों पर बड़ी कार्रवाई की गई है. हमास ने भी इजरायल के यरुशलम और तेल अवीव सहित कई शहरों पर जबर्दस्त राकेट हमले किए हैं. दोनों देशों की इस लड़ाई से ऐसा लगता है की ये पूरी लड़ाई विश्व युद्ध की ओर अग्रसर होरही है.

इसमें कोई शक़ नहीं कि इसराइल एक ताक़तवर मुल्क है. उसके पास एयर फोर्स है, एयर डिफेन्स सिस्टम है, सशस्त्र ड्रोन्स हैं और ख़ुफ़िया जानकारी जुटाने का एक सिस्टम है जिससे वो जब चाहे गज़ा पट्टी में अपने टार्गेट को निशाना बना सकता है. इसराइल भले ही इस बात पर ज़ोर दे रहा हो कि वो केवल उन्हीं ठिकानों को निशाना बना रहा है जिनका इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा है लेकिन जिन इलाक़ों में हवाई हमले हुए हैं. 

कल की लड़ाई का साथी है इजराइलफ़लस्तीनियों की वहां इतनी सघन आबादी है कि हमास और इस्लामिक जिहाद जैसे संगठनों के ठिकानों से उन्हें अलग कर पाना बहुत मुश्किल है. ऐसे में आज जरुरत इस बात की है की इजरायल को खुलकर भारत साथ दे. साथ हीं दुनिया के अन्य देशों को भी फलिस्तीन के आतंकी अड्डे की खात्मा के लिए आगे आने की जरुरत है.  

राजस्थान के बारां के दंगे पर बड़ा खुलासा

आज हम एक ऐसा बड़ा खुलासा करने जारहे हैं जिसे न तो आपने अबतक देखा होगा और ना हीं आप इसकी कल्पना कर सकते हैं. आज हम खुलासा करने वाले हैं राजस्थान छबड़ा बारा  दंगे की, जी हैं हम उसी बारा की बात कर रहे हैं जो कुछ हीं दिन पहले जिहादी आतंक के आगोश में था..जहां पर हिन्दू अपने वजूद और अस्तित्व का संघर्ष कर रहा था...और आखिरकार बारा दंगाइयों का भेंट चढ़ गया.. 

मगर हम आज आपको बताएंगे की कैसे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के बैनर तले इस पूरे दंगे को अंजाम दिया गया. कैसे PFI मीटिंग के जरिये दंगा भड़काने का काम कर रहा था...सवाल यहां राजस्थान सरकार पर भी उठा रहा है की जिन लोगों के उपर रिपोर्ट दर्ज हुआ है उनका गुनाह क्या है और जिसने दंगा किया वो अबतक खुला क्यों घूम रहे हैं. सरकारी का ये दोहरा मापदंड क्या राज्य में सामाजिक द्वेष पैदा नहीं करेगा..?

आज नहीं तो कल आखिरकार राजस्थान सरकार को जवाब तो देना ही होगा.  सीसीटीवी फुटेज से लेकर प्रशासन के पास होते हुए भी अबतक कार्रवाई क्यों नहीं होरही है ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है. कांग्रेस नेता निजामुद्दीन पर भी दंगा भड़काने व भीड़ का संचालन करने का आरोप लग चुका है मगर आज खुद निजामुद्दीन सलाखों के अन्दर होने के बजाय अपने जिहादी गतिविधियों के संचालन में लगा हुआ है.

कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष निजामुद्दीन खान के घर पर सैकड़ों की संख्या में भीड़ एकत्रित हुई वहां से दंगाई भीड़ को निजामुद्दीन खान का संरक्षण मिला और उसके इशारे पर इस सारी घटना को अंजाम दिया गया. घटना के समय इर्द गिर्द घूमते मोबाइल पर बात करते हैं सीसीटीवी फुटेज में हर जगह निजामुद्दीन देखा जा सकता है. 

कांग्रेस के टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ने वाले एक नेता अबरार अहमद सिद्दीकी के पुत्र भी है इस जेहादी आतंकी घटना का नामजद आरोपी है. मगर वो भी गहलोत में मौज कर रहा है. वहीँ मुस्लिम सदर अतीक अहमद का लड़का सानू भी देखा जा सकता है. जिहादी भीड़ उत्पात आगजनी दंगा वाली भीड़ में हर जगह सीसीटीवी फुटेज में मौजूद है. 

मगर खाना पूर्ती करने के लिए प्रशासन ने आनन-फानन में कुछ निर्दोष बेगुनाह विश्व हिंदू परिषद और आर एस एस के लोगों को उठा लिया और उनके हीं आरोप मढ़ दिया. मगर जिहादी दंगाई आज में पकड़ से बाहर हैं. तो ऐसे में सवाल खड़ा होता है की क्या राजस्थान सरकार दंगाइयों को सजा देने के बजाय हिन्दुओं के साथ भेदभाव कर रही है ?

जानिए इजरायल और फिलिस्तीन के बिच क्या है विवाद

सात साल बाद एक बार फिर इजरायल और फिलिस्तीन एक दूसरे के आमने सामने हैं. लगातार हो रहे हवाई हमलों और गोलाबारी के बीच एक बार फिर दोनों के बीच युद्द जैसे हालात बन गए हैं. साल 2014 में दोनों के बीच युद्ध हुआ था जो कि 50 दिन तक चला था. मगर क्या आप जानतें है की आखिर इजरायल और फिलिस्तीन के बिच आखिर विवाद है क्या...? तो आइये हम आपको विस्तार से बताते है इस विवाद के बारे में.

इतिहास पर अगर नजर डालें तो इजरायल और फिलिस्तीन के बीच का विवाद ईसा मसीह के जन्म से भी पुराना है. बाइबल में मसीह ने इजरायल के इलाके का चुनाव यहूदियों के लिए किया था. इसलिए पूरी दुनिया के यहूदी इसे अपना घर मानते हैं. हालांकि यहूदियों को कई बार इसी जगह अत्याचारों का सामना करना पड़ा है और यहां से बेदखल भी होना पड़ा है. वहीं फिलिस्तीनियों का मानना है कि वे हमेशा से यहां के मूल निवासी रहे हैं इसलिए इस जगह पर उनका अधिकार है और वो किसी भी स्थिति में उसे नहीं खोना चाहते हैं.

72 ईसा पूर्व में रोमन साम्राज्य ने इस इलाके पर हमला करके उसपर कब्जा कर लिया था. इसके बाद सारे यहूदी दुनियाभर में इधर-उधर जाकर बस गए. इस घटना को एक्जोडस कहा जाता है. इस घटना के बाद यहूदी बड़ी संख्या में यूरोप और अमेरिका में जाकर बस गए.

प्रथम विश्व युद्ध के बाद साल 1920 और 1945 के बीच यूरोप में बढ़ते उत्पीड़न और हिटलर की नाजियों के हाथों नरसंहार से बचने के लिए लाखों की संख्या में यहूदी फिलिस्तीन पहुंचने लगे. इलाके में यहूदियों की बढ़ती आबादी को देखकर फिलिस्तीनियों को अपने भविष्य की चिंता हुई और इसके बाद फिलिस्तीनियों और यहूदियों के बीच टकराव शुरू हो गया. 1933 में जर्मनी का सत्ता पर काबिज होने के बाद हिटलर ने यहूदियों का पूरी दुनिया से खात्मा करने की योजना पर अमल किया. 

1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध के आगाज के बाद हिटलर ने बड़े पैमाने पर यहूदियों को मौत के घाट उतरा. हिटलर ने एक योजना के तहत विश्व युद्ध के 6 साल के दौरान 60 लाख से ज्यादा यहूदियों को मौत के घाट उतारा था. जिसमें 15 लाख बच्चे शामिल थे. हिटलर ने पूरी दुनिया की एक तिहाई यहूदी आबादी को खत्म कर दिया था.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र ने 29 नवंबर, 1947 को द्विराष्ट सिद्धांत के तहत अपना फैसला सुनाया और इस इलाके को यहूदी और अरब देशों में बांट दिया. यरुशलम को अंतरराष्ट्रीय शहर घोषित किया गया. यहूदियों ने इस फैसले को तुरंत मान्यता दे दी और अरब देशों ने इसे स्वीकार नहीं किया. इसके बाद 1948 में अंग्रेज इस इलाके को छोड़कर चले गए और 14 मई, 1948 को यहूदियों का देश इजरायल वजूद में आया.

इजरायल के खुद के राष्ट्र घोषित करते हुए सीरिया, लीबिया और इराक ने इसपर हमला बोल दिया. यमन भी युद्ध में शामिल हुआ. एक साल तक लड़ाई के चलने के बाद युद्ध विराम की घोषणा हुई. जॉर्डन और इजरायल के बीच सीमा का निर्धारण हुआ. जिसे ग्रीन लाइन नाम दिया गया. इस युद्ध के दौरान तकरीबन 70 हजार फिलिस्तीनी विस्थापित हुए. युद्ध के बाद 11 मई 1949 को इजरायल को संयुक्त राष्ट्र ने अपनी मान्यता दे दी.

1967 में एक बार फिर अरब देशों ने मिलकर इजरायल पर हमला किया. लेकिन इसबार इजरायल ने महज छह दिन में ही उन्हें हरा दिया और उनके कब्जे वाले वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया. तब से लेकर अबतक इजरायल का इन इलाकों पर कब्जा है. यहां तक कि यरुशलम को वो अपनी राजधानी बताता है. 

हालांकि गाजा के कुछ हिस्से को उसने फिलिस्तीनियों को वापस लोटा दिया है. वर्तमान में ज्यादातर फिलिस्तीनी गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक में रहते हैं. उनके और इजरायली सैन्य बलों के बीच संघर्ष होता रहता है...अब यही संघर्ष एकबार फिर से शुरू होगया है.

आओ इजराइल का साथ दें

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच खूनी संघर्ष जारी है. दोनों तरफ से लगातार आम नागरिकों की जानें जारही है. हमास के गाजा में मौत का आंकड़ा बढ़ते जारहा है. इज़राइल अपने अपने रौद्र रूप में आगया है. इस आपसी संघर्ष में 65 लोगों की अबतक मौत होचुकी है. इसराइल में मरने वालों की संख्या सिर्फ है. मतलब साफ है की अब इसराइल जिहादियों को अपने तरीके से सबक सिखाने में जुट गया है. 

हमास के गाजा पट्टी पर इजरायल ने भारी बमबारी की है. लोग ताबाह होकर इधर से उधर भाग हुए नज़र आरहे हैं. इजरायल के हवाई हमले में हमास गाजा के सिटी कमांडर बसीम इस्सा की मौत हो गई है. बसीम की मौत से गाजा सहमा हुआ है.

इजरायल के रक्षा मंत्री बेनी गैंट्स ने कहा है कि हमारी सेना के हमास के गाजा पट्टी और फलस्तीन में हमले बंद नहीं होंगे...इजरायल ने अब पूरी तरीके से कमर कस ली है. इजरायल से साफ कर दिया है की हम अब तब तक रुकने को तैयार नहीं हैं, जब तक दुश्मन को पूरी तरह शांत नहीं कर देते. इसके बाद ही अमन बहाली पर कोई बात होगी.

 ऐसे में अब गाजा के पास एक हीं बिकल्प है या तो इजरायल के सामने हथियार डाल दे या फिर अपने जिहादी चरमपंथी के कारण मरने के लिए तैयार रहे. चरमपंथियों ने चेतावनी दी है कि वे इजरायलियों की जिंदगी नर्क कर देंगे, मगर खुद हीं जिहादी चरमपंथी एक-एक कर इजरायली सैनिकों के आगे ढेर होरहे हैं.

गाजा की मौत भरी मातम पर विदेशी ताकतें भी अब मुखर होने लगीं हैं. संयुक्त राष्ट्र के मध्य पूर्व शांति राजदूत टॉर वेनेसलैंड ने कहा है कि दोनों पक्ष इसे व्यापक युद्ध की ओर ले जा रहे हैं... संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने कहा है कि वे हिंसा को लेकर काफी चिंतित हैं... वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा है कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है, जर्मनी ने भी कहा है कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है. 

जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के प्रवक्ता स्टीफन सीबेरट ने कहा कि गाजा से इजरायल पर हो रहे हमले की हम कड़ी निंदा करते हैं...विश्व समुदाय ने ये जता दिया है की जिहादी चरमपंथियों के किसी भी करतूतों को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा चाहे वह किसी भी देश के ऊपर अपनी बर्बरता क्यों न करें..ऐसे में आज हम भी यही कह रहे हैं आओ इजरायल का साथ दें.


कुछ महत्वपूर्ण सवाल 


01.     जिहाद के मुद्दे पर अरब देशों में इतनी एकजुटता क्यों है, क्या फिलिस्तीन का समर्थन चरमपंथ को बढ़ावा नहीं देगा ?

02.     पूरी दुनिया इजराइल का साथ देरही है मगर पाकिस्तान फिलिस्तीन के समर्थन में है, क्या इससे पाकिस्तान का चेहरा बेनकाब नहीं होरहा है ?

03.     फिलिस्तीन एक समझौते के तहत अपने हिस्से का जमीन ले चुका है, फिर भी ये बार-बार इजराइल पर हमला क्यों करता है ?

04.     भारत के मार्क्सवादी कम्युनिस्ट और कट्टरपंथी इजराइल को गलत ठहराने में क्यों जुटे हुए हैं ? क्या इसके पीछे चीन की कोई साजिश तो नहीं ?

05.     इजराइल में कई बार लाखों यहूदियों का नरसंहार हो चुका है, आज भी पूरी दुनिया में उनपर हमलें होरहे हैं मगर फिर भी कोई बड़े शक्तिशाली देश, इसपर क्यों नहीं बोल रहा है ?

06.     अपने आप को दुनिया में शांति के मसीहा बताने वाला अमेरिका आज इजराइल के मुद्दे पर चुप क्यों है ?

07.     एक ओर पूरी दुनिया जहां कोरोना से कराह रही है वहीँ दूसरी ओर फिलिस्तीन जिहादी युद्ध में कूद रहा है, क्या इसको कोई बड़ी अंतर्राष्ट्रीय ताकतें समर्थन कर रहीं हैं ?

08.     मानवाधिकार के मुद्दे पर शांति पाठ का सीख देने वाले देश आज इजराइल के उपर होरही बर्बरता पर सामने क्यों नहीं आरहे हैं ?

09.     घातक हाथियों और मिसाइलों से पूरी दुनिया में मानव अस्तित्व के उपर खतरे के बादल मडरा रहे हैं, कोई भी पर्यावरणविद फिलिस्तीन पर सवाल क्यों नहीं खड़ा कर रहा है ?

10.     क्या फिलिस्तीन की उन्मादी हरकतें दुनिया को विश्वयुद्ध की आग में नहीं धकेल रही है ?

पश्चिम बंगाल में कब थमेगा राजनीतिक हिंसा ?

पश्चिम बंगाल में हिंसा रुकने का नाम नहीं लेरहा है. चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद से लगातार हिंसा जारी है. बीते 7 दिनों से राज्य के विभिन्न इलाको में लोगों की हत्या लूट और मौत से चारो ओर कोहराम मचा हुआ है. मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जारही है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के कारणों की पड़ताल करने और राज्य में जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए चार सदस्यीय दल का गठन किया है. अधिकारियों ने 6 मई को बताया कि मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव के नेतृत्व में दल पश्चिम बंगाल पहुंच चुका है और उसकी जाँच अभी जारी है.

मंत्रालय ने राज्य सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि राज्य सरकार ऐसा करने में विफल होती है तो मामले को गंभीरता से लिया जाएगा. राज्य के विभिन्न हिस्सों में चुनाव बाद हुई हिंसा अबतक कई लोगों की मौत हो चुकी है.

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने भी ट्वीट कर कहा है की हिंसा को रोकने में क्या क्या कदम उठाए गए हैं इसके बारे में रिपोर्ट रिपोर्ट देने में गैर प्रतिक्रियात्मक और उपेक्षापूर्ण व्यवहार अपनाया गया है वो बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है. इसलिए चीफ सेक्रेटरी राज्य की कानून व्यवस्था पर विस्तारपूर्वक अपडेट दें. जिसमें DGP और कोलकाता CP द्वारा ACS को भेजी रिपोर्ट भी शामिल हैं. राज्यपाल खुद सपथग्रहण के दिन हीं ममता को राजधर्म का याद दिलाये थे.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी कहा है कि कई महिलाओं को बलात्कार की धमकियां मिल रही हैं तथा वे अपनी बच्चियों को राज्य के बाहर भेजना चाहती हैं क्योंकि पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रही है. आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने अपने बयान में कहा है कि पीड़िता डर की वजह से अपनी शिकायतें नहीं कह पा रही हैं. 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत के बाद राज्य में हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी हिंसा को लेकर कड़ी आलोचना की है. संघ ने कहा की बंगाल हिंसा भारतीय संविधान में अंकित जन और लोकतंत्र की मूल भावना के भी विपरीत हैं.

ऐसे में ममता सरकार की चारों ओर से आलोचना होरही है. साथ ही केंद्र की भेजी गई रिपोर्ट के बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय क्या कुछ कदम उठाता है ये भी देखना होगा. इसलिए सुदर्शन न्यूज़ भी ये मांग करता है की तत्काल ममता सरकार को पद से हटाया जाय. ताकि बंगाल हिन्दू विहीन होने से बच सके. 


                                                         कुछ महत्वपूर्ण सवाल 


01.  ममता पर सीधी कार्रवाई करने के बजाय उसे संवैधानिक तरीके से समय दिया, परंतु उसने अपना कर्तव्य निभाना तो दूर, नरसंहार की रिपोर्ट तक नहीं दी क्या ममता सविधान से ऊपर है ?

02.  क्या ममता से संवैधानिक मर्यादाओं की अपेक्षा करना हीं व्यर्थ था ? इससे इतर भी वह कुछ करेगी यह अपेक्षा ग़लत नहीं थी ?

03.  अब सरकार ममता को कितना अधिक समय देना चाहती है, सरकार इतना समय क्यों लेरही है ? इस वक्त संवैधानिक मर्यादाओं का पालन ज़्यादा आवश्यक है या हिन्दुओं का नरसंहार रोकना ?

04.  राज्यपाल महोदय को मुख्यमंत्री से ट्विटर पर सार्वजनिक संवाद करने की नौबत आना संवैधानिक मशीनरी का विफल होना नहीं है तो क्या है ?

05.  राज्यपाल महोदय हीं लाचार और असहाहाय दिखें, तो अत्याचारियों का हौसला बुलंद नहीं होगा क्या ?

06.  क्या सरकार विदेशी शक्तियों की प्रतिक्रिया से चिंतित है ? क्या वह कभी भी हिन्दुओं के पक्ष में आने वाली है या नहीं ?

07.  देश का तथाकथित मीडिया 7 दिनों से चुप क्यों है ? उसे यह नरसंहार क्यों नहीं दिखता ?

08.  न्याय में देरी भी अन्याय होता है. इस सिद्धांत से पीड़ितों पर अन्याय नहीं होरहा रहा है तो फिर क्या होरहा है ?

09.  ऐसी स्थिति में अगर पीड़ित समाज या उसके संरक्षक अपने आत्म रक्षा में कुछ करे तो क्या इसे उसका आप अधिकार मानेंगे और अगर हां, तो फिर क्या कानून उसे संरक्षण प्रदान करेगा ?

10.  संविधान कानून व्यवस्था के आधार पर केंद्र को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का अधिकार देता है, राज्य में वर्तमान स्थिति उसी ओर इशारा कर रहा है, फिर भी अबतक अबतक राष्ट्रपति शासन क्यों नहीं लगाई गई ?

कोरोना के इलाज में वैकल्पिक और पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल

देश में चारों ओर कोरोना को लेकर हाहाकार मचा हुआ है कोर्ट सरकार विपक्ष हरकोई अपने अपने तरीके से समाधान और प्रबंधन करने में लगा हुआ है. एक ओर सरकार जीतोड़ मेहनत कर रही है तो वही दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट भी अब कोरोना को लेकर काफी सख्त होगया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए एक याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

 वहीँ देश के जाने माने प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन के साथ तमाम एक्‍सपर्ट्स कोरोना की तीसरी लहर के बारे में चेतावनी दे रहे है. इसके बाद लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं जैसे, यह पहली और दूसरी लहर से कैसे अलग होगी ? देश में यह कब दस्‍तक देगी? अगर आक्सीजन की कमी हुई तो इसकी पूर्ती कहाँ से होगी? ऐसे में आज जरुरत इस बात को लेकर है कि क्या ऑक्सीजन की समस्या पर वैकल्पिक एवं पारंपरिक दवाईयों को बढ़ावा सरकानी को देना चाहिए ?

कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को ज्यादा खतरा है. महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमित बच्चों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. कोरोना का खतरा फिलहाल खत्‍म होता नहीं दिख रहा है. वायरस के नए-नए वैरिएंट्स की वजह से अब इसकी तीसरी लहर की बात होने लगी है. देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब विदेशों से आक्सीजन की सप्लाई भारत में हुई है. 

पहली बार लोग आक्सीजन के लिए भागते दौड़ते देखे गए. आज जीवन दायनी ऑक्सीजन लोगों के लिय ज़िन्दगी की सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है. इसलिए आज हम इसके वैकल्पिक और पारंपरिक तरीकों को बढ़ावा देने की बात कर रहे है ताकि हलके फुल्के दिक्कतों के लिए लोगों को अस्पतालों की तरफ भागना नहीं पड़े.

बंगाल में बीजेपी की हार के मायने

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक समीकरण बदला है उसके क्या कुछ मायने  हैं आईये आपको बताते हैं. विधानसभा चुनाव में सारी ताकत झोंकने के बावजूद बीजेपी ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस TMC को सत्ता से हटाने में पीछे रह गई. रुझानों के हिसाब से टीएमसी ने 200 के आंकड़े को पार करते हुए 205 से 215 सीटों पर आगे चल रही हैजबकि BJP की संख्या सरक कर 75 से 85 के सीटों पर गई है. इस हार जीत के कई अहम मायने हैं.

 अब बंगाल में जीत हार की समीक्षा शुरू होगई है. राजनीतिक गुणा-भाग करने में सभी दल जुट गए हैं. ऐसे में आखिर ममता बनर्जी को किस वजह से जीत मिली है और बीजेपी क्यों हारी है इसके आकलन के साथ हीं ये भी ध्यान देंगा होगा की अब बंगाल में हिन्दू हितों का क्या होगा ? क्या आने समय में बंगाल में अन्दर राजनीतिक हिंसा में बढ़ोतरी नहीं होगी ? ऐसे तमाम सवाल हैं जो अभी से लोगों के मन उठने शुरू होगए हैं. 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार और वोटिंग पर गौर करें तो चार शब्दों मतुआ, मुस्लिम, महिला और ममता की खूब चर्चा होती रही. इन चारों शब्दों की शुरुआत M से होती है, इसलिए 4M की चर्चा हो रही है.

कांग्रेस को महज 2.78% और सभी वाम दलों CPI+CPI(M)+CPI(ML)(L) को मिलाकर 4.82% वोट मिलते हुए दिख रहे हैं वोटिंग प्रतिशत बता रहे हैं कि पश्चिम बंगाल की जनता ने केवल टीमएमसी और बीजेपी पर भरोसा किया है. तीन दशक तक पश्चिम बंगाल में सत्ता चलाने वाली वाम दलों को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है. वहीं कांग्रेस का भी यही हश्र है. इससे साफ संकेत है कि राज्य की राज्य जनता टुकड़ों में वोट करने के बजाय वह राज्य में केवल दो विचारधारा को जिंदा रखना चाहती है.

                                 कुछ महत्वपूर्ण सवाल 

01.   पश्चिम बंगाल में सभी तरह की राजनीतिक समीकरण बीजेपी के पक्ष में होने के बावजूद हार क्यों हुई ?

02.   क्या TMC की जीत के पीछे बंगलादेशी घुसपैठियों का बड़ा हाथ है ?

03.   चुनाव के दौरान दुर्गा मंत्र का जाप करने वाली ममता बनर्जी क्या जीत के बाद बंगाल में हिन्दू मंदिरों को जिहादियों से बचा पाएंगी ?

04.   जीत के बाद ममता का हिन्दू हितों की रक्षा करने के लिए कोई चुनावी घोषणा का ऐलान पहले से क्यों नहीं की ?

05.   ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल से बंगलादेशी घुसपैठियों को भागने के मुद्दे पर चुप्पी क्यों साध लेती हैं ?

06.   बंगाल हिन्दू बहुसंख्यक राज्य होने के बावजूद बीजेपी जैसी राष्ट्रीय पार्टी चुनाव हार गई ? क्या इसके लिए हिन्दू समाज जिम्मेदार नहीं है ?

07.   लेफ्ट और कांग्रेस का बंगाल में सूपड़ा साफ होगया मगर फिर भी ये दोनों दल जश्न मना रहे हैं इसके क्या मायने हैं ?

08.   क्या TMC को जिताने में लेफ्ट पार्टियों ने गोपनीय तरीके से कोई योजना बनाई थी ?

09.   जीत के जश्न में TMC के कार्यकर्ता हिन्दुओं के घरों और बीजेपी के पार्टी दफ्तर को आग के हवाले कर रहे हैं, फिर भी ममता बनर्जी चुप क्यों हैं ?

10.   बंगाल में कोरोना गाईड लाइन का मज़ाक उड़ाने वाले  TMC कार्यकर्ताओं पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होरही है ?  

बंगाल में ममता बनर्जी की जीत के मायने

बंगाल में ममता बनर्जी जीत चुकी हैं. मगर क्या आप जानते हैं इस जीत के पीछे बांग्लादेशी घुसपैठियों का एक बड़ा समूह है जो चुनावी जीत हार को तय कर रहा है. इस बार के चुनाव में भी यही हुआ है. पश्चिम बंगाल में बंगलादेशी मुसलमानों की हिस्सेदारी 2001 में 25.2 प्रतिशत की तुलना में 2011 में बढ़कर 26.94 प्रतिशत हो गई है. मुसलमान बहुल जनसंख्या वाले बड़े राज्यों में बंगाल की वृद्धिदर प्रतिशत 21.81 प्रतिशत हैं. मुसलमानों की इसमें वृद्धि से कहीं न कहीं चुनाव पर इसका प्रभाव बढ़ रहा है.

आज बेशक बंगाल में ममता की जीत यहां के हिन्दुओं के लिए एक बड़ा झटका हो मगर अब ये जीत बंगलादेशी घुसपैठियों के लिए ओक्सिजन का काम करेगा.  पश्चिम बंगाल में धार्मिक जनसांख्यिकी परिवर्तन भी आज बांग्लादेशियों की वजह से बदली है. पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुसलमानों की घुसपैठ अच्छी खासी है. ऐसे में राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल बांग्लादेशियों को संरक्षण देते हैं. TMC जैसी पार्टियाँ बांग्लादेशी मुसलमानों के वोटबैंक पर निर्भर हैं. यही कारण है की ममता अपने जीत के लिए अस्वस्त थी.

जनगणना के आंकड़ों ने ये साबित किया है की पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की जनसंख्या की अप्रत्याशित वृद्धि के पीछे बंगलादेशी घुसपैठिये हैं. बांग्लादेश से मुसलमानों का अवैध आगमन के मुद्दे TMC चुप्पी साध लेती है आज यही कारण है की बंगाल की राजीनीति समीकरण का ठीक से आकलन लगाना मुस्किल होरहा है. 

आज पश्चिम बंगाल बढ़ती जनसंख्या की वजह से एक संवेदनशील राज्य बन गया है यही कारण है की चुनावों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होने लगी है. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा और दक्षिण 24 परगना के सीमावर्ती जिलों में बांग्लादेशी मुसलमानों की घुसपैठ के कारण व्यापक रूप से जनसांख्यिकीय परिवर्तन हुआ है. 

इन स्थानों पर स्थिति खतरनाक है. कई स्थानों पर मुसलमानों के चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता के कारण आज बंगाल में बीजेपी जैसी कद्दावर पार्टी हार का सामना कर रही है. मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भारी संख्या में मतदान बंगाल्देशियों के प्रभाव को दर्शाता है. 

जिहादियों के जद में देवभूमि उत्तराखंड

देवभूमि उत्तराखंड आज लव जिहादियों के जद में है. हर ओर आज लवजिहादियों ने अपनी जड़े जमानी शुरू कर दी है. आए दिन कोई न कोई मासूम हिन्दू लड़की लव जिहादियों के हाथों हत्या के शिकार होरही है. लव जिहाद की भड़कती ज्वाला ने पूरे पहाड़ को ज्वालामुखी की जला रही है. जिहाद की जद में जकड़ता देवभूमि इसकदर तार-तार हो चुका की हल्की-सी हवा लगते ही भभक उठता है. रुड़की, सतपुलीहरिद्वारकोटद्वारदेहरादूनकाशीपुर और हल्द्वानी इन तमाम जगहों पर लव जिहादी की भयावह घटनाएं हो चुकी हैं. इस सभी अपराधों में आरोपित खास समुदाय के लोग आज भी खुलेआम घूम रहे हैं.

आज जिहादी समुदाय लव जिहाद के आड़ में दुकानों/मकानों और बस्तियों में तोड़-फोड़ और आगजनी पूरे प्रदेश में दहशत फैलाने का काम रहा है. इस उन्मादी भीड़ की जिहादी चरित्र से हिन्दू सामाज अपनी बहन-बेटियों की इज्जत आबरू बचाने के लिए अपने वजूद से संघर्ष कर रहा है. 

पहाड़ की शांत वादियों में जिहाद की जड़े जमाने की कवायद ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को गहरा अघात पहुंचा है. आज देवभूमि में धर्म और सामाज दोनों पर काला बादल मडरा रहा है. उत्तराखंड के पहाड़ों में बढ़ती मुस्लिम आबादी ने पूरे राज्य की सामाजिक ताना-बाना को बदल रहा है. शासन-प्रशासन की लापरवाही और बेरुखी ने हिन्दू सामाज के लड़कियों की जिंदगी बदहवास बना दिया है.    

पहाड़ के गांव पलायन के कारण खाली हो रहे हैं क्योंकी आज हर गली मोहल्ले में बाबर और गजनी का आतंक मचा हुआ है. यही कारण है की इज्जत आबरू की लोकलाज से डरा हुआ हिन्दू पलायन कर रहा है, तो वहीँ दूसरी ओर पहाड़ जिहादियों के बसेरे का सबसे सबसे अच्छी जगह बनती जारही है. उत्तराखंड भी कश्मीर न बन जाए आज इस आवाज को अनसुना किया जारहा है. ताज़ा घटना रोली कुमारी और तनुजा की है ये दोनों बहने अब जोशी से खान बन चुकी है. परिवार घर बार छोड़ कर पलायन कर चुका है. मगर अब मोहम्मद इबरार ख़ान एवं मोहम्मद अब्दुस्सलाम अली से निकाह करने वाली दोनों बहनों पर जबरन धर्मान्तरण करने के लिये दबाव डाला जारहा है. 

सूत्रों के अनुसार इन दोनों हिन्दू लड़कियों को जमात-ए-इस्लामी की पोस्टर वूमेन बनाने की कवायद चल रही है. अगर समय रहते इसपर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले वक़्त में उत्तराखण्ड के अन्दर ऐसे अनेकों मास कन्वर्जन की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं. लव जिहाद की फैक्ट्री में इज्जत अबरू पिस रही है और हिन्दू सामाज मूकदर्शक बन तमाशा देख रहा है.

बीबीए छात्रा निधि की जिहादियों ने गला काटकर की हत्या

निधि की गला काटकर हत्या करने का मामला पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है. मगर क्या आप जानते हैं की आखिर कौन हैं ये हत्यारे लव जिहादी और क्या है इनका बैग्राउंड तो आइये हम आपको बताते हैं. रुड़की में बीबीए की छात्रा की दिनदहाड़े घर में घुसकर गला रेतकर हत्या करने वाले इन जिहादियों का नाम है, हैदर पुत्र सदाकत निवासी सफरपुर थाना गंग नहर रुड़की और इसके दोस्त रिहान और सारीक निवासी सहापुर थाना गंग नहर रुड़की. ये तीनों जल्लाद युवक दिन दहाड़े घर में घुस आए थे और 21 साल की निधि की हत्या कर दी.

हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया मगर अबतक मामले को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में हस्तांतरित नहीं किया गया है. आरोपी हैदर निधि से एकतरफा प्यार करने का ढोंग कर रहा था. निधि को अक्सर बातचीत के लिए परेशान करता था. हैदर सऊदी अरब में काम करता था और उसका परिवार वर्तमान में रुड़की के सफरपुर में रहता है.

पुलिस की  पूछताछ में हैदर ने बताया कि उसके और युवती के बीच दोस्ती है. मगर परिवार इस बात से इंकार कर रहा है. पुलिस को मोबाइल में दोनों के बीच कॉल और व्हाट्सएप पर बातचीत करने की जानकारी मिली है. कुछ दिन पहले दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था.

जिस पर निधि ने हैदर संग बात करनी बंद कर दी थी. बस यही बात हैदर को नागवार गुजरी क्योंकि हैदर का मकसद सिर्फ और सिर्फ निधि को अपने लव जिहाद के जाल में फंसाना था. मगर जब हैदर ने अपने मनसूबे में कामयाबी हासिल नहीं की, तो उसने निर्ममता से निधि की हत्या कर दी. निधि का परिवार कृष्णानगर गली नंबर-20 में रहता है. निधि बीबीए की पढ़ाई कर रही थी.

वारदात के दिन निधि अपने घर पर अकेली थी. उसी वक्त हैदर और इसके दोस्त रिहान और सारीक निवासी ये तीनों जल्लाद बाइक से गली के पास पहुंचे. दो हत्यारे छात्रा के घर के पास खड़े हो गए जबकि एक युवक ने दरवाजा खुलवाया और अंदर घुस गया. घर के अंदर घुसते ही हैदर ने निधि के ऊपर चाकू से हमला कर दिया. छात्रा ने अपने आप को काफी बचाने की कोशिश की मगर जिहादियों से वो भला कैसे बच पाती. इन जिहादियों के ऊपर तो लव जिहाद की सनक सवार थी. हैदर ने निधि के गले पर वार कर दिया. दर्द से तड़पती निधि घर के पास ही खून से लतपथ गला पकड़ कर बैठी रही और कुछ ही समय बाद उसने दम तोड़ दिया.