बिहार के राजनीति के अपराधी मोहम्मद शहाबुद्दीन की कब्रिस्तान को लेकर नया विवाद खड़ा होगया है... दिल्ली गेट स्थित जदीद कब्रिस्तान में बिहार के पूर्व बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन की पक्की कब्र बनाने का मामला तूल पकड़ रहा है.. यहां जगह की कमी को देखते हुए पहले से ही कब्र को पक्की करने की मनाही है... उसमें भी कोरोना संक्रमण के कारण अत्यधिक मौतों को देखते हुए तो इसपर पूरी तरह से रोक है, लेकिन उनकी कब्र को पक्की किया जा रहा है.. जिसपर विवाद छिड़ गया है...इस विवाद में कब्रिस्तान कमिटी सही तमाम मुस्लिम संगठन सामने आगये हैं.
तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास सजा काट रहे शहाबुद्दीन का कोरोना संक्रमण के कारण एक मई को निधन हो गया था. हालांकि, उनके घर वाले उनके शव को सीवान में पैतृक गांव में ही दफनाने के लिए ले जाना चाहते थे. पर इसकी मंजूरी नहीं मिली और उनके शव को दिल्ली गेट स्थित कब्रिस्तान में दफनाया गया.
अब उसी कब्र को पक्का करने का काम किया
जा रहा है...बताया जाता है कि जब इसे पक्का करने की शुरूआत हुई तो कब्रिस्तान की
कमेटी ने उसे रूकवाने की भी कोशिश की...पुलिस भी बुला ली गई...पर अब फिर से काम
शुरू हो गया है...फिलहाल इसपर कमेटी का कोई सदस्य बोलने को तैयार नहीं है..मगर
अंदरखाने सभी इसका समर्थन कर रहे हैं...रोक के बाद भी कुछ लोग मनमाने तरके से
निर्माण कार्य जारी रखे हुए हैं...सवाल यहां ये हैं की आखिर इसका कौन समर्थन कर
रहा है...?
मंसूरी वेलफेयर फाउंडेशन के अध्यक्ष हसनैन अख्तर मंसूरी ने कहा कि आम लोगों के लिए अलग तथा पूर्व सांसद के लिए अलग नियम नहीं हो सकते हैं... वर्ष 1992 में ही कब्रिस्तान कमेटी ने एक कानून बनाकर कब्र को पक्की करने पर रोक लगा दी थी. अब इस कब्र को जगह घेर कर ईंट से कैसे पक्की की जा रही है. इसकी जांच होनी चाहिए. इस कब्रिस्तान में कब्र को पक्का करने की इजाजत नही है.
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